Pune spurious liquor tragedy: पुणे में पिछले सप्ताह जहरीली शराब पीने से हुई 22 लोगों की मौत के मामले में राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और तेलंगाना के सह-प्रभारी सचिन सावंत ने राज्य की फडणवीस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पुणे की घटना को सरकारी लापरवाही का नतीजा बताते हुए सवाल उठाया है कि आखिर सरकार ने 2015 के ‘मालवणी शराब कांड’ से क्या सबक सीखा?
तिलक भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए सचिन सावंत ने कहा कि पुणे हादसे के बाद सरकार ने दिखावे के लिए 26 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की है, जो बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने पूछा कि मालवणी दुर्घटना के बाद गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को अब तक ठंडे बस्ते में क्यों डाल कर रखा गया?
गृह विभाग के निर्देशों को किया गया नजरअंदाज
सचिन सावंत ने खुलासा किया कि गृह विभाग ने 17 फरवरी 2022 को ही मालवणी समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए सभी विभागों को निर्देश जारी किए थे। इन सिफारिशों में मुख्य रूप से शामिल था:
● सख्त निगरानी:मिथेनॉल के उत्पादन से लेकर उसके परिवहन (सप्लाई) तक राज्य आबकारी विभाग का पूरा नियंत्रण होना।
● संयुक्त कार्रवाई:अवैध देसी शराब ठिकानों को हमेशा के लिए बंद करने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग द्वारा लगातार संयुक्त छापेमारी करना।
● कठोर कानून: संगठित अपराधियों और झोपड़पट्टी दादाओं के खिलाफ MPAD कानून के तहत सख्त कार्रवाई करना और उन्हें कड़ी सजा दिलाना, चाहे उन्हें किसी भी राजनीतिक दल या नेता का संरक्षण प्राप्त हो।
सावंत ने आरोप लगाया कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुणे में इतनी बड़ी घटना हो जाना यह साबित करता है कि वर्तमान राज्य सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है।
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क्या अस्पतालों में एंटीडोट और प्रशिक्षित डॉक्टर थे?
कांग्रेस नेता ने सरकार की स्वास्थ्य तैयारियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मालवणी समिति ने सिफारिश की थी कि जहरीली शराब कांड जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाई जाए, अस्पतालों में एंटीडोट (जहर नाशक दवाइयां) का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए और डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने पूछा, “क्या पुणे की घटना के समय स्थानीय अस्पतालों में ये जरूरी दवाएं और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध था? सरकार इसका जवाब दे।”
हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
पुणे कांड के बाद भिवंडी और अन्य इलाकों में पुलिस द्वारा मिथेनॉल के स्टॉक और अवैध शराब की भट्टियों पर की जा रही छापेमारी पर भी सावंत ने तंज कसा। उन्होंने कहा, “जो अवैध भट्टियां पिछले 40 साल से चल रही थीं, क्या पुणे हादसे से पहले पुलिस, आबकारी विभाग और फ्लाइंग स्क्वाड को वे दिखाई नहीं दे रही थीं? पुणे की फ्लाइंग स्क्वाड ने अपराधियों पर एक भी मामला दर्ज नहीं किया था। घटना होने के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है? इससे साफ है कि इस अवैध धंधे की जानकारी ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारियों को पहले से थी।”
सचिन सावंत ने मांग की है कि सरकार केवल छोटे अधिकारियों को निलंबित करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला न झाड़े, बल्कि मालवणी समिति की एक-एक सिफारिश पर अब तक क्या अमल हुआ और कौन सी सिफारिशें क्यों लंबित रखी गईं, इसका श्वेतपत्र या पूरा खुलासा जनता के सामने रखे।

