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सतारा में BSNL की लापरवाही से प्रधानमंत्री की 4G सैचुरेशन योजना पर उठे गंभीर सवाल, पाटण तालुका के ग्रामीण प्रभावित

सातारा के पाटण तालुका में BSNL की लापरवाही से प्रधानमंत्री की 4G सैचुरेशन योजना प्रभावित, ऑप्टिकल फाइबर केबल क्षतिग्रस्त, तकनीकी मानकों की अनदेखी पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी।
सातारा के पाटण तालुका में BSNL की लापरवाही से प्रधानमंत्री की 4G सैचुरेशन योजना प्रभावित, ऑप्टिकल फाइबर केबल क्षतिग्रस्त, तकनीकी मानकों की अनदेखी पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी।
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मुंबई | अश्विनी कुमार

प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी 4G सैचुरेशन योजना, जिसका उद्देश्य दूरदराज और नेटवर्क से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों तक तेज और भरोसेमंद मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाना है, महाराष्ट्र के सातारा जिले के पाटण तालुका में BSNL अधिकारियों की कथित लापरवाही के आरोपों के घेरे में आ गई है।

स्थानीय नागरिकों ने शिकायत की है कि योजना के तहत लगभग दो वर्ष पहले पाटण तालुका के कई गांवों में 4G नेटवर्क विस्तार के लिए करोड़ों रुपये की ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई थी। यह परियोजना भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) द्वारा केंद्र सरकार के आर्थिक सहयोग से क्रियान्वित की जा रही थी।

लेकिन हाल ही में चल रहे कराड-चिपळूण हाईवे चौड़ीकरण कार्य के दौरान कई जगह फाइबर केबल क्षतिग्रस्त पाई गई। कुछ केबल जमीन से बाहर निकल आईं, कुछ पेड़ों पर लटक रही थीं, जबकि कुछ खेतों और नालों में बिखरी हुई दिखाई दी। इस पर ग्रामीणों और टेलीकॉम उपभोक्ताओं में गहरी नाराजगी फैल गई।

तकनीकी लापरवाही और मानक उल्लंघन

राष्ट्रीय महामार्ग ठेकेदार का दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान केवल तीन फीट की खुदाई में ही फाइबर केबल बाहर आ गई। यदि यह दावा सही है, तो इसका मतलब है कि BSNL अधिकारियों ने फाइबर केबल बिछाने में आवश्यक तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया

दूरसंचार अधोसंरचना के नियमों के अनुसार ऑप्टिकल फाइबर केबल को पर्याप्त गहराई पर जमीन में बिछाना अनिवार्य है, ताकि सड़क निर्माण या अन्य गतिविधियों से उसे नुकसान न पहुंचे। इस गड़बड़ी से यह साफ संकेत मिलता है कि परियोजना के प्रारंभिक कार्य, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियां थीं।

स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों ने कहा कि सफल 4G सैचुरेशन परियोजना के लिए नेटवर्क की विश्वसनीयता और केबल की सही इंस्टालेशन अत्यंत जरूरी है, लेकिन BSNL अधिकारियों की कथित लापरवाही ने पूरे प्रयास को प्रभावित किया है।

सरकारी परियोजना का महत्व

भारत सरकार ने 27 जुलाई 2022 को देशभर में 4G सैचुरेशन योजना की घोषणा की थी। योजना का लक्ष्य लगभग 24,680 ग्रामीण गांवों तक तेज और भरोसेमंद 4G कनेक्टिविटी पहुंचाना है, जिसमें लगभग 26,300 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। यह योजना प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

पाटण तालुका में सामने आई स्थिति ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जमीनी क्रियान्वयन और BSNL अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और मांगें

स्थानीय नागरिकों ने सख्त जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तकनीकी मानकों का सही पालन किया गया होता, तो निर्माण कार्य के दौरान फाइबर केबल को नुकसान नहीं पहुंचता और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क सेवा निरंतर बनी रहती।

विशेषज्ञों का कहना है कि BSNL को फाइबर केबल इंस्टॉलेशन, तकनीकी मानकों और गुणवत्ता निगरानी के सभी प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना चाहिए। अन्यथा, योजना की विश्वसनीयता और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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