भिवंडी(Bhiwandi) | संवाददाता: महाराष्ट्र के भिवंडी शहर से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक बेटी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही घर में चोरी की वारदात को अंजाम दिया और पिता के करीब 10.65 लाख रुपये नकदी और सोने के आभूषण लेकर फरार हो गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बेटी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, यह घटना भिवंडी के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक स्थित प्रेसिडेन्सी प्लाजा इमारत की है। यहां रहने वाले सोहनलाल चौधरी ने जब अपने घर के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, तो 6 मार्च की रिकॉर्डिंग में दो संदिग्ध व्यक्ति घर से एक ट्रैवल बैग और एक थैला लेकर जाते हुए दिखाई दिए।
फुटेज देखने के बाद जब उन्होंने घर की अलमारी की जांच की, तो उनके होश उड़ गए। अलमारी से 10 लाख 65 हजार रुपये नकद और सोने के आभूषण गायब थे।
चोरी की जानकारी मिलते ही सोहनलाल चौधरी ने निजामपुर पुलिस स्टेशन में अपनी बेटी पूजा, उसके दोस्त अर्सलान महफूजुर्रहमान खान और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और जाल बिछाकर पूजा और अर्सलान को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के बाद दोनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
दोनों आरोपियों को भिवंडी अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 12 मार्च तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
इस संबंध में सहायक पुलिस निरीक्षक विनोद चव्हाण ने बताया कि मामले की आगे की जांच जारी है और चोरी की पूरी रकम व आभूषणों की बरामदगी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
ठाणे: मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने ‘प्रयास’(Prayas) नामक नुक्कड़ नाटक श्रृंखला का आयोजन किया।
23 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक चले इस अभियान के दौरान बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के विभिन्न निर्माण स्थलों पर लगभग 6 हजार श्रमिकों को कार्यस्थल सुरक्षा का संदेश दिया गया। कलाकारों ने रोचक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रमिकों को हेलमेट, हार्नेस बेल्ट, सेफ्टी शूज़ और पीपीई किट जैसे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
यह अभियान कॉरिडोर के 40 निर्माण स्थलों पर चलाया गया, जिनमें गुजरात के 24 और महाराष्ट्र के 16 स्थल शामिल हैं। इन स्थानों में स्टेशन, कास्टिंग यार्ड, सुरंग, डिपो, पुल और वायाडक्ट जैसे निर्माण स्थल शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं।
नुक्कड़ नाटक के जरिए श्रमिकों को यह संदेश दिया गया कि सुरक्षा नियमों का पालन करें, बिना प्रशिक्षण के काम न करें, शॉर्टकट से बचें और काम शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन करें।
पिछले तीन वर्षों से चल रही यह पहल श्रमिकों में सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
ठाणे | संवाददाता: वरिष्ठ समाजसेवी और भाजपा राष्ट्रीय परिषद के पूर्व सदस्य ओमप्रकाश शर्मा की धर्मपत्नी उमादेवी शर्मा के निधन के बाद उनकी स्मृति में एक सराहनीय पहल की गई है। शर्मा परिवार ने उनकी मालिकी की जमीन गोशाला के लिए दान (Bhoodan) करने का निर्णय लिया है।
बताया गया कि उमादेवी शर्मा अपने जीवनकाल में सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहती थीं। उनके निधन के बाद उनके सामाजिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और समाज सेवा की भावना को जीवित रखने के लिए उनकी जमीन गोशाला के लिए दान करने का फैसला लिया गया है।
यह जमीन पालघर जिले के वाडा तालुका में स्थित है, जहां ‘उमादेवी ओमप्रकाश शर्मा स्मृति मधुवन गोशाला’ की स्थापना की जाएगी। इस गोशाला का उद्देश्य बेसहारा, बीमार और कमजोर गोमाताओं की देखभाल और उपचार की सेवा करना होगा।
उमादेवी शर्मा ने ठाणे में महिलाओं का एक समूह बनाकर गणगौर पूजा जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत भी की थी। उनके साथ कार्य करने वाली महिला सहयोगियों ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए खुशी व्यक्त की है।
इस अवसर पर उनकी सहयोगी रही महिला दल की सदस्य सुमन अत्री, डॉ. सविता इंदौरिया, रमा गौड़, सुलोचना शर्मा, संतोष सैनी, सुलोचना डोकवाल, सुमन शर्मा, बिंदु भोमिया, प्रेम शर्मा, बबली शर्मा, मनीषा शर्मा, रंजना गुप्ता, रीना शर्मा, मंजू भिंडा, सविता भिंडा, देवी ओझा और विमला मिश्रा सहित अन्य महिलाओं ने इस निर्णय की सराहना की।
