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  • SK Dhaba Incident: कल्याण बाईपास पर महिला बीयर पीते और लघुशंका करते दिखी, VIDEO वायरल!

    SK Dhaba Incident: कल्याण बाईपास पर महिला बीयर पीते और लघुशंका करते दिखी, VIDEO वायरल!

    SK Dhaba Incident: कल्याण बाईपास पर SK ढाबे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें कथित तौर पर एक महिला खुलेआम बीयर पीती और बाद में पब्लिक एरिया में लघुशंका करती दिख रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के समय ढाबे पर बच्चों समेत कई परिवार मौजूद थे। इस घटना से स्थानीय लोगों में गुस्सा है, जिन्होंने जांच और सही कार्रवाई की मांग की है।

    यह भी सवाल उठ रहे हैं कि अगर ढाबे के पास शराब परोसने या पीने की इजाज़त देने की ज़रूरी परमिशन नहीं है, तो वहां खुलेआम बीयर कैसे पी जा रही थी। संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच के बाद मामले की सच्चाई का पता चलेगा।

  • Viral Sacrifice Video: भिवंडी में कुर्बानी के लिए खूंटे से बंधा भैंसा छूटा, मची अफरा-तफरी, वीडियो वायरल!

    Viral Sacrifice Video: भिवंडी में कुर्बानी के लिए खूंटे से बंधा भैंसा छूटा, मची अफरा-तफरी, वीडियो वायरल!

    Viral Sacrifice Video: मुस्लिम बहुल भिवंडी शहर में बकरीद के अवसर पर बड़े पैमाने पर बकरों के साथ-साथ भैंसों की भी कुर्बानी दी जाती है। इसी बीच कुर्बानी के लिए खूंटे से बांधकर रखा गया एक भैंसा आधी रात के समय रस्सी तोड़कर भाग गया, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई।

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    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सौभाग्य से इस घटना में कोई बड़ी जनहानि या आर्थिक नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, भैंसे को पकड़ने की कोशिश के दौरान उसका मालिक धक्का लगने से गिर पड़ा और उसे मामूली चोटें आईं।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, भिवंडी में बकरीद के दौरान इस प्रकार की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, जब बेकाबू पशुओं के कारण लोगों को परेशानी और चोटों का सामना करना पड़ा था। बताया जा रहा है कि बाद में छत्रपति शिवाजी महाराज चौक इलाके में काफी मशक्कत के बाद मालिक और स्थानीय लोगों की मदद से भैंसे को पकड़ लिया गया।

  • Cockroach Janata Party: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर चर्चा में, जानिए क्या है पूरा मामला!

    Cockroach Janata Party: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर चर्चा में, जानिए क्या है पूरा मामला!

    Cockroach Janata Party: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का व्यंग्यात्मक अभियान तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनकी बातों को गलत तरीके से पेश किया गया।

    इस अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के अभिजीत दीपके ने की। उनका कहना है कि युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से किए जाने के बाद उन्होंने विरोध के तौर पर यह पैरोडी प्लेटफॉर्म बनाया। देखते ही देखते यह सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो गया।

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    कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट और इंस्टाग्राम पेज तेजी से वायरल हुए हैं। पार्टी के इंस्टाग्राम पर 40 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि दो लाख से अधिक लोग इसकी सदस्यता के लिए रजिस्ट्रेशन कर चुके हैं।

    अभिजीत दीपके पहले आम आदमी पार्टी की कम्युनिकेशन टीम के साथ काम कर चुके हैं और फिलहाल अमेरिका में पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह अभियान युवाओं की बेरोजगारी, निराशा और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ व्यंग्यात्मक आवाज बनकर उभरा है।

    उन्होंने कहा कि भारतीय जेन ज़ी हिंसा नहीं, बल्कि व्यंग्य और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहता है। अभिजीत के मुताबिक, यह सिर्फ सोशल मीडिया मजाक नहीं बल्कि युवाओं की नई राजनीतिक सोच की शुरुआत है।

  • Ranveer Singh New Look: रणवीर सिंह एक बार फिर सुर्ख़ियों में! अपने नए लुक से मचाया तहलका!

    Ranveer Singh New Look: रणवीर सिंह एक बार फिर सुर्ख़ियों में! अपने नए लुक से मचाया तहलका!

