Tag: Monsoon 2026

  • Thane Rains: ठाणे में गुरुवार को 38.61 मिमी बारिश दर्ज की गई; गुरुवार को भारी बारिश हुई!

    Thane Rains: ठाणे में गुरुवार को 38.61 मिमी बारिश दर्ज की गई; गुरुवार को भारी बारिश हुई!

    Thane Rains: गुरुवार को ठाणे में भारी बारिश हुई। बारिश रुकने की भविष्यवाणी गलत साबित हुई। दिन भर रुक-रुक कर बारिश होती रही और फिर अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। शाम 5 बजे तक ठाणे में 38.61 मिमी बारिश दर्ज की गई। इस दौरान आग लगने, पेड़ गिरने और शाखा गिरने की एक-एक घटना हुई।

    गुरुवार को किसी भी जानमाल का नुकसान नहीं हुआ। गुरुवार को बारिश की रफ्तार धीमी हो गई। हाल यह है कि गुरुवार को हुई भारी बारिश के कारण मुंब्रा क्षेत्र के कुछ इलाकों में जलभराव हो गया। ठाणे के निचले इलाकों में राबोडी और वंदना सिनेमा रोड पर पानी जमा हो गया। बल्कुम में भी छिटपुट जलभराव की घटनाएं हुईं।

    ठाणे के पचपखाड़ी स्थित श्रीजी आर्केड में स्थित मेसर्स क्रायोजेन इंस्ट्रूमेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय के रिसेप्शन रूम में आग लग गई। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। रिसेप्शन रूम में रखे दस्तावेज, लकड़ी की मेजें और अन्य सामान आग से क्षतिग्रस्त हो गए।

    गुरुवार सुबह गावदेवी में लोकमान्य तिलक उद्यान के पास गावदेवी मैदान के नजदीक एक पेड़ गिर गया। ठाणे में देवकोरपोरा बिल्डिंग के सामने केंदंबरी जंक्शन पर एक पेड़ की तीन शाखाएं गिर गईं, जिससे एक चार पहिया वाहन को मामूली नुकसान हुआ। लगातार चौथे दिन भी दिनभर बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी होती रही।

    बीच-बीच में कुछ देर के लिए भारी बारिश भी हुई। ठाणे के आनंदनगर प्रवेश द्वार पर सड़क पर बर्फ जमा होने से वाहनों की गति धीमी हो गई और जाम जैसी स्थिति बन गई। वहीं, ठाणे के घोड़बंदर रोड पर भारी बारिश के कारण ट्रैफिक जाम हो गया। यातायात धीमी गति से चल रहा था। ठाणे-भिवंडी और ठाणे-नासिक रोड पर भी भारी बारिश और गड्ढों के कारण वाहनों की आवाजाही धीमी रही।

    24 घंटों में 74 शिकायतें
    ठाणे आपदा प्रबंधन विभाग को पिछले 24 घंटों में 74,000 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के प्रमुख यासीन ताडवी ने बताया कि इनमें से 13 शिकायतें आग लगने से संबंधित, 20 पेड़ गिरने से, 5 पेड़ की शाखाएं गिरने से और 13 पेड़ खतरनाक स्थिति में होने से संबंधित हैं। इसके अलावा, 20 जलभराव की घटनाएं, एक इमारत गिरने की घटना और तीन अन्य शिकायतें ठाणे में प्राप्त हुई हैं।

  • Open Manhole Horror: साकीनाका में खुले मैनहोल में समाए 60 वर्षीय बुजुर्ग, मौके पर मचा हड़कंप!

    Open Manhole Horror: साकीनाका में खुले मैनहोल में समाए 60 वर्षीय बुजुर्ग, मौके पर मचा हड़कंप!

