अमेरिका-ईरान वार्ता अंतिम चरण में, ट्रंप बोले- जरूरत पड़ी तो उठाएंगे “कठोर कदम”; ईरान ने कहा- दबाव में नहीं झुकेंगे
वॉशिंगटन / तेहरान: अमेरका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि या तो तेहरान अमेरिका के साथ समझौता कर ले, या फिर “कठोर कदमों” के लिए तैयार रहे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है।बुधवार को जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा, “हम ईरान के साथ बातचीत के अंतिम चरण में हैं। देखते हैं क्या होता है। या तो वे समझौता कर लेंगे या हम कुछ ऐसे कदम उठाएंगे जो थोड़े कठोर होंगे।”हालांकि ट्रंप ने उम्मीद जताई कि मामला युद्ध तक नहीं पहुंचेगा, लेकिन उनके बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
नेतन्याहू की खुलकर तारीफ
इस दौरान ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू वही करेंगे जो वे उनसे करवाना चाहेंगे और इजरायल में उनके साथ उचित व्यवहार नहीं हो रहा है।ट्रंप ने कहा, “वे बहुत अच्छे इंसान हैं। यह मत भूलिए कि वे युद्धकालीन प्रधानमंत्री रह चुके हैं।” उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि इजरायल में उनका समर्थन इतना ज्यादा है कि वे वहां प्रधानमंत्री पद का चुनाव भी लड़ सकते हैं।
युद्धों का जिक्र कर ट्रंप ने दिया संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में वियतनाम, अफगानिस्तान, इराक और कोरिया युद्धों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय तक कई युद्धों में शामिल रहा है, लेकिन ईरान के खिलाफ मौजूदा स्थिति को केवल तीन महीने हुए हैं और अधिकतर समय युद्धविराम जैसी स्थिति बनी रही।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने पुराने युद्धों में लाखों सैनिक खोए हैं और वे नहीं चाहते कि हालात फिर उसी दिशा में जाएं।
ईरान ने कहा- दबाव में नहीं झुकेंगेवहीं दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने ट्रंप के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कूटनीति और आपसी सम्मान युद्ध से कहीं अधिक टिकाऊ और सुरक्षित रास्ता है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ईरान ने हमेशा अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान किया है और युद्ध टालने के लिए हर संभव प्रयास किया है। हमारी ओर से सभी रास्ते खुले हैं। दबाव डालकर ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना केवल एक भ्रम है।”
(US Iran Tension 2026)मध्य पूर्व में बढ़ सकती है चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत विफल होती है, तो मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती बयानबाजी से वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

