Tag: Indian Economy

  • Yashwant Sinha attack on PM: मोदी सरकार देश को आर्थिक संकट में डालने के सिवाय कुछ नहीं कर सकती; पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा का पीएम पर बड़ा हमला

    Yashwant Sinha attack on PM: मोदी सरकार देश को आर्थिक संकट में डालने के सिवाय कुछ नहीं कर सकती; पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा का पीएम पर बड़ा हमला

    Yashwant Sinha attack on PM: देश में बढ़ते आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और निवेश में गिरावट को लेकर कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘भारत में आने वाली आर्थिक सुनामी?’ विषयक परिसंवाद में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान संकट से देश को बाहर निकालने की क्षमता सरकार में नहीं है और कांग्रेस ही इसका प्रभावी विकल्प बन सकती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मोदी मस्ट गो” और देश को बचाने की जिम्मेदारी कांग्रेस पर है।

    महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अर्थशास्त्र विभाग तथा ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस के संयुक्त तत्वावधान में तिलक भवन में आयोजित इस परिसंवाद में वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व सांसद एवं योजना आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. भालचंद्र मुंगेकर, पूर्व सांसद कुमार केतकर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की।

    यशवंत सिन्हा ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत विकास दर के आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते। निवेश में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है और देश की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से घिरी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संकटों से लड़ने की इच्छाशक्ति खो चुकी है और विपक्ष को समाप्त करने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, युवा और मध्यम वर्ग सभी परेशान हैं तथा महंगाई और बेरोजगारी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

    वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण देश का असंगठित क्षेत्र और एमएसएमई क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक आर्थिक आंकड़ों को छिपा रही है, जबकि रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं और गरीबों की स्थिति बदतर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाए बिना अर्थव्यवस्था में मांग नहीं बढ़ सकती।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि देश आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने लोगों से सत्य और अहिंसा के मार्ग पर संघर्ष करने का आह्वान करते हुए कहा कि आर्थिक मुद्दों को केंद्र में रखकर जनता की आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं और आम नागरिकों में बढ़ता असंतोष सरकार की नीतियों की विफलता को दर्शाता है।

    कार्यक्रम का प्रारंभिक वक्तव्य अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख विश्वास उटगी ने दिया, जबकि अतिथियों का परिचय पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कराया। कार्यक्रम का संचालन गजानन देसाई ने तथा आभार प्रदर्शन डॉ. भालचंद्र मुंगेकर ने किया।

  • Modi Government 12 Years: मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उद्योग जगत ने सराहा आर्थिक सुधारों और विकास की रफ्तार को!

    Modi Government 12 Years: मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर उद्योग जगत ने सराहा आर्थिक सुधारों और विकास की रफ्तार को!

    Modi Government 12 Years: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने पर देश के प्रमुख उद्योग संगठनों ने आर्थिक सुधारों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश माहौल को मजबूत बनाने के लिए सरकार की सराहना की है। उद्योग जगत का मानना है कि पिछले एक दशक में किए गए सुधारों ने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाया है।

    भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने कहा कि बीते वर्षों में लागू की गई नीतियों और सुधारों ने देश की आर्थिक बुनियाद को सुदृढ़ किया है। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचा, डिजिटल तकनीक, विनिर्माण, नवाचार और कारोबार सुगमता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे भारत वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है।

    भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि सुधारवादी नीतियों, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और वैश्विक व्यापारिक साझेदारियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। उनके अनुसार, भारत आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    उद्योग संगठन एसोचैम (ASSOCHAM) ने भी सरकार की आर्थिक नीतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश की विकास दर, विनिर्माण गतिविधियों और सेवा क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। संगठन का मानना है कि आर्थिक स्थिरता, निवेश वृद्धि और निर्यात विस्तार ने भारत की विकास यात्रा को नई गति प्रदान की है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि हाल के वर्षों में विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही निर्यात में बढ़ोतरी और चालू खाते के घाटे में कमी से अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है। उद्योग संगठनों ने विश्वास जताया कि सरकार और निजी क्षेत्र के सहयोग से ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश और तेज़ी से आगे बढ़ेगा।

  • Plastic Currency Notes: प्लास्टिक के नोटों पर विचार जारी, आरबीआई ने कहा- अभी शुरुआती चरण में है प्रस्ताव

