Tag: Public Health

  • Stop Diarrhea Campaign 2026: ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन 2026’ के तहत पानी, सफ़ाई और हेल्थ मैनेजमेंट पर खास ज़ोर!

    Stop Diarrhea Campaign 2026: ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन 2026’ के तहत पानी, सफ़ाई और हेल्थ मैनेजमेंट पर खास ज़ोर!

    Stop Diarrhea Campaign 2026: केंद्र और राज्य सरकारों की गाइडलाइन के मुताबिक, ठाणे ज़िले में ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन 2026’ कैंपेन 16 जून से 31 जुलाई 2026 तक अलग-अलग फेज़ में चलाया जा रहा है, और डायरिया फैलने से रोकने के लिए पीने के पानी, सफ़ाई, हेल्थ एजुकेशन और लोगों में जागरूकता पर खास ज़ोर दिया जा रहा है।

    इस कैंपेन को अच्छे से लागू करने के लिए, एजुकेशन डिपार्टमेंट (प्राइमरी और सेकेंडरी), महिला और बाल विकास डिपार्टमेंट, हेल्थ डिपार्टमेंट, वॉटर सप्लाई और सैनिटेशन डिपार्टमेंट के साथ-साथ ग्राम पंचायत लेवल के सिस्टम के बीच तालमेल बनाया गया है। स्कूलों, आंगनवाड़ी सेंटर्स, प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स और सरकारी ऑफिसों में पीने के पानी की क्वालिटी, साफ-सफाई और हाथ धोने की आदतों की रेगुलर मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं।

    कैंपेन के पहले और दूसरे फेज (16 जून से 30 जून) में, गांवों में पानी की सप्लाई और साफ-सफाई का रिव्यू करने के लिए डिस्ट्रिक्ट लेवल पर खास मीटिंग्स की गईं। पीने के पानी की पाइपलाइनों की मरम्मत, जंग लगी पाइपलाइनों को बदलने, पानी के स्टोरेज टैंकों को डिसइंफेक्ट करने, रेगुलर क्लोरीनेशन और फ्री रेसिडुअल क्लोरीन को कम से कम 0.2 ppm पर बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

    स्कूलों और आंगनवाड़ी सेंटर्स में फील्ड टेस्ट किट के जरिए पानी की टेस्टिंग की ट्रेनिंग देने और उसका रिकॉर्ड रखने पर जोर दिया गया। तीसरे और चौथे फेज (1 जुलाई से 15 जुलाई) में, ग्राम पंचायत लेवल पर पानी कमेटियां बनाकर लोकल वॉटर मैनेजमेंट को और मजबूत बनाया जा रहा है।

    पानी, सफ़ाई और साबुन से हाथ धोने के महत्व पर एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2026 को असरदार तरीके से लागू करने के लिए भी खास कोशिशें की जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों में सीवेज मैनेजमेंट, घरेलू नल कनेक्शन, पानी की क्वालिटी की रेगुलर जांच और पोर्टल पर रिकॉर्ड अपडेट रखने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    पांचवें और छठे फेज (16 जुलाई से 31 जुलाई) में, लोकल कम्युनिटी, NGOs और इम्प्लीमेंटिंग सपोर्ट एजेंसियों के ज़रिए पानी के सोर्स के बचाव, बारिश के पानी को जमा करने, साफ़-सफ़ाई की आदतों और ODF सस्टेनेबिलिटी के महत्व पर ट्रेनिंग और जागरूकता प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे। पानी की क्वालिटी के बारे में मिली शिकायतों का तुरंत समाधान करके हर घर को साफ़ पीने का पानी देने पर ज़ोर दिया जाएगा।

    संबंधित डिपार्टमेंट को जिले के सभी स्कूलों, आंगनवाड़ियों, हेल्थ सेंटर और पब्लिक इंस्टीट्यूशन में सफ़ाई, पानी की क्वालिटी और हाथ धोने के तरीकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वाटर सप्लाई और सैनिटेशन डिपार्टमेंट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पंडित राठौड़ ने बताया कि अभियान के तहत की गई सभी एक्टिविटी को डॉक्यूमेंट किया जाएगा और स्टेट लेवल पर एक रिपोर्ट जमा की जाएगी।

