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Pragati 2026: बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास “प्रगति 2026” के लिए पूरी तरह तैयार है मेघालय का उमरोई!

Pragati 2026
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Pragati 2026: मेघालय के उमरोई स्थित संयुक्त प्रशिक्षण नोड में 20 मई से शुरू होने वाले बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास “प्रगति 2026” की सभी तैयारी पूरी हो गयी है और क्षेत्र के मित्र देशों की सेनाओं के दलों के 18 मई को पहुंचने की संभावना है।

सेना ने बुधवार को बताया कि 31 मई तक चलने वाला “प्रगति” (भारतीय महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी) अभ्यास सहभागी देशों की व्यावसायिक सहयोग, पारस्परिक सीख और सामूहिक तैयारी के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस अभ्यास में भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम के दल भाग लेंगे।

मेघालय के उमरोई का संयुक्त प्रशिक्षण नोड सैन्य प्रशिक्षण के लिए अनुकूल है और वहां का सुखद मौसम, लहरदार भू-भाग और प्राकृतिक जंगल क्षेत्र सामरिक प्रशिक्षण, संयुक्त योजना निर्माण और परिचालन अवधारणाओं के परीक्षण के लिए उपयुक्त परिस्थिति उपलब्ध कराते हैं।

संयुक्त प्रशिक्षण नोड, उमरोई आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना से सुसज्जित है, जिसमें संयुक्त युद्धकेंद्र, युद्ध अवरोधक पाठ्यक्रम, त्वरित प्रतिक्रिया फायरिंग रेंज, लघु शस्त्र फायरिंग रेंज, हेलिबोर्न अभियान प्रशिक्षण क्षेत्र, जंगल लेन फायरिंग क्षेत्र, ट्रेकिंग मार्ग और प्रमाणीकरण अभ्यास प्रशिक्षण क्षेत्र शामिल हैं।

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ये सुविधाएं कमांड पोस्ट प्रक्रियाओं, अवरोध पार करने, त्वरित फायरिंग, कक्ष हस्तक्षेप, फायर एवं मूव अभ्यास, जंगल अभियान, हेलिबोर्न अभ्यास तथा घायल निकासी प्रशिक्षण को समर्थन प्रदान करती हैं। यह अभ्यास 72 घंटे के समापन अभ्यास के साथ समाप्त होगा, जो प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए सबकों को समेकित करने और बहुराष्ट्रीय वातावरण में सहभागी दलों द्वारा प्राप्त अंतर-संचालन क्षमता का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करेगा।

अभ्यास के समापन चरण में सहभागी देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडलों, जिनमें सेना उप प्रमुख और वरिष्ठ कमांडर शामिल होंगे, के उपस्थित रहने की संभावना है। उनकी उपस्थिति अभ्यास की प्रगति की समीक्षा करने और निरंतर रक्षा सहयोग एवं व्यावसायिक सहभागिता को और मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करेगी।

“प्रगति 2026” का आयोजन समानता, मित्रता और पारस्परिक सम्मान की भावना के साथ किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सहभागी सेनाओं के बीच विश्वास निर्माण, अंतर-संचालन क्षमता को बढ़ाना तथा सैन्य-से-सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करना है।

यह अभ्यास मित्रवत विदेशी देशों के साथ रचनात्मक रक्षा सहभागिता तथा सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण और साझा सीख के माध्यम से समान सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।

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