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  • BNCMC Corruption: भिवंडी मनपा के घनकचरा विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप, आपराधिक कार्रवाई की मांग

    BNCMC Corruption: भिवंडी मनपा के घनकचरा विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप, आपराधिक कार्रवाई की मांग

    BNCMC Corruption: भिवंडी निजामपुर शहर महानगरपालिका (मनपा) के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग की ई-निविदा प्रक्रिया में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर एक निजी कंपनी द्वारा करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता गौरव संतोष भोइर ने इस मामले में संबंधित कंपनी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए भिवंडी मनपा के महापौर नारायण चौधरी, आयुक्त अनमोल सागर तथा उप महापौर एवं घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के अधिकारियों को लिखित ज्ञापन सौंपा है।

    ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि दिसंबर 2024 में भिवंडी मनपा के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग के माध्यम से अपशिष्ट संग्रहण (कचरा संकलन) का ठेका प्राप्त करने के लिए नवी मुंबई की एक कंपनी ने कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। कंपनी ने दावा किया था कि उसे इस प्रकार के कार्यों का पूर्व अनुभव है, जिसके आधार पर उसे निविदा प्रदान की गई।

    गौरव भोइर के अनुसार, सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत संबंधित दस्तावेजों की जांच करने पर यह सामने आया कि प्रस्तुत किया गया प्रमाणपत्र कथित रूप से फर्जी और जाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त कंपनी ने इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर भिवंडी मनपा को गुमराह किया और करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

    भोइर ने यह भी आशंका व्यक्त की है कि संबंधित कंपनी ने राज्य की अन्य महानगरपालिकाओं में भी इसी प्रकार के दस्तावेजों का उपयोग कर ठेके हासिल किए हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी निविदाएं प्राप्त करना न केवल प्रशासन के साथ धोखाधड़ी है, बल्कि निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।

    उन्होंने दावा किया कि इस मामले के कारण शासन को करोड़ों रुपये का संभावित आर्थिक नुकसान हुआ है तथा निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इसके अलावा, भिवंडी मनपा के कुछ पार्षदों द्वारा भी संबंधित कंपनी के खिलाफ विभिन्न शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

    गौरव संतोष भोइर ने मांग की है कि संबंधित कंपनी के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए, उसका अनुबंध रद्द किया जाए, कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा अनुबंध प्राप्त करने में शामिल जिम्मेदार व्यक्तियों को भी सह-आरोपी बनाया जाए। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

    भोइर ने कहा कि वह इस कथित ई-टेंडर घोटाले की शिकायत राज्य के मुख्यमंत्री , उपमुख्यमंत्री, शहरी विकास विभाग, कोंकण आयुक्त तथा ठाणे जिला कलेक्टर के समक्ष भी प्रस्तुत करेंगे।

    मनपा का पक्ष

    भिवंडी मनपा के महापौर ने कहा, “यदि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग की ई-निविदा प्रक्रिया में किसी प्रकार की धोखाधड़ी पाई जाती है, तो संबंधित कंपनी के दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में यदि यह सिद्ध होता है कि मनपा को गुमराह कर वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी की गई है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”

  • Nashik TCS Case: नासिक TCS मामले में मलेशिया कनेक्शन का दावा, संजय निरुपम ने की विस्तृत जांच की मांग!

    Nashik TCS Case: नासिक TCS मामले में मलेशिया कनेक्शन का दावा, संजय निरुपम ने की विस्तृत जांच की मांग!

    Nashik TCS Case: शिवसेना के उपनेता एवं प्रवक्ता संजय निरुपम ने नासिक स्थित TCS में कार्यरत एक महिला कर्मचारी के कथित धर्मांतरण, यौन एवं आर्थिक शोषण से जुड़े मामले को गंभीर बताते हुए इसकी व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि मामले के पीछे मलेशिया और पाकिस्तान से जुड़े किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

    मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में निरुपम ने कहा कि अदालत में दाखिल आरोपपत्र में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उनके अनुसार, पीड़िता का कथित रूप से ब्रेनवॉश करने के लिए उसे विवादास्पद धार्मिक वीडियो दिखाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के मुख्य आरोपियों के मलेशिया से संबंध होने की बात भी आरोपपत्र में सामने आई है तथा पीड़िता को मलेशिया भेजने की योजना बनाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

    निरुपम ने जांच एजेंसियों से मांग की कि मामले के सभी अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की गहन जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं इसका संबंध किसी संगठित नेटवर्क से तो नहीं है। उन्होंने फरार आरोपी निदा खान को कथित रूप से संरक्षण दिए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले में जिन स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों या संगठनों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    संजय निरुपम ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के पालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लापरवाही बरती गई है, तो संबंधित प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    महाराष्ट्र की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की जांच की मांग
    निरुपम ने राज्य सरकार और पुलिस से महाराष्ट्र की आईटी, फार्मा तथा अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्थान की जिम्मेदारी है।

    इसके लिए सभी बड़ी कंपनियों में सुरक्षा उपायों, शिकायत निवारण तंत्र और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की नियमित जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

  • Twisha Sharma Death Case: उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा मौत के मामले में मीडिया से संयम बरतने की अपील!

    Twisha Sharma Death Case: उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा मौत के मामले में मीडिया से संयम बरतने की अपील!

    Twisha Sharma Death Case: उच्चतम न्यायालय ने ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मीडिया से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि पीड़िता के परिवार या आरोपियों के परिवार के बयानों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित न किया जाए।

    शीर्ष अदालत ने ट्विशा शर्मा मृत्यु मामले में कथित संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत त्रुटियों से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने की।

    मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “कुछ घटनाक्रमों से हमें पीड़ा हुई है। हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार या दूसरे पक्ष के बयानों पर ज्यादा ध्यान न दे। मामले को कानून और प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दिया जाए।”

    उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि मामले में एक पूर्व जिला न्यायाधीश और एक वकील के खिलाफ आरोप होने के कारण न्यायपालिका द्वारा आरोपियों को संरक्षण दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

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    शीर्ष अदालत ने मीडिया से भी संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि पीड़िता के परिवार या आरोपियों के परिवार के बयानों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित न किया जाए। नोएडा निवासी ट्विशा शर्मा पूर्व ‘मिस पुणे’ विजेता थीं।

    उन्होंने पांच महीने पहले डेटिंग ऐप के माध्यम से परिचय होने के बाद भोपाल निवासी वकील समर्थ सिंह से विवाह किया था। समर्थ सिंह का परिवार न्यायपालिका से जुड़ा हुआ बताया गया है। समर्थ सिंह जहां पेशे से वकील हैं, वहीं उनकी मां गिरिबाला सिंह सेवानिवृत्त न्यायाधीश और वर्तमान में जिला उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग की अध्यक्ष हैं।

    विवाह के महज पांच महीने बाद 12 मई 2026 को ट्विशा शर्मा अपने घर में जिम्नास्टिक रस्सी से लटकी हुई पाई गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, सीबीआई की एक टीम ट्विशा शर्मा की मृत्यु मामले की जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में लेने के लिए भोपाल रवाना हो चुकी है।