    “बच्चों को डायरिया जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बचाने के लिए पीने का साफ़ पानी, साफ़-सफ़ाई और जागरूकता तीन सबसे ज़रूरी चीज़ें हैं। शिक्षा, महिला और बाल विकास, स्वास्थ्य और पानी की सप्लाई डिपार्टमेंट को मिलकर काम करना चाहिए और कैंपेन को असरदार तरीके से लागू करना चाहिए। हर स्कूल, आंगनवाड़ी और गांव में साफ़-सफ़ाई और पानी की क्वालिटी की कड़ी मॉनिटरिंग होनी चाहिए। सिर्फ़ मिलकर कोशिश करने से ही हम डायरिया-फ़्री और सेहतमंद ठाणे ज़िले का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं।” – ज़िला परिषद के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर रंजीत यादव

  • Pulse Polio campaign: ठाणे डिस्ट्रिक्ट रूरल में पल्स पोलियो कैंपेन पर अचानक रिस्पॉन्स; 1 लाख 17 हज़ार से ज़्यादा बच्चों को पोलियो की रोकथाम वाली डोज़ दी गई!

    Pulse Polio campaign: ठाणे डिस्ट्रिक्ट रूरल में पल्स पोलियो कैंपेन पर अचानक रिस्पॉन्स; 1 लाख 17 हज़ार से ज़्यादा बच्चों को पोलियो की रोकथाम वाली डोज़ दी गई!

    Pulse Polio campaign: नेशनल पल्स पोलियो वैक्सीनेशन कैंपेन के तहत, 0 से 5 साल के बच्चों को पोलियो की रोकथाम वाली डोज़ देने का एक बड़ा कैंपेन रविवार, 28 जून, 2026 को ठाणे डिस्ट्रिक्ट रूरल में सफलतापूर्वक चलाया गया। ज़िले के पांच तालुकों शाहपुर, मुरबाद, भिवंडी, कल्याण और अंबरनाथ में 1,699 वैक्सीनेशन बूथ पर कुल 1 लाख 17 हज़ार 249 बच्चों को पोलियो की डोज़ दी गई।

    तालुका के हिसाब से डेटा के मुताबिक, शाहपुर तालुका में 490 बूथ पर उम्मीद के मुताबिक 27,400 बच्चों में से 26,173 बच्चों को पोलियो की रोकथाम की डोज़ दी गई। मुरबाद तालुका में, उम्मीद के मुताबिक 12,050 बच्चों में से 11,692 बच्चों को 330 बूथ पर वैक्सीन लगाई गई। भिवंडी तालुका में, उम्मीद के मुताबिक 41,052 बच्चों में से 35,673 बच्चों को 445 बूथ पर डोज़ दी गई।

    कल्याण तालुका में, उम्मीद के मुताबिक 28,752 बेनिफिशियरी में से 25,952 बच्चों को 235 बूथ पर वैक्सीन लगाई गई, जबकि अंबरनाथ तालुका में उम्मीद के मुताबिक 19,163 बच्चों में से 17,759 बच्चों को 199 बूथ पर पोलियो की रोकथाम की डोज़ दी गई। यह कैंपेन भिवंडी के प्राइमरी हेल्थ सेंटर पडघा में MLA शांताराम मोरे ने शुरू किया। इसके अलावा, MLA राजेश मोरे की मौजूदगी में ताल कल्याण के निलजे प्राइमरी हेल्थ सेंटर में पल्स पोलियो कैंपेन शुरू किया गया।

    कैंपेन के दौरान, नेशनल हेल्थ मिशन के जॉइंट डायरेक्टर डॉ. बालासाहेब सोनवणे, ठाणे सर्कल के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अशोक नंदपुरकर, डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. कैलास पवार, डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर डॉ. गंगाधर पारगे, डिस्ट्रिक्ट मैटरनल एंड चाइल्ड वेलफेयर ऑफिसर डॉ. स्वाति शिंदे, डिस्ट्रिक्ट आयुष ऑफिसर डॉ. बालाजी गावड़े और डिस्ट्रिक्ट एक्सटेंशन एंड मीडिया ऑफिसर संजय जाधव ने अलग-अलग वैक्सीनेशन सेंटर्स का दौरा किया और कैंपेन को सुपरवाइज़ किया।

    ठाणे जिले में, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल और डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रंजीत यादव के गाइडेंस में यह कैंपेन असरदार तरीके से चलाया गया। कैंपेन को कामयाब बनाने के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट, आंगनवाड़ी वर्कर्स, आशा वॉलंटियर्स, लोकल सेल्फ-गवर्नमेंट बॉडीज़, वॉलंटरी ऑर्गनाइज़ेशन्स और सभी संबंधित ऑफिसर्स और एम्प्लॉइज ने कोऑर्डिनेशन से काम किया।

