Ghazal: वो मेरी चालाकियों पर मुस्कुरा कर रह गया…….

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वो मेरी चालाकियों पर मुस्कुरा कर रह गया
और कुछ बोले बिना ही बात सारी कह गयाI(Ghazal)

स्वप्न जो उसने बुने थे सारे आलम के लिए
जंग के उन्माद में कैसे कहाँ सब ढह गया

उसने तो चाहा नहीं था पर यकायक एक दिन
ढाई आखर जो दबा रक्खा था दिल में कह गया

ज़िन्दगी तूफ़ान से लड़ कर गुज़ारी इसलिए
दोस्तों ने दीं थीं जो पीड़ाएँ वो भी सह गया

प्रश्न विचलित कर रहे थे पर नहीं उत्तर मिला
अपनी पीड़ाओं को सहते एक दिन वह दह गया

दूर ही हरदम रहा वो जश्न के माहौल से
जंग है हक़ के लिए ये सोच कर ही वह गया

किशन तिवारी
भोपाल

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