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NewMumbai:सिडको की ‘शिल्पकार’ छवि पर सवाल: नेरूल के आगरी कोळी भवन की बदहाली ने खोली पोल

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आर. एस. नेटवर्क। ज्योति दुबे
नवी मुंबई (NewMumbai)। खुद को शहर का ‘शिल्पकार’ बताने वाली सिडको(CIDCO) की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है। नेरूल स्थित आगरी कोळी भवन, जिसे स्थानीय आगरी-कोळी समाज की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र माना जाता था, आज अव्यवस्था, लापरवाही और कथित मनमानी वसूली का उदाहरण बन चुका है।

हाल ही में यहां कार्यक्रम आयोजित करने वाली एक संस्था ने भवन की दुर्दशा को उजागर किया। मौके पर की गई पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, वह सिडको के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।

25 हजार रुपए किराया, लेकिन टूटी कुर्सियां और जर्जर हाल

तीन घंटे के लिए ऑडिटोरियम का किराया करीब 25,000 रुपए वसूला जाता है। 550 सीटों वाले सभागार में लगभग 180 कुर्सियां टूटी या जर्जर हालत में हैं। आयोजकों को मजबूरन बाहर से प्लास्टिक कुर्सियां मंगवानी पड़ती हैं, जिस पर प्रति कुर्सी 30–40 रुपए का अतिरिक्त खर्च आता है। यानी कार्यक्रम के नाम पर हजारों रुपये की अतिरिक्त मार।

इतना भारी किराया लेने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं होना सीधे-सीधे प्रबंधन की विफलता को दर्शाता है।

अंदर की सामग्री पर भी मनमानी वसूली

हॉल के अलावा अन्य सामान के नाम पर भी ‘अव्वा के सव्वा’ दर वसूले जा रहे हैं—

  • एक समय (सामान) के लिए 1,200 रुपए तक
  • टेबल व झालर के लिए 200 रुपए
  • पूरे कार्यक्रम में केवल एक कॉर्डलेस माइक
  • लाइटिंग व्यवस्था भी बेहद सामान्य

सवाल उठता है कि जब सुविधाएं न्यूनतम हैं, तो शुल्क आसमान छू क्यों रहे हैं?

सुरक्षा से समझौता, सीढ़ियां बनीं कबाड़घर

भवन की साफ-सफाई की स्थिति दयनीय है। सीढ़ियों और सार्वजनिक मार्गों पर कबाड़ का ढेर लगा है। आपात स्थिति में यह अवरोध जानलेवा साबित हो सकता है। क्या सिडको को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

अजीब नियम, जनता से दूरी

तीन मंजिला इमारत होने के बावजूद शादी या बड़े आयोजनों में भोजन पकाने पर रोक है। वहीं ‘वीआईपी रूम’ आम नागरिकों के लिए बंद है और कथित तौर पर केवल नेताओं व अधिकारियों तक सीमित है। मुख्य ऑडिटोरियम तीसरी मंजिल पर और वीआईपी कक्ष भूतल पर — यह भवन नियोजन की गंभीर खामी को दर्शाता है।

पार्किंग और कैंटीन तक नहीं

आश्चर्यजनक रूप से इतने बड़े सांस्कृतिक भवन में समुचित पार्किंग और कैंटीन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। आगरी-कोळी संस्कृति के संरक्षण के नाम पर बने कक्ष में समाज की परंपराओं का प्रदर्शन भी नगण्य है।

नागरिकों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय नागरिकों और आगरी-कोळी समाज में भारी रोष है। ‘सजग नागरिक मंच’ के सुधीर दाणी ने आरोप लगाया कि जवाबदेही की कमी और प्रशासनिक उदासीनता ने सिडको को आर्थिक लूट का केंद्र बना दिया है। अधिकारी औपचारिक बयानबाजी छोड़कर खुद स्थल का निरीक्षण करें और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएं। अन्यथा आंदोलन की राह अपनाने की चेतावनी दी गई है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सिडको सिर्फ इमारतें बनाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, या उनकी देखरेख और जनता को बेहतर सुविधा देना भी उसकी प्राथमिकता में है? नेरूल का आगरी कोळी भवन आज इसी सवाल का जवाब मांग रहा है।

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