    डिस्ट्रिक्ट हेल्थ ऑफिसर डॉ. गंगाधर पारगे ने कहा कि जिले में एक भी बच्चा पोलियो वैक्सीन से वंचित नहीं रहेगा। 0 से 5 साल के सभी बच्चे जो रविवार को बूथ पर आकर डोज़ नहीं लगवा पाए, उन्हें अगले तीन दिनों तक घर-घर जाकर वैक्सीन लगाई जाएगी। “पोलियो-फ्री इंडिया के रास्ते को और मज़बूत करने के लिए यह ज़रूरी है कि हर बच्चे को पोलियो वैक्सीन मिले। यह कैंपेन हेल्थ डिपार्टमेंट, आशा और आंगनवाड़ी वर्कर्स और लोकल बॉडीज़ की मिली-जुली कोशिशों से सफल हुआ है।

    जिन पेरेंट्स के बच्चों को अभी तक वैक्सीन नहीं लगी है, वे हेल्थ वर्कर्स के घर जाकर वैक्सीन लगवाने में उनका साथ दें और यह पक्का करें कि हर बच्चा पोलियो से सुरक्षित रहे।” – ज़िला परिषद के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर रंजीत यादव। पोलियो जैसी गंभीर बीमारी को हमेशा के लिए हराने के लिए हर बच्चे का वैक्सीनेशन ज़रूरी है, और एडमिनिस्ट्रेशन ने पेरेंट्स से हेल्थ डिपार्टमेंट के इस कैंपेन में एक्टिवली हिस्सा लेने की अपील की है।

  • Health Care Training Program: ‘कॉम्प्रिहेंसिव प्राइमरी हेल्थ केयर ट्रेनिंग प्रोग्राम’ शुरू; ग्रामीण हेल्थ केयर की क्वालिटी सुधारने पर फोकस!

    Health Care Training Program: ‘कॉम्प्रिहेंसिव प्राइमरी हेल्थ केयर ट्रेनिंग प्रोग्राम’ शुरू; ग्रामीण हेल्थ केयर की क्वालिटी सुधारने पर फोकस!

    Health Care Training Program: महाराष्ट्र सरकार के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा पूरे राज्य में चलाए जा रहे ‘कॉम्प्रिहेंसिव प्राइमरी हेल्थ केयर (CPHC) ट्रेनिंग प्रोग्राम’ के तहत ठाणे ज़िले में ट्रेनिंग सेशन शुरू हो गए हैं, और इस पहल का पहला ट्रेनिंग सेशन प्राइमरी हेल्थ सेंटर निलजे, तालुका कल्याण में सफलतापूर्वक पूरा हुआ। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम आयुष्मान भारत स्कीम के तहत चल रहे आयुष्मान हेल्थ टेंपल में हेल्थ सर्विस को ज़्यादा कुशल, असरदार और लोगों के लिए बनाने के मकसद से आयोजित किया गया है।

    कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO), असिस्टेंट नर्स मिडवाइफ (ANM), मल्टीपर्पस हेल्थ वर्कर (MPW) और ASHA वॉलंटियर को अपडेटेड हेल्थ नॉलेज, स्किल और सर्विस मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग में कई ज़रूरी टॉपिक शामिल हैं, जैसे माँ और बच्चे की हेल्थ, फैलने वाली और नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों का मैनेजमेंट, हाइपरटेंशन और डायबिटीज़ कंट्रोल, मेंटल हेल्थ, किशोरों की हेल्थ, बुज़ुर्गों की हेल्थ केयर, इमरजेंसी मेडिकल केयर, योग और आयुष इलाज के तरीके, हेल्थ को बढ़ावा देना और बचाव के उपाय।

    ठाणे ज़िले में, यह ट्रेनिंग प्रोग्राम ज़िला कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल और ज़िला परिषद के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव ऑफ़िसर रंजीत यादव की गाइडेंस में चलाया जा रहा है और इसे असरदार तरीके से लागू करने की प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन ज़िला सर्जन डॉ. कैलाश पवार और ज़िला हेल्थ ऑफ़िसर डॉ. गंगाधर पारगे कर रहे हैं। असिस्टेंट ज़िला हेल्थ ऑफ़िसर डॉ. दिनेश सुतार, ज़िला मैटरनल एंड चाइल्ड वेलफ़ेयर ऑफ़िसर डॉ. स्वाति शिंदे और ज़िला ट्रेनिंग सेंटर की मेडिकल ऑफ़िसर डॉ. अंजलि चौधरी ट्रेनिंग प्रोग्राम को सफलतापूर्वक ऑर्गनाइज़ करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

