Matoshree Builder Case: ‘मातोश्री बिल्डर’ मामला बना खरीदारों के लिए चेतावनी; ₹1.80 करोड़ फ्लैट डील विवाद में FIR, जांच तेज!

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Matoshree Builder Case: मुंबई में मातोश्री प्रॉपर्टीज प्रा. लि. के खिलाफ दर्ज कथित धोखाधड़ी मामले ने रियल एस्टेट क्षेत्र में हलचल मचा दी है। विलेपार्ले पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर के बाद यह मामला नए फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ा सबक माना जा रहा है।

मामले की प्रमुख बातें :
▪️ ₹1.80 करोड़ का फ्लैट सौदा विवादों में
शिकायतकर्ता गौतम सुरेश कुमार ने अक्टूबर 2020 में बिल्डर से ₹1.80 करोड़ में दो फ्लैट खरीदे थे। दोनों फ्लैटों को बाद में जोड़कर “जोडी फ्लैट” देने का वादा किया गया था।

▪️ OC के बाद फ्लैट जोड़ने का आश्वासन
बिल्डर की ओर से A-701 और A-501 फ्लैट देकर ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिलने के बाद दोनों यूनिट्स को एक करने का भरोसा दिया गया था।

▪️ 2025 में बिल्डर ने बदला रुख
आरोप है कि जनवरी 2025 में बिल्डर ने अचानक “जोडी फ्लैट” देना संभव नहीं होने की बात कही और एक फ्लैट अपने पास रखने का प्रस्ताव रखा।

▪️ दूसरे खरीदार को फ्लैट बेचने का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, A-701 फ्लैट पहले ही किसी अन्य व्यक्ति को बेचा जा चुका था। जबकि उससे पहले स्टांप ड्यूटी भरवाकर रजिस्ट्रेशन कराने का आश्वासन दिया गया था।

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▪️ विलेपार्ले पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज
5 अप्रैल 2026 को एफआईआर क्रमांक 386/2026 दर्ज की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 318(4) और 3(5) के तहत दर्ज हुआ है।

▪️ कंपनी और संचालकों पर आरोप
पुलिस ने मातोश्री प्रॉपर्टीज प्रा. लि. तथा उसके संचालक रवी अमनसिंग राजपुरोहित और संतोष रवी राजपुरोहित के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

▪️ आरोपियों को अंतरिम अग्रिम जमानत
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को अदालत से अंतरिम अग्रिम जमानत मिल चुकी है। मामले की जांच जारी है।

खरीदारों के लिए क्या सीख?
▪️ केवल मौखिक आश्वासन पर भरोसा न करें।
▪️ फ्लैट खरीदने से पहले सभी दस्तावेजों की कानूनी जांच कराएं।
▪️ प्रोजेक्ट का MahaRERA रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें।
▪️ OC, मंजूर नक्शा, जमीन के दस्तावेज और बिक्री करार की पुष्टि करें।
▪️ “जोडी फ्लैट”, प्री-लॉन्च ऑफर और विशेष वादों वाले प्रोजेक्ट्स में अतिरिक्त सतर्कता बरतें।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला मुंबई समेत बड़े शहरों में घर खरीदने वालों के लिए एक चेतावनी है कि करोड़ों रुपये निवेश करने से पहले हर दस्तावेज और दावे की स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी है।

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