Energy Security: प्रधानमंत्री की यह यात्रा यूरोप के साथ भारत की साझेदारी को विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत करेगी, विशेष रूप से हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा मिलेगी।Energy Security Tops Modi’s Agenda: दुनिया भर में ऐतिहासिक ऊर्जा संकट के कारण भारत में भी ऊर्जा आपूर्ति में आ रहे व्यवधान के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई ) और चार यूरोपीय देशों नीदरलैंड , स्वीडन, नार्वे तथा इटली की यात्रा पर रवाना होंगे और इस यात्रा में उनका सबसे अधिक जोर ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में श्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक क्षेत्र में सहयोग बढाना है। मोदी इस दौरान इन देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यात्रा के पहले चरण में 15 मई को यूएई की आधिकारिक यात्रा पर जायेंगे जहां वह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता द्विपक्षीय मुद्दों, विशेष रूप से ऊर्जा सहयोग, तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।
जार्ज ने कहा कि प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात , नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे तथा अन्य नॉर्डिक साझेदारों के साथ बातचीत के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर बातचीत का ठोस एजेंडा है। इसमें व्यापारिक समुदाय के साथ चर्चा और सहभागिता भी शामिल है। संयुक्त अरब अमीरात में यह यात्रा ओपेक पाइपलाइन से जुड़े हाल के घटनाक्रमों के बाद हो रही है।
नीदरलैंड के साथ सेमीकंडक्टर सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र है, और चर्चाओं में उन्नत सेमीकंडक्टर जैसे विषय शामिल होंगे, जिन पर उपयुक्त रूप से चर्चा और जानकारी साझा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार यूएई में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कुछ समझौते भी हो सकते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के बीच परस्पर संबंधों पर आधारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे।
यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार तथा पिछले 25 वर्षों में सातवां सबसे बड़ा निवेश स्रोत है। यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं। उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न इस अनिश्चितता की स्थिति में श्री मोदी ने देशवासियों से ऊर्जा का संरक्षण करने तथा विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए मितव्ययिता की अपील की है।
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यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। वर्ष 2017 के बाद यह उनकी दूसरी नीदरलैंड यात्रा होगी। इस दौरान प्रधानमंत्री नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्ज़ेंडर और रानी मैक्सिमा से भेंट करेंगे तथा प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ वार्ता करेंगे। यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर तथा जल क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग को नयी गति देगी।
यात्रा के तीसरे चरण में श्री मोदी स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के निमंत्रण पर 17 से 18 मई तक स्वीडन के गोथेनबर्ग जाएंगे। प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेता व्यापार, हरित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, जलवायु कार्रवाई और जन-से-जन संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
दोनों प्रधानमंत्री यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री यात्रा के चौथे चरण में 18 से 19 मई तक नॉर्वे की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जहाँ वह तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी तथा पिछले 43 वर्षों में भारत से किसी प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा भी होगी।
प्रधानमंत्री नॉर्वे के राजा हेराल्ड पंचम और रानी सोन्या से भेंट करेंगे तथा प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे के साथ वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री भारत-नॉर्वे व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। यह यात्रा व्यापार और निवेश, भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते, स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकी तथा ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।
तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन 19 मई को ओस्लो में होगा। इसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेट्टेरी ऑर्पो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रोस्टाडॉटिर तथा स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन भाग लेंगे। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री 19 से 20 मई तक इटली की आधिकारिक यात्रा करेंगे।
यह यात्रा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर होगी। इस दौरान वह इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मत्तारेला से भेंट करेंगे तथा प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ वार्ता करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में हो रही है, जहाँ दोनों पक्ष संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। इस कार्ययोजना में व्यापार, निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जन-से-जन संबंधों सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।
प्रधानमंत्री की यह यात्रा यूरोप के साथ भारत की साझेदारी को विभिन्न क्षेत्रों में और मजबूत करेगी, विशेष रूप से हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के संदर्भ में व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा मिलेगी।