    ट्रेनीज़ को ज़िला लेवल के एक्सपर्ट ट्रेनर्स थ्योरी और प्रैक्टिकल तौर पर गाइड कर रहे हैं। इस पहल के तहत, ठाणे ज़िले के सभी 33 प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स में अलग-अलग फ़ेज़ में कुल 50 ट्रेनिंग सेशन ऑर्गनाइज़ किए गए हैं और लगभग 2,000 हेल्थ वर्कर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग से ग्रामीण इलाकों के लोगों को बेहतर क्वालिटी, पूरी और आसानी से मिलने वाली हेल्थ सर्विस देने में मदद मिलेगी।

    इस ट्रेनिंग का मुख्य मकसद प्राइमरी लेवल पर ज़्यादा हेल्थ प्रॉब्लम को हल करना, गैर-ज़रूरी रेफरल सर्विस को कम करना, ज़्यादा रिस्क वाले मरीज़ों की समय पर पहचान करके सही इलाज पक्का करना और हेल्थ सर्विस की क्वालिटी को बेहतर बनाना है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने माना है कि यह पहल यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज पाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगी और लोगों के हेल्थ नतीजों में अच्छे बदलाव लाने में मदद करेगी।

    जिला परिषद के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रंजीत यादव ने कहा, “सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण इलाकों में हर नागरिक को अच्छी, आसानी से मिलने वाली और पूरी हेल्थकेयर सर्विस देना है। पूरी प्राइमरी हेल्थकेयर ट्रेनिंग प्रोग्राम आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में काम करने वाले हेल्थ वर्कर की क्षमता को और मज़बूत करेगा। अपडेटेड जानकारी और स्किल के ज़रिए, प्राइमरी लेवल पर लोगों को ज़्यादा असरदार हेल्थकेयर सर्विस मिल सकेंगी। यह पहल एक हेल्दी समाज बनाने के लिए ज़रूरी होगी।”

  • Bhiwandi Food Poisoning: भिवंडी में शोरमा-पिज्जा खाने से 59 लोग फूड पॉइजनिंग के शिकार, अस्पताल में इलाज जारी

    Bhiwandi Food Poisoning: भिवंडी में शोरमा-पिज्जा खाने से 59 लोग फूड पॉइजनिंग के शिकार, अस्पताल में इलाज जारी

    Bhiwandi Food Poisoning: शहर के खंडूपाडा इलाके में चिकन शोरमा, पिज्जा और फालूदा खाने के बाद फूड पॉइजनिंग का बड़ा मामला सामने आया है। इस घटना में अब तक कुल 59 लोग बीमार हो चुके हैं, जिनका इलाज भिवंडी के उपजिला अस्पताल में जारी है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रारंभ में एक ही परिवार के 6 सदस्यों सहित कुल 14 लोगों को उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद रात और अगली सुबह इसी तरह के लक्षणों के साथ 23 और मरीज अस्पताल पहुंचे, जिससे कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 59 हो गई।

    बताया जा रहा है कि सभी प्रभावित लोगों ने खंडूपाडा स्थित ‘फेमस शोरमा’ नामक दुकान से चिकन शोरमा और पिज्जा खरीदा था, जिसे उन्होंने घर ले जाकर खाया। इसके बाद अगले दिन सुबह से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और दोपहर तक हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    फूड पॉइजनिंग के शिकार मरीजों में उल्टी, जी मिचलाना, पेट दर्द, दस्त और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण पाए गए हैं। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर इसे फूड पॉइजनिंग का मामला बताया है।

    अस्पताल अधीक्षिका डॉ. माधवी पंधारे ने बताया कि सभी मरीजों का इलाज स्व. इंदिरा गांधी स्मृति उपजिला अस्पताल में चल रहा है और कुछ नए मरीज भी भर्ती हो रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि गर्मी और उमस के मौसम में बाहर का खाना खाने से बचें और घर का ताजा व पौष्टिक भोजन ही ग्रहण करें।

    घटना की सूचना मिलते ही खाद्य निरीक्षक की टीम मौके पर पहुंची और होटल से खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए जब्त किए। वहीं, शांतिनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विनायक गायकवाड ने बताया कि होटल संचालक दिलशाद अंसारी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

  • Health System: स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती का आधार है सक्षम प्रयोगशाला

    Health System: स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती का आधार है सक्षम प्रयोगशाला

