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  • Sanjay Nirupam: अहंकार ही उबाठा को ले डूबेगा, ममता बनर्जी जैसी होगी हालत: संजय निरुपम

    Sanjay Nirupam: अहंकार ही उबाठा को ले डूबेगा, ममता बनर्जी जैसी होगी हालत: संजय निरुपम

    Sanjay Nirupam: शिवसेना के उपनेता एवं प्रवक्ता संजय निरुपम ने रविवार को आयोजित पत्रकार परिषद में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उनका बढ़ता अहंकार ही उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाएगा। उन्होंने दावा किया कि जिस प्रकार ममता बनर्जी के बढ़ते अहंकार का असर उनकी पार्टी पर पड़ा, उसी तरह की स्थिति उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट (उबाठा) में भी दिखाई दे रही है।

    निरुपम ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की मजबूती उसके नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच निरंतर संवाद पर निर्भर करती है। जब नेतृत्व अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं से दूरी बना लेता है तो संगठन कमजोर होने लगता है। उनका आरोप था कि उबाठा में भी यही स्थिति बनती जा रही है, जिसके कारण पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और भविष्य में इसके राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

    उबाठा की कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए निरुपम ने कहा कि यह दल लंबे समय से “ऑनलाइन राजनीति” करता आया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब दोनों ठाकरे नेता भी “वर्क फ्रॉम होम” की राजनीति कर रहे हैं और पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद के बजाय ऑनलाइन माध्यमों पर अधिक निर्भर हैं।

    उन्होंने उबाठा नेता संजय राउत द्वारा कथित तौर पर चलाए जा रहे “ऑपरेशन भेड़िया” अभियान का भी उल्लेख किया। निरुपम ने सवाल उठाया कि क्या संजय राउत अपनी ही पार्टी के नेताओं को “भेड़िया” कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान पार्टी के भीतर चल रही स्थिति को उजागर करते हैं।

    इस दौरान निरुपम ने मीडिया में चर्चा में रहे “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस तरह की खबरों और चर्चाओं से शिवसेना का कोई संबंध नहीं है। पार्टी की न तो इसमें कोई भूमिका है और न ही ऐसी किसी गतिविधि में उसकी कोई रुचि है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को मजबूत बनाए रखने के लिए नेतृत्व का जमीनी स्तर पर सक्रिय रहना और कार्यकर्ताओं के साथ सतत संवाद बनाए रखना आवश्यक है, अन्यथा संगठन को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

  • Nashik TCS Case: नासिक TCS मामले में मलेशिया कनेक्शन का दावा, संजय निरुपम ने की विस्तृत जांच की मांग!

    Nashik TCS Case: नासिक TCS मामले में मलेशिया कनेक्शन का दावा, संजय निरुपम ने की विस्तृत जांच की मांग!

    Nashik TCS Case: शिवसेना के उपनेता एवं प्रवक्ता संजय निरुपम ने नासिक स्थित TCS में कार्यरत एक महिला कर्मचारी के कथित धर्मांतरण, यौन एवं आर्थिक शोषण से जुड़े मामले को गंभीर बताते हुए इसकी व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि मामले के पीछे मलेशिया और पाकिस्तान से जुड़े किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

    मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में निरुपम ने कहा कि अदालत में दाखिल आरोपपत्र में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उनके अनुसार, पीड़िता का कथित रूप से ब्रेनवॉश करने के लिए उसे विवादास्पद धार्मिक वीडियो दिखाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के मुख्य आरोपियों के मलेशिया से संबंध होने की बात भी आरोपपत्र में सामने आई है तथा पीड़िता को मलेशिया भेजने की योजना बनाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

    निरुपम ने जांच एजेंसियों से मांग की कि मामले के सभी अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की गहन जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं इसका संबंध किसी संगठित नेटवर्क से तो नहीं है। उन्होंने फरार आरोपी निदा खान को कथित रूप से संरक्षण दिए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले में जिन स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों या संगठनों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    संजय निरुपम ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के पालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लापरवाही बरती गई है, तो संबंधित प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    महाराष्ट्र की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की जांच की मांग
    निरुपम ने राज्य सरकार और पुलिस से महाराष्ट्र की आईटी, फार्मा तथा अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्थान की जिम्मेदारी है।

    इसके लिए सभी बड़ी कंपनियों में सुरक्षा उपायों, शिकायत निवारण तंत्र और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की नियमित जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।