Bhim Army Demands: अनुसूचित जाति आरक्षण में उपवर्गीकरण के विरोध में गुरुवार को भीम आर्मी की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से मंत्रालय तक विशाल मोर्चा निकाला गया। मोर्चे के माध्यम से महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की रिपोर्ट को तत्काल रद्द करने तथा अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई।
भीम आर्मी द्वारा सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि महाराष्ट्र की 59 अनुसूचित जातियों में से किसी भी जाति के प्रतिनिधि को समिति में शामिल नहीं किया गया। साथ ही व्यापक जनसुनवाई, आपत्तियां और संबंधित पक्षों से परामर्श किए बिना रिपोर्ट तैयार की गई है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
संगठन ने आरोप लगाया कि समिति की पूरी रिपोर्ट, अनुभवजन्य आंकड़े, कार्यप्रणाली और सिफारिशें अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं। ऐसे में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं मानी जा सकती। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित संवैधानिक मानकों का पालन किए बिना सरकार जल्दबाजी में उपवर्गीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
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मोर्चे के बाद भीम आर्मी के प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में मुख्यमंत्री कार्यालय के ओएसडी पाटणकर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही मुख्यमंत्री और भीम आर्मी के प्रतिनिधियों के बीच बैठक आयोजित कराने का आश्वासन दिया।
भीम आर्मी की प्रमुख मांगें
●न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की रिपोर्ट तत्काल रद्द की जाए।
●अनुसूचित जाति उपवर्गीकरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
●समिति की पूरी रिपोर्ट और अनुभवजन्य आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।
●सभी 59 अनुसूचित जातियों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श किया जाए।
●सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन किए बिना आगे कोई कार्रवाई न की जाए।
भीम आर्मी ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो राज्यभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