    Plastic Currency Notes: प्लास्टिक के नोटों पर विचार जारी, आरबीआई ने कहा- अभी शुरुआती चरण में है प्रस्ताव

    Plastic Currency Notes: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा है कि देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के करेंसी नोट शुरू करने के प्रस्ताव पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन यह अभी प्रारंभिक स्तर पर है। मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    आरबीआई गवर्नर ने बताया कि पॉलीमर नोटों के फायदे और चुनौतियों का अध्ययन किया जा रहा है। इन नोटों की विशेषता यह है कि ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और जल्दी खराब नहीं होते। साथ ही लंबे समय में इनके रखरखाव और प्रतिस्थापन की लागत भी कम हो सकती है। हालांकि, इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले सभी पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाएगा।

    गौरतलब है कि पॉलीमर नोट विशेष प्रकार के प्लास्टिक से बनाए जाते हैं और इनमें कपास-आधारित कागज का उपयोग नहीं होता। दुनिया के कई देशों, जैसे Canada, United Kingdom और Singapore में ऐसे नोट पहले से प्रचलन में हैं। आरबीआई का कहना है कि भारत में भी इस विकल्प पर विचार किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में ही है।

  • PPI Launch India: 15 जून से लागू होगा नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, महंगाई मापने का तरीका बदलेगा!

    PPI Launch India: 15 जून से लागू होगा नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, महंगाई मापने का तरीका बदलेगा!

    PPI Launch India: भारत सरकार 15 जून 2026 से महंगाई मापने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) लागू करेगी और साथ ही संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (WPI) श्रृंखला भी जारी करेगी। यह बदलाव देश की आर्थिक गतिविधियों और मूल्य परिवर्तनों को अधिक सटीक तरीके से मापने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

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    नया PPI केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें बैंकिंग, बीमा, दूरसंचार, रेलवे और अन्य सेवा क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा। इससे उत्पादकों पर पड़ने वाले लागत दबाव और मूल्य परिवर्तनों का व्यापक आकलन संभव होगा।

    सरकार अगले कुछ वर्षों में WPI से PPI की ओर धीरे-धीरे संक्रमण की योजना पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की महंगाई मापने की प्रणाली वैश्विक मानकों के अधिक अनुरूप हो जाएगी और नीति निर्माण में मदद मिलेगी। संशोधित WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा, जबकि नई प्रणाली में वस्तुओं और सेवाओं का अधिक व्यापक दायरा शामिल होगा।

  • PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: PSU बैंकों ने कमाया रिकॉर्ड मुनाफा, सरकार ने दी सतर्क रहने की सलाह!

    PSU Banks Record Profit: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) ने वित्त वर्ष 2025-26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए संयुक्त रूप से लगभग ₹1.98 लाख करोड़ का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में सरकारी बैंकों का अब तक का सबसे बड़ा लाभ माना जा रहा है। इस उपलब्धि के बीच वित्त मंत्रालय ने बैंकों को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए खर्च में अनुशासन बनाए रखने और जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।

    वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक की, जिसमें बैंकिंग क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, भविष्य की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बैंकों की लाभप्रदता की सराहना की, लेकिन साथ ही उन्हें सतर्क रहने की भी सलाह दी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी बैंकों की बेहतर वित्तीय स्थिति के पीछे गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) में कमी, ऋण वसूली में सुधार, डिजिटल बैंकिंग का विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ जैसे प्रमुख कारण रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग सुधारों और सख्त निगरानी के कारण सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है।

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    वित्त मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वे अपने परिचालन खर्चों पर नियंत्रण बनाए रखें और संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर करें। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना आवश्यक बताया गया है।

    बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि रिकॉर्ड मुनाफा भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते विश्वास का संकेत है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था उद्योगों, व्यापार और उपभोक्ताओं को ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलती है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल बैंकिंग, फिनटेक सहयोग और तकनीकी नवाचार सरकारी बैंकों की वृद्धि को और मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, लाभप्रदता बनाए रखने के लिए बैंकों को सतर्कता, लागत नियंत्रण और बेहतर ग्राहक सेवाओं पर लगातार ध्यान देना होगा।

    रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद वित्त मंत्रालय का संदेश स्पष्ट है कि बैंक केवल वर्तमान उपलब्धियों पर निर्भर न रहें, बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी तैयार रहें। इससे बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और देश की आर्थिक मजबूती दोनों को लाभ मिलेगा।

  • RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: Reserve Bank of India ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। आरबीआई के अनुसार, इन परिस्थितियों का असर आर्थिक विकास दर और महंगाई दोनों पर पड़ने की आशंका है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम से जुड़ी चिंताएं निकट भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में अनिश्चितता भी चिंता का विषय बनी हुई है।

    केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी कि इन परिस्थितियों का असर कॉर्पोरेट आय और बैंकों के ऋण पोर्टफोलियो पर भी पड़ सकता है। हालांकि आरबीआई ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिति मजबूत बनी हुई है और देश की वित्तीय व्यवस्था प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है।

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    रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर लगातार जोर, कॉर्पोरेट और बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट तथा प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौते निवेश और विकास को समर्थन देंगे।

    आरबीआई ने यह भी कहा कि सरकार की राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता और केंद्रीय बैंक के तरलता बढ़ाने के कदम बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम करने में मददगार साबित होंगे।

    हाल ही में Nirmala Sitharaman ने भी कहा था कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की कीमतों में तेजी से भारत के विदेशी मुद्रा व्यय पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन जरूरी आयातों का भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है, जिससे आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

  • Weak Monsoon Forecast Hits Market: कमजोर मानसून की आशंका से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1092 अंक टूटा!

    Weak Monsoon Forecast Hits Market: कमजोर मानसून की आशंका से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1092 अंक टूटा!

    Weak Monsoon Forecast Hits Market: कमजोर मानसून की आशंका ने शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। मौसम विभाग की कम बारिश की भविष्यवाणी के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ी और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

    भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना जताए जाने के बाद घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की बिकवाली के दबाव में BSE Sensex 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 74,775.74 अंक पर बंद हुआ, जो 13 मई के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है।

    वहीं Nifty 50 भी 359.40 अंक यानी 1.5 प्रतिशत गिरकर 23,547.75 अंक पर पहुंच गया। यह 20 मई के बाद का निचला स्तर रहा।

    शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी देखने को मिली थी और सेंसेक्स 76,220 अंक तक पहुंचा, लेकिन मानसून से जुड़ी चिंताओं के बाद बिकवाली तेज हो गई। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 1,631 अंकों का बड़ा उतार-चढ़ाव देखा।

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    मौसम विभाग ने कहा कि इस साल मानसून सीजन में दीर्घावधि औसत का लगभग 90 प्रतिशत ही वर्षा होने की संभावना है। इससे कृषि, ग्रामीण मांग और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई, जिसका असर सीधे शेयर बाजार पर दिखाई दिया।

    वृहद बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप-50 में 1.49 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।

    तेल एवं गैस, धातु, बैंकिंग, ऑटो, एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। हालांकि आईटी शेयरों में कुछ खरीदारी देखने को मिली, जिससे नुकसान कुछ हद तक सीमित रहा।

    कंपनियों की बात करें तो इंडिगो का शेयर चौथी तिमाही में 2,537 करोड़ रुपये के नुकसान की खबर के बाद 3.55 प्रतिशत गिर गया। इसके अलावा पावर ग्रिड, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज और हिंदुस्तान यूनिलीवर समेत कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही।

    दूसरी ओर, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे आईटी शेयरों में तेजी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में एशियाई बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, जबकि यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में हल्की बढ़त दर्ज की गई।

  • NTPC’s Q4 Profit: एनटीपीसी का चौथी तिमाही का मुनाफा 34 प्रतिशत बढ़कर 10,615 करोड़ पर!

    NTPC’s Q4 Profit: एनटीपीसी का चौथी तिमाही का मुनाफा 34 प्रतिशत बढ़कर 10,615 करोड़ पर!

