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  • Babubhai Bhavanji’s Message: पानी ही जीवन है, पानी है तो कल है; बाबूभाई भवानजी का जनजागरण संदेश

    Babubhai Bhavanji’s Message: पानी ही जीवन है, पानी है तो कल है; बाबूभाई भवानजी का जनजागरण संदेश

    Babubhai Bhavanji’s Message: दादर में आयोजित एक जनजागृति अभियान के दौरान मुंबई के पूर्व डिप्टी मेयर ने जल संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने लोगों से सवाल करते हुए कहा, “कोई बताए, पानी की एक्सपायरी डेट क्या होती है?” इस सवाल के माध्यम से उन्होंने समाज की सोच पर गहरा चिंतन करने को प्रेरित किया।

    भवानजी ने कहा कि अक्सर हम अपनी सुविधा और परिस्थितियों के आधार पर पानी की एक्सपायरी डेट तय कर लेते हैं, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शहरों में जहां रोजाना नल का पानी उपलब्ध होता है, वहां लोग एक दिन पुराने पानी को बासी मानकर फेंक देते हैं। वहीं जिन इलाकों में पानी की आपूर्ति दो या आठ दिनों में होती है, वहां वही पानी कई दिनों तक सुरक्षित और उपयोगी माना जाता है।

    उन्होंने सामाजिक व्यवहार पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि शादियों और समारोहों में लोग नई बोतल मिलने पर आधी भरी पुरानी बोतल को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि दूसरी ओर रेगिस्तान जैसे क्षेत्रों में पानी की हर बूंद तब तक अमूल्य और ताजा मानी जाती है, जब तक अगला जलस्रोत नहीं मिल जाता।

    प्रकृति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बांधों और झीलों का पानी अगले मानसून तक उपयोगी बना रहता है, और सूखे की स्थिति में यह दो से तीन वर्षों तक भी जीवनदायी होता है। इसी तरह, बोरवेल से निकाला जाने वाला पानी हजारों या लाखों वर्षों पुराना हो सकता है, फिर भी वह शुद्ध और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जाता है।

    भवानजी ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि पानी की अपनी कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती, बल्कि उसकी उपयोगिता हमारी सोच और उसकी उपलब्धता पर निर्भर करती है। जब पानी आसानी से उपलब्ध होता है, तो हम उसे बासी मान लेते हैं, और जब उसकी कमी होती है, तो वही पानी अमूल्य बन जाता है।

    उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पानी का उपयोग विवेक, जिम्मेदारी और संयम के साथ करें। यदि हमने समय रहते अपनी सोच और आदतों में बदलाव नहीं किया, तो पानी खत्म होने से पहले ही हम प्यासे रह जाएंगे। अंत में उन्होंने इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

  • Thane Water Supply: ठाणे में पानी की आपूर्ति में रोजाना 10 प्रतिशत कटौती, नागरिकों से पानी बचाने की अपील!

    Thane Water Supply: ठाणे में पानी की आपूर्ति में रोजाना 10 प्रतिशत कटौती, नागरिकों से पानी बचाने की अपील!

    Thane Water Supply: ठाणे महानगरपालिका ने जानकारी दी है कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका द्वारा जलाशयों में पानी का स्तर अत्यंत कम होने के कारण 15 मई 2026 से 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू की गई है। इसके तहत ठाणे शहर के उन क्षेत्रों में, जहां बृहन्मुंबई महानगरपालिका के माध्यम से जलापूर्ति होती है, प्रतिदिन 10 प्रतिशत पानी की कटौती प्रभावी रूप से लागू रहेगी।

    इस संबंध में ठाणे महानगरपालिका को निर्देश दिए गए हैं कि नागरिकों को पानी का उपयोग संयमित ढंग से करने और जल संरक्षण के उपायों के बारे में जागरूक किया जाए। महानगरपालिका के अनुसार नौपाड़ा-कोपरी प्रभाग समिति अंतर्गत हाजुरी, लुईसवाड़ी, नामदेववाड़ी, आनंदनगर, गावदेवी जलकुंभ, टेंभी बंगला जलकुंभ, कोपरी धोबीघाट, कन्हैया नगर जलकुंभ, कोपरी, नौपाड़ा और पाचपाखाडी क्षेत्रों में यह कटौती लागू होगी।

