Fuel Surcharge Charge: उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जून माह में लगाए गए 10 प्रतिशत ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीए) शुल्क की वसूली पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। परिषद ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत नियामक आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जून में लगाए गए ईंधन अधिभार शुल्क का आकलन निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आयोग ने इसे कानून के विपरीत बताया है। साथ ही ऊर्जा मंत्री द्वारा भी सार्वजनिक रूप से यह कहा गया कि उन्हें इस निर्णय की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से मिली और इस संबंध में उनकी राय नहीं ली गई।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियामक आयोग और ऊर्जा मंत्री दोनों की जानकारी या सहमति के बिना यह निर्णय लिया गया, तो उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन को ऐसे फैसले लेने का अधिकार किस स्तर पर मिला।
उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था में संविदा कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। परिषद का कहना है कि गर्मी शुरू होने से पहले ही बिजली आपूर्ति और अनुरक्षण व्यवस्था पर इसके असर को लेकर चेतावनी दी गई थी। परिषद ने बर्खास्त संविदा कर्मियों की पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव भी रखा था।
वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन में कई महत्वपूर्ण निर्णय मनमाने तरीके से लिए गए हैं। उन्होंने बिजली चोरी से जुड़े मामलों, राजस्व निर्धारण में कथित छूट और स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना की लागत में वृद्धि जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
परिषद ने मांग की है कि मुख्यमंत्री पावर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा कराएं और जून माह में लगाए गए एफपीपीए शुल्क की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश जारी करें। परिषद का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना उपभोक्ताओं के हित में आवश्यक है।