    Health System: ठाणे में एक दिन की राज्य स्तर वर्कशॉप ऑर्गनाइज़ की गई थी। इसका मकसद पब्लिक स्वास्थ्य सिस्टम में लैब सर्विस की क्वालिटी को बेहतर बनाना और सही डायग्नोसिस के ज़रिए मरीज़ की सर्विस को और असरदार बनाना था। इस पहल ने हेल्थ सिस्टम में “प्रॉब्लम से सॉल्यूशन” की तरफ एक पॉजिटिव बदलाव लाने की कोशिश की है।मनोरोगी अस्पताल में हुई इस वर्कशॉप में राज्य भर के प्राइमरी स्वास्थ्य सेंटर, ग्रामीण अस्पताल, सब-जिला और जिला अस्पताल के लैब ऑफिसर, मेडिकल ऑफिसर और एक्सपर्ट ने हिस्सा लिया।

    ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सर्विस के बीच के गैप को कम करने और मरीज़ों के लिए समय पर और सही डायग्नोसिस पक्का करने पर खास ज़ोर दिया गया। स्वास्थ्य डायरेक्टर डॉ. नितिन अंबाडेकर की अध्यक्षता में हुई इस वर्कशॉप में जॉइंट डायरेक्टर डॉ. सुनीता गोलहैत, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अशोक नंदापुरकर,मनोरोगी अस्पताल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नेताजी मुलिक,सिविल सर्जन डॉ. कैलाश पवार और दूसरे जाने-माने लोग मौजूद थे।

    लैबोरेटरी सर्विस में रोज़ाना आने वाली दिक्कतों, इक्विपमेंट की अवेलेबिलिटी, मैनपावर की कमी और टेक्निकल सुधारों पर गहराई से चर्चा हुई। इसमें शामिल अधिकारियों ने अपने सीधे अनुभव बताए और असली हालात की तस्वीर पेश की। इस जानकारी के आधार पर तुरंत सुधार और समाधान सुझाने की कोशिश की गई। इस मौके पर, जाने-माने लोगों ने कहा कि एक मज़बूत लैबोरेटरी सिस्टम मॉडर्न स्वास्थ्य की रीढ़ है।

    अगर टेस्ट सही समय पर और सही तरीके से किए जाएं, तो मरीज़ों का इलाज ज़्यादा असरदार होता है और स्वास्थ्य सिस्टम पर बोझ भी कम होता है। इस पहल से ज़मीनी स्तर के स्वास्थ्य इंस्टीट्यूशन को मज़बूत करने, डायग्नोस्टिक सर्विस की क्वालिटी सुधारने और मरीज़ों पर ध्यान देने वाला हेल्थ सिस्टम बनाने को बढ़ावा मिला है। इस तरह की जागरूकता बढ़ाने वाली और प्रोएक्टिव वर्कशॉप से ​​ग्रामीण इलाकों में लोगों के लिए बेहतर क्वालिटी की स्वास्थ्य पाना आसान हो रहा है।

  • Sanitary Pad Disposal Machine: भिवंडी के आदर्श पार्क में सैनिटरी पैड डिस्पोजल मशीन का उद्घाटन

    Sanitary Pad Disposal Machine: भिवंडी के आदर्श पार्क में सैनिटरी पैड डिस्पोजल मशीन का उद्घाटन

    Sanitary Pad Disposal Machine: महिलाओं के स्वास्थ्य, मासिक धर्म स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भिवंडी महानगरपालिका के वार्ड क्रमांक-1 स्थित आदर्श पार्क में सैनिटरी पैड डिस्पोजल मशीन का उद्घाटन नगरसेविका नेहा काठवले के हाथों किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं एवं स्थानीय नागरिकों ने उपस्थित रहकर इस पहल का स्वागत किया।

    नगरसेविका नेहा काठवले ने बताया कि महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए यह मशीन उनके स्वखर्च से स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं को सैनिटरी कचरे के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक निस्तारण की सुविधा प्रदान करेगी। उनके अनुसार भिवंडी में इस प्रकार की यह पहली जनहितकारी पहल है।

    उद्घाटन समारोह में नगरसेवक मयुरेश पाटील, सामाजिक कार्यकर्ता नवीन काठवले, मनपा स्वास्थ्य निरीक्षक उत्तम एस. जाधव तथा बड़ी संख्या में स्थानीय महिला नागरिक उपस्थित थीं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को मशीन का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कर इसकी कार्यप्रणाली समझाई गई।

    साथ ही मासिक धर्म स्वच्छता, सैनिटरी कचरे के सुरक्षित निपटान तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी दी गई। नगरसेवक मयुरेश पाटील ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता से संबंधित ऐसे उपक्रमों को महानगरपालिका स्तर पर व्यापक रूप से लागू किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

    वहीं स्वास्थ्य निरीक्षक उत्तम एस. जाधव ने सैनिटरी कचरे के उचित निस्तारण, सार्वजनिक स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नागरिकों से स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतों को अपनाने का आह्वान किया। इस पहल को लेकर क्षेत्र की महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया।

    उपस्थित महिलाओं ने नगरसेविका नेहा काठवले का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सुविधा न केवल महिलाओं के लिए उपयोगी साबित होगी, बल्कि मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

  • Sanitation Workers Issues: सफाई कर्मचारियों के मुद्दों पर ढिलाई बरतने पर होगी सख्त कार्रवाई!

