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  • Bihar News: अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बजाने पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस को विशेष अभियान के आदेश

    Bihar News: अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बजाने पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस को विशेष अभियान के आदेश

    पटना। बिहार में सार्वजनिक स्थानों और वाहनों में अश्लील एवं द्विअर्थी गाने बजाने वालों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस मुख्यालय को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि भोजपुरी, मगही, मैथिली या किसी भी भाषा में फूहड़ और अश्लील गानों(Vulger Songs) को तत्काल रोका जाए।

    उन्होंने कहा कि बस, ऑटो, टैक्सी, ट्रेन और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे गाने बजाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। आदेश के बाद राज्यभर में पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

    सम्राट चौधरी ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे मामलों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील गानों से समाज में फूहड़ता बढ़ती है और इसका सबसे नकारात्मक प्रभाव बच्चों और युवाओं की मानसिकता पर पड़ता है। साथ ही, यह महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती है।

    उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना सरकार की प्राथमिकता है, और इसी उद्देश्य से अश्लील गानों पर प्रतिबंध अनिवार्य हो गया है। इस फैसले के बाद बिहार पुलिस ने ‘अश्लील गाने नहीं, सभ्य समाज बनाएं’ के संकल्प के साथ राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है।

    पुलिस प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अब किसी भी सार्वजनिक स्थल या वाहन में अश्लील गाना बजाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा भी हो सकती है।

    कानूनी प्रावधानों के तहत पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 296, 79 सहित अन्य सुसंगत धाराओं में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करेगी।

    बिहार पुलिस ने ‘जन विश्वास हमारा संकल्प’ अभियान के तहत आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की अश्लीलता का विरोध करें और इसकी सूचना तुरंत नजदीकी थाने को दें। सरकार का मानना है कि जनभागीदारी और सख्त कानून के माध्यम से ही बिहार को एक सभ्य और सुरक्षित राज्य बनाया जा सकता है।

  • 15 साल बाद मिली मेहनताना राशि, राजस्थान हाईकोर्ट में महिला वकील की याचिका खत्म

    15 साल बाद मिली मेहनताना राशि, राजस्थान हाईकोर्ट में महिला वकील की याचिका खत्म

    जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में करीब 32 वर्षों से प्रैक्टिस कर रहीं एक महिला अधिवक्ता को नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (NRHM) के लिए की गई पैरवी की प्रोफेशनल फीस आखिरकार राज्य सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई के 15 साल बाद मिल गई। मामला कुल 84 याचिकाओं से जुड़ा था, जिनमें उन्होंने बतौर सरकारी वकील पेश होकर पैरवी की थी।

    याचिकाकर्ता अधिवक्ता को वर्ष 2010 में NRHM द्वारा 84 याचिकाओं के एक समूह में पेश होने के लिए नियुक्त किया गया था। इन सभी मामलों का निस्तारण हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में कर दिया। इसके बाद अधिवक्ता ने अपनी प्रोफेशनल सेवाओं के एवज में 4.25 लाख रुपये का बिल संबंधित विभाग को भेजा, लेकिन भुगतान वर्षों तक लंबित रहा।

    बताया गया कि वर्ष 2019 तक फीस का भुगतान नहीं होने पर अधिवक्ता ने तत्कालीन प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NRHM को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन, भुगतान दिलाने के लिए राज्य सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

    याचिका दायर होने के लगभग सात साल बाद, संबंधित प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NRHM की ओर से कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया गया, जिसमें यह जानकारी दी गई कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता को उनकी प्रोफेशनल फीस के रूप में 4.25 लाख रुपये का चेक जारी कर दिया गया है।

    हलफनामे और भुगतान की पुष्टि के बाद अधिवक्ता की ओर से याचिका वापस लेने का आवेदन पेश किया गया, जिसे जस्टिस गणेश राम मीना की एकलपीठ ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही यह लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया।

    यह मामला सरकारी विभागों में लंबित भुगतानों और अधिवक्ताओं को समय पर फीस न मिलने की समस्या को एक बार फिर उजागर करता है।