    Open Manhole Horror: खुले मैनहोल से जुड़ी दुखद और असल ज़िंदगी की “डरावनी” कहानियाँ अक्सर प्रशासन की भारी लापरवाही का नतीजा होती हैं; इनमें बिना ढक्कन वाले नाले या ठीक से घेराबंदी न किए गए मरम्मत के काम जानलेवा हादसों की वजह बनते हैं।

    ऐसे ही मुंबई के साकीनाका इलाके में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में 60 वर्षीय व्यक्ति की खुले मैनहोल में गिरने से मौत हो गई। यह घटना खैरानी रोड पर उस समय हुई, जब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से नालों की सफाई और रखरखाव का कार्य चल रहा था।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, नाले की सफाई के लिए मैनहोल का ढक्कन हटाया गया था। इसी दौरान बुजुर्ग व्यक्ति वहां से गुजर रहे थे और खुले मैनहोल में गिर गए। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस व दमकल विभाग को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही पुलिस, दमकलकर्मी और अन्य राहत दल मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद व्यक्ति को बाहर निकाला गया और नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। नागरिकों ने आरोप लगाया कि नाले की सफाई के दौरान खुले मैनहोल के आसपास पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए थे, जिससे यह दुखद हादसा हुआ।

    पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, संबंधित विभाग भी घटना के कारणों की जांच कर रहा है। इस हादसे के बाद मानसून के दौरान चल रहे नाला सफाई कार्यों में सुरक्षा मानकों और नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • Thane Weather Update: ठाणे में लगातार तीसरे दिन भी झमा झम बारिश से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, ठंड से कांपे ठाणेवासी !

    Thane Weather Update: ठाणे में लगातार तीसरे दिन भी झमा झम बारिश से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, ठंड से कांपे ठाणेवासी !

    Thane Weather Update: बुधवार सुबह से ठाणे में लगातार बारिश हो रही है। ठाणे आपदा प्रबंधन विभाग ने शाम 6 बजे तक ठाणे में 99.02 मिमी बारिश दर्ज की। रविवार रात से शुरू हुई बारिश सोमवार को और तेज हो गई। सोमवार को 116.83 मिमी बारिश दर्ज की गई और मंगलवार शाम तक 111 मिमी बारिश हुई।

    इसके साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन भी हुआ। वहीं, बुधवार को मुंब्रा और शिलफाटा में जलभराव की घटनाएं हुईं और वागले में सुरक्षा दीवारें और पेड़ गिरने की घटनाएं भी हुईं। ठाणे में लगातार तीसरे दिन भी भीषण ठंड पड़ रही है। तीन दिनों से रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है और जमा हुए पानी की भरपाई के संकेत मिल रहे हैं।

    बुधवार को ठाणे के कालवा पारसिक नगर स्थित राज पार्क कॉम्प्लेक्स के 90 फीट रोड पर एक पेड़ चार पहिया वाहन पर गिर गया। मुंब्रा में, एमटीएनएल कंपाउंड, अमृतनगर, मुंब्रा में एक बालकनी का एक हिस्सा गिर गया। इमारत में फंसे चार परिवारों को सुरक्षित निकाला गया। वागले एस्टेट स्थित टीएमटी बस डिपो की सुरक्षा दीवार गिर गई।

    वहीं, शिलफाटा, दोस्ती कॉम्प्लेक्स के सामने, माज़ होटल, अंसारी चौक, श्रीलंका रोड, राशिद कंपाउंड, मोती बाग और हरि निवास सर्कल में भी पेड़ की शाखाएं गिरीं। बुधवार सुबह से ही भारी बारिश शुरू हो गई थी। इस बार सुबह 9:30 बजे तक 5.33 मिमी बारिश हुई। वहीं, सुबह 10:30 बजे तक 16.77 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद बारिश की रफ्तार धीमी हो गई। अंत में, शाम 6 बजे तक ठाणे में 82.76 मिमी बारिश दर्ज की गई।

  • Mumbra Mishap: मुंब्रा में एक इमारत की बालकनी का एक हिस्सा गिरा; चार परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया

    Mumbra Mishap: मुंब्रा में एक इमारत की बालकनी का एक हिस्सा गिरा; चार परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया

    Mumbra Mishap: मुंब्रा के अमृत नगर इलाके में स्थित दो मंजिला इमारत ‘हिना कॉटेज’ की बालकनी मंगलवार रात भारी बारिश के दौरान गिर गई। इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। हालांकि, ठाणे आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि इमारत में रहने वाले चार परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।

    नगर निगम के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अनुसार, यह घटना रात 8.28 बजे घटी। अमृतनगर में सैफ्रॉन शॉप के पीछे स्थित एमटीएनएल परिसर में हिना कॉटेज नामक इमारत की पहली मंजिल की बालकनी का स्लैब अचानक गिर गया। निरीक्षण के बाद इमारत का शेष भाग भी खतरनाक स्थिति में पाया गया। दमकलकर्मी, निर्माण विभाग के अधिकारी और मुंब्रा वार्ड समिति की आपदा प्रबंधन टीम तुरंत मौके पर पहुंची।

    एहतियात के तौर पर, इमारत में रहने वाले चारों परिवारों को तुरंत खाली करा लिया गया और उन्हें अस्थायी रूप से अपने रिश्तेदारों के पास जाने का निर्देश दिया गया। आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ ने यह भी बताया कि इमारत के चारों ओर खतरे की चेतावनी वाली टेप लगाकर क्षेत्र को सुरक्षित कर लिया गया है।

  • Mumbra’s Shil Phata Submerged: सिर्फ साधारण बारिश में डूबा मुंब्रा का सील फाटा, मनपा की तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल!

    Mumbra’s Shil Phata Submerged: सिर्फ साधारण बारिश में डूबा मुंब्रा का सील फाटा, मनपा की तैयारियों पर उठे गंभीर सवाल!

    Mumbra’s Shil Phata Submerged: मुंब्रा का सील फाटा क्षेत्र एक बार फिर जलभराव की गंभीर समस्या से जूझता नजर आया। हैरानी की बात यह है कि न तो मूसलाधार बारिश हुई और न ही कोई तूफानी मौसम था। जून के अंतिम दिन शुरू हुई साधारण बारिश ने ही पूरे इलाके की व्यवस्था की पोल खोल दी। देखते ही देखते सड़कों पर पानी भर गया, यातायात पूरी तरह ठप हो गया और लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश का पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं था। नालों में पानी की निकासी नहीं हो रही थी और सड़क किनारे बने ड्रेनेज सिस्टम भी पूरी तरह विफल साबित हुए। कई स्थानों पर जब नालों के ढक्कन हटाए गए, तब कहीं जाकर पानी का बहाव शुरू हुआ। तब तक पानी दुकानों, मकानों और वाहनों में घुस चुका था, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर वर्ष मानसून से पहले करोड़ों रुपये नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर खर्च किए जाते हैं, फिर भी पहली ही सामान्य बारिश में पूरा इलाका पानी-पानी कैसे हो गया? यदि इतनी मामूली बारिश में यह हाल है, तो आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश के दौरान स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

    स्थानीय नागरिकों ने मनपा प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बारिश से पहले जलनिकासी की समुचित योजना बनाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी थी, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त तैयारी नहीं की गई। यही वजह है कि हर साल लोगों को जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ता है।

    अब नागरिकों की मांग है कि मनपा इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले, जलनिकासी व्यवस्था का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण करे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि हर मानसून में जनता को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।

  • Meteorological Department’s Major Update: तय समय से देरी से आएगा मानसून, जून के अंत तक पूरे देश में देगा दस्तक!

    Meteorological Department’s Major Update: तय समय से देरी से आएगा मानसून, जून के अंत तक पूरे देश में देगा दस्तक!

