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  • CT Ravi: धर्मस्थल मामले की सीबीआई जांच हो, सच्चाई सामने आए: सीटी रवि

    CT Ravi: धर्मस्थल मामले की सीबीआई जांच हो, सच्चाई सामने आए: सीटी रवि

    CT Ravi: भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य सीटी रवि ने कर्नाटक सरकार से श्री क्षेत्र धर्मस्थल और उसके धर्माधिकारी पद्म विभूषण डॉ. डी. वीरेंद्र हेगड़े के खिलाफ कथित साजिश के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।

    मुख्यमंत्री को लिखे एक खुले पत्र में रवि ने कहा कि धर्मस्थल से जुड़े हालिया विवादों ने लाखों श्रद्धालुओं और अनुयायियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि मामले में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराई जानी चाहिए।

    भाजपा नेता ने दावा किया कि धर्मस्थल संस्थान और डॉ. हेगड़े की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से एक सुनियोजित अभियान चलाए जाने के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इन दावों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है, लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत पड़ताल आवश्यक है।

    रवि ने सवाल उठाया कि यदि ऐसा कोई अभियान चलाया गया, तो इसके पीछे आर्थिक संसाधन कहां से आए और इसमें किन लोगों या संगठनों की भूमिका रही। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी धर्मस्थल को निशाना बनाने के प्रयासों को लेकर चिंता जताई गई थी और हाल के घटनाक्रमों ने इन आशंकाओं को और बल दिया है। उनके अनुसार, यदि मामले में राज्य से बाहर के व्यक्तियों या संस्थाओं की संलिप्तता है, तो इसकी जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए।

    सीटी रवि ने कहा कि धर्मस्थल करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और उससे जुड़े किसी भी विवाद की गहन तथा निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मामले को सीबीआई को सौंपकर तथ्यों को सामने लाया जाए। गौरतलब है कि धर्मस्थल से जुड़े कुछ दावों और आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

  • Nashik TCS Case: नासिक TCS मामले में मलेशिया कनेक्शन का दावा, संजय निरुपम ने की विस्तृत जांच की मांग!

    Nashik TCS Case: नासिक TCS मामले में मलेशिया कनेक्शन का दावा, संजय निरुपम ने की विस्तृत जांच की मांग!

    Nashik TCS Case: शिवसेना के उपनेता एवं प्रवक्ता संजय निरुपम ने नासिक स्थित TCS में कार्यरत एक महिला कर्मचारी के कथित धर्मांतरण, यौन एवं आर्थिक शोषण से जुड़े मामले को गंभीर बताते हुए इसकी व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि मामले के पीछे मलेशिया और पाकिस्तान से जुड़े किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।

    मुंबई में आयोजित पत्रकार वार्ता में निरुपम ने कहा कि अदालत में दाखिल आरोपपत्र में कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उनके अनुसार, पीड़िता का कथित रूप से ब्रेनवॉश करने के लिए उसे विवादास्पद धार्मिक वीडियो दिखाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले के मुख्य आरोपियों के मलेशिया से संबंध होने की बात भी आरोपपत्र में सामने आई है तथा पीड़िता को मलेशिया भेजने की योजना बनाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

    निरुपम ने जांच एजेंसियों से मांग की कि मामले के सभी अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की गहन जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि कहीं इसका संबंध किसी संगठित नेटवर्क से तो नहीं है। उन्होंने फरार आरोपी निदा खान को कथित रूप से संरक्षण दिए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले में जिन स्थानीय राजनीतिक व्यक्तियों या संगठनों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    संजय निरुपम ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के पालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्थान में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लापरवाही बरती गई है, तो संबंधित प्रबंधन की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    महाराष्ट्र की बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों की जांच की मांग
    निरुपम ने राज्य सरकार और पुलिस से महाराष्ट्र की आईटी, फार्मा तथा अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराना प्रत्येक संस्थान की जिम्मेदारी है।

    इसके लिए सभी बड़ी कंपनियों में सुरक्षा उपायों, शिकायत निवारण तंत्र और कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की नियमित जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

  • ₹10 Crore Scam: सुरक्षा रक्षक पंजीकरण में ₹10 करोड़ के घोटाले का आरोप, ACB जांच की मांग से मचा हड़कंप!