  • अमेरिका के टैरिफ का भारत पर गंभीर प्रभाव , दुनिया में जो 40 वर्षों में नहीं हुआ, वह हो रहा है

    अमेरिका के टैरिफ का भारत पर गंभीर प्रभाव , दुनिया में जो 40 वर्षों में नहीं हुआ, वह हो रहा है

    अमेरिका के टैरिफ को लेकर पहले बजट पर बड़े पैमाने पर चर्चाएँ होती थीं और उसे विस्तार से समझाया जाता था, लेकिन अब बजट ही निरर्थक होता जा रहा है। बजट को लेकर जनता में उत्सुकता समाप्त हो चुकी है, और यह स्थिति अत्यंत निराशाजनक व चिंताजनक है। राहुल गांधी ने यह स्पष्ट किया कि बजट का “हलवा” किस सामाजिक वर्ग को मिलता है, यह सामाजिक न्याय पर की गई एक सटीक टिप्पणी थी। लेकिन आज बजट से सामाजिक न्याय की भूमिका पूरी तरह गायब हो चुकी है और यह केवल पैसे फेंकने का तमाशा बनकर रह गया है, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।

    तिलक भवन में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की अध्यक्षता में बजट पर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस चर्चा में अर्थशास्त्री अजित जोशी, संजीव चांदोरकर, एस. नागराजन, विश्वास उटगी तथा पूर्व सांसद कुमार केतकर ने भाग लिया।

    इस अवसर पर सपकाल ने कहा कि बजट के माध्यम से देश की वार्षिक प्रगति और आम नागरिक के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से न तो सरकार और न ही आम जनता बजट को लेकर गंभीर दिखाई देती है। यदि हम अर्थव्यवस्था को इसी प्रकार उदासीनता से देखते रहे, तो समय हमें माफ़ नहीं करेगा। किसान और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर आंदोलन होते रहे हैं, और अब ऐसा लगता है कि बजट पर भी आंदोलन करने की नौबत आ सकती है। पहले ग्रामीण नेतृत्व की प्रशासन और नीति निर्धारण में मज़बूत भूमिका होती थी, जिससे सामाजिक न्याय बना रहता था, लेकिन अब यह स्थिति पूरी तरह बदल गई है। डॉ. मनमोहन सिंह के बाद देश की दिशा बदल गई और नई तरह की शक्तियाँ प्रभावी हो गईं। ग्रामीण और बहुजन वर्ग की पकड़ कमज़ोर हुई और उसकी जगह दलालों का वर्चस्व बढ़ता गया, यह अत्यंत चिंताजनक है।

    हाल ही में संपन्न नगरपालिका और महानगरपालिका चुनावों में भारी धनबल और गुंडागर्दी का प्रयोग किया गया। दलालों द्वारा खुलेआम खर्च किए गए इस धन के गंभीर परिणाम क्या होंगे, इसका किसी को अंदाज़ा नहीं है। आज देश का हर नागरिक असुरक्षा और भय की स्थिति में है। जो भरोसे का चेहरा दिखाया गया था, वह भी अब गायब है। नीतियाँ स्पष्ट नहीं हैं। देश की मौजूदा परिस्थितियाँ किसी विस्फोटक स्थिति की ओर इशारा कर रही हैं, जो किसी भी समय ज्वालामुखी की तरह फूट सकती हैं, ऐसी आशंका सपकाल ने व्यक्त की।

    अर्थशास्त्री संजीव चांदोरकर ने कहा कि बजट में वित्तीय संसाधनों और उनके वितरण की रूपरेखा प्रस्तुत की जाती है। मोदी सरकार के 11 वर्षों के कार्यकाल को देखते हुए इस बजट को केवल एक वर्ष का बजट मानकर नहीं देखा जा सकता। इन 11 वर्षों में सरकार की आर्थिक नीतियों में एक स्पष्ट निरंतरता रही है। इसलिए किसी एक बजट के बजाय पूरे आर्थिक मॉडल को समग्रता में समझना आवश्यक है। पिछले वर्ष अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद उसके वैश्विक प्रभाव भारत पर भी दिखाई देने लगे हैं। जो पिछले 40 वर्षों में दुनिया में नहीं हुआ, वह अब घटित हो रहा है, और यह केवल शुरुआत है।

