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  • Employment News: रेलवे ग्रुप-D भर्ती 2026: एक ही ज़ोन के लिए होगा आवेदन, जानें आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और फीस

    Employment News: रेलवे ग्रुप-D भर्ती 2026: एक ही ज़ोन के लिए होगा आवेदन, जानें आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और फीस

    नई दिल्ली: भारतीय रेलवे द्वारा ग्रुप-D के 21,997 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार केवल एक ही रेलवे ज़ोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि कोई अभ्यर्थी एक से अधिक ज़ोन के लिए आवेदन करता है, तो उसका फॉर्म रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, एक ही ज़ोन के अंतर्गत उम्मीदवार एक से अधिक पदों के लिए वरीयता क्रम देकर आवेदन कर सकता है, जिसके लिए अलग फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी।

    केवल एक ही फॉर्म भरा जा सकेगा

    उम्मीदवार केवल एक ही रेलवे ज़ोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि किसी उम्मीदवार ने एक से अधिक ज़ोन के लिए आवेदन किया, तो उसका फॉर्म रद्द कर दिया जाएगा।
    हालांकि, एक ही ज़ोन के भीतर एक से अधिक पदों के लिए आवेदन किया जा सकता है, जिसके लिए उम्मीदवार को वरीयता क्रम (Preference Order) देना होगा। इसके लिए अलग से कोई आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।


    आयु सीमा क्या है?

    इस भर्ती के लिए 18 से 33 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।
    आयु की गणना 1 जनवरी 2026 के अनुसार की जाएगी।

    आयु में छूट:

    • OBC: 3 वर्ष
    • SC/ST: 5 वर्ष

    खुला वर्ग / EWS:
    उम्मीदवार का जन्म 2 जनवरी 1993 से 1 जनवरी 2008 के बीच होना चाहिए।


    चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

    चयन प्रक्रिया निम्न चरणों पर आधारित होगी:

    1. सिंगल स्टेज कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT)
    2. शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET)
    3. दस्तावेज़ सत्यापन
    4. चिकित्सीय परीक्षण

    लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को ही शारीरिक परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा।


    परीक्षा का स्वरूप

    • परीक्षा अवधि: 90 मिनट
    • कुल प्रश्न: 100

    विषयवार प्रश्न:

    • सामान्य विज्ञान: 25 प्रश्न
    • गणित: 25 प्रश्न
    • बुद्धिमत्ता (रीजनिंग): 30 प्रश्न
    • सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक घटनाएं: 20 प्रश्न

    नेगेटिव मार्किंग

    प्रत्येक गलत उत्तर पर 1/3 (एक-तिहाई) अंक काटे जाएंगे।


    न्यूनतम उत्तीर्ण प्रतिशत

    • UR / EWS: 40%
    • OBC / SC / ST: 30%

    शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की शर्तें

    पुरुष उम्मीदवारों के लिए:

    • 35 किलोग्राम वजन उठाकर 100 मीटर दूरी 2 मिनट में पूरी करनी होगी।
    • 1000 मीटर दौड़ 4 मिनट 15 सेकंड में पूरी करनी होगी।

    महिला उम्मीदवारों के लिए:

    • 20 किलोग्राम वजन उठाकर 100 मीटर दूरी 2 मिनट में पूरी करनी होगी।
    • 1000 मीटर दौड़ 5 मिनट 40 सेकंड में पूरी करनी होगी।

    वेतन और आवेदन शुल्क

    वेतन:

    • ₹18,000 प्रति माह (लेवल-1 पे स्केल) + अन्य भत्ते

    आवेदन शुल्क:

    परीक्षा में शामिल होने पर पूरा ₹250 रिफंड

    जनरल / OBC / EWS: ₹500

    परीक्षा में शामिल होने पर ₹400 रिफंड

    SC / ST / महिला / EBC: ₹250

  • Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    Ajit Pawar Death: NCP at Crossroads, Sharad Pawar Emerges as Bhishma Pitamah: शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभरकर आएंगे

    अजित पवार के असामयिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर फैसला इतिहास लिख सकता है। उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख के रूप में अजित पवार केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि सत्ता संतुलन की धुरी थे। उनके जाने के बाद न केवल पार्टी, बल्कि पूरी महायुति और विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक भूचाल आ गया है।

    इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद शरद पवार एक बार फिर एनसीपी के भीष्म पितामह की भूमिका में उभर आए हैं। भले ही अजित पवार की बगावत के बाद एनसीपी दो गुटों में बंटी हो, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार और पार्टी—दोनों के सबसे वरिष्ठ मार्गदर्शक के रूप में शरद पवार की ओर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

    क्या होगा अजित पवार गुट का भविष्य?

