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  • Quick Heal Technologies Limited: क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने हरीश कुमार को सीईओ नियुक्त किया!

    Quick Heal Technologies Limited: क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने हरीश कुमार को सीईओ नियुक्त किया!

    Quick Heal Technologies Limited: प्रमुख वैश्विक साइबर सुरक्षा समाधान प्रदाता क्विक हील टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने हरीश कुमार को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की घोषणा की है। हरीश कुमार के पास साइबर सुरक्षा, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव है।

    अपने करियर के दौरान उन्होंने व्यवसायिक परिवर्तन, विकास विस्तार और प्रतिस्पर्धी बाजारों में उच्च प्रदर्शन करने वाली टीमों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। क्विक हील से पहले वे चेक पॉइंट सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजीज में हेड ऑफ सेल्स (इंडिया एवं सार्क) के पद पर कार्यरत थे।

    कंपनी ने कहा कि यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वह अपने प्रमुख ब्रांड्स ‘क्विक हील’ और ‘सेक्राइट’ के माध्यम से कंज्यूमर और एंटरप्राइज साइबर सुरक्षा, डेटा प्राइवेसी, थ्रेट इंटेलिजेंस और एआई-आधारित सुरक्षा समाधानों में अपनी स्थिति को मजबूत कर रही है।

    कंपनी के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कैलाश काटकर ने कहा कि हरीश कुमार का अनुभव और नेतृत्व कंपनी को विकास के अगले चरण तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    वहीं, हरीश कुमार ने कहा कि क्विक हील जैसे प्रतिष्ठित संगठन से जुड़ना उनके लिए गौरव की बात है और वे कंपनी के नवाचार, ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण और मजबूत टीम के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा क्षेत्र में नए अवसरों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • NSE Social Stock Exchange को बड़ा बढ़ावा, CSR फंडिंग का रास्ता हुआ आसान!

    NSE Social Stock Exchange को बड़ा बढ़ावा, CSR फंडिंग का रास्ता हुआ आसान!

    NSE Social Stock Exchange: भारत के Social Stock Exchange (SSE) इकोसिस्टम को बड़ा बढ़ावा मिला है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने कंपनियों को अपने Corporate Social Responsibility (CSR) खर्च का एक हिस्सा Social Stock Exchange के माध्यम से लगाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से गैर-लाभकारी संगठनों (NPOs) और सामाजिक संस्थाओं के लिए फंड जुटाने के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था के तहत कंपनियां अपने वार्षिक CSR बजट का एक निर्धारित हिस्सा Social Stock Exchange पर सूचीबद्ध पात्र गैर-लाभकारी संगठनों को Zero Coupon Zero Principal (ZCZP) इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से उपलब्ध करा सकेंगी। MCA ने इसके लिए Companies Act, 2013 के तहत CSR नियमों में संशोधन किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत में सामाजिक वित्तपोषण (Social Financing) को मजबूत करेगा। इससे सामाजिक प्रभाव वाले प्रोजेक्ट्स को अधिक पारदर्शी और विनियमित तरीके से वित्तीय सहायता मिल सकेगी। साथ ही कॉर्पोरेट कंपनियों को भी अपने CSR खर्च के प्रभाव को बेहतर तरीके से मापने और ट्रैक करने का अवसर मिलेगा।

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    Social Stock Exchange एक ऐसा विशेष प्लेटफॉर्म है जो सामाजिक संस्थाओं, गैर-लाभकारी संगठनों और निवेशकों को एक साथ जोड़ता है। पारंपरिक शेयर बाजार की तरह यहां वित्तीय लाभ कमाने के उद्देश्य से निवेश नहीं किया जाता, बल्कि सामाजिक प्रभाव और जनकल्याण को प्राथमिकता दी जाती है।

    NSE के अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सामाजिक क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उनका मानना है कि कंपनियों को अब एक संरचित और विनियमित प्लेटफॉर्म मिलेगा, जिसके जरिए वे अपने CSR फंड को प्रभावी सामाजिक परियोजनाओं तक पहुंचा सकेंगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से सामाजिक संगठनों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया आसान होगी और सामाजिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक फंडिंग का रास्ता खुलेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

    गौरतलब है कि Social Stock Exchange की अवधारणा पहली बार केंद्रीय बजट 2019 में पेश की गई थी। इसका उद्देश्य पूंजी बाजार को सामाजिक विकास और समावेशी वृद्धि से जोड़ना था। नए नियमों के लागू होने के बाद इस पहल को और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए संयुक्त रूप से लगभग ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में सरकारी बैंकों का अब तक का सबसे बड़ा लाभ माना जा रहा है। इस उपलब्धि के बीच वित्त मंत्रालय ने बैंकों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए खर्च में अनुशासन बनाए रखने और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

    वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक की, जिसमें बैंकिंग क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, भविष्य की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बैंकों की लाभप्रदता की सराहना की, लेकिन साथ ही उन्हें सतर्क रहने की भी सलाह दी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी बैंकों की बेहतर वित्तीय स्थिति के पीछे गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में कमी, ऋण वसूली में सुधार, डिजिटल बैंकिंग का विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ जैसे प्रमुख कारण रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग सुधारों और सख्त निगरानी के कारण सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

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    वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे अपने परिचालन खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखें और संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर करें। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना आवश्यक बताया गया है।

    बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि रिकॉर्ड मुनाफा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते विश्वास का संकेत है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था उद्योगों, व्यापार और उपभोक्ताओं को ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक सहयोग और तकनीकी नवाचार सरकारी बैंकों की वृद्धि को और मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, लाभप्रदता बनाए रखने के लिए बैंकों को सतर्कता, लागत नियंत्रण और बेहतर ग्राहक सेवाओं पर लगातार ध्यान देना होगा।

    रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद वित्त मंत्रालय का संदेश स्पष्ट है कि बैंक केवल वर्तमान उपलब्धियों पर निर्भर न रहें, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी तैयार रहें। इससे बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और देश की आर्थिक मजबूती दोनों को लाभ मिलेगा।

  • Standard Engineering Technology Q4 FY26: स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलोजी लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड प्रदर्शन!

    Standard Engineering Technology Q4 FY26: स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलोजी लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड प्रदर्शन!

    Standard Engineering Technology Q4 FY26: स्टैंडर्ड इंजीनियरिंग टेक्नोलोजी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही और पूरे वर्ष में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी की कुल आय, मुनाफे और संचालन क्षमता में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है।

    चौथी तिमाही (Q4 FY26) में कंपनी की कुल आय ₹231 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 35% अधिक है। इस दौरान EBITDA ₹36 करोड़ और शुद्ध लाभ (PAT) ₹21 करोड़ दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल आय ₹793 करोड़ तक पहुंची, जो पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 27% की वृद्धि है। वार्षिक शुद्ध लाभ ₹83 करोड़ रहा, जो लगभग 21% अधिक है।

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    कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर नागेश्वर राव कंदुला ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 कंपनी के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने बताया कि कंपनी अब केवल उपकरण निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजाइन, प्रिसिशन फैब्रिकेशन, टर्नकी प्रोजेक्ट्स, कमीशनिंग और मेंटेनेंस जैसी सेवाओं के साथ एक एकीकृत इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बन चुकी है।

    कंपनी ने प्रबंधन स्तर पर भी बदलाव किए हैं। यासुयुकी इकेडा को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में पुनर्नियुक्त किया गया है, जबकि कंचेरला उमा महेश्वर राव को स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है। कंपनी का कहना है कि इससे वैश्विक विस्तार और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी।