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  • Shramjeevi Sanghatana Meeting: अंबरनाथ तहसीलदारों ने ज़मीन पर बैठकर 3 घंटे तक आदिवासियों के पेंडिंग मामलों पर पॉजिटिव चर्चा की!

    Shramjeevi Sanghatana Meeting: अंबरनाथ तहसीलदारों ने ज़मीन पर बैठकर 3 घंटे तक आदिवासियों के पेंडिंग मामलों पर पॉजिटिव चर्चा की!

    Shramjeevi Sanghatana Meeting: डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल के कॉन्सेप्ट और उल्हासनगर सब-डिविजनल ऑफिसर विजयानंद शर्मा के गाइडेंस में, आदिवासी परिवारों के फंडामेंटल राइट्स के पेंडिंग मामलों को तेज़ी से निपटाने के लिए गुरुवार को अंबरनाथ तहसीलदार के ऑफिस में श्रमजीवी संगठन की तरफ से एक खास मीटिंग रखी गई। इस मीटिंग में अंबरनाथ तहसीलदार अमित पुरी और दूसरे सरकारी अधिकारियों ने ज़मीन पर, चटाई पर बैठकर आदिवासी भाइयों से सीधी और गहरी बातचीत की, ताकि आदिवासी भाइयों की समस्याओं को सीधे समझा जा सके।

    लगभग तीन घंटे तक चली इस मैराथन मीटिंग में, अलग-अलग डिपार्टमेंट के सीनियर अधिकारियों की मौजूदगी में आदिवासियों के पानी, सर्टिफिकेट, राशन और सरकारी स्कीमों के मुद्दों पर बहुत पॉजिटिव और ज़रूरी चर्चा हुई। इस मीटिंग की गंभीरता को देखते हुए, अंबरनाथ और बदलापुर नगर परिषदों के मुख्य अधिकारी, ग्रुप डेवलपमेंट अधिकारी, मुंबई राशन वितरण ऑफिस के अधिकारी, डिप्टी तहसीलदार, सप्लाई अधिकारी, इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट अधिकारी और ग्रुप शिक्षा अधिकारी मौजूद थे।

    मीटिंग में आदिवासी गांवों, पाड़ों और बस्तियों में पानी की भारी कमी का मुद्दा मुख्य रूप से उठाया गया। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, तहसीलदार अमित पुरी ने अंबरनाथ पंचायत समिति के ग्रुप डेवलपमेंट अधिकारियों को अगले 7 दिनों के अंदर हर आदिवासी पाड़े में अलग पीने के पानी की टंकी लगाने और पानी के स्टोरेज का इंतज़ाम करने का आदेश दिया, ताकि आदिवासी परिवारों को उनकी ज़रूरत के हिसाब से और समय पर साफ़ पानी मिल सके। इसके अलावा, बहुत दूर-दराज के इलाकों में कातकरी परिवारों को जाति प्रमाण पत्र और जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र तुरंत दिलाने के लिए 1,000 एप्लीकेशन तहसीलदारों के ज़रिए मौके पर ही उपलब्ध कराए गए।

    इन पेंडिंग मुद्दों पर सिर्फ़ कुछ समय के लिए हल देने के बजाय, लगातार और असरदार तरीके से फॉलो-अप पक्का करने के लिए हर महीने सभी एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों और श्रमजीवी संगठन के पदाधिकारियों की एक जॉइंट रिव्यू मीटिंग करने का फ़ैसला किया गया। इस प्लानिंग के तहत, जुलाई के पहले हफ़्ते में एडमिनिस्ट्रेशन और श्रमजीवी संगठन के ज़रिए उन सभी आदिवासी परिवारों के लिए एक खास कैंप चलाया जाएगा जिनके पास पहचान पत्र (जैसे सरकारी पहचान पत्र) नहीं हैं। यह भी निर्देश दिया गया कि ग्रुप डेवलपमेंट ऑफिसर इस बारे में खास कैंप की सही प्लानिंग करें और इसका ऑफिशियल प्रोग्राम तुरंत अनाउंस करें।

    साथ ही, तहसीलदार अंबरनाथ के ज़रिए स्टडी सेंटर बनाए जाएंगे ताकि स्कूल के स्टूडेंट और ग्रेजुएट कॉम्पिटिटिव एग्जाम की अच्छी तैयारी कर सकें। इस ज़रूरी मीटिंग में श्रमजीवी संगठन के ठाणे ज़िला जनरल सेक्रेटरी राजेश चन्ने, तालुका प्रेसिडेंट मारुति वाघे, वाइस प्रेसिडेंट नरेश वाघे, गोटीराम वाघे, तालुका सेक्रेटरी अरुण पवार के साथ-साथ अंबरनाथ तालुका के एक्टिविस्ट और आदिवासी भाई शामिल हुए। लेबर लीडर राजेश चन्ने ने शुक्रिया अदा किया कि AC केबिन में बैठकर, सभी फॉर्मैलिटीज़ को किनारे रखकर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स की यह सेंसिटिव पहल, अब सालों से लटके आदिवासियों के मुद्दों को असली गति देगी, ऐसा तहसीलदार और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट अंबरनाथ अमित पुरी ने बताया।