    Sanitation Workers Issues: सफाई कर्मचारियों के मुद्दों पर ढिलाई बरतने पर होगी सख्त कार्रवाई!

    Sanitation Workers Issues: महाराष्ट्र राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष मुकेश सारवान ने चेतावनी दी है कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होगा और यदि समस्याओं के समाधान में ढिलाई बरती गई तो संबंधित अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मंगलवार को मुकेश सारवान ने भिवंडी महानगरपालिका का दौरा कर सफाई कर्मचारियों की समस्याओं की समीक्षा की तथा मनपा आयुक्त अनमोल सागर के साथ विस्तृत चर्चा की। इस अवसर पर आयोजित समीक्षा बैठक में अतिरिक्त आयुक्त विठ्ठल डाके, नयना ससाणे, उपायुक्त विक्रम दराडे, सहायक आयुक्त शैलेश दोंदे तथा विभिन्न श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

    बैठक में महानगरपालिका के सफाई कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के साथ-साथ सामाजिक न्याय विभाग और नगर विकास विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेशों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। मुकेश सारवान ने स्थापना विभाग के अधिकारियों और आयुक्त से चर्चा करते हुए यह जानकारी ली कि सफाई कर्मचारियों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं को किस प्रकार लागू किया जा रहा है।

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    उन्होंने ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर श्रमसाफल्य योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन सफाई कर्मचारियों ने 25 वर्ष या उससे अधिक समय तक सेवा दी है, उन्हें मालिकाना हक के आधार पर निःशुल्क फ्लैट उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इस संबंध में उन्होंने मनपा प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई कर मामले का शीघ्र समाधान करने के निर्देश दिए।

    मुकेश सारवान ने 30 अप्रैल 2025 के सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दूषित नालों में काम करते समय जान गंवाने वाले, स्थायी रूप से दिव्यांग या विकलांग हुए मैनुअल स्कैवेंजर्स और सफाई कर्मचारियों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके अलावा 13 अक्टूबर 2024 के सरकारी आदेश के तहत लंबित अनुकंपा नियुक्ति और वारिस हक से जुड़े मामलों की जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया।

    उन्होंने महानगरपालिका प्रशासन को निर्देश दिया कि सफाई कर्मचारियों के स्वीकृत, भरे गए और रिक्त पदों का विवरण तैयार किया जाए तथा कर्मचारियों के समग्र विकास के लिए सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए। बैठक के दौरान आयोग की ओर से दोहराया गया कि सफाई कर्मचारियों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और यदि समस्याओं के समाधान में अनावश्यक देरी हुई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • Bhiwandi De-addiction Rally: विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर भिवंडी में निकली व्यसन मुक्ति रैली, नशामुक्त भारत का दिलाया संकल्प!

    Bhiwandi De-addiction Rally: विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर भिवंडी में निकली व्यसन मुक्ति रैली, नशामुक्त भारत का दिलाया संकल्प!

    Bhiwandi De-addiction Rally: गायत्री परिवार ट्रस्ट भिवंडी द्वारा व्यसन मुक्ति भारत अभियान के अंतर्गत विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर गायत्री प्रज्ञा पीठ, गौशाला प्रांगण में व्यसन मुक्ति रैली एवं संकल्प समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में नशामुक्ति के प्रति जनजागरण करना तथा युवाओं को तंबाकू एवं अन्य व्यसनों से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. देवराज सिन्हा, स्वामी प्रेम स्वरूप चैतन्य, वरिष्ठ समाजसेवी कृष्णगोपाल सिंह, चंदन सिंह राजपुरोहित, डॉ. वरुण मानेक तथा भाजपा नेता मोहन कोंडा उपस्थित रहे। व्यसन मुक्ति रैली का शुभारंभ नगरसेवक मनोज काटेकर द्वारा किया गया।