    Meteorological Department’s Major Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमान के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने तय समय से थोड़ी देरी से आगे बढ़ रहा है। आमतौर पर मानसून 1 जून को देश में दस्तक दे देता है, लेकिन इस बार इसके 4 जून 2026 को केरल के तटों से टकराने की पूरी संभावना जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हवाओं की रफ्तार धीमी होने और वायुमंडल में बने चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulations) के कारण मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ी है। हालांकि, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के तटीय इलाकों में प्री-मानसून की गतिविधियां तेज हो चुकी हैं और विभाग ने इन राज्यों में अगले छह से सात दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है।

    अन्य राज्यों में मानसून का सफर और संभावित तारीखें
    केरल में दस्तक देने के बाद मानसून तेजी से देश के अन्य हिस्सों की तरफ बढ़ेगा, जिससे तपती गर्मी से जूझ रहे राज्यों को राहत मिलेगी। वित्तीय राजधानी मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में प्री-मानसून बौछारें शुरू हो चुकी हैं, जिससे तापमान में गिरावट आई है और वहां 5 जून तक तेज आंधी-तूफान का अनुमान है।

    इसके बाद मानसूनी हवाएं मध्य भारत का रुख करेंगी, जहां मध्य प्रदेश में 20 से 22 जून के बीच पहली मानसूनी बारिश होने की उम्मीद है। वहीं, भीषण गर्मी का सामना कर रहे राजस्थान और इसके आस-पास के उत्तर-पश्चिमी राज्यों में जून के आखिरी हफ्ते, यानी 25 से 30 जून के बीच मानसून के पहुंचने की संभावना जताई गई है।

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    मैदानी इलाकों में आंधी-तूफान और भीषण लू की चेतावनी
    जब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं होता, तब तक उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में अगले कुछ दिनों तक 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने, बिजली कड़कने और हल्की बूंदाबांदी होने की आशंका है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि जून के शुरुआती दो हफ्तों में उत्तर और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में लोगों को सामान्य से अधिक दिनों तक भीषण लू (Heat Wave) का सामना करना पड़ सकता है, जिससे दिन का तापमान सामान्य से ऊपर बना रहेगा।

    अल-नीनो का साया और खेती पर इसका असर
    इस साल देश में कुल मानसूनी बारिश के आंकड़ों को लेकर भी मौसम विभाग ने महत्वपूर्ण दीर्घकालिक पूर्वानुमान जारी किया है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ (El Niño) की स्थिति सक्रिय होने के कारण इस साल देश में औसत से थोड़ी कम बारिश होने का अनुमान लगाया गया है, जो दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है।

    कम बारिश का यह अनुमान देश के कृषि क्षेत्र और जलाशयों के जलस्तर के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि भारत की अधिकांश खेती पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करती है। हालांकि, जून के अंत तक देश के एक बड़े हिस्से में बारिश का दौर शुरू होने से किसानों को बुवाई में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • Weak Monsoon Alert: कमजोर मानसून से बढ़ सकती है महंगाई, कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका

    Weak Monsoon Alert: कमजोर मानसून से बढ़ सकती है महंगाई, कृषि क्षेत्र पर असर की आशंका

    Weak Monsoon Alert: भारत में वर्ष 2026 के दौरान सामान्य से कम मानसून रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार बारिश औसत से कम हो सकती है, जिससे कृषि उत्पादन, खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    मौसम विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार देश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य स्तर से नीचे रह सकती है। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है।

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    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश में उल्लेखनीय कमी आती है तो धान, दाल, तिलहन और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

    कमजोर मानसून का असर केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी की उपलब्धता, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो सकती है। सरकार और कृषि विशेषज्ञ किसानों को मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन तथा जल संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य से काफी कमजोर रहता है तो आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ सकती है, जिससे महंगाई नियंत्रण की चुनौती और कठिन हो सकती है। ऐसे में सरकार की नजर मानसून की प्रगति और कृषि उत्पादन पर बनी हुई है।