    सबसे बड़ा और निर्णायक सवाल यही है कि अब अजित पवार की एनसीपी का रास्ता क्या होगा? क्या यह गुट स्वतंत्र पहचान बनाए रख पाएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराते हुए दोनों एनसीपी का विलय होगा?

    महानगरपालिका चुनाव के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी को हराने के लिए अजित पवार का शरद पवार के साथ आना कोई सामान्य राजनीतिक घटना नहीं थी। तभी से यह संकेत मिलने लगे थे कि दोनों गुटों के बीच जमी बर्फ पिघल रही है। खुद अजित पवार ने भी एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि कार्यकर्ता एकजुटता चाहते हैं और सही समय पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।
    अब वही “सही समय” नियति ने तय कर दिया है।

    41 विधायक, एक सांसद और सत्ता की चाबी

    फिलहाल अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 41 विधायक और लोकसभा में एक सांसद—सुनील तटकरे—हैं। यह संख्या किसी भी गठबंधन सरकार को बनाने या गिराने की ताकत रखती है। यही वजह है कि बीजेपी, शिंदे सेना और शरद पवार—तीनों खेमे इस गुट पर नज़र गड़ाए बैठे हैं।

    अगर दोनों गुटों का विलय होता है तो सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल डिप्टी सीएम पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर सकते हैं। लेकिन यह राह आसान नहीं होगी। इसके लिए उन्हें प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे जैसे कद्दावर नेताओं का भरोसा जीतना होगा—जो कभी अजित पवार के सबसे विश्वस्त सिपहसालार रहे हैं।

    पटेल–तटकरे–भुजबल: किंगमेकर की भूमिका

    अजित पवार के बाद उनके गुट में सबसे मजबूत स्तंभ प्रफुल पटेल और सुनील तटकरे हैं। दोनों नेताओं ने एनसीपी के विभाजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी। अब वही नेता तय करेंगे कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा—शरद पवार की छांव में या बीजेपी के साथ सत्ता के केंद्र में।

    इसके अलावा छगन भुजबल जैसे अनुभवी नेता भी इस राजनीतिक शतरंज के अहम मोहरे हैं। उनका एक कदम कई समीकरणों को उलट सकता है।

    सुनेत्रा पवार की अग्निपरीक्षा

    अजित पवार के निधन के बाद सबसे कठिन परीक्षा उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के सामने है। निजी शोक और राजनीतिक जिम्मेदारी—दोनों का बोझ एक साथ उठाना आसान नहीं होगा। राज्यसभा सांसद होने के नाते वे पहले ही संसद में मौजूद हैं, लेकिन अब उन्हें पार्टी की विरासत को संभालने का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

    राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि बीजेपी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दे सकती है। इससे एक ओर अजित समर्थकों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहेगा, तो दूसरी ओर महायुति की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। साथ ही कैबिनेट में एक महिला चेहरे की एंट्री भी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी हो सकती है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला शिंदे सेना से विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

    पार्थ और जय पवार: उत्तराधिकार का संकट

    अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार पहले ही जमीन घोटाले के आरोपों और 2019 की लोकसभा हार के चलते कमजोर स्थिति में हैं। ऐसे में उन्हें तत्काल बड़ी जिम्मेदारी मिलना मुश्किल माना जा रहा है। छोटे बेटे जय पवार राजनीति में अभी सक्रिय नहीं हैं।
    इस हालात में शरद पवार की भूमिका निर्णायक हो जाती है। माना जा रहा है कि उनकी सहमति और मार्गदर्शन के बिना पवार परिवार और एनसीपी का कोई भी बड़ा फैसला संभव नहीं है।