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    रैली के दौरान प्रतिभागियों ने नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश देते हुए जनजागरण किया तथा तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया। इसके पश्चात आयोजित संकल्प समारोह में उपस्थित जनसमूह ने नशामुक्त भारत के निर्माण हेतु सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

    कार्यक्रम का सफल संचालन उपेन्द्र जोशी ने किया। इस अवसर पर दयाशंकर गुप्ता, लालजी वरिया, दिनकर सिंह, विपुल खंडेलवाल, नीरज गुप्ता, पी. डी. यादव, चिराग मालदे, ओंकार यादव, सुनीता नायक, सुनील भोंसले सहित बड़ी संख्या में बच्चों, महिलाओं एवं पुरुषों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। आयोजकों ने सभी उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए समाज को नशामुक्त बनाने के लिए निरंतर जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया।

  • Thane NQAS Rating: ठाणे के 4 PHC और 4 सब-सेंटर को मिली नेशनल NQAS रेटिंग

    Thane NQAS Rating: ठाणे के 4 PHC और 4 सब-सेंटर को मिली नेशनल NQAS रेटिंग

    Thane NQAS Rating: ठाणे ज़िले के लोगों को अच्छी, सुरक्षित, ट्रांसपेरेंट और मरीज़ों पर ध्यान देने वाली हेल्थ सर्विस देने के लिए डिस्ट्रिक्ट हेल्थ डिपार्टमेंट की तरफ से क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम को अच्छे से लागू किया जा रहा है। सेंट्रल गवर्नमेंट के नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) के तहत ज़िले के अलग-अलग हेल्थ इंस्टीट्यूशन की सर्विस क्वालिटी को बेहतर बनाने की लगातार कोशिशें की जा रही हैं, और इसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं।

    ठाणे ज़िले के 4 प्राइमरी हेल्थ सेंटर ने नेशनल लेवल की NQAS क्वालिटी रेटिंग हासिल की है। इनमें प्राइमरी हेल्थ सेंटर वज्रेश्वरी, खरबाव, धसाई और शेनवा शामिल हैं। साथ ही, 4 सब-सेंटर ने नेशनल लेवल की NQAS रेटिंग हासिल करके शानदार परफॉर्मेंस दी है। इनमें बापगांव, खांबला, भिनार और कटाई सब-सेंटर शामिल हैं।

    इसके अलावा, जिले के 10 सब-सेंटर को स्टेट-लेवल NQAS क्वालिटी रेटिंग मिली है। इनमें वदुनावघर, उसगांव, एकलहरे, कन्होर, नादगांव, बिरवाड़ी, शिरगांव, दापोड़े, लैप और डोहोल सब-सेंटर शामिल हैं। जिले में हेल्थ इंस्टीट्यूशन से लोगों को दी जाने वाली सर्विस को ज़्यादा असरदार, डिसिप्लिन्ड और क्वालिटी वाला बनाने के लिए, NQAS के तहत अलग-अलग क्राइटेरिया के आधार पर एक इवैल्यूएशन प्रोसेस लागू किया जाता है।

    इसमें साफ-सफाई, मरीज़ की सेफ्टी, दवा की अवेलेबिलिटी, टाइम पर सर्विस, ट्रेंड मैनपावर, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, रिकॉर्ड मैनेजमेंट और मरीज़ सैटिस्फैक्शन जैसे पहलुओं पर खास ज़ोर दिया जा रहा है। सेंट्रल गवर्नमेंट की गाइडलाइंस के मुताबिक, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, रूरल हॉस्पिटल, प्राइमरी हेल्थ सेंटर और सब-सेंटर के लिए डिटेल्ड क्वालिटी क्राइटेरिया तय किए गए हैं।

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    प्राइमरी असेसमेंट डिस्ट्रिक्ट क्वालिटी एश्योरेंस सेल के ज़रिए किया जाता है। प्राइमरी असेसमेंट में 70 परसेंट से ज़्यादा स्कोर करने वाले इंस्टीट्यूशन को स्टेट-लेवल असेसमेंट के लिए भेजा जाता है। इसके बाद, जो इंस्टीट्यूशन स्टेट-लेवल असेसमेंट में ज़रूरी मार्क्स लाते हैं, उन्हें नेशनल क्वालिटी रेटिंग के लिए रिकमेंड किया जाता है।

    डिस्ट्रिक्ट हेल्थ डिपार्टमेंट ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में जिले के सभी हेल्थ इंस्टीट्यूशन के लिए NQAS रेटिंग पाने का टारगेट रखा है, और बाकी हेल्थ इंस्टीट्यूशन को क्वालिटी स्टैंडर्ड के हिसाब से तैयार करने का काम चल रहा है। इस पहल से हेल्थ सर्विसेज़ में लोगों का भरोसा मज़बूत हो रहा है और ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अच्छी हेल्थ सर्विसेज़ मिल रही हैं।