    अनिश्चितता के इस दौर में अर्थव्यवस्था को अधिक मज़बूत और लचीला बनाना आवश्यक है, ताकि किसी भी वैश्विक झटके का न्यूनतम प्रभाव पड़े। लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था को व्यापक बनाने के प्रयास नाकाफ़ी रहे हैं। बजट में कृषि की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। कृषि का जीडीपी में योगदान घटकर 15 प्रतिशत रह गया है, जबकि कोरोना काल में कृषि ने पूरे देश को संभाला। कर सुधारों की अनदेखी हो रही है। कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ रहा है — केवल कर्ज़ चुकाने के लिए ही 19 लाख करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। कर्ज़ लेकर कर्ज़ चुकाने की यह नीति ख़तरनाक है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बातें तो की जा रही हैं, लेकिन उसके लिए अमीरों पर कर लगाने, संसाधनों की पुनर्वितरण नीति अपनाने और आर्थिक समानता बढ़ाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई नहीं देती।

    प्रशांत गावंडे ने कहा कि केंद्रीय बजट में किसान पूरी तरह गायब है और मुख्यधारा के मीडिया ने भी इस तथ्य को नज़रअंदाज़ किया है। कृषि अनुसंधान, तकनीक और निवेश के लिए बजट में अत्यंत नगण्य प्रावधान किए गए हैं। सोयाबीन, कपास, ज्वार, बाजरा, सरसों और गन्ना जैसी प्रमुख फसलों की अनदेखी की गई है। देश में 550 चीनी मिलें हैं, जिनमें से अधिकांश घाटे में हैं, जबकि करोड़ों किसान इन पर निर्भर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक जमा घट रही हैं, जो गंभीर चेतावनी है। भारत में 92 प्रतिशत किसान छोटे और मध्यम हैं, जिनके पास 2 से 8 एकड़ भूमि है, जबकि अमेरिका में ‘छोटे’ किसान के पास भी कम से कम 2,000 एकड़ भूमि होती है। ऐसी असमान प्रतिस्पर्धा में भारत सरकार का मज़बूत समर्थन आवश्यक है, जो पूरी तरह अनुपस्थित है। सरकार की मौजूदा कृषि नीति से किसानों की आत्महत्याएँ बढ़ने की आशंका है।

  • आदोशी टनल के पास पलटा गैस टैंकर: 32 घंटे बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक बहाल

    आदोशी टनल के पास पलटा गैस टैंकर: 32 घंटे बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक बहाल

    मुंबई। मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर आदोशी टनल के पास गैस टैंकर पलटने से बनी आपात स्थिति अब पूरी तरह सामान्य हो गई है। रायगढ़ हाईवे पुलिस के अनुसार, टैंकर से हो रहे गैस रिसाव को पूरी तरह रोक लिया गया है और दुर्घटनाग्रस्त टैंकर को एक्सप्रेसवे से हटा दिया गया है। इसके बाद करीब 32 घंटे तक बंद रही मुंबई की ओर जाने वाली लेन को खोल दिया गया, जिससे यातायात फिर से सुचारू रूप से शुरू हो गया है।

    रायगढ़ क्षेत्र की हाईवे सेफ्टी टीम के पुलिस अधीक्षक की ओर से गुरुवार को जारी प्रेस नोट में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। प्रेस नोट के मुताबिक, 3 फरवरी को शाम करीब 5 बजे यशवंतराव चव्हाण मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर किलोमीटर 41/000, आदोशी टनल के पास मुंबई की ओर जा रही लेन में प्रोपाइलीन गैस से भरा एक टैंकर पलट गया था।

    हादसे के बाद टैंकर से अत्यधिक ज्वलनशील प्रोपाइलीन गैस का रिसाव शुरू हो गया, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एहतियातन एक्सप्रेसवे पर यातायात को तत्काल बंद कर दिया गया।

