मुंबई: मुंबई पुलिस के मुंबई पुलिस डीसीपी ज़ोन-5(DCP Zone5) के अंतर्गत आने वाले कई पुलिस स्टेशनों और एसीपी कार्यालयों में कथित रूप से अनधिकृत एयर कंडीशनर(Air Conditioner) लगाए जाने का मामला प्रशासनिक विवाद का रूप लेता जा रहा है। आरटीआई से प्राप्त जानकारी और बाद में विभागीय समजपत्र में सामने आए विरोधाभासों ने पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
महाराष्ट्र शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय (जीआर) के अनुसार केवल उच्च वेतन श्रेणी के अधिकारियों को सरकारी कार्यालयों में एसी सुविधा की पात्रता है। इसके बावजूद आरोप है कि कई पुलिस स्टेशनों और एसीपी कार्यालयों में वर्षों से स्प्लिट और विंडो एसी बिना वैधानिक अनुमति के संचालित किए जा रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता गिरीश केशवराम मिश्रा ने दिसंबर 2022 में संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) को लिखित शिकायत भेजकर इस मामले को उठाया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कई पुलिस कार्यालयों में शासन नियमों की अनदेखी कर एसी लगाए गए हैं और सरकारी बिजली का उपयोग हो रहा है।
इसके बाद सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछा गया कि कितने पुलिस स्टेशनों में एसी वैध अनुमति से लगाए गए, कितने बिना अनुमति संचालित हैं, कितने हटाए गए और जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं। लेकिन जून 2023 में माहीम पुलिस स्टेशन की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि उपलब्ध अभिलेखों में ऐसी जानकारी मौजूद नहीं है।
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब अप्रैल 2026 में उसी थाने की प्रशासन शाखा से जारी समजपत्र में कहा गया कि निरीक्षण के दौरान कोई अनधिकृत एसी नहीं पाया गया और अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बिना अनुमति एसी न लगाए जाएँ।
यहीं सबसे बड़ा विरोधाभास सामने आता है, जब रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, तो निरीक्षण किस दस्तावेज़ के आधार पर किया गया? और यदि कोई अनधिकृत एसी था ही नहीं, तो बिना अनुमति एसी न लगाने की चेतावनी क्यों जारी करनी पड़ी?
अब इस पूरे मामले में कई गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं:
- ●क्या शासन के GR का उल्लंघन हुआ?
- ●क्या सरकारी बिजली और संसाधनों का अनुचित उपयोग हुआ?
- ●क्या रिकॉर्ड जानबूझकर उपलब्ध नहीं कराया गया?
- ●क्या यह मामला केवल माहिम पुलिस स्टेशन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे डीसीपी ज़ोन-5 में फैला है?
सूत्रों के अनुसार यदि इस प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाती है, तो मुंबई पुलिस के थानों के भीतर सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा खुलासा सामने आ सकता है। फिलहाल बिजली खर्च ऑडिट, संपत्ति रजिस्टर की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।