    Ranveer Singh New Look: बॉलीवुड अभिनेता Ranveer Singh एक बार फिर अपने नए और अलग अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में सामने आए उनके नए लुक ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है और फैंस उनके स्टाइल की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

    रणवीर सिंह हमेशा से अपने यूनिक फैशन सेंस और एनर्जेटिक पर्सनैलिटी के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी उन्होंने अपने नए अवतार से फैंस को चौंका दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियोज में उनका स्टाइल पहले से काफी अलग नजर आ रहा है।

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    फैंस लगातार उनके नए लुक पर कमेंट कर रहे हैं। किसी ने उन्हें “स्टाइल आइकन” बताया तो किसी ने उनके नए अवतार को उनकी अपकमिंग फिल्म से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। हालांकि अभिनेता की ओर से इस लुक को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

    मनोरंजन जगत में रणवीर सिंह की अलग पहचान उनकी दमदार एक्टिंग और एक्सपेरिमेंटल फैशन की वजह से बनी हुई है। चाहे रेड कार्पेट हो या फिल्म प्रमोशन, उनका हर अंदाज चर्चा का विषय बन जाता है।

    वर्कफ्रंट की बात करें तो रणवीर सिंह आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आ सकते हैं। फैंस उनकी अगली फिल्म और नए किरदारों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • Story Time: IITian ने छोड़ी करोड़ों की अमेरिकी नौकरी, माता-पिता के लिए खोली किराना दुकान

    Story Time: IITian ने छोड़ी करोड़ों की अमेरिकी नौकरी, माता-पिता के लिए खोली किराना दुकान

    Story Time: मेरा नाम विवेक शर्मा है। उम्र 32 साल। लोग जब पूछते हैं, तुम क्या करते हो, तो मैं कहता हूँ, किराना दुकान चलाता हूँ। वे हँसते हैं, क्योंकि उन्हें पता है मैं आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में गोल्ड मेडलिस्ट था, और मेरे पास सैन फ्रांसिस्को की एक कंपनी का ऑफर लेटर आज भी अलमारी में रखा है, जिस पर सैलरी लिखी है 2,40,000 डॉलर सालाना। मैंने वह लेटर कभी फाड़ा नहीं, पर कभी इस्तेमाल भी नहीं किया।

    कहानी 1998 से शुरू होती है, कानपुर के किदवई नगर में। दो कमरे का घर, ऊपर टीन। पापा रेलवे में क्लर्क, माँ ट्यूशन पढ़ातीं। मैं इकलौता बेटा। पापा की सैलरी 8,000 रुपये। माँ की ट्यूशन से 2,000। हम मिडिल क्लास भी नहीं थे, लोअर मिडिल पर पापा का एक सपना था, बेटा बड़ा आदमी बने। उन्होंने कभी मुझसे नहीं कहा डॉक्टर बन, इंजीनियर बन। वह सिर्फ कहते, बेटा, जितना पढ़ना है पढ़, पैसे की चिंता मत कर। मैं पढ़ता गया। दसवीं में 95 प्रतिशत, बारहवीं में 97। कोचिंग की फीस 1 लाख थी। पापा ने पीएफ निकाला। माँ ने अपनी चूड़ियाँ बेचीं। मैं कोटा गया। दो साल पंखे के नीचे पढ़ा, मच्छर खाए। 2012 में रिजल्ट आया, AIR 147। आईआईटी बॉम्बे, कंप्यूटर साइंस।

    जिस दिन लेटर आया, पापा मिठाई का डिब्बा ले कर पूरे मोहल्ले में बाँट आए। माँ रो पड़ी। बोली, अब मेरा बेटा अमेरिका जाएगा। आईआईटी में मैं उड़ा। कोडिंग, हैकाथॉन, इंटर्नशिप। तीसरे साल में गूगल समर इंटर्न, 1 लाख स्टाइपेंड। मैंने पहली सैलरी से पापा को फोन दिलाया, माँ को वॉशिंग मशीन। पापा ने फोन पर कहा, बेटा, अब तो रिटायरमेंट में आराम करूँगा।

    फाइनल ईयर में प्लेसमेंट। मैं दिन रात तैयारी करता। दिसंबर 2015, मेरा इंटरव्यू हुआ एक कंपनी से, नाम था स्ट्राइप जैसी पेमेंट स्टार्टअप, बेस सैन फ्रांसिस्को। चार राउंड, आखिरी में सीटीओ ने कहा, वी वांट यू। ऑफर आया, 240k डॉलर, H1B, रीलोकेशन। मैंने हॉस्टल में चिल्ला कर दोस्तों को बताया। रात को पापा को फोन किया। पापा चुप रहे, फिर बोले, बेटा, बहुत बड़ी बात है। माँ ने कहा, पासपोर्ट बनवा ले।

    मैंने टिकट देखना शुरू किया, अगस्त 2016 जॉइनिंग। मार्च 2016 में होली पर घर आया। पापा कमजोर लग रहे थे। खाँसी। मैंने कहा, डॉक्टर को दिखाओ। बोले, कुछ नहीं, ठंड लग गई। माँ भी थकी थकी। मैंने सोचा, उम्र है। अप्रैल में फोन आया, माँ का। पापा गिर गए, अस्पताल में। मैं भागा। डॉक्टर ने कहा, लंग्स में इंफेक्शन, साथ में हार्ट की प्रॉब्लम। एंजियोप्लास्टी करनी पड़ेगी। खर्च, 3 लाख।

    पापा के पास मेडिकल था, पर आधा ही कवर। मैंने अपनी इंटर्नशिप के पैसे, 2 लाख, निकाल कर दिए। ऑपरेशन हुआ। पापा बच गए। मैं वापस बॉम्बे गया, फाइनल प्रोजेक्ट। मई में फिर फोन, माँ को चक्कर आए। जांच हुई, ब्रेस्ट कैंसर, स्टेज 2। डॉक्टर ने कहा, कीमो शुरू करो, 6 साइकल, हर साइकल 80 हजार। कुल 5 लाख, प्लस सर्जरी।

    मैं सुन्न। पापा रिटायर हो चुके थे, पेंशन 12 हजार। घर में सेविंग खत्म। मैंने दोस्तों से उधार माँगा, 1 लाख मिला। बाकी। जून में मैं घर बैठा था, ऑफर लेटर हाथ में। वीजा इंटरव्यू 15 जुलाई को था। फ्लाइट 10 अगस्त की। माँ की पहली कीमो 20 जून को।

    मैंने पापा से कहा, मैं लोन लेता हूँ। पापा बोले, कौन देगा, घर गिरवी रखना पड़ेगा। मैंने कहा, रख देंगे। पापा ने मना किया, बोले, ये घर तेरी माँ की निशानी है। उस रात मैं छत पर बैठा। आसमान में प्लेन जा रहा था। मैंने सोचा, यही प्लेन मुझे ले जाएगा। दूसरी तरफ माँ नीचे दर्द में।

    मैंने अपने मेंटर को मेल किया, क्या जॉइनिंग डिफर हो सकती है, 6 महीने। रिप्लाई आया, सॉरी विवेक, वी नीड पीपल नाउ। यू कैन रीअप्लाई नेक्स्ट ईयर। मैंने फिर मेल किया, रिमोट पॉसिबल। नो। 14 जुलाई की रात। वीजा इंटरव्यू कल। माँ की दूसरी कीमो परसों। पापा दवाई लेने गए थे, लौटे तो पर्ची गिर गई, झुक कर उठा नहीं पाए। मैंने उठाई। उस वक्त समझ आया, मैं अगर चला गया तो ये दोनों कैसे रहेंगे।

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    पापा रिटायर्ड, बीमार। माँ कीमो पर। कोई भाई बहन नहीं। रिश्तेदार मदद नहीं करते। कौन अस्पताल ले जाएगा, कौन दवाई लाएगा, कौन रात को पानी देगा। मैंने सुबह वीजा इंटरव्यू कैंसिल किया। कंपनी को मेल लिखा, थैंक यू फॉर ऑफर, ड्यू टू फैमिली मेडिकल इमरजेंसी आई एम अनेबल टू जॉइन। दोस्तों ने फोन किया, पागल है क्या, 1.6 करोड़ की जॉब छोड़ रहा है। मैंने कहा, हाँ।

    माँ को नहीं बताया। पापा को बताया। वह चुप रहे, फिर बोले, बेटा तेरा करियर। मैंने कहा, करियर फिर बन जाएगा, आप फिर नहीं मिलोगे। मैंने कानपुर में ही नौकरी ढूंढी। एक लोकल सॉफ्टवेयर कंपनी, सैलरी 35 हजार। मैंने जॉइन कर ली। सुबह 9 से शाम 6 ऑफिस, शाम को अस्पताल। कीमो में माँ के बाल गए, वह रोती। मैं विग ले आया। पापा की दवाई टाइम पर देता।

    2016 से 2018, दो साल ऐसे निकले। माँ की सर्जरी हुई, रिकवरी हुई। कैंसर रिमिशन में आया। पापा की तबीयत स्थिर। पर पैसे खत्म। मैंने लोन लिया, 7 लाख। 2018 में कंपनी बंद हो गई। मैं बेरोजगार। इंटरव्यू दिए, बेंगलुरु से ऑफर आया, 18 लाख। मैंने मना किया। पापा बोले, जा बेटा। मैंने कहा, अब नहीं छोड़ सकता। माँ को हर तीन महीने चेकअप, पापा को डायबिटीज। कौन देखेगा।

    दोस्त बोले, तू अपना करियर मार रहा है। मैंने कहा, करियर मेरा है, माँ बाप भी मेरे। मैंने घर के नीचे छोटी सी दुकान खोली, पापा के नाम पर, शर्मा जनरल स्टोर। कंप्यूटर छोड़ कर दाल चावल बेचने लगा। पहले दिन शर्म आई। आईआईटी का लड़का दुकान पर। फिर एक आंटी आईं, बोलीं, बेटा तुम्हारी माँ ने मुझे पढ़ाया था, तुम दुकान खोलो, हम यहीं से लेंगे।

