महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री Devendra Fadnavis द्वारा पेश किया गया बजट 2026-27 (Maharashtra Budget 2026-27) राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। लगभग 51 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था (GSDP) के लक्ष्य के साथ सरकार ने इसे “विकसित महाराष्ट्र 2047” की आधारशिला बताया है। इस बजट में एक ओर किसानों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए राहत भरी घोषणाएं की गई हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी बड़ा जोर दिया गया है।

मुंबई। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए 30 सितंबर 2025 तक के बकाया कृषि ऋणों में से 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी की घोषणा की है। इस फैसले से राज्य के लाखों छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही समय पर अपनी कर्ज की किस्तें चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये का नकद प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है, जिसे ईमानदार किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
महिलाओं के लिए भी बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। राज्य सरकार की ‘लाडकी बहिन योजना’ को जारी रखते हुए 25 लाख नई “लखपति दीदी” तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। वहीं दिव्यांग नागरिकों के मानधन में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2,500 रुपये कर दिया गया है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा का बेहतर सहारा मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक और शहरी विकास के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़े विजन का संकेत दिया है। मुंबई के वडाला इलाके में 130 एकड़ में विशाल स्टार्टअप हब बनाने की योजना घोषित की गई है। इसके साथ ही राज्य में लगभग 50 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में कोस्टल रोड, मेट्रो नेटवर्क और भूमिगत सुरंगों के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया गया है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए नई ऊर्जा माना जा रहा है। सरकार ने महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को 566 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने और राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि बजट को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रत्यक्ष कर या महंगाई से राहत की कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। मुंबई जैसे महंगे शहर में रहने वाले आम करदाताओं को भविष्य में टोल और बुनियादी ढांचे के निर्माण से होने वाली असुविधाओं की आशंका भी जताई जा रही है। विपक्ष ने राज्य के लगभग 9.32 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का हवाला देते हुए इतनी बड़ी योजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि कर्जमाफी और नकद लाभ योजनाओं का बोझ राज्य के खजाने पर दबाव बढ़ा सकता है।
कुल मिलाकर यह बजट एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कर्जमाफी और किसान हितैषी योजनाओं के जरिए मजबूती देने की कोशिश करता है, तो दूसरी ओर शहरी विकास, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से महाराष्ट्र को वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने का रोडमैप भी प्रस्तुत करता है। अब इस बजट की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाएं कितनी पारदर्शिता और तेजी से जमीन पर उतरती हैं।