    अजित पवार का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक युगांतकारी क्षण है। आने वाले दिनों में तय होगा कि एनसीपी फिर से एकजुट होकर नई ताकत बनेगी या इतिहास के पन्नों में बिखर जाएगी। इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम की धुरी—एक बार फिर—शरद पवार ही होंगे।

  • Maharashtra News : आज सुबह बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान में लैंडिंग के समय लगी भीषण आग से हुई मौत

    Maharashtra News : आज सुबह बारामती में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान में लैंडिंग के समय लगी भीषण आग से हुई मौत

    बारामती। आज सुबह बारामती, महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान ने लैंडिंग के समय भारी दुर्घटना का सामना किया। विमान क्रैश होते ही भीषण आग लग गई और उसके मलबे से धुआँ उठता हुआ देखा गया। यह हादसा एयरपोर्ट के लगभग खेत के पास सामने आया जहाँ विमान लैंड करने की कोशिश कर रहा था। मौके पर पुलिस, जिला प्रशासन और आपदा प्रतिक्रिया टीम तुरंत पहुंच चुकी हैं और राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया है। जहां महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई. 

    🚨 अजित पवार की स्थिति
    प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार वे बारामती में होने वाली एक भारी जनसभा कार्यक्रम के लिए आ रहे थे।महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी नेता और डिप्टी सीएम अजित पवार का निजी विमान दुर्घटना में मौत हो गई है. लैंडिंग के दौरान विमान हादसा हुआ, जिसमें अजित पवार सहित विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई. 

    🧯 बचाव कार्य और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    • पुलिस और फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पाने के लिए कार्य शुरू कर दिया है।
    • जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन अधिकारी स्थल पर पहुंचकर राहत प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।

    📰 आगे क्या होने वाला है

    सरकारी सूत्रों और अधिकारियों की तरफ से अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन केंद्रीय और राज्य स्तर पर जांच शुरू होने की उम्मीद है।

    छह बार डिप्टी सीएम बनने वाले अजित पवार का सियासी सफर, सत्ता के हर समीकरण में निभाई अहम भूमिका


    महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का नाम उन नेताओं में शुमार है, जिन्होंने सत्ता के बदलते दौर में खुद को हर बार प्रासंगिक बनाए रखा। रणनीतिक फैसलों, संगठन पर पकड़ और निर्णायक राजनीति के चलते वे अब तक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे।

    अजित पवार पहली बार नवंबर 2010 में उपमुख्यमंत्री बने। इसके बाद उसी वर्ष दूसरी बार उन्हें यह जिम्मेदारी मिली। इसके बाद 2019 में उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, हालांकि यह सरकार अल्पकालिक रही।

    जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी, तब भी अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 2023 में राजनीतिक समीकरण बदले और वे शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर एक बार फिर डिप्टी सीएम बने।
    2024 में वे छठी बार उपमुख्यमंत्री बने, जो महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई।


    2022 में आया सियासी टर्निंग पॉइंट, चाचा से अलग चुनी अपनी राह

    अजित पवार ने राजनीति में कदम अपने चाचा शरद पवार के मार्गदर्शन में रखा था, लेकिन 2022 में उनके राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा मोड़ आया।
    जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में आगे बढ़ाना शुरू किया, तब अजित पवार ने अपनी अलग राजनीतिक राह चुनने का फैसला किया।

    उन्होंने एनसीपी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल होने का कदम उठाया।
    2023 में अजित पवार ने पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़ बनाई और एनसीपी के नेतृत्व पर नियंत्रण स्थापित किया।
    2024 में वे सत्ता में अपनी स्थिति को और मजबूत करने में सफल रहे और खुद को महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली केंद्र के रूप में स्थापित किया।


    महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत पकड़

    लंबे राजनीतिक अनुभव और सत्ता के गलियारों की गहरी समझ के चलते अजित पवार ने खुद को केवल एक नेता नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया।
    उनका सियासी सफर यह दर्शाता है कि वे बदलते राजनीतिक हालात में भी निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता रखते थे।

  • Uttar Pradesh Divas: भिवंडी में उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का भव्य आयोजन, सभी दलों के दिग्गज आए एक मंच पर