    यात्रियों को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए पुलिस प्रशासन ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अपडेट साझा किए। हादसे की सूचना मिलते ही हाईवे पुलिस, रायगढ़ जिला पुलिस, फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ, बीपीसीएल, हेल्प फाउंडेशन और रासायनिक विशेषज्ञों की टीमें मौके पर पहुंच गईं।

    प्रेस नोट में बताया गया कि गैस लीकेज को रोकना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन सभी एजेंसियों और विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों से 5 फरवरी 2026 को तड़के करीब 1:30 बजे गैस रिसाव को पूरी तरह रोकने में सफलता मिली। इसके बाद टैंकर को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया।

    राहत कार्य पूरा होने के बाद अब यशवंतराव चव्हाण मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के साथ-साथ पुराने मुंबई–पुणे राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-48) पर भी यातायात सामान्य रूप से शुरू हो गया है।

    पुलिस प्रशासन ने यात्रियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। गौरतलब है कि इस हादसे के चलते एक्सप्रेसवे पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था और हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक बहाल होने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली है।

  • Minor Assaulted at Jogeshwari Station, GRP-RPF Under Scrutiny: जोगेश्वरी स्टेशन के प्लेटफार्म पर नाबालिग को नंगा कर पीटने की घटना को जीआरपी–आरपीएफ ने स्टेशन प्रांगण में बदला

    Minor Assaulted at Jogeshwari Station, GRP-RPF Under Scrutiny: जोगेश्वरी स्टेशन के प्लेटफार्म पर नाबालिग को नंगा कर पीटने की घटना को जीआरपी–आरपीएफ ने स्टेशन प्रांगण में बदला

    ‘शिकायत नहीं आई’ कहकर अपराध पर डाली गई चादर, सुरक्षा व्यवस्था खतरे में

    मुंबई: पश्चिम रेलवे के जोगेश्वरी स्टेशन पर 30 जनवरी को दोपहर 2:38 बजे हुई एक शर्मनाक घटना ने रेलवे सुरक्षा तंत्र की गहन चुप्पी और लापरवाही उजागर कर दी है। प्लेटफॉर्म नंबर 1 (चर्चगेट दिशा) पर दबंगों ने एक नाबालिग को नंगा कर बेरहमी से पीटा। यह जघन्य घटना यात्रियों की भीड़ के सामने हुई, जिसे कैमरे और फोटोज़ में दर्ज किया गया है।

    लेकिन, सुरक्षा एजेंसियों ने इस बर्बरता पर कार्रवाई करने के बजाय इसे मामूली बना दिया। जीआरपी और आरपीएफ ने घटना को “स्टेशन प्रांगण” बताकर गंभीरता को घटाने का प्रयास किया।

    स्थानीय आईपीएफ राजीव सलारिया ने घटना को तोड़-मरोड़ कर वरिष्ठ अधिकारियों को बताया, जबकि जीआरपी ने वही पुराना बहाना दोहराया –
    “किसी ने शिकायत नहीं की।”

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब अपराध कैमरे में कैद हो, पीड़ित नाबालिग हो और स्थान रेलवे प्लेटफॉर्म हो, तो एफआईआर दर्ज करना कानूनन अनिवार्य है। शिकायत का इंतजार करना ड्यूटी से पलायन के समान है।

    सबसे गंभीर सवाल:

    • नाबालिग की पहचान क्यों नहीं हुई?
    • हमला करने वाले दबंग कौन थे?
    • बच्चे की मेडिकल जाँच कराई गई या नहीं?
    • चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सूचना दी गई या नहीं?

    घटना साफ़ करती है कि रेलवे प्लेटफॉर्म अब अपराधियों और असामाजिक तत्वों के लिए सुरक्षित ज़ोन बन चुके हैं। कानून लागू करने के बजाय सुरक्षा बल लीपा-पोती कर रहे हैं।

    अब सवाल यही है – क्या रेलवे प्लेटफॉर्म पर कानून चलेगा या दबंगों और असामाजिक तत्वों की मनमानी?