परिजनों ने बताया कि आज के समय में जहां जमीन के लिए लोग आपसी रिश्तों को भी भूल जाते हैं, वहीं विनोबा भावे की भूदान परंपरा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
शर्मा परिवार लंबे समय से सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्रों में निःस्वार्थ भाव से कार्य करता रहा है। उमादेवी शर्मा की स्मृति में शुरू की जा रही यह पहल समाज सेवा और गौसेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।
ठाणे (Thane News) | संवाददाता: मार्च के पहले ही सप्ताह में ठाणे शहर में गर्मी का असर तेज़ी से बढ़ने लगा है। मंगलवार को शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे दोपहर के समय बाहर निकलना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है।
हालांकि सुबह के समय हल्की ठंडक महसूस होती है, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही गर्मी का असर बढ़ने लगता है। दोपहर में तेज धूप के कारण सड़कों पर ट्रैफिक भी कुछ कम दिखाई दे रहा है।
जानकारी के मुताबिक, ठाणे में सामान्य तौर पर अधिकतम तापमान 34 से 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है, लेकिन इस साल तापमान में 4 से 5 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। फिलहाल शहर में अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच बना हुआ है, जिससे लोगों को गर्मी से काफी परेशानी हो रही है।
मनपा आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, शहर में न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 40 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलते समय सावधानी बरतें।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर शहरों की गर्मी पर भी दिखाई दे रहा है। तेज धूप के कारण लोगों को डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, कमजोरी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
ठाणे जिला सिविल सर्जन डॉ. कैलाश पवार ने नागरिकों को सलाह दी है कि गर्मी के मौसम में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं और हल्के व सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय गॉगल्स, टोपी या छाते का इस्तेमाल करें और यात्रा के दौरान अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें।
उन्होंने बताया कि शरीर में पानी की कमी होने पर ORS, नींबू पानी, छाछ और लस्सी जैसे पेय पदार्थों का सेवन करना फायदेमंद होता है।
भिवंडी | संवाददाता: भिवंडी-निजामपुर शहर महानगरपालिका (BNMC) की बहुप्रतीक्षित पहली महासभा सोमवार (9 मार्च) को आयोजित होने वाली थी, लेकिन ऐन वक्त पर इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। नगर सचिव विभाग ने अधिसूचना जारी कर बताया कि ‘अपरिहार्य कारणों’ की वजह से सभा को टाल दिया गया है।
नगर निगम के आम चुनाव के बाद महापौर के चुनाव में करीब एक महीने का समय लगा था। इसके बाद 20 फरवरी को महापौर का चुनाव संपन्न हुआ था। वहीं, इसके लगभग 15 दिन बाद 9 मार्च को पहली महासभा आयोजित करने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी।
इस महासभा के एजेंडे में दो अहम विषय शामिल थे—
स्थायी समिति के 16 सदस्यों का चयन
प्रभाग समितियों का पुनर्गठन
हालांकि, बैठक से ठीक पहले नगर सचिव विभाग ने इसे स्थगित करने का फैसला लिया। नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि सभा टलने के पीछे असली वजह स्थायी समिति के सभापति पद को लेकर राजनीतिक खींचतान है।
बताया जा रहा है कि सेक्युलर फ्रंट गठबंधन के तहत स्थायी समिति का सभापति पद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के हिस्से में आया है। शुरुआत में यह संभावना जताई जा रही थी कि पूर्व उपमहापौर इमरान खान की बेटी ईशा खान को इस पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नगरसेवक फराज (बाबा) बहाउद्दीन ने भी इस पद के लिए अपना दावा पेश कर दिया है। इसी दावेदारी के चलते पार्टी के भीतर असंतोष और खींचतान बढ़ गई है, जिसे महासभा स्थगित होने का मुख्य कारण माना जा रहा है।
मुंबई: मध्य रेल(Central Railway) में 9 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) में केंद्रीय कर्मचारी कल्याण कोष (CSBF) के तत्वावधान में महिला कर्मचारी उपलब्धि सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “Give to Gain” रखी गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं को अवसर, सम्मान, समानता और सहयोग देकर समाज में प्रगति और सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम की शुरुआत मध्य रेल के महाप्रबंधक प्रतीक गोस्वामी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
