Nashik TCS Case: नासिक TCS मामले में मलेशिया कनेक्शन का दावा, संजय निरुपम ने की विस्तृत जांच की मांग!

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Nashik TCS Case: शिवसेना के उपनेता एवं प्रवक्ता संजय निरुपम ने नासिक स्थित TCS में कार्यरत एक महिला कर्मचारी के कथित धर्मांतरण, यौन एवं आर्थिक शोषण से जुड़े मामले को गंभीर बताते हुए इसकी व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि मामले के पीछे मलेशिया और पाकिस्तान से जुड़े किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में निरुपम ने कहा कि अदालत में दाखिल आरोपपत्र में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उनके अनुसार, पीड़िता का कथित रूप से ब्रेनवॉश करने के लिए उसे विवादास्पद धार्मिक वीडियो दिखाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के मुख्य आरोपियों के मलेशिया से संबंध होने की बात भी आरोपपत्र में सामने आई है तथा पीड़िता को मलेशिया भेजने की योजना बनाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

निरुपम ने जांच एजेंसियों से मांग की कि मामले के सभी अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की गहन जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं इसका संबंध किसी संगठित नेटवर्क से तो नहीं है। उन्होंने फरार आरोपी निदा खान को कथित रूप से संरक्षण दिए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले में जिन स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों या संगठनों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

संजय निरुपम ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के पालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लापरवाही बरती गई है, तो संबंधित प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

महाराष्ट्र की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की जांच की मांग
निरुपम ने राज्य सरकार और पुलिस से महाराष्ट्र की आईटी, फार्मा तथा अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्थान की जिम्मेदारी है।

इसके लिए सभी बड़ी कंपनियों में सुरक्षा उपायों, शिकायत निवारण तंत्र और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की नियमित जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

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