नई दिल्ली | शिवसेना के संसदीय दल के नेता और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने लोकसभा में लोकसभा(Lok Sabha) अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश और सेना के खिलाफ बोलने वालों को 20 बार नहीं बल्कि 200 बार भी रोका जाएगा।
डॉ. शिंदे ने कहा कि विपक्ष के नेता का पद देश की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इसकी एक मजबूत परंपरा रही है। लेकिन आज विपक्ष के नेता संसद सत्र शुरू होते ही छुट्टियों पर चले जाते हैं। इसी वजह से वे “लीडर ऑफ ऑपोजिशन नहीं बल्कि लीडर ऑफ वेकेशन” बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अक्सर संसद के महत्वपूर्ण सत्रों के दौरान विदेश दौरों पर रहते हैं। पिछले वर्ष बजट सत्र के दौरान वे जर्मनी में थे, उससे पहले के साल वियतनाम में और मार्च 2023 के बजट सत्र के समय ब्रिटेन में मौजूद थे। वर्ष 2018 के बजट सत्र के दौरान भी वे सिंगापुर और मलेशिया गए हुए थे।
डॉ. शिंदे ने आरोप लगाया कि संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों के दौरान भी राहुल गांधी सदन में उपस्थित नहीं थे। उन्होंने कहा कि 2015 में भूमि अधिग्रहण विधेयक, 2016 में आधार विधेयक, 2017 में ट्रिपल तलाक विधेयक, 2019 में अनुच्छेद 370 और 2025 में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक जैसे अहम मुद्दों पर भी राहुल गांधी सदन में मौजूद नहीं थे।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र करते हुए डॉ. शिंदे ने कहा कि इससे पहले 1954, 1966 और 1987 में तीन बार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था और अब चौथी बार यह प्रस्ताव सामने आया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को बोलते समय 20 बार रोके जाने का आरोप लगाया गया है, लेकिन अगर कोई देश और भारतीय सेना के खिलाफ बोलने की कोशिश करेगा तो उसे 20 नहीं बल्कि 200 बार भी रोका जाएगा।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि संसद के अंदर और बाहर कांग्रेस की नीति अक्सर देश के खिलाफ रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना और सेना ने अद्भुत साहस दिखाया, लेकिन इस पर गर्व करने के बजाय कांग्रेस के कुछ नेता यह बताने में लगे थे कि पाकिस्तान ने भारत के कितने विमान गिराए।
डॉ. शिंदे ने यह भी कहा कि विदेश जाकर भारत की छवि खराब करना राहुल गांधी की राजनीति का हिस्सा बन गया है और उनके भारत विरोधी बयान पाकिस्तान में भी दिखाए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने 22 साल के राजनीतिक जीवन में राहुल गांधी ने संसद में एक भी निजी विधेयक पेश नहीं किया है।
उन्होंने यह भी बताया कि 2009 से 2014 के बीच राहुल गांधी केवल दो बार सदन में बोले, जबकि 2014 से 2019 के बीच उन्होंने 14 बार और 2019 से 2024 के बीच 8 बार बोलने का अवसर लिया। 15वीं, 16वीं और 17वीं लोकसभा में उनकी अनुपस्थिति 50 प्रतिशत से अधिक रही।
डॉ. शिंदे ने कहा कि जो लोग पहले अपनी ही सरकार के विधेयकों को सार्वजनिक रूप से फाड़ते थे, वही आज संसद और लोकतंत्र बचाने की बात कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति आधे से ज्यादा समय सदन से अनुपस्थित रहा हो, वह लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कैसे ला सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब पाकिस्तान ने पहलगाम में हमला किया था, तब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए उसे करारा जवाब दिया, लेकिन विपक्ष के नेता ने भारतीय सेना के साहस पर ही सवाल उठाए। उन्होंने सर्वदलीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का भी विरोध किया, जबकि सांसद शशि थरूर, सुप्रिया सुले और कनिमोझी ने उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर देश का पक्ष रखा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 26 देशों ने किया सम्मानित
डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि दुनिया के 26 देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने भूटान से लेकर इजरायल तक 19 देशों में जाकर संसद या महत्वपूर्ण मंचों को संबोधित किया है। इतिहास में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री को विश्व स्तर पर इतना सम्मान मिला है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1954 में जब तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था कि इस प्रस्ताव का समर्थन वही लोग कर सकते हैं जिनमें बौद्धिक क्षमता की कमी हो।