इस दौरान महाप्रबंधक ने मध्य रेल की विभिन्न इकाइयों और विभागों से चयनित 36 महिला कर्मचारियों को “सशक्त नारी पुरस्कार” देकर सम्मानित किया। इनमें लोको पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन, शिक्षिका, वाणिज्य निरीक्षक, आरपीएफ कर्मी, कार्यालय अधीक्षक और अन्य विभागों की कर्मचारी शामिल थीं।
इनमें से 21 महिला कर्मचारियों को मुख्यालय, मुंबई मंडल और विभिन्न वर्कशॉप से व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया गया। सम्मानित कर्मचारियों में अनुराधा रॉय भी शामिल हैं, जिन्हें 8 मार्च को नई दिल्ली में रेलवे बोर्ड द्वारा “Outstanding Women Award” से भी सम्मानित किया गया था।
कार्यक्रम के दौरान महिला सशक्तिकरण के तहत 8 आश्रित अविवाहित बेटियों को साइकिल और 3 महिला आश्रितों को सिलाई मशीनें भी वितरित की गईं।
इस मौके पर महाप्रबंधक प्रतीक गोस्वामी ने बताया कि मध्य रेल में लगभग 9 हजार महिलाएं विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं और महिला सशक्तिकरण के लिए कई पहलें की जा रही हैं।
कार्यक्रम में लेखिका और TED एलुमना अनुपमा पांडे ने भी प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में मुंबई मंडल के डीआरएम, वरिष्ठ अधिकारी और रेलवे कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
ठाणे | संवाददाता: ठाणे शहर में बच्चों के अचानक घर से लापता होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे अभिभावकों में चिंता और दहशत का माहौल है। महिला दिवस(Women,s Day) की पूर्व संध्या पर ठाणे के कोलशेत इलाके से दो नाबालिग लड़कियों के लापता होने की घटना सामने आई है। वहीं इससे पहले एक 11 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला भी दर्ज किया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 7 मार्च 2026 को सुबह करीब 6:45 बजे कोलशेत रोड से एक 16 वर्षीय लड़की अपनी सहेली के साथ बिना किसी को बताए घर से निकल गई। देर तक घर वापस न लौटने पर परिजनों ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन दोनों का कोई पता नहीं चल सका।
परिवार की शिकायत के बाद कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों लड़कियों को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका है। इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मंजुषा भोंगले के मार्गदर्शन में की जा रही है।
11 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला भी दर्ज
इस घटना से पहले 6 मार्च को ठाणे के श्रीनगर थाना क्षेत्र से एक 11 वर्षीय लड़का लापता हो गया था। बताया जा रहा है कि वह अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने के लिए घर से बाहर गया था, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटा।
काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने श्रीनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने वेंकट नामक एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया है।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है और लापता बच्चों की तलाश जारी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से ठाणे में अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
मुंबई: हाल ही में शुरू की गई कोस्टल रोड की ‘मेलोडी रोड’(Mumbai Coastal Road) अब विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। इस सड़क पर लगाए गए विशेष म्यूजिकल पैच के कारण जब वाहन गुजरते हैं तो सड़क से “जय हो” की धुन बजती है। इस अनोखे प्रयोग का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था और कई वाहन चालकों को यह अनुभव काफी रोचक भी लगा।
लेकिन अब समुद्र किनारे बसे पॉश इलाके ब्रीच कैंडी के स्थानीय निवासियों ने इस पहल पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सड़क पर बजने वाली यह धुन लगातार सुनाई देती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को ध्वनि प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस इलाके में प्रसिद्ध ब्रीच कैंडी अस्पताल के साथ-साथ कई उद्योगपतियों और राजनेताओं के आवास भी स्थित हैं।
एक महीने में ही बढ़ी शिकायतें
