Tag: Real Estate Fraud

  • Major ED Action: रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई; 150 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा गया!

    Major ED Action: रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई; 150 करोड़ रुपये का घोटाला पकड़ा गया!

    Major ED Action: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को दो रियल एस्टेट समूहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (सीएलयू) की फर्जी मंजूरी लेने और जमीन मालिकों व ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने के मामले में की गई है।

    ईडी ने आरोप लगाया कि ‘सनटेक सिटी’ (इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसाइटी) के सुरेश कुमार बजाज और अजय सहगल ने 15 भू-स्वामियों की 30.5 एकड़ जमीन के लिए फर्जी सहमति पत्र तैयार किए। इन पत्रों पर कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाकर ‘सनटेक सिटी’ नामक मेगा प्रोजेक्ट के लिए सीएलयू अनुमति प्राप्त की गई थी।

    इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर सोसाइटी को सीएलयू की मंजूरी मिल गई, जिसके बाद उन्होंने बिना कोई ‘सेल डीड’ निष्पादित किए सदस्यों का पंजीकरण कर 150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूल ली। ईडी ने बताया कि यह मामला पंजाब पुलिस द्वारा मोहाली के मुल्लांपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।

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    एजेंसी ने आरोप लगाया कि अजय सहगल ने उसी फर्जी सीएलयू का उपयोग करके ‘ला कैनेला’ (आवासीय) और ‘डिस्ट्रिक्ट 7’ (व्यावसायिक) जैसी परियोजनाएं विकसित कीं। इन परियोजनाओं की सभी इकाइयां बेची गईं, जिससे ‘अपराध की कमाई’ अर्जित की गई। हालांकि, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में पीड़ितों द्वारा दायर याचिका के बाद जीएमएडीए ने इन सीएलयू अनुमतियों को रद्द कर दिया था।

    मोहाली की अतिरिक्त सत्र अदालत ने इस मामले में टिप्पणी की कि मुल्लांपुर के डीएसपी आरोपी अजय सहगल के इशारे पर काम कर रहे थे और उन्होंने उचित जांच नहीं की। इसके अलावा, ‘अल्टस स्पेस बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड’ से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया गया, जहाँ खरीदारों ने सीएलयू मंजूरी को लेकर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इस मामले में प्रमोटर मोहिंदर सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।

    छापेमारी के दौरान ईडी ने दो बिचौलियों, नितिन गोहल और प्रितपाल सिंह ढींडसा को भी जांच के दायरे में लिया, जो कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण प्रदान कर रहे थे। तलाशी के दौरान कुछ चौंकाने वाली घटनाएं भी सामने आईं। एक घटना में कथित तौर पर एक बालकनी से 21 लाख रुपये नकद फेंके गए, जिन्हें बाद में ईडी अधिकारियों ने बरामद कर लिया। मामले की जांच अभी जारी है।

  • Matoshree Builder Case: ‘मातोश्री बिल्डर’ मामला बना खरीदारों के लिए चेतावनी; ₹1.80 करोड़ फ्लैट डील विवाद में FIR, जांच तेज!

    Matoshree Builder Case: ‘मातोश्री बिल्डर’ मामला बना खरीदारों के लिए चेतावनी; ₹1.80 करोड़ फ्लैट डील विवाद में FIR, जांच तेज!

    Matoshree Builder Case: मुंबई में मातोश्री प्रॉपर्टीज प्रा. लि. के खिलाफ दर्ज कथित धोखाधड़ी मामले ने रियल एस्टेट क्षेत्र में हलचल मचा दी है। विलेपार्ले पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के बाद यह मामला नए फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ा सबक माना जा रहा है।

    मामले की प्रमुख बातें :
    ▪️ ₹1.80 करोड़ का फ्लैट सौदा विवादों में
    शिकायतकर्ता गौतम सुरेश कुमार ने अक्टूबर 2020 में बिल्डर से ₹1.80 करोड़ में दो फ्लैट खरीदे थे। दोनों फ्लैटों को बाद में जोड़कर “जोडी फ्लैट” देने का वादा किया गया था।

    ▪️ OC के बाद फ्लैट जोड़ने का आश्वासन
    बिल्डर की ओर से A-701 और A-501 फ्लैट देकर ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिलने के बाद दोनों यूनिट्स को एक करने का भरोसा दिया गया था।

    ▪️ 2025 में बिल्डर ने बदला रुख
    आरोप है कि जनवरी 2025 में बिल्डर ने अचानक “जोडी फ्लैट” देना संभव नहीं होने की बात कही और एक फ्लैट अपने पास रखने का प्रस्ताव रखा।

    ▪️ दूसरे खरीदार को फ्लैट बेचने का आरोप
    शिकायतकर्ता के अनुसार, A-701 फ्लैट पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेचा जा चुका था। जबकि उससे पहले स्टांप ड्यूटी भरवाकर रजिस्ट्रेशन कराने का आश्वासन दिया गया था।

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    ▪️ विलेपार्ले पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज
    5 अप्रैल 2026 को एफआईआर क्रमांक 386/2026 दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 318(4) और 3(5) के तहत दर्ज हुआ है।

    ▪️ कंपनी और संचालकों पर आरोप
    पुलिस ने मातोश्री प्रॉपर्टीज प्रा. लि. तथा उसके संचालक रवी अमनसिंग राजपुरोहित और संतोष रवी राजपुरोहित के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

    ▪️ आरोपियों को अंतरिम अग्रिम जमानत
    पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को अदालत से अंतरिम अग्रिम जमानत मिल चुकी है। मामले की जांच जारी है।

    खरीदारों के लिए क्या सीख?
    ▪️ केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा न करें।
    ▪️ फ्लैट खरीदने से पहले सभी दस्तावेजों की कानूनी जांच कराएं।
    ▪️ प्रोजेक्ट का MahaRERA रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें।
    ▪️ OC, मंजूर नक्शा, जमीन के दस्तावेज और बिक्री करार की पुष्टि करें।
    ▪️ “जोडी फ्लैट”, प्री-लॉन्च ऑफर और विशेष वादों वाले प्रोजेक्ट्स में अतिरिक्त सतर्कता बरतें।

    रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला मुंबई समेत बड़े शहरों में घर खरीदने वालों के लिए एक चेतावनी है कि करोड़ों रुपये निवेश करने से पहले हर दस्तावेज और दावे की स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है।