    इसलिए यह जरूरी है कि आईपीएफ राजीव सलारिया और संबंधित जीआरपी अधिकारियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की जाए, ताकि यह तय हो सके कि रेलवे सुरक्षा बल जनता के लिए हैं या अपराधियों की ढाल बन चुके हैं।

  • Budget 2026: आम आदमी को राहत, तंबाकू पर सख्ती, टेक्नोलॉजी और डिफेंस पर बड़ा दांव

    Budget 2026: आम आदमी को राहत, तंबाकू पर सख्ती, टेक्नोलॉजी और डिफेंस पर बड़ा दांव

    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि सरकार की प्राथमिकता आम आदमी की जेब पर बोझ कम करना, हेल्थ सेक्टर को राहत देना और भारत को मैन्युफैक्चरिंग व टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब बनाना है। बजट के एलान के बाद जहां आम नागरिकों को कई बड़ी राहतें मिली हैं, वहीं तंबाकू उत्पादों पर सख्ती से सिगरेट पीने वालों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है।


    दुर्लभ बीमारियों के मरीजों को बड़ी राहत, 7 जीवनरक्षक दवाएं टैक्स फ्री

    सरकार ने सात और दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को पूरी तरह इंपोर्ट ड्यूटी से मुक्त कर दिया है।
    इस फैसले से उन मरीजों को सीधी राहत मिलेगी, जिनका इलाज अब तक बेहद महंगा था।

    वित्त मंत्री ने कहा कि

    “सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को सिर्फ पैसों की वजह से इलाज से वंचित न होना पड़े।”


    विदेश से लौटने वालों को राहत, बैगेज ड्यूटी-फ्री सीमा बढ़ी

    बजट में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए भी बड़ी राहत दी गई है।
    अब विदेश यात्रा से लौटने वाले लोग ज्यादा मूल्य तक का निजी सामान ड्यूटी-फ्री ला सकेंगे। इससे एयरपोर्ट पर बैगेज क्लीयरेंस आसान होगा और यात्रियों को अतिरिक्त टैक्स नहीं देना पड़ेगा।


    सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 40,000 करोड़, भारत बनेगा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब

    भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने

    40,000 करोड़ रुपये की इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम

    की घोषणा की है।

    इसके साथ ही India Semiconductor Mission (ISM 2.0) के दूसरे चरण की शुरुआत होगी, जिससे:

    • चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा
    • युवाओं के लिए हाई-टेक नौकरियां पैदा होंगी
    • भारत की विदेशी निर्भरता कम होगी

    रेयर अर्थ कॉरिडोर से चीन पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी

    सरकार ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में

    ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’

    स्थापित करने का ऐलान किया है।

    इन कॉरिडोर के जरिए:

    • दुर्लभ खनिजों की पहचान
    • देश में ही प्रोसेसिंग
    • मैग्नेट और हाई-टेक उपकरणों के लिए घरेलू सप्लाई

    वित्त मंत्री ने इसे रणनीतिक और सामरिक रूप से ऐतिहासिक कदम बताया।


    टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस, हर शहर को 1000 करोड़ सालाना

    अब सरकार का फोकस सिर्फ महानगर नहीं बल्कि छोटे और मझोले शहर हैं।
    हर टियर-2 और टियर-3 शहर के विकास के लिए

    सालाना 1000 करोड़ रुपये

    देने का प्रस्ताव रखा गया है।

    इससे:

    • बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर
    • रोजगार के नए अवसर
    • छोटे शहरों में भी मेट्रो और आधुनिक सुविधाएं

    राजकोषीय अनुशासन बरकरार, घाटा 4.3% तक सीमित

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए:

    • कुल खर्च: 53.5 लाख करोड़ रुपये
    • राजकोषीय घाटा: GDP का 4.3%

    सरकार ने भरोसा दिलाया कि विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बना रहेगा।