कोस्टल रोड पर ‘मेलोडी रोड’ शुरू हुए अभी करीब एक महीना ही हुआ है, लेकिन इस दौरान ही स्थानीय लोगों की शिकायतें सामने आने लगी हैं। ब्रीच कैंडी एएलएम (एरिया लोकल मैनेजमेंट) और ब्रीच कैंडी रेजिडेंट्स फोरम ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और मुंबई महानगरपालिका को पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी जाहिर की है।
करीब 650 परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन संगठनों का कहना है कि कोस्टल रोड पर उत्तर दिशा की ओर जाने वाले मार्ग पर बजने वाली यह धुन सीधे रिहायशी इलाकों तक सुनाई देती है। इससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है और कई निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह से देर रात तक सुनाई देता है संगीत
निवासियों के अनुसार यह धुन सुबह लगभग 6 बजे से लेकर आधी रात तक सुनाई देती रहती है। ऐसे में लोगों के लिए खिड़कियां खुली रखना मुश्किल हो जाता है, खासकर बुजुर्गों के लिए यह समस्या और अधिक बढ़ जाती है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि कोस्टल रोड पर पहले से ही तेज रफ्तार वाहनों के कारण शोर अधिक रहता है और अब इस म्यूजिकल रोड के कारण ध्वनि प्रदूषण और बढ़ गया है।
सुरक्षा को लेकर भी जताई चिंता
स्थानीय संगठनों ने यह भी आशंका जताई है कि यह सड़क तेज रफ्तार वाहनों के लिए बनाई गई है, ऐसे में सड़क से निकलने वाला संगीत ड्राइवरों का ध्यान भटका सकता है और इससे सड़क सुरक्षा को खतरा भी पैदा हो सकता है। इसके अलावा इलाके में अस्पताल और स्कूल होने के कारण मरीजों, छात्रों और बुजुर्गों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बीएमसी करेगी डेसिबल स्तर की जांच
शिकायत मिलने के बाद मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ‘मेलोडी रोड’ से होने वाले शोर की जांच करने का निर्णय लिया है। बीएमसी अधिकारियों के अनुसार कोस्टल रोड के आसपास की रिहायशी इमारतों में ध्वनि का डेसिबल स्तर मापा जाएगा।
सुरक्षा पर भाषण, जमीनी हकीकत पर सवाल; कर्मचारियों को दिए गए नियमों के पालन के निर्देश
भिवंडी: भिवंडी में बिजली वितरण कंपनी टोरेंट पावर लिमिटेड द्वारा विद्युत सुरक्षा सप्ताह मनाया गया, जिसमें कर्मचारियों को बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी गई। हालांकि इस कार्यक्रम के बीच शहर में लगातार सामने आ रहे बिजली हादसों और असुरक्षित बिजली व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान ठाणे-2 के विद्युत निरीक्षक राजेश यादव ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्युत सुरक्षा केवल कागजी नियम नहीं है, बल्कि इसे कर्मचारियों की दैनिक कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाना जरूरी है। उन्होंने टोरेंट पावर द्वारा सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।
सुरक्षा नियमों पर जोर
सहायक विद्युत निरीक्षक अर्जुन जाधव ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सुरक्षा) विनियम 2023 के तहत निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कर्मचारियों को मरम्मत से पहले बिजली आपूर्ति बंद करने, व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करने और लॉकआउट–टैगआउट प्रक्रिया अपनाने जैसे कई सुरक्षा उपायों की जानकारी दी।
टोरेंट पावर की जिम्मेदारी पर सवाल
कार्यक्रम में सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया गया, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि भिवंडी के कई इलाकों में खुले बिजली के तार, पुराने ट्रांसफॉर्मर और असुरक्षित पोल अब भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
नागरिकों का कहना है कि अगर सुरक्षा नियम इतने महत्वपूर्ण हैं, तो शहर में बार-बार होने वाली बिजली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
अधिकारियों ने दिया सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
विद्युत निरीक्षक ने कहा कि अधिकांश बिजली दुर्घटनाएं जागरूकता, अनुशासन और सुरक्षा नियमों के पालन से रोकी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित कार्यस्थल बनाए रखना हर कर्मचारी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में टोरेंट पावर के जनरल मैनेजर राणे और कुलकर्णी ने अधिकारियों का आभार व्यक्त किया और कंपनी में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का भरोसा दिया।
कार्यक्रम का समापन सेफ्टी गैलरी के दौरे और कर्मचारियों के साथ संवाद के साथ हुआ, जिसमें बिजली सुरक्षा के प्रति लगातार जागरूक रहने का संदेश दिया गया।
असुरक्षित बिजली खंभों से बड़ा हादसा होने की आशंका, क्या महावितरण(Mahavitaran) को खबर भी है?