    NTPC’s Q4 Profit: सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी को वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में समेकित आधार पर 10,615 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ जो सालाना आधार पर 34 प्रतिशत अधिक है। कंपनी के निदेशक मंडल की शनिवार को हुई बैठक में वित्तीय परिणामों को मंजूरी प्रदान की गयी।

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    एकल आधार पर एनटीपीसी को चौथी तिमाही में 8,747 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ जो सालाना 15 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है। सहयोगी कंपनियों से मुनाफे में हिस्सेदारी 870 रुपये रही जबकि संयुक्त उद्यमों से प्राप्त हिस्सेदारी 1,194 करोड़ रुपये रही

    तिमाही में कंपनी का एकल परिचालन राजस्व 43,904 करोड़ रुपये से घटकर 43,111 करोड़ रुपये रह गया। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एनटीपीसी का एकल शुद्ध मुनाफा 23,162 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 19,649 करोड़ रुपये था। हालांकि इस दौरान परिचालन राजस्व 1,70,037 करोड़ रुपये से घटकर 1,65,494 करोड़ रुपये रहा गया।

  • Piyush Goyal: पीयूष गोयल ने रखा 2000 अरब डॉलर वार्षिक निर्यात का लक्ष्य!

    Piyush Goyal: पीयूष गोयल ने रखा 2000 अरब डॉलर वार्षिक निर्यात का लक्ष्य!

    Piyush Goyal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने निर्यात कारोबार को आत्मनिर्भरता की एक पहचान बताते हुए सोमवार को कहा कि देश का निर्यात अगले पांच वर्षों में 2000 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है और चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात 1000 अरब डॉलर को पार कर जाएगा।

    गोयल ने निर्यात कारोबार में विस्तार को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सच्ची पहचान बताते हुए कहा कि वस्तु और सेवा, दोनों क्षेत्रों में भारत में वृद्धि हुई है जो मौजूदा वैश्विक माहौल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वह यहां भारत मंडपम में आयोजित ‘भारतीय व्यापार महोत्सव’ की वेबसाइट जारी करने के लिए आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    अमेरिकी आयात शुल्क की कार्रवाइयों और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद वर्ष 2025-26 में निर्यात 863 अरब डॉलर तक पहुँच गया जो इससे पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत अधिक है।गोयल ने सभी हितधारकों से ‘भारतीय व्यापार महोत्सव’ को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया और इस कार्यक्रम के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। भारतीय व्यापार महोत्सव’ 12 अगस्त से 15 अगस्त, 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

    निर्यात क्षेत्र को सरकार की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा देते हुए उन्होंने कहा कि निर्यात का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में जो व्यापार समझौते किये हैं उनमें लगभग 38 विकसित देशों के साथ ‘मुक्त व्यापार व्यवस्था’ की दिशा में प्रयास किए गए हैं। इन समझौतों से बड़े बाज़ारों तक विशेष पहुँच मिलेगी, जहाँ भारतीय सामान प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम आयात शुल्क पर बेचे जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि ये समझौते धीरे-धीरे लागू होंगे।

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    उन्होंने बताया कि ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौता जून से लागू हो सकता है,और अन्य समझौते कागज़ी कार्रवाई की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लागू कर दिये जाएंगे। पीयूष गोयल ने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे वाणिज्य मंत्रालय के ‘ट्रेड पोर्टल’ के माध्यम से आयात के रुझानों का अध्ययन करें और घरेलू विनिर्माण तथा आयात के विकल्प तलाशने के अवसरों की पहचान करें।

    उन्होंने कहा कि भारत अभी भी ‘पूंजीगत वस्तुओं’ जैसे क्षेत्रों में विदेशी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। उन्होंने राजकोट, जालंधर, लुधियाना, बटाला और पुणे जैसे औद्योगिक केंद्रों से आह्वान किया कि वे आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन बढ़ाएँ। देश में अब चिकित्सा उपकरणों के बढ़ते विनिर्माण और विशेष रूप से विशाखापत्तनम में निर्मित एक ‘सीटी स्कैन मशीन’ का ज़िक्र करते हुए वाणिज्य मंत्री ने कहा कि भारत में बने उत्पादों को ज़्यादा अपनाने से उनकी मांग बढ़ेगी और उत्पादन का पैमाना भी विस्तृत होगा।

    उन्होंने आयोजकों से आग्रह किया कि वे देश भर से विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों को ‘भारतीय व्यापार महोत्सव’ में आमंत्रित करें। इस कार्यक्रम में 1,000 व्यवसायों की भागीदारी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि हर राज्य से 25 महिला उद्यमियों को आमंत्रित किया जाए, जिससे अकेले ही लगभग 700-750 प्रतिभागी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे।