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  • Modi Longest Serving Elected PM: 10 जून को नया रिकॉर्ड बनाएंगे मोदी, बनेंगे सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री!

    Modi Longest Serving Elected PM: 10 जून को नया रिकॉर्ड बनाएंगे मोदी, बनेंगे सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री!

    Modi Longest Serving Elected PM: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 जून को एक ऐतिहासिक राजनीतिक उपलब्धि अपने नाम करने जा रहे हैं। इस दिन वह स्वतंत्र भारत के इतिहास में लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन जाएंगे। अब तक यह रिकॉर्ड भारत के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के नाम दर्ज है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और तब से लगातार देश का नेतृत्व कर रहे हैं। 10 जून 2026 को उनके लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे हो जाएंगे, जो नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड से एक दिन अधिक होगा।

    इससे पहले मोदी पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi के लगातार 4,077 दिनों के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ चुके हैं। इंदिरा गांधी 1966 से 1977 तक लगातार प्रधानमंत्री रहीं थीं और बाद में 1980 में दोबारा सत्ता में लौटी थीं।

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    प्रधानमंत्री मोदी का सार्वजनिक जीवन भी लंबे प्रशासनिक अनुभव से जुड़ा रहा है। प्रधानमंत्री बनने से पहले वह Gujarat के मुख्यमंत्री के रूप में भी लंबा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनका कुल प्रशासनिक अनुभव 9,000 दिनों से अधिक का हो चुका है।

    सूत्रों के अनुसार, इस उपलब्धि के अवसर पर 10 जून को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा सकती है। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी को इस उपलब्धि के लिए बधाई देने के साथ एक विशेष प्रस्ताव पारित किए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।

    यह उपलब्धि भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि लगातार तीन लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज कर मोदी देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं।

  • India-Cyprus Agreement: भारत और साइप्रस ने रक्षा, साइबर सुरक्षा सहित छह क्षेत्रों में समझौते किये, आठ घोषणाएं भी की!

    India-Cyprus Agreement: भारत और साइप्रस ने रक्षा, साइबर सुरक्षा सहित छह क्षेत्रों में समझौते किये, आठ घोषणाएं भी की!

    India-Cyprus Agreement: भारत और साइप्रस ने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत करने के साथ-साथ रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत छह क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किये और संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में आठ घोषणाएं भी की। भारत की तीन दिन की यात्रा पर आये साइप्रस के राष्ट्रपति महामहिम निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स के साथ शुक्रवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की द्विवपक्षीय वार्ता के बाद इन समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये।

    विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों देशों के बीच जिन छह समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए उनमें आतंकवाद-रोधी संयुक्त कार्य समूह की स्थापना, वर्ष 2026-2031 के लिए रक्षा सहयोग रोडमैप, साइप्रस के अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल नीति उप मंत्रालय तथा भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच नवाचार और प्रौद्योगिकी सहयोग संबंधी समझौता शामिल है।

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    भारत और साइप्रस ने साइबर सुरक्षा संवाद और कांसुलर संवाद शुरू करने पर भी सहमति जताई, जबकि साइप्रस के लारनाका संयुक्त बचाव समन्वय केंद्र और भारत के रक्षा मंत्रालय के बीच खोज एवं बचाव सहयोग को लेकर तकनीकी व्यवस्था पर भी हस्ताक्षर किये गये। यात्रा के दौरान कूटनीतिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान, तथा वर्ष 2026-2030 के लिए सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े समझौते भी किए गए।

    एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कदम के तहत साइप्रस ने “व्यापार, संपर्क और समुद्री परिवहन” स्तंभ के अंतर्गत भारत की हिन्द प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने की घोषणा की। भारत ने साइप्रस को “भारत स्वास्थ्य पहल सहयोग, हित एवं मैत्री (भीष्म) क्यूब” उपहार स्वरूप देने की घोषणा की। दोनों देशों ने 18 मई को पहली बार “भारत-साइप्रस अंतरिक्ष दिवस” मनाकर अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को भी रेखांकित किया।

    इसके साथ ही साइप्रस ने व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मुंबई में “साइप्रस ट्रेड सेंटर” खोलने की मंशा जाहिर की। राष्ट्रपति क्रिस्टोडूलाइड्स की इस यात्रा को भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक, प्रौद्योगिकी और समुद्री क्षेत्रों में सहयोग के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

  • Energy Security Tops Modi’s Agenda: यूएई सहित पांच देशों की यात्रा में मोदी के एजेन्डे में ऊर्जा सुरक्षा सबसे उपर!

    Energy Security Tops Modi’s Agenda: यूएई सहित पांच देशों की यात्रा में मोदी के एजेन्डे में ऊर्जा सुरक्षा सबसे उपर!

    Energy Security: प्रधानमंत्री की यह यात्रा यूरोप के साथ भारत की साझेदारी को विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत करेगी, विशेष रूप से हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा मिलेगी।Energy Security Tops Modi’s Agenda: दुनिया भर में ऐतिहासिक ऊर्जा संकट के कारण भारत में भी ऊर्जा आपूर्ति में आ रहे व्यवधान के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई ) और चार यूरोपीय देशों नीदरलैंड , स्वीडन, नार्वे तथा इटली की यात्रा पर रवाना होंगे और इस यात्रा में उनका सबसे अधिक जोर ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा।

    विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में श्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक क्षेत्र में सहयोग बढाना है। मोदी इस दौरान इन देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यात्रा के पहले चरण में 15 मई को यूएई की आधिकारिक यात्रा पर जायेंगे जहां वह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता द्विपक्षीय मुद्दों, विशेष रूप से ऊर्जा सहयोग, तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

    जार्ज ने कहा कि प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात , नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे तथा अन्य नॉर्डिक साझेदारों के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत का ठोस एजेंडा है। इसमें व्यापारिक समुदाय के साथ चर्चा और सहभागिता भी शामिल है। संयुक्त अरब अमीरात में यह यात्रा ओपेक पाइपलाइन से जुड़े हाल के घटनाक्रमों के बाद हो रही है।

    नीदरलैंड के साथ सेमीकंडक्टर सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र है, और चर्चाओं में उन्नत सेमीकंडक्टर जैसे विषय शामिल होंगे, जिन पर उपयुक्त रूप से चर्चा और जानकारी साझा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार यूएई में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ समझौते भी हो सकते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।

    यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा पिछले 25 वर्षों में सातवां सबसे बड़ा निवेश स्रोत है। यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न इस अनिश्चितता की स्थिति में श्री मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा का संरक्षण करने तथा विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए मितव्ययिता की अपील की है।

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    यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। वर्ष 2017 के बाद यह उनकी दूसरी नीदरलैंड यात्रा होगी। इस दौरान प्रधानमंत्री नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्ज़ेंडर और रानी मैक्सिमा से भेंट करेंगे तथा प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ वार्ता करेंगे। यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर तथा जल क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को नयी गति देगी।

    यात्रा के तीसरे चरण में श्री मोदी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर 17 से 18 मई तक स्वीडन के गोथेनबर्ग जाएंगे। प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेता व्यापार, हरित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु कार्रवाई और जन-से-जन संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

    दोनों प्रधानमंत्री यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री यात्रा के चौथे चरण में 18 से 19 मई तक नॉर्वे की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जहाँ वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी तथा पिछले 43 वर्षों में भारत से किसी प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा भी होगी।

    प्रधानमंत्री नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्या से भेंट करेंगे तथा प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के साथ वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री भारत-नॉर्वे व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। यह यात्रा व्यापार और निवेश, भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते, स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकी तथा ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।

    तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 19 मई को ओस्लो में होगा। इसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेट्टेरी ऑर्पो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रोस्टाडॉटिर तथा स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन भाग लेंगे। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19 से 20 मई तक इटली की आधिकारिक यात्रा करेंगे।

    यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर होगी। इस दौरान वह इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से भेंट करेंगे तथा प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ वार्ता करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में हो रही है, जहाँ दोनों पक्ष संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। इस कार्ययोजना में व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जन-से-जन संबंधों सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा यूरोप के साथ भारत की साझेदारी को विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत करेगी, विशेष रूप से हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा मिलेगी।