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  • NEET-UG Re-Exam: सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून की परीक्षा CBT मोड में कराने से किया इनकार

    NEET-UG Re-Exam: सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून की परीक्षा CBT मोड में कराने से किया इनकार

    NEET-UG Re-Exam: उच्चतम न्यायालय ने 21 जून को होने वाली नीट-यूजी पुनर्परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा पहले से तय ‘पेन-एंड-पेपर’ (ऑफलाइन) मोड में ही आयोजित होगी।

    न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की।

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    याचिकाकर्ता की ओर से केवल यह मांग रखी गई थी कि 21 जून की परीक्षा CBT मोड में कराई जाए। हालांकि अदालत ने कहा कि इस प्रकार की मांग पहले भी खारिज की जा चुकी है और वर्तमान परिस्थितियों में परीक्षा पद्धति बदलने का कोई औचित्य नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद 21 जून को होने वाली नीट-यूजी पुनर्परीक्षा ऑफलाइन मोड में ही आयोजित किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

  • NEET Exam 2026: सरकार से आर्थिक सहायता पाने के इरादे से लगाए गए झूठे आरोप: सेंगर

    NEET Exam 2026: सरकार से आर्थिक सहायता पाने के इरादे से लगाए गए झूठे आरोप: सेंगर

    NEET Exam 2026: NEET परीक्षा 2026, जो मेडिकल प्रवेश के लिए देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रश्नपत्र लीक होने के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया और मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।

    इसी बीच कुछ छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि परीक्षा रद्द होने के सदमे में छात्रों ने यह कदम उठाया। हालांकि महाराष्ट्र करणी सेना के प्रमुख अजय सिंह सेंगर ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि इन आत्महत्याओं का कारण NEET परीक्षा रद्द होना नहीं था।

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    सेंगर का आरोप है कि अधिकांश मामलों में आत्महत्या के पीछे व्यक्तिगत कारण, जैसे प्रेम संबंधों में तनाव या दिल टूटने जैसी परिस्थितियाँ जिम्मेदार थीं। उन्होंने दावा किया कि कुछ परिजन सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त करने के उद्देश्य से परीक्षा रद्द होने को कारण बताकर झूठे आरोप लगा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए तथा यदि किसी प्रकार के भ्रामक दावे सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। सेंगर ने यह भी सुझाव दिया कि पुलिस और जांच एजेंसियां मृतक छात्रों एवं उनके परिजनों के कॉल रिकॉर्ड और अन्य तथ्यों की जांच कर आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगा सकती हैं।

    करणी सेना प्रमुख ने विपक्षी दलों पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें इन घटनाओं का इस्तेमाल कर केंद्र सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। सेंगर ने मांग की कि इन आत्महत्या के मामलों की भी सीबीआई अथवा किसी विशेष जांच दल से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।