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    वहीं लोकमान्य सावरकरनगर प्रभाग समिति क्षेत्र के साईनाथ नगर, रामचंद्र नगर, जिजामाता नगर, ज्ञानेश्वर नगर, करवाळो नगर और इंदिरानगर में भी पानी आपूर्ति प्रभावित रहेगी। इसके अलावा वागळे प्रभाग समिति क्षेत्र के किसननगर 1 व 2, शिवाजीनगर, पडवळनगर, भटवाडी और अंबिका नगर, तथा माजीवाडा-मानपाडा प्रभाग समिति क्षेत्र के बालकुम पाड़ा 1 व 2, लक्ष्मी नगर, आंबेडकर नगर और गांधीनगर में भी प्रतिदिन 10 प्रतिशत पानी कटौती अगले आदेश तक जारी रहेगी।

    महानगरपालिका ने नागरिकों से पानी का उपयोग सावधानीपूर्वक करने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। महानगरपालिका ने बताया कि जलाशयों में उपलब्ध पानी का लंबे समय तक उपयोग सुनिश्चित करने और मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष एल-नीनो (El Niño) तथा आईओडी (IOD) की स्थिति को लेकर जताए गए अनुमान के मद्देनज़र, महाराष्ट्र सरकार के निर्देशानुसार यह एहतियाती कदम उठाया गया है।

  • Mumbra Water Reservoirs: मुंब्रा के जलकुंभ बदहाल, पानी बचाने के नारों के बीच रिसाव और गंदगी से लोग परेशान!

    Mumbra Water Reservoirs: मुंब्रा के जलकुंभ बदहाल, पानी बचाने के नारों के बीच रिसाव और गंदगी से लोग परेशान!

    Mumbra Water Reservoirs: मुंब्रा पाणी पुरवठा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर, टूटी टंकियां और फटी पाइप लाइन से हजारों लीटर पानी बर्बाद। मुंब्रा में पानी संकट को लेकर समय-समय पर आंदोलन और राजनीति करने वाले नेताओं के दावों के बीच पाणी पुरवठा विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिस जल भंडारण केंद्र से हजारों नागरिकों के घरों तक पानी पहुंचाया जाता है, वहीं की टंकियों की हालत बेहद खराब और चिंताजनक दिखाई दे रही है। स्थानीय निरीक्षण के दौरान देखा गया कि पानी स्टोर करने वाली बड़ी टंकियों के लोहे के ढक्कन पूरी तरह जर्जर और सड़े हुए हैं।

    कई जगहों पर ढक्कन टूट चुके हैं, जिससे टंकी के अंदर सीधे धूल-मिट्टी और गंदगी जा रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि टंकियों के आसपास किसी प्रकार का सुरक्षा कवच या जाली तक मौजूद नहीं है, जिससे चूहे या छोटे जानवर आसानी से अंदर गिर सकते हैं। आसपास फैली गंदगी को देखकर यह आशंका भी जताई जा रही है कि अब तक कई चूहे या अन्य जानवर टंकियों में गिर चुके होंगे। सवाल यह उठता है कि क्या इसी गंदे और असुरक्षित सिस्टम का पानी मुंब्रा की जनता पीने को मजबूर है? इतना ही नहीं, पाणी पुरवठा विभाग के कार्यालय परिसर में भी भारी गंदगी देखी गई।

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    विभाग की सफाई व्यवस्था पूरी तरह लचर नजर आई, जबकि यही विभाग जनता को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने का दावा करता है। वहीं दूसरी ओर, विभाग के बाहर मुख्य पाइप लाइन पिछले कई महीनों से टूटी हुई बताई जा रही है। पाइप लाइन से लगातार बड़ी मात्रा में पानी बहकर बर्बाद हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इसकी मरम्मत करना जरूरी नहीं समझा। विडंबना यह है कि शहर में पानी को लेकर आंदोलन करने वाले कई नेता और सामाजिक कार्यकर्ता इस टूटे पाइप लाइन और हजारों लीटर बर्बाद हो रहे पानी को शायद देख नहीं पा रहे हैं।

    जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर आंदोलन सिर्फ कैमरों तक सीमित हैं या वास्तव में पानी बचाने की कोई गंभीर चिंता भी है? मुंब्रा के नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की तत्काल जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और जल भंडारण केंद्र की सफाई, सुरक्षा तथा टूटी पाइप लाइन की मरम्मत जल्द से जल्द कराई जाए।