    तंबाकू पर 300% टैक्स, सिगरेट पीना हुआ बेहद महंगा

    बजट 2026 में तंबाकू उत्पादों को ‘Sin Goods’ मानते हुए उन पर 300% तक टैक्स बढ़ा दिया गया है।

    अब सिगरेट पर टैक्स इस तरह लगेगा:

    • छोटी नॉन-फिल्टर (65mm): ₹2.05 प्रति स्टिक
    • छोटी फिल्टर: ₹2.10 प्रति स्टिक
    • मीडियम लेंथ: ₹3.6 – ₹4 प्रति स्टिक
    • लंबी सिगरेट: ₹5.4 प्रति स्टिक
    • प्रीमियम डिजाइन: ₹8.50 प्रति स्टिक

    अब 18 रुपये वाली सिगरेट की कीमत 70–72 रुपये तक!

    इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक कंपनियां टैक्स का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालेंगी।
    इस फैसले के बाद ITC के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

    सरकार का तर्क है कि:

    • तंबाकू सेवन कम होगा
    • पब्लिक हेल्थ सुधरेगी
    • राजस्व संग्रह बढ़ेगा

    रक्षा को सबसे बड़ा बजट, 7.8 लाख करोड़ का आवंटन

    Defence Budget 2026

    • कुल आवंटन: 7.8 लाख करोड़
    • आधुनिकीकरण: 2.1 लाख करोड़

    इससे:

    • नए लड़ाकू विमान
    • पनडुब्बियां
    • स्वदेशी हथियारों की खरीद

    रेलवे और ट्रांसपोर्ट: 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

    रेलवे सेक्टर में:

    • मुंबई–पुणे, दिल्ली–वाराणसी सहित
      7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
    • ट्रेनों में ‘कवच’ एंटी-कोलिजन सिस्टम
    • डानकुनी–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर

    कृषि, MSME और हेल्थ पर भी बड़ा फोकस

    कृषि और ग्रामीण विकास

    • ‘भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR)’ AI पोर्टल
    • अमृत सरोवर और जलाशयों का विकास

    MSME

    • 10,000 करोड़ का MSME ग्रोथ फंड

    हेल्थ और बायो-फार्मा

    • 5 सालों में 10,000 करोड़
    • 5 नए मेडिकल हब राज्यों में

    निष्कर्ष: बजट किसी के लिए राहत, किसी के लिए झटका

    बजट 2026 ने:

    • आम आदमी को राहत
    • टेक्नोलॉजी और डिफेंस को ताकत
    • हेल्थ सेक्टर को मजबूती

    लेकिन
    सिगरेट पीने वालों के लिए यह बजट सबसे कड़वा साबित हुआ।

  • Pakistan v/s Baloochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में BLA और सेना के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें, 10 सैनिकों की मौत

    Pakistan v/s Baloochistan: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में BLA और सेना के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें, 10 सैनिकों की मौत

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सेना और विद्रोहियों के बीच बड़े पैमाने पर संघर्ष शुरू हो गया है। विद्रोही गुट बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ऑपरेशन हेरोफ शुरू करते हुए पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया। शनिवार तड़के से बलूचिस्तान के कई जिलों में धमाके, मिलिट्री ठिकानों पर हमले और झड़पों की खबरें मिल रही हैं।

    बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में विस्फोट हुए हैं, वहीं ग्वादर पोर्ट के पास भी फायरिंग हुई। इन हमलों में कम से कम 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।

    BLA के शीर्ष कमांडरों ने ऑपरेशन हेरोफ का दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की है। गुट ने इसे मातृभूमि की रक्षा के लिए अभियान बताया। क्वेटा, नुश्की, कलात, मस्तंग, दलबांदिन, खारान, ग्वादर, पसनी, टंप और बुलेदा में भारी गोलीबारी, विस्फोट और सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए।

