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  • Nationwide Public Protest: जियो मोबाइल टावरों के खिलाफ देशव्यापी जनआंदोलन का ऐलान, हजारों लोग उतरेंगे सड़कों पर!

    Nationwide Public Protest: जियो मोबाइल टावरों के खिलाफ देशव्यापी जनआंदोलन का ऐलान, हजारों लोग उतरेंगे सड़कों पर!

    Nationwide Public Protest: मोबाइल टावरों से निकलने वाले कथित रेडिएशन के मुद्दे को लेकर देशभर में बड़े जनआंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता गणेश ननवरे ने मुंबई में आयोजित एक पत्रकार परिषद में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संबंधित सरकारी एजेंसियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो देशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा और हजारों नागरिक सड़कों पर उतरेंगे।

    ननवरे ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मोबाइल टावरों की स्थापना और संचालन में सुरक्षा मानकों तथा नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने विशेष रूप से जियो इन्फोकॉम से जुड़े कुछ मोबाइल टावरों और दूरसंचार ढांचे की जांच की मांग करते हुए कहा कि कोकण विभागीय आयुक्त द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार स्वतंत्र ऑडिट कराया जाना चाहिए।

    उन्होंने दावा किया कि मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन का लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्कूलों, अस्पतालों और घनी आबादी वाले इलाकों में स्थापित मोबाइल टावरों की तत्काल जांच कर उनकी वैधता, सुरक्षा मानकों और नियमों के अनुपालन की समीक्षा की जानी चाहिए।

    पत्रकार परिषद में बताया गया कि इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक संगठन, डॉक्टर, वकील, शैक्षणिक संस्थान और नागरिक मंच एकजुट हो रहे हैं। भगत सिंह यूथ फाउंडेशन सहित कई संगठनों ने आंदोलन को समर्थन देने का दावा किया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल एक संगठन की लड़ाई नहीं, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है।

    गणेश ननवरे ने कहा कि मुंबई के आजाद मैदान में विशाल आंदोलन की तैयारी चल रही है। यदि प्रशासन और संबंधित विभागों ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस आंदोलन में क्रकोरोच जनता पार्टी समेत कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन भी भाग लेंगे।

    आंदोलनकारियों ने मांग की है कि देशभर में स्थापित मोबाइल टावरों की सुरक्षा, नियमपालन और तकनीकी मानकों की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।

  • Waste Disposal Plant: कचरा निस्तारण संयंत्र लगाए जाने के प्रस्ताव का विरोध जारी!

    Waste Disposal Plant: कचरा निस्तारण संयंत्र लगाए जाने के प्रस्ताव का विरोध जारी!

    Waste Disposal Plant: राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र के नरसिंहपुरा बारानी गांव में सरकार द्वारा श्री गंगानगर शहर के लिए ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र लगाये जाने के प्रस्ताव को लेकर स्थानीय लोगों में तीव्र विरोध अब भी जारी है। यह पूरा इलाका वन्यजीवों से समृद्ध है और यहां के लोग गौ रक्षा और वन्यजीव संरक्षण के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं।

    नरसिंहपुरा गौ रक्षा दल के संयोजक मैसी चौधरी ने सोमवार को बताया कि जहां एक ओर उनके गौ रक्षा दल के युवा पिछले चार-पांच वर्षों से दिन-रात बेजुबान जीवों की सेवा में लगे हुए हैं, वहीं उसी स्थान पर कचरा संयंत्र लगाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि नरसिंहपुरा की गोविंद गौ धाम केवल एक गौशाला नहीं बल्कि लाखों बेजुबान जीवों की आशा का केंद्र है।

    यहां घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं का इलाज किया जाता है। सड़क पर छोड़े गये कई जानवरों को यहां नई जिंदगी मिलती है। गौ रक्षा दल 70-80 किलोमीटर तक फ्री एम्बुलेंस सेवा प्रदान करके सैकड़ों वन्यजीवों की जान बचा चुका है। युवा दल बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात, गर्मी-सर्दी में घायल जानवरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं।

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    चौधरी ने कहा कि ठोस कचरा निस्तारण संयंत्र के खिलाफ स्थानीय लोग पिछले 40 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। वे प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि इस संवेदनशील क्षेत्र में संयंत्र न लगाया जाये। सबसे बड़ी चिंता एलएनपी नहर को लेकर है, जो इस जगह के पास से बहती है और 50-60 गांवों की सिंचाई एवं पेयजल व्यवस्था इससे जुड़ी हुई है।

    महाराजा गंगासिंह द्वारा बनायी गयी इस नहर को प्रदूषण से बचाने की मांग की जा रही है। इस मामले पर जिला कलेक्टर डॉ अमित यादव ने आज स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार कचरा निस्तारण केंद्र नरसिंहपुर बारानी में ही लगाया जाएगा और जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पास वाली गौशाला को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

    यादव ने यह भी बताया कि संयंत्र शहर से करीब 32 किलोमीटर दूर है, लेकिन फिलहाल इस क्षेत्र के अलावा कोई अन्य उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं है। कहीं और भूमि मिलती तो वहां संयंत्र स्थापित किया जाता। स्थानीय लोग विकास का समर्थन करते हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि यह विकास पर्यावरण, वन्यजीवों और गौशालाओं की कीमत पर न हो। इस मुद्दे पर प्रशासन से वैकल्पिक स्थान की तलाश करने का आग्रह किया जा रहा है।