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  • Sureshchandra Rajhans: ईरान-इज़राइल युद्ध के बहाने बढ़ी ईंधन कीमतें वापस लेने की मांग!

    Sureshchandra Rajhans: ईरान-इज़राइल युद्ध के बहाने बढ़ी ईंधन कीमतें वापस लेने की मांग!

    Sureshchandra Rajhans: पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों के विरोध में मुंबई कांग्रेस द्वारा शहरभर में आंदोलन किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि ईरान-इज़राइल युद्ध की आड़ लेकर केंद्र की मोदी सरकार आम जनता की जेब पर डाका डाल रही है और पेट्रोलियम कंपनियों के मुनाफे के लिए लगातार ईंधन के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।

    सुरेशचंद्र राजहंस का कहना है कि पिछले 10-12 दिनों से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है, जिससे आम नागरिकों, वाहन चालकों, व्यापारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पार्टी ने मांग की है कि बढ़ाए गए ईंधन दरों को तत्काल वापस लिया जाए।

    इसी मांग को लेकर मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद के नेतृत्व में मुंबई के विभिन्न क्षेत्रों में आंदोलन आयोजित किए जा रहे हैं।

    चारकोप विधानसभा क्षेत्र में भी “जनता की लूट बंद करो, पेट्रोल-डीजल-सीएनजी की दरवृद्धि वापस लो” की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन पूर्व मंत्री एवं विधायक के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

    इस अवसर पर जिला अध्यक्ष राजपती यादव, मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता एवं मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस, स्लम सेल के अध्यक्ष नीलेश नानचे, नगरसेविका डॉ. अजंता यादव, पूर्व नगरसेविका शीतल म्हात्रे, स्लम सेल के जिला अध्यक्ष फारुख शेख सहित अनेक कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि महंगाई से पहले ही परेशान जनता पर ईंधन मूल्य वृद्धि का अतिरिक्त बोझ डालना अन्यायपूर्ण है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बढ़ी हुई कीमतें वापस नहीं लीं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

  • RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल से भारत की विकास दर व महंगाई पर खतरा!

    RBI Warning: Reserve Bank of India ने शुक्रवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं। आरबीआई के अनुसार, इन परिस्थितियों का असर आर्थिक विकास दर और महंगाई दोनों पर पड़ने की आशंका है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम से जुड़ी चिंताएं निकट भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में अनिश्चितता भी चिंता का विषय बनी हुई है।

    केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी कि इन परिस्थितियों का असर कॉर्पोरेट आय और बैंकों के ऋण पोर्टफोलियो पर भी पड़ सकता है। हालांकि आरबीआई ने यह भी कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली की स्थिति मजबूत बनी हुई है और देश की वित्तीय व्यवस्था प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम है।

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    रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर लगातार जोर, कॉर्पोरेट और बैंकों की मजबूत बैलेंस शीट तथा प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौते निवेश और विकास को समर्थन देंगे।

    आरबीआई ने यह भी कहा कि सरकार की राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता और केंद्रीय बैंक के तरलता बढ़ाने के कदम बॉन्ड यील्ड पर दबाव कम करने में मददगार साबित होंगे।

    हाल ही में Nirmala Sitharaman ने भी कहा था कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल, उर्वरक और सोने की कीमतों में तेजी से भारत के विदेशी मुद्रा व्यय पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इन जरूरी आयातों का भुगतान विदेशी मुद्रा में करना पड़ता है, जिससे आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।