    डिस्ट्रिक्ट हेल्थ डिपार्टमेंट रेगुलर ट्रेनिंग, गाइडेंस, रिव्यू मीटिंग और इंटरनल क्वालिटी इंस्पेक्शन के ज़रिए इंस्टीट्यूशन की क्वालिटी को बेहतर बनाने पर लगातार ज़ोर दे रहा है। चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रंजीत यादव ने कहा, “अच्छी हेल्थ केयर लोगों की एक बेसिक ज़रूरत है।

    जिले के प्राइमरी हेल्थ सेंटर और सब-सेंटर को मिली नेशनल और स्टेट-लेवल NQAS रेटिंग हेल्थ डिपार्टमेंट की लगातार कोशिशों और हेल्थ वर्कर के डेडिकेटेड काम की निशानी है। ज़िला परिषद ठाणे एडमिनिस्ट्रेशन ग्रामीण इलाकों के लोगों को सुरक्षित, भरोसेमंद और अच्छी हेल्थ सर्विसेज़ देने के लिए कमिटेड है, और आने वाले दिनों में और ज़्यादा हेल्थ इंस्टीट्यूशन को क्वालिटी रेटिंग दिलाने के लिए तेज़ी से कोशिशें जारी रखी जाएंगी।”

  • HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: एचआईवी पॉजिटिव महिला का प्रसव न कराने पर अस्पतालों की जांच शुरू!

    HIV Positive Woman Delivery Case: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिला का प्रसव कराने से इंकार करने के मामले में जिला महिला अस्पताल हमीरपुर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मौदहा के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ को मामले की जांच सौंपी गई है।

    जांच अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय कुमार ने मंगलवार को बताया कि महोबा जिले के खन्ना क्षेत्र निवासी दंपती एचआईवी पॉजिटिव हैं। महिला के पति ने प्रसव के लिए पत्नी को मौदहा सीएचसी में भर्ती कराया था, जहां एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी मिलने पर स्टाफ ने प्रसव कराने से मना कर दिया और जिला महिला अस्पताल हमीरपुर रेफर कर दिया।

    उन्होंने बताया कि जिला महिला अस्पताल पहुंचने पर भी रेफरल कार्ड देखते ही महिला को तत्काल कानपुर रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला प्रसव पीड़ा से गुजर रही थी। जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एचआईवी पॉजिटिव प्रसूताओं का हर हाल में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव कराया जाए। इसके लिए विशेष किट और चिकित्सकीय प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाती है।

    बताया गया कि 21 मई को महिला ने कानपुर के एक निजी अस्पताल में प्रसव कराया, जिसमें परिवार का लगभग 40 हजार रुपये खर्च हो गया। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हमीरपुर पहुंचकर जिलाधिकारी अभिषेक गोयल से शिकायत की। जिलाधिकारी ने मामले की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गीतम सिंह को सौंपी, जिन्होंने आगे जांच डिप्टी सीएमओ को दे दी।

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    जांच के दौरान मौदहा सीएचसी अधीक्षक डॉ. रजत तिवारी ने कहा कि स्टाफ ने महिला को जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया था और उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। वहीं जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. के.एस. मिश्रा ने बताया कि अस्पताल में पूर्व में एचआईवी पॉजिटिव महिलाओं के प्रसव कराए जा चुके हैं तथा इसके लिए अलग ऑपरेशन थिएटर और विशेष किट उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि महिला को रेफर किए जाने की जानकारी की जांच कराई जाएगी।

    डॉ. मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल का अधिकांश स्टाफ इस प्रकार के मामलों में प्रशिक्षित नहीं है। वहीं जांच अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने दावा किया कि एचआईवी संक्रमित महिलाओं के प्रसव संबंधी मामलों में स्वास्थ्य केंद्रों पर लगभग 90 प्रतिशत स्टाफ अप्रशिक्षित है, जबकि सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि महिला अस्पताल में एचआईवी जांच की सुविधा तो उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई प्रसूताओं की जांच किए बिना ही प्रसव करा दिया जाता है। साथ ही महिला अस्पताल की काउंसलर को पुरुष अस्पताल से संबद्ध किए जाने के कारण भी कार्य प्रभावित हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों की सूचना आईसीटीसी को दी जानी चाहिए, लेकिन कई बार ऐसा नहीं किया जाता।