  • Shramjeevi Sanghatana Protests: घटिया कंक्रीट सड़क के खिलाफ श्रमजीवी संगठन का प्रदर्शन, सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय पर मोर्चा

    Shramjeevi Sanghatana Protests: घटिया कंक्रीट सड़क के खिलाफ श्रमजीवी संगठन का प्रदर्शन, सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय पर मोर्चा

    Shramjeevi Sanghatana Protests: भिवंडी तालुका के गोमतारा किला से देपोली मार्ग पर जिला योजना समिति के माध्यम से लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कंक्रीट सड़क की गुणवत्ता को लेकर श्रमजीवी संगठन ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने भादवड स्थित सार्वजनिक निर्माण विभाग (लोनिवि) कार्यालय पर मोर्चा निकालकर धरना दिया और सड़क निर्माण में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।

    जानकारी के अनुसार, पिळंझे ग्राम पंचायत के अंतर्गत देपोली से गोमतारा किला मार्ग पर स्थित भवरपाडा, नंबरपाडा और खरमपाडा जैसे आदिवासी बस्तियों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2022-23 में जिला योजना समिति के माध्यम से दो करोड़ रुपये की निधि मंजूर की गई थी।

    श्रमजीवी संगठन का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण कार्य अत्यंत निम्न गुणवत्ता का किया गया है। इस संबंध में स्थानीय ग्रामीणों और संगठन की ओर से 16 मार्च को सार्वजनिक निर्माण विभाग को लिखित शिकायत भी दी गई थी, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने न तो स्थल निरीक्षण किया और न ही तकनीकी जांच कर कोई कार्रवाई की।

    विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व श्रमजीवी संगठन के तालुका सचिव विश्वनाथ पासारी, उपाध्यक्ष चंद्रकांत रायत, महापोली गुट अध्यक्ष दयानंद पाटील सहित तानाजी लहांगे, सुरेश ठाकरे, दशरथ गवळी, किशोर पाटील, विठ्ठल पस्टे, निलेश शेलार, भीमाबाई पवार और सुनीताबाई भवर ने किया।

    प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सड़क निर्माण शुरू करते समय नियमानुसार परियोजना की जानकारी, स्वीकृत निधि और कार्य विवरण दर्शाने वाला सूचना फलक नहीं लगाया गया। इसके अलावा सड़क निर्माण के दौरान आवश्यक रोलर कॉम्पैक्शन नहीं किया गया और सीमेंट कंक्रीट सड़क पर निर्धारित मानकों के अनुसार पानी का छिड़काव भी नहीं किया गया।

    संगठन का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सड़क पर कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। सड़क किनारे बनाई गई नालियां भी निम्न गुणवत्ता की सामग्री के कारण टूटने और ध्वस्त होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। कई जगहों पर सड़क की मोटाई स्वीकृत अनुमान (एस्टीमेट) से कम होने का आरोप भी लगाया गया है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की गई है।

    श्रमजीवी संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है तथा संबंधित ठेकेदार को संरक्षण दिया जा रहा है। संगठन ने मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की तत्काल निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए, ठेकेदार का भुगतान रोका जाए तथा निर्धारित मानकों और स्वीकृत बजट के अनुसार सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए। साथ ही, कार्य की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए।

  • Shramjeevi Sanghatana Protest: भिवंडी तहसीलदार कार्यालय के सामने श्रमजीवी संगठन का धरना आंदोलन!

    Shramjeevi Sanghatana Protest: भिवंडी तहसीलदार कार्यालय के सामने श्रमजीवी संगठन का धरना आंदोलन!

    Shramjeevi Sanghatana Protest: आजादी के इतने वर्षों बाद भी आदिवासी समाज के कई परिवार आधार कार्ड, राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्र जैसी मूलभूत दस्तावेजी सुविधाओं से वंचित हैं। इसी मुद्दे को लेकर श्रमजीवी संगठन की ओर से भिवंडी तहसीलदार कार्यालय के बाहर जोरदार धरना आंदोलन किया गया।

    लगातार पत्र-व्यवहार और शिकायतों के बावजूद प्रशासन द्वारा ठोस कार्रवाई न किए जाने से नाराज कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने तहसील कार्यालय के बाहर कड़कती धूप में बैठकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। आंदोलन का नेतृत्व जिला उपाध्यक्ष सागर देसक ने किया।

    धरने में प्रकाश राउत, जया पारधी, गुलाब म्हसकर, जयेश पाटिल, विश्वनाथ पासारी और तानाजी लहांगे सहित बड़ी संख्या में श्रमजीवी संगठन के कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को आवश्यक प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

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    जिला उपाध्यक्ष सागर दसक ने आरोप लगाया कि कई आदिवासी और कातकरी परिवारों के पास जन्म प्रमाणपत्र तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में आधार कार्ड और राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, जिसके कारण ये परिवार सरकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से पूरी तरह वंचित रह जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसे परिवारों के लिए विशेष शिविर आयोजित कर तत्काल पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को उनके मूलभूत अधिकार मिल सकें। आंदोलनकारियों का कहना था कि दस्तावेजों के अभाव में गरीब और आदिवासी परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं के लाभ से लगातार दूर होते जा रहे हैं।

    धरना प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवारों को आधार कार्ड, राशन कार्ड और अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं सौंपे जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।