ठाणे: हाल ही में संजय गांधी नेशनल पार्क, येउर और तुंगारेश्वर जंगल में ‘निसर्गानुभव 2026’ के तहत हुई एनिमल सेंसस के आंकड़े सामने आए हैं, और इन जंगल के इलाकों में वाइल्डलाइफ़ मूवमेंट बढ़ने की एक अच्छी तस्वीर दिख रही है। इस खास सेंसस में कुल 43 वाइल्डलाइफ़ स्पीशीज़ को ऑफिशियली रिकॉर्ड किया गया है, जिसमें एक तेंदुआ समेत कई दुर्लभ जानवर शामिल हैं। इस सेंसस में सबसे ज़रूरी बात यह है कि येउर जंगल के इलाके में एक तेंदुआ देखा गया है।(Forest Census 2026)
तेंदुआ इस इलाके में फ़ूड चेन में सबसे ऊपर एक शिकारी जानवर है और इसकी मौजूदगी को इस जंगल के इलाके की खुशहाली की निशानी माना जाता है। इलाके के हिसाब से देखें तो सबसे ज़्यादा 34 जानवर येउर इलाके में रिकॉर्ड किए गए। इसमें 7 ग्रे लंगूर, 4 जंगली सूअर, 4 चमगादड़, 3 चीते, 3 बंदर, 3 नेवले और सांभर जैसे अलग-अलग जानवर शामिल हैं। साथ ही, इंडियन ट्री श्रू और इंडियन लेपर्ड जैसे जानवर भी यहां देखे गए हैं।
तुंगारेश्वर जंगल के इलाके के दक्षिणी और उत्तरी दोनों हिस्सों में कुल 9 जानवर रिकॉर्ड किए गए। तुंगारेश्वर के दक्षिणी हिस्से में 4 चीते और 1 पाम खार मिला, जबकि उत्तरी हिस्से में 2 पाम खार, 1 ग्रे लंगूर और 1 लेपर्ड देखा गया। इस पूरी गिनती में सबसे ज़्यादा ‘ग्रे लंगूर’ (8) और ‘चीते’ (7) रिकॉर्ड किए गए हैं। हालांकि, इस सेशन में रस्टी स्पॉटेड कैट और स्मॉल सिवेट कैट रिकॉर्ड नहीं किए जा सके।नेचर लवर्स येउर और तुंगारेश्वर दोनों इलाकों में अलग-अलग तरह के जंगली जानवरों के मिलने पर खुशी जता रहे हैं।
‘निसर्गानुभव’ जैसी पहल से फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को इलाके की बायोडायवर्सिटी की डिटेल में स्टडी करने में मदद मिल रही है, जिससे इस जंगल के रिसोर्स को बचाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जा रहा है।बुद्ध पूर्णिमा जानवरों की गिनती के लिए सही समय है, क्योंकि उस दिन चांदनी ज़्यादा होती है और जंगल में जानवरों की मूवमेंट भी ज़्यादा होती है।
इस नेचुरल लाइट से जानवरों को देखना आसान हो जाता है। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की इस पहल से जंगल में बायोडायवर्सिटी की हालत को समझने में मदद मिलती है। इससे भविष्य में बचाने के लिए फैसले लेना आसान हो जाता है।