सातारा: महाराष्ट्र के सातारा जिले के पाटण तालुका में नदी किनारे चल रहे बड़े पैमाने पर मिट्टी उत्खनन ने एक गंभीर खतरा खड़ा कर दिया है। उत्खनन के कारण खेती और घरों को बिजली देने वाले सैकड़ों बिजली के खंभे बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। कई जगह खंभों के चारों ओर की मिट्टी पूरी तरह हटा दी गई है, जिससे वे जमीन में मजबूती से टिके रहने के बजाय हवा में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बरसात में बाढ़ या तेज बारिश हुई तो ये खंभे कभी भी गिर सकते हैं। ऐसे में न केवल बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है, बल्कि करंट फैलने से लोगों और पशुओं की जान पर भी खतरा मंडरा सकता है।
नदी किनारे बड़े पैमाने पर उत्खनन
जानकारी के मुताबिक पाटण तालुका के नदी किनारे कई इलाकों में भारी मात्रा में मिट्टी निकाली जा रही है। उत्खनन के दौरान कई जगह शेतीपंप और घरों को बिजली देने वाले खंभों के आसपास की मिट्टी पूरी तरह हटा दी गई है।
परिणाम यह हुआ कि कई बिजली के खंभे अब हवा में खड़े दिखाई दे रहे हैं और किसी भी समय गिर सकते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसे सैकड़ों खंभे क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महावितरण को इस बारे में जानकारी है? और अगर है तो अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
मिट्टी उत्खनन के लिए आमतौर पर राजस्व विभाग, वन विभाग, सिंचन विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग सहित कई विभागों से अनुमति और ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ लेना जरूरी होता है।
लेकिन इस मामले में यह सवाल उठ रहा है कि क्या महावितरण से अनुमति ली गई थी या उन्हें इसकी जानकारी दी गई थी? अगर नहीं, तो यह प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।
बाढ़ के समय बढ़ सकता है खतरा
इस इलाके के कई बिजली खंभे कोयना नदी की बाढ़ रेखा के नीचे आते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में अगर नदी में बाढ़ आती है या तेज बारिश होती है, तो इन खंभों के गिरने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा।
अगर खंभे गिरते हैं तो बिजली की तारें टूटकर जमीन या पानी में गिर सकती हैं, जिससे आसपास के लोगों, किसानों और पशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। खासकर अगर करंट पानी में फैल गया तो बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता।
शॉर्ट सर्किट और आग का भी खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर खंभे कमजोर हो जाएं तो तेज हवा या तूफान में गिर सकते हैं। इससे बिजली की तारें आपस में टकराकर शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं।
ऐसी स्थिति में पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे किसानों, गांव वालों और स्थानीय व्यवसायों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
खंभों को फिर से लगाने का खर्च कौन उठाएगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन खतरनाक हो चुके खंभों को दोबारा सुरक्षित तरीके से लगाने की जिम्मेदारी किसकी होगी। आम तौर पर एक बिजली खंभे को लगाने में 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च आता है।
ऐसे में अगर सैकड़ों खंभों को दोबारा लगाना पड़ा तो इसके लिए काफी बड़ा बजट लगेगा। यह खर्च महावितरण उठाएगा या उत्खनन करने वालों से वसूला जाएगा, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।
पर्यटन और नदी के प्रवाह पर भी असर
कोयना नदी के किनारे कृषि पर्यटन और जल पर्यटन विकसित करने की योजनाएं भी चल रही हैं। कई लोगों ने नदी किनारे पर्यटन प्रोजेक्ट, होटल और अन्य व्यवसाय शुरू करने की तैयारी की है।
लेकिन नदी से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकालने से नदी का प्रवाह बदल सकता है, जिससे नावों और जल पर्यटन गतिविधियों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत जांच कर उत्खनन पर नियंत्रण लगाया जाए और बिजली के खंभों को सुरक्षित किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 क्या कहता है?
भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि से बिजली के खंभे, तार या अन्य विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचता है, तो बिजली वितरण कंपनी उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी और आर्थिक कार्रवाई कर सकती है।
ऐसे मामलों में क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत या पुनर्स्थापना का पूरा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जा सकता है।
अगर मामला गंभीर पाया जाता है तो दोषी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। इस कानून के तहत सार्वजनिक बिजली संपत्ति को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना, नुकसान की भरपाई और कुछ मामलों में जेल की सजा का भी प्रावधान है।