    ₹10 Crore Scam: सुरक्षा रक्षक पंजीकरण में ₹10 करोड़ के घोटाले का आरोप, ACB जांच की मांग से मचा हड़कंप!

    ₹10 Crore Scam: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल (बृहन्मुंबई एवं ठाणे जिला) के माध्यम से सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता और न्यायालय को गुमराह करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस मामले में सुरक्षा रक्षक मंडल के अध्यक्ष अशोक डोके सहित संबंधित अधिकारियों की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से विस्तृत जांच कराने की मांग सामाजिक कार्यकर्ता तथा फाइट फॉर राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद पांडुरंग घोलप ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, श्रम मंत्री आकाश फुंडकर और श्रम विभाग के प्रधान सचिव को लिखित शिकायत देकर की है।

    शिकायत के अनुसार, 4 अप्रैल 2022 को मीरा-भाईंदर महानगरपालिका के तत्कालीन उपायुक्त मारुति पांडुरंग गायकवाड ने मे. सैनिक इंटेलिजेंस सिक्युरिटी प्रा. लि. नामक ठेकेदार कंपनी के माध्यम से कार्यरत सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण के लिए पत्र जारी किया था। हालांकि, संबंधित सुरक्षा रक्षक वास्तव में कहां, कितने समय से और किस विभाग में कार्यरत थे, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया गया है।

    मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया गया है कि उच्च न्यायालय में केवल 161 सुरक्षा रक्षकों के पंजीकरण से संबंधित याचिका लंबित होने के बावजूद लगभग 490 अतिरिक्त सुरक्षा रक्षकों का पंजीकरण किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने इसे न्यायालय के आदेश की अवमानना और प्रशासन द्वारा न्यायालय को गुमराह करने का मामला बताया है।

    शिकायत में आगे कहा गया है कि न्यायालय में दायर शपथपत्र में तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड ने लगभग 650 सुरक्षा रक्षकों की कोई जानकारी महानगरपालिका के पास उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी, जबकि इससे पहले उन्हीं अधिकारियों द्वारा पंजीकरण के लिए अनुशंसा पत्र जारी किया गया था। इससे शासन और न्यायालय को विरोधाभासी जानकारी देने का आरोप और गंभीर हो गया है।

    इसके अलावा, संबंधित सुरक्षा रक्षकों से पंजीकरण खर्च के नाम पर ₹1 लाख से ₹1.50 लाख तक की राशि अग्रिम कर्ज के रूप में लेकर उनके वेतन से कटौती किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे सुरक्षा रक्षकों के आर्थिक शोषण और बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का संकेत बताया है।

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    वहीं सुरक्षा रक्षक मंडल के निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में संबंधित 650 सुरक्षा रक्षकों को पिछले 15 वर्षों से कार्यरत बताते हुए उनके पंजीकरण पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही गई है। हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह जानकारी वास्तविकता से मेल नहीं खाती और शासन व न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से गलत जानकारी प्रस्तुत की गई है।

    उल्लेखनीय है कि तत्कालीन उपायुक्त मारुति गायकवाड बाद में नवी मुंबई महानगरपालिका में कार्यरत रहते हुए भ्रष्टाचार के एक मामले में ACB द्वारा गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इससे पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने इस पूरे मामले में ₹10 करोड़ से अधिक के आर्थिक घोटाले का दावा करते हुए अवैध पंजीकरण तत्काल रद्द करने, सुरक्षा रक्षकों से वसूली गई राशि वापस करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।

    इन आरोपों के बाद मीरा-भाईंदर महानगरपालिका और सुरक्षा रक्षक मंडल का कामकाज एक बार फिर विवादों में आ गया है। अब राज्य सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगी या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। “यदि सुरक्षा रक्षकों को न्याय नहीं मिला तो तीव्र जन आंदोलन किया जाएगा,” ऐसा इशारा शिकायतकर्ता विनोद घोलप ने दिया है।