    धीरे धीरे दुकान चली। मैं सुबह 6 बजे होलसेल मंडी जाता, सामान लाता, दिन में दुकान, रात को फ्रीलांस कोडिंग। 500 डॉलर की वेबसाइट बनाता।2019 में माँ पूरी तरह ठीक। डॉक्टर ने कहा, क्लियर। उस दिन मैं दुकान बंद कर के मंदिर गया। प्रसाद चढ़ाया। घर आया तो पापा बोले, बेटा,तूने हमारे लिए सब छोड़ दिया। मैंने कहा, छोड़ा नहीं, बदला है।

    2020 लॉकडाउन। दुकान एसेंशियल में खुली। लोगों को राशन चाहिए था। मैंने होम डिलीवरी शुरू की। साइकिल पर जाता। पापा हिसाब लिखते। माँ पैकिंग करती। उस लॉकडाउन में हमने 2 लाख कमाए। मैंने लोन का आधा चुका दिया।

    2021 में मैंने दुकान के साथ एक छोटा कंप्यूटर क्लास शुरू किया, बच्चों को कोडिंग सिखाने। फीस 500 महीना। 20 बच्चे आए। मुझे फिर से कोडिंग का मजा आया। 2022 में एक बच्चा, अंश, जो मेरे पास पढ़ता था, उसने नेशनल ओलंपियाड जीता। न्यूज में आया, ‘कानपुर के किराना वाले आईआईटीयन से सीख कर जीता’। वह आर्टिकल वायरल हुआ।

    उसी हफ्ते मुझे मेल आया, स्ट्राइप के उसी सीटीओ से। लिखा था, विवेक, आई सॉ योर स्टोरी। वी आर ओपनिंग इंडिया ऑफिस। वुड यू लाइक टू लीड एजुकेशन इनिशिएटिव, रिमोट, पार्ट टाइम। मैंने हाँ कहा। अब मैं सुबह दुकान, दोपहर क्लास, शाम को यूएस टीम के साथ काम। सैलरी डॉलर में नहीं, पर इज्जत में बहुत।

    पिछले महीने पापा 68 के हुए। मैंने छोटा सा फंक्शन रखा। दोस्त आए, वही जो कहते थे तूने करियर बर्बाद किया। पापा ने माइक ले कर कहा, मेरा बेटा अमेरिका नहीं गया, पर मेरे पास रहा। जब मैं अस्पताल में था, उसने मेरा हाथ पकड़ा। जब इसकी माँ के बाल गए, इसने चोटी बनाई। करियर तो बहुत लोग बनाते हैं, बेटा कोई कोई बनता है।

    माँ ने धीरे से कहा, मुझे आज भी वह ऑफर लेटर याद है। तूने अलमारी में क्यों रखा। मैंने कहा, ताकि याद रहे मैंने क्या छोड़ा। बोली, तूने छोड़ा नहीं, तूने चुना। आज दुकान पर बैठा हूँ। सामने स्कूल के बच्चे टॉफी ले रहे हैं। लैपटॉप पर कोड चल रहा है। पापा बगल में अखबार पढ़ रहे हैं, माँ काउंटर पर बैठी हैं। कभी कभी रात को वह ऑफर लेटर निकालता हूँ। 240,000 डॉलर। फिर माँ की हँसी सुनता हूँ, पापा की खाँसी कम हुई है, देखता हूँ। और लेटर वापस रख देता हूँ।

    लोग पूछते हैं, पछतावा होता है। मैं सच कहता हूँ, पहले होता था। जब दोस्त बेंगलुरु से फोटो डालते, यूएस ट्रिप की। अब नहीं। क्योंकि मैंने करियर का त्याग नहीं किया, मैंने करियर को रीडिफाइन किया। मेरा करियर अब सिर्फ कोड नहीं, केयर है। मैंने माता पिता के लिए अमेरिका छोड़ा, पर उनके साथ जिंदगी जी ली। पापा को हर सुबह चाय दे पाता हूँ, माँ के पैर दबा पाता हूँ। ये 2.4 करोड़ में नहीं मिलता।

    अगर फिर से मौका मिले, तो मैं फिर वही करूँगा। वीजा कैंसिल, जॉब छोड़, दुकान खोल। क्योंकि कुछ त्याग घाटा नहीं होते, वे निवेश होते हैं, प्यार में। और आज जब कोई बच्चा पूछता है, भैया आप आईआईटी करके दुकान क्यों, मैं हँस कर कहता हूँ, क्योंकि मेरे माता पिता मेरी सबसे बड़ी कंपनी हैं, और मैं उनका फुल टाइम सीईओ हूँ।l