    क्वेटा में हथियारबंद लोगों ने पुलिस मोबाइल पर हमला किया, जिसमें दो पुलिसकर्मी मारे गए और पुलिस वाहन में आग लगा दी। रेलवे स्टेशन के पास भी गोलीबारी हुई। नुश्की में फ्रंटियर कॉर्प्स मुख्यालय के पास झड़प हुई, जबकि कलात में सेना के कैंप के गेट पर विस्फोटक वाहन का उपयोग किया गया।

    BLA के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने कहा कि उनके लड़ाकों ने सैन्य और प्रशासनिक ढांचों को निशाना बनाया। BLA के कमांडर-इन-चीफ बशीर जेब बलूच ने बलूच लोगों से अपील की कि वे अपनी घरों से बाहर निकलें और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लड़ें।

    पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार तड़के से चल रही झड़पों में कई हमलों को नाकाम किया गया और सुरक्षा बलों ने 58 आतंकियों को मार गिराया। इस संघर्ष में 10 सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है।

  • Congress 2026: भाजपा पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का हमला, कहा – सत्ता के अहंकार में समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही है भारतीय जनता पार्टी

    Congress 2026: भाजपा पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का हमला, कहा – सत्ता के अहंकार में समाज में नफरत फैलाने का काम कर रही है भारतीय जनता पार्टी

    मुंबई: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी सत्ते के लिए समाज में जाति और धर्म के नाम पर भांडने कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल हिंदू-मुस्लिम विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि मराठा, ओबीसी, आदिवासी और दलित समाज में भी भड़के पैदा कर महाराष्ट्र के सामाजिक एकता को बिगाड़ने का काम कर रही है।

    सपकाळ ने छत्रपती संभाजीनगर जिले के लाडसावंगी, गणोरी, बाजार सावंगी और नागव में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए आयोजित प्रचार सभाओं में यह बयान दिया। इस अवसर पर जालना के सांसद डॉ. कल्याण काळे, कांग्रेस सेवादल के प्रदेशाध्यक्ष विलास औताडे, जिला अध्यक्ष किरण पाटील डोणगावकर, प्रदेश सचिव सुदामराव मते, शिवसेना उपजिल्हाप्रमुख जगन्नाथराव पवार, फुलंब्री नगराध्यक्ष राजेंद्र ठोंबरे सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

    सपकाळ ने कहा कि भाजपा सरकार देश की लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का काम कर रही है। विपक्षी दलों को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में पैसे की बर्बादी और धमकियों का खेल चल रहा है, और चुनाव आयोग भी सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है। बावजूद इसके, कांग्रेस जनता के हित, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।

    सपकाळ ने जनता से अपील की कि नगरपालिका और महानगरपालिका चुनावों में कांग्रेस को मिली सफलता को जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों में भी दोहराएं। उन्होंने कहा कि भाजपा को किसान, महिला, कामगार और युवाओं की समस्याएं दिखाई नहीं देतीं। किसानों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, फसल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और महंगाई चरम पर है। इसके बावजूद भाजपा सामाजिक तेढ फैलाकर जनता का ध्यान भटका रही है।

    सपकाळ ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी का यह चालाकी भरा खेल जनता पहचानें और चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों को विजयी बनाएं।”

  • First Woman Deputy CM Maharashtra: महाराष्ट्र को मिली पहली महिला उपमुख्यमंत्री, सुनेत्रा पवार ने ली शपथ

    First Woman Deputy CM Maharashtra: महाराष्ट्र को मिली पहली महिला उपमुख्यमंत्री, सुनेत्रा पवार ने ली शपथ

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार की पत्नी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की वरिष्ठ नेता सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मुंबई के लोकभवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, सुनेत्रा पवार के पुत्र जय पवार सहित सत्तारूढ़ गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। समारोह में एनसीपी के प्रफुल पटेल, छगन भुजबल, सुनील तटकरे और धनंजय मुंडे जैसे दिग्गज नेताओं की भी उपस्थिति रही।

    सुनेत्रा पवार का शपथ ग्रहण समारोह पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के लिए भावुक क्षण बन गया। जैसे ही उन्होंने शपथ ली, लोकभवन परिसर ‘अजित दादा अमर रहे’ के नारों से गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने अपने दिवंगत नेता अजित पवार को श्रद्धांजलि देते हुए नारे लगाए।

    गौरतलब है कि शनिवार को मुंबई में आयोजित एनसीपी विधायक दल की अहम बैठक में पार्टी के सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुना था। दिलीप वलसे पाटिल ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। इसके साथ ही उन्हें विधानसभा में पार्टी की ओर से व्हिप जारी करने और विधायी कार्य संचालन के सभी संवैधानिक अधिकार सौंपे गए।

    उल्लेखनीय है कि 28 जनवरी 2026 को पुणे जिले के बारामती में एक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया था। वे जिला परिषद चुनाव प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे, तभी लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। उनके निधन के बाद एनसीपी ने सुनेत्रा पवार को पार्टी की कमान सौंपी।

  • Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर फैसला इतिहास लिख सकता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख के रूप में अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि सत्ता संतुलन की धुरी थे। उनके जाने के बाद न केवल पार्टी, बल्कि पूरी महायुति और विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक भूचाल आ गया है।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभर आए हैं। भले ही अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी दो गुटों में बंटी हो, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी—दोनों के सबसे वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में शरद पवार की ओर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

    क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?

    सबसे बड़ा और निर्णायक सवाल यही है कि अब अजित पवार की एनसीपी का रास्ता क्या होगा? क्या यह गुट स्वतंत्र पहचान बनाए रख पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराते हुए दोनों एनसीपी का विलय होगा?

    महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को हराने के लिए अजित पवार का शरद पवार के साथ आना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। खुद अजित पवार ने भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि कार्यकर्ता एकजुटता चाहते हैं और सही समय पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
    अब वही “सही समय” नियति ने तय कर दिया है।

    41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबी

    फिलहाल अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक और लोकसभा में एक सांसद—सुनील तटकरे—हैं। यह संख्या किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने या गिराने की ताकत रखती है। यही वजह है कि बीजेपी, शिंदे सेना और शरद पवार—तीनों खेमे इस गुट पर नज़र गड़ाए बैठे हैं।

    अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल डिप्टी सीएम पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं का भरोसा जीतना होगा—जो कभी अजित पवार के सबसे विश्वस्त सिपहसालार रहे हैं।

    पटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिका

    अजित पवार के बाद उनके गुट में सबसे मजबूत स्तंभ प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे हैं। दोनों नेताओं ने एनसीपी के विभाजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही नेता तय करेंगे कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा—शरद पवार की छांव में या बीजेपी के साथ सत्ता के केंद्र में।

    इसके अलावा छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेता भी इस राजनीतिक शतरंज के अहम मोहरे हैं। उनका एक कदम कई समीकरणों को उलट सकता है।

    सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा

    अजित पवार के निधन के बाद सबसे कठिन परीक्षा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने है। निजी शोक और राजनीतिक जिम्मेदारी—दोनों का बोझ एक साथ उठाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सांसद होने के नाते वे पहले ही संसद में मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पार्टी की विरासत को संभालने का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दे सकती है। इससे एक ओर अजित समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा, तो दूसरी ओर महायुति की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही कैबिनेट में एक महिला चेहरे की एंट्री भी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला शिंदे सेना से विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

    पार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

    अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले ही जमीन घोटाले के आरोपों और 2019 की लोकसभा हार के चलते कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल बड़ी जिम्मेदारी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में अभी सक्रिय नहीं हैं।
    इस हालात में शरद पवार की भूमिका निर्णायक हो जाती है। माना जा रहा है कि उनकी सहमति और मार्गदर्शन के बिना पवार परिवार और एनसीपी का कोई भी बड़ा फैसला संभव नहीं है।

    अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण है। आने वाले दिनों में तय होगा कि एनसीपी फिर से एकजुट होकर नई ताकत बनेगी या इतिहास के पन्नों में बिखर जाएगी। इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम की धुरी—एक बार फिर—शरद पवार ही होंगे।