    Uttar Pradesh Divas: भिवंडी में उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का भव्य आयोजन, सभी दलों के दिग्गज आए एक मंच पर

    भिवंडी। उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर उत्तर भारतीय समाज सेवा संस्था (रजि.) की ओर से भिवंडी के मानसरोवर स्थित महाराजा गार्डन में आयोजित भव्य कार्यक्रम ने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोगों की उपस्थिति ने उत्तर भारतीय समाज की एकता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

    बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का आयोजन होता रहा है, लेकिन इस बार कार्यक्रम किसी राजनीतिक दल के बैनर तले न होकर समाज के तत्वावधान में आयोजित होने के कारण हर वर्ग और हर विचारधारा के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। आयोजन स्थल पर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा उत्तर प्रदेश भिवंडी में उमड़ आया हो। हर ओर उत्साह, जयकारे, लोक-संस्कृति और भाईचारे का वातावरण दिखा।

    सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

    प्रसिद्ध भोजपुरी एवं अवधी गायक दीपक सुहाना नाइट के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सैकड़ों लोगों ने खड़े होकर आनंद लिया। इस दौरान राकेश तिवारी ‘बबलू’ और अनामिका त्रिपाठी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    एक मंच पर जुटे सभी राजनीतिक दलों के नेता

    कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इस विशाल मंच पर विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता एक साथ उपस्थित रहे। मुख्य अतिथियों में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कपिल पाटिल, बोरीवली विधायक संजय उपाध्याय, भिवंडी पश्चिम विधायक महेश चौघुले, शिवसेना के पूर्व विधायक रूपेश म्हात्रे, पूर्व उपमहापौर व नगरसेवक मनोज काटेकर, यादव संघ मुंबई अध्यक्ष व सपा प्रदेश उपाध्यक्ष अजय यादव, भिवंडी भाजपा अध्यक्ष रवि सावंत शामिल थे।

    इसके साथ ही नवनिर्वाचित नगरसेवक बालाराम चौधरी, निलेश चौधरी, सुमित पाटिल, राजू चौघुले, क्षमा मनोज सिंह, नितेश ऐनकर, राजेश शेट्टी, मेहुल पाटिल, गीता बिठोबा नाईक, एड. वैभव भोईर, भाजपा महिला अध्यक्ष कल्पना शर्मा, भिवंडी सपा अध्यक्ष अनस अंसारी, तारिक फारुकी, शहर शिवसेना (उबाठा) प्रमुख मनोज गगे सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

    नेताओं के विचार

    बोरीवली विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि उत्तर भारतीय समाज ने अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से अपनी पहचान बनाई है। साथ ही उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की पावन धरती महाराष्ट्र और मुंबई ने सभी को आगे बढ़ने का अवसर दिया है, इसलिए यहां की संस्कृति और लोगों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करने के लिए ऐसे आयोजन जरूरी हैं।
    भिवंडी विधायक महेश चौघुले ने कहा कि उत्तर भारतीय समाज देशभर में फैला हुआ है और धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र की रक्षा में हमेशा अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक जीवन में उत्तर भारतीय समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
    पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल पाटिल
    ने उत्तर प्रदेश के विकास की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश आज तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने भिवंडी में उत्तर भारतीय भवन की स्थापना के लिए हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।

    समाज के प्रबुद्धजनों का सम्मान

    उत्तर भारतीय समाज सेवा संस्था की ओर से डॉक्टर, प्रिंसिपल, वकील, पत्रकार और विभिन्न जातीय संगठनों के अध्यक्षों का स्मृति चिन्ह, पुष्पगुच्छ और गमछा देकर सम्मान किया गया। संस्था अध्यक्ष कृष्णगोपाल सिंह (दादा ठाकुर), एड. प्रवीण मिश्रा, मनोज सिंह, उदयराज सिंह, रामशंकर केसरवानी, सदा प्रकाश सिंह, बालमुकुंद शुक्ला, पीड़ी यादव, पत्रकार गुरुप्रसाद सिंह, एड. आर.आर. त्रिपाठी, सलाहकार अनिल सिंह, डॉ. स्वाति सिंह, युवाध्यक्ष अजीत ठाकुर सहित पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महासचिव संजय दुबे ने किया, जबकि महासचिव जितेंद्र तिवारी ने आभार प्रदर्शन किया।

  • Crime News: पति-पत्नी के झगड़े में बीच-बचाव बना जानलेवा, चाकू घोपकर युवक की हत्या, तीन सगे भाई गिरफ्तार

    Crime News: पति-पत्नी के झगड़े में बीच-बचाव बना जानलेवा, चाकू घोपकर युवक की हत्या, तीन सगे भाई गिरफ्तार

    भिवंडी। भिवंडी के शांतिनगर इलाके में एक मामूली घरेलू विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। पति-पत्नी के झगड़े में बीच-बचाव करना एक युवक के परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। झगड़ा शांत कराने से नाराज़ पति के तीन सगे भाइयों ने मध्यस्थता करने वाले युवक के भाई की बेरहमी से चाकू घोपकर हत्या कर दी। यह सनसनीखेज वारदात न्यू आज़ाद नगर झोपड़पट्टी क्षेत्र में हुई।

    पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान दिलशाद मकबूल अहमद शाह (23) के रूप में हुई है। मामले में शिकायतकर्ता गुलजार मकबूल अहमद शाह (25) ने बताया कि उसकी मौसेरी बहन और उसके पति के बीच विवाद हो रहा था। गुलजार ने बीच-बचाव कर दोनों के बीच झगड़ा शांत कराया था।

    बदले की नीयत से की गई साजिश

    यह हस्तक्षेप पति के भाइयों को नागवार गुज़रा। बदला लेने की नीयत से उन्होंने गुलजार के भाई दिलशाद को निशाना बनाया। आरोप है कि आसिफ अब्दुलहकीम शाह, अलीहसन अब्दुलहकीम शाह और मुजफ्फर अब्दुलहकीम शाह ने आपसी मिलीभगत से साजिश रची। शांतिनगर स्थित निजामिया होटल के पास आरोपियों ने दिलशाद पर हमला कर दिया। आसिफ ने लोहे के धारदार चाकू से दिलशाद पर ताबड़तोड़ वार किए। जब गुलजार अपने भाई को बचाने दौड़ा, तो मुजफ्फर ने उस पर लोहे के पाइप से हमला कर उसे भी घायल कर दिया।

    अस्पताल में घोषित किया गया मृत

    घटना की सूचना मिलते ही शांतिनगर पुलिस मौके पर पहुंची और खून से लथपथ दिलशाद को तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर जांच शुरू कर दी है। शांतिनगर पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक विनायक गायकवाड ने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। आगे की जांच जारी है। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और स्थानीय लोग इस नृशंस हत्या की कड़ी निंदा कर रहे हैं।

  • UGC कानून पर हर समाज ने दर्ज कराया अपना विरोध

    UGC कानून पर हर समाज ने दर्ज कराया अपना विरोध

    बिहार के हाजीपुर में UGC के नए कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते अगड़ी जाति के लोग

    यूजीसी एक्ट 2026 के विरोध में रांची की सड़कों पर उतरे छात्र, केंद्र सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन

    छात्रों का प्रदर्शन, यूजीसी के नए नियमों का विरोध:शिक्षा सुधार के नाम पर थोपे गए कानून वापस लेने की मांग

    देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सवर्ण समाज इसके विरोध में सड़को पर उतर आया और उच्चाधिकारियों को लिखित रूप में ज्ञापन भी सौंपे।

    राजस्थान में UGC के अन्यायी कानूनों के विरोध में सभी सवर्णो ने बच्चों के भविष्य के खातिर अपने अपने स्तर पर इस विरोध के रुप में 1 फरवरी को भारत बंद का एलान किया है।

    यूजीसी कानून के विरोध में कानपुर में प्रदर्शन:छात्रों ने काली पट्टी बांधकर रैली निकाली, कानून वापस लेने की मांग

  • Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    सुजीत मिश्र | मुंबई।
    मुंबई की लोकल ट्रेनें अब सिर्फ सफर का जरिया नहीं रहीं, बल्कि दिनदहाड़े अपराध की चलती-फिरती प्रयोगशाला बन चुकी हैं। पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों में कानून, सुरक्षा और इंसानियत—तीनों का सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार हो चुका है। गुरुवार, 22 जनवरी को बोरीवली जाने वाली स्लो लोकल में मलाड रेलवे स्टेशन पर मामूली बहस ने वह भयावह मोड़ लिया, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। 33 वर्षीय प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह की चलती ट्रेन में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई।

    यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सरकारी नाकामी का खून से लिखा दस्तावेज़ है। आरोपी 27 वर्षीय ओमकार शिंदे की गिरफ्तारी अगले दिन हो गई, लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी का नहीं—सवाल यह है कि ऐसे कातिल लोकल ट्रेनों में बेखौफ कैसे घूम रहे हैं?

    मुंबई लोकल में अब अकेले यात्री नहीं चलते—गुंडों के झुंड चलते हैं। ये गिरोह तय करते हैं कि कौन चढ़ेगा, कौन उतरेगा और कौन ज़िंदा बचेगा। विरोध किया तो मारपीट, लूट और अब हत्या तय है। विकलांग डिब्बों तक पर दबंगों और माफियाओं का कब्ज़ा है, जहाँ असल में दिव्यांग यात्रियों की एंट्री ही मुश्किल हो चुकी है। यह अव्यवस्था नहीं, बल्कि संस्थागत अपराध है।

    रेलवे के उच्चाधिकारी और कमर्शियल विभाग या तो गहरी नींद में हैं या जानबूझकर आँखें मूंदे बैठे हैं। न नियमित पेट्रोलिंग, न अपराधियों पर सख़्त लगाम। बीते साल महिला डिब्बे में मारपीट का वीडियो वायरल हुआ, चेतावनियाँ दी गईं—लेकिन प्रशासन ने खून बहने तक इंतज़ार किया।

    मृतक आलोक कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र के पड़रछा गाँव के निवासी थे और मुंबई के प्रतिष्ठित एन.एम. कॉलेज, विले पार्ले में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। एक शिक्षक, एक शिक्षित नागरिक अगर लोकल ट्रेन में सुरक्षित नहीं है, तो मजदूर, छात्र और महिला यात्रियों की सुरक्षा का दावा कौन करेगा?

    सीधा सवाल, सीधा आरोप—
    क्या मुंबई लोकल अब अपराधियों के लिए फ्री ज़ोन बन चुकी है?
    क्या रेलवे प्रशासन को चेतना सिर्फ लाशों की गिनती से आती है?

    यह घटना चेतावनी नहीं, अंतिम अलार्म है। अगर अब भी सख़्त और दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली मौत किसी और की होगी—और जिम्मेदार फिर भी कोई नहीं होगा।

  • Public Politics:नवी मुंबई मनपा चुनाव में दल-बदल करने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकारा

    Public Politics:नवी मुंबई मनपा चुनाव में दल-बदल करने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकारा

    पार्टी बदलकर टिकट लेने की रणनीति उलटी पड़ी, अधिकांश उम्मीदवारों को हार

    नवी मुंबई: नवी मुंबई महानगरपालिका (मनपा) चुनाव से पहले बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने अपनी पुरानी पार्टी की निष्ठा छोड़कर दूसरे दलों से चुनाव लड़ने का रास्ता चुना। चुनाव की पूर्व संध्या पर टिकट पाने के लिए किया गया यह राजनीतिक दल-बदल इस बार मतदाताओं को रास नहीं आया। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि जनता ने ऐसे राजनीतिक अवसरवाद को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

    चुनाव नतीजों में यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि अंतिम समय में पार्टी बदलने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा। मतदाताओं ने विचारधारा में अचानक आए इस बदलाव को स्वीकार नहीं किया और ऐसे उम्मीदवारों को समर्थन देने से इनकार कर दिया।


    ऐरोली में मढ़वी परिवार को बड़ा झटका

    दल-बदल से सबसे बड़ा झटका ऐरोली विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला। मनोहर उर्फ एम. के. मढ़वी, जो नवी मुंबई में शिवसेना (ठाकरे गुट) के प्रमुख नेतृत्व के रूप में पहचाने जाते थे, आचार संहिता लागू होने के कुछ ही दिनों के भीतर अपने परिवार के साथ शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए थे।

    हालांकि, चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे। इस चुनाव में:

    • एम. के. मढ़वी
    • उनकी पत्नी विनया मढ़वी (वार्ड 5D)
    • बहू तेजश्री करण मढ़वी (वार्ड 5A)

    तीनों को ही हार का सामना करना पड़ा, जिससे यह संकेत मिला कि मतदाताओं ने परिवार सहित किए गए दल-बदल को स्वीकार नहीं किया।


    भाजपा में शामिल हुए विठ्ठल मोरे के बेटे को भी हार

    इसी तरह, नवी मुंबई से शिवसेना (ठाकरे गुट) के वरिष्ठ नेता विठ्ठल मोरे ने नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया था। यह कदम उन्होंने अपने बेटे के लिए टिकट सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया था।

    हालांकि, उनके बेटे अवधूत मोरे (वार्ड 17D) को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जिससे यह साफ हुआ कि केवल पार्टी बदलकर टिकट हासिल करना मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सका।


    सानपाड़ा में भी नहीं चला दल-बदल का दांव

    सानपाड़ा मंडल में भी इसी तरह का नतीजा देखने को मिला। पूर्व पार्षद सोमनाथ वास्कर (वार्ड 19A) और उनकी पत्नी कोमल वास्कर (वार्ड 19B) ने शिवसेना (ठाकरे गुट) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश किया था।

    लेकिन दोनों को ही अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिला और चुनाव परिणाम उनके खिलाफ रहे।


    मतदाताओं का स्पष्ट संदेश

    नवी मुंबई मनपा चुनाव के नतीजों ने यह साफ संदेश दिया है कि मतदाता सिद्धांत और निष्ठा को महत्व देते हैं। अंतिम समय में पार्टी बदलने वाले उम्मीदवारों को जनता ने नकार दिया और यह साबित कर दिया कि केवल सत्ता या टिकट की राजनीति के लिए किया गया दल-बदल अब स्वीकार्य नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिणाम भविष्य के चुनावों में राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

  • Business News:आयुष मधुसूदन अग्रवाल की इंस्पायरा ग्लोबल करेगी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया का अधिग्रहण

    Business News:आयुष मधुसूदन अग्रवाल की इंस्पायरा ग्लोबल करेगी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया का अधिग्रहण

    ₹70 प्रति शेयर पर खरीदी जाएगी नियंत्रण हिस्सेदारी, बर्गर किंग® इंडिया को मिलेगा नया प्रमोटर

    मुंबई: क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में एक बड़े कॉरपोरेट सौदे के तहत आयुष मधुसूदन अग्रवाल द्वारा प्रवर्तित इंस्पायरा ग्लोबल (Inspira Global), रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया लिमिटेड (RBA) में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी। आरबीए भारत में बर्गर किंग® और इंडोनेशिया में बर्गर किंग® एवं पोपायज़® ब्रांड का संचालन करती है।

    इस संबंध में आरबीए और उसकी मौजूदा प्रमोटर कंपनी क्यूएसआर एशिया प्राइवेट लिमिटेड (जिसमें एवरस्टोन कैपिटल की बहुलांश हिस्सेदारी है) ने आज निश्चित समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह लेनदेन आवश्यक नियामकीय और शेयरधारक मंजूरियों के अधीन होगा।


    ₹70 प्रति शेयर पर अधिग्रहण, 10% प्रीमियम

    घोषणा के अनुसार, यह अधिग्रहण ₹70 प्रति शेयर की दर से किया जाएगा, जो आरबीए के मौजूदा क्लोजिंग प्राइस की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाता है। इस सौदे का उद्देश्य कंपनी की दीर्घकालिक विकास योजनाओं को मज़बूती देना है।

    प्रस्तावित लेनदेन के साथ ही क्यूएसआर एशिया प्रा. लि. का आरबीए से पूर्ण रूप से एग्ज़िट हो जाएगा, जो उसके नियोजित निवेश चक्र के अनुरूप है।


    ₹1,900 करोड़ से अधिक का नया निवेश प्रस्तावित

    इस अधिग्रहण के तहत:

    • क्यूएसआर एशिया की 11.26% हिस्सेदारी लगभग ₹460 करोड़