MP Advocate Goval K. Padvi: महाराष्ट्र में आदिवासी विकास के लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) की जनसंख्या के अनुपात में 9.35 प्रतिशत बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किया जाए तथा तेलंगाना राज्य के ट्राइबल सब-प्लान (Tribal Sub-Plan) कानून की तर्ज पर राज्य में भी स्वतंत्र आदिवासी कानून बनाया जाए।
यह मांग नंदुरबार लोकसभा क्षेत्र के सांसद एडवोकेट गोवाल के. पाडवी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में विधान भवन में आयोजित 52वीं आदिवासी सलाहकार परिषद की बैठक में जोरदार ढंग से उठाई।
सांसद पाडवी ने कहा कि महाराष्ट्र में अनुसूचित जनजातियों की आबादी लगभग 9.35 प्रतिशत है, इसलिए आदिवासी विकास के लिए भी उसी अनुपात में बजट आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूर्व के शासन निर्णयों और स्थापित नीति के बावजूद आदिवासी समाज के लिए आबादी के अनुपात में धनराशि उपलब्ध नहीं करा रही है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में आदिवासी विकास विभाग के बजट में पगार, पेंशन और प्रशासनिक खर्च (Committed Expenditure) को भी आदिवासी विकास का खर्च दिखाया जा रहा है, जबकि इससे वास्तविक विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध राशि में भारी कमी आ रही है।
उन्होंने मांग की कि प्रशासनिक खर्च को सामान्य प्रशासन के मद में अलग रखा जाए और शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार, सड़क तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं के लिए अलग एवं पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए।
सांसद पाडवी ने तेलंगाना की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी स्वतंत्र ट्राइबल सब-प्लान कानून लागू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे आदिवासी विकास निधि का अन्य कार्यों में उपयोग नहीं हो सकेगा तथा धनराशि का पारदर्शी और जवाबदेह उपयोग सुनिश्चित होगा।
बैठक में उन्होंने अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि फर्जी दस्तावेजों या धोखाधड़ी के आधार पर एसटी प्रमाणपत्र प्राप्त करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
साथ ही, जाति सत्यापन समितियों को केवल शिकायत का इंतजार करने के बजाय स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार और जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
सांसद ने अनुसूचित जनजाति आरक्षण के तहत रिक्त एवं अधिसंख्य पदों को शीघ्र भरने की मांग भी की। उन्होंने आदिवासी विकास विभाग, एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना (आईटीडीपी), अतिरिक्त आदिवासी आयुक्त कार्यालयों तथा नासिक स्थित आदिवासी विकास आयुक्तालय में अधिकारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जनप्रतिनिधियों को होने वाली कठिनाइयों का मुद्दा भी परिषद के समक्ष रखा।
उन्होंने जाति प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया को आधुनिक बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल डेटा विश्लेषण और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग कर सत्यापन प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाए।
बैठक के अंत में सांसद पाडवी ने सर्वोच्च न्यायालय में लंबित धनगर समाज से जुड़े मामले पर राज्य सरकार की भूमिका पर चर्चा कराने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि जैसे ही उन्होंने यह विषय उठाना शुरू किया, राज्य के आदिवासी विकास मंत्री ने इस पर आपत्ति जताई और उन्हें मुद्दा रखने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद, उनके अनुसार, परिषद के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक स्थगित कर दी और सभागार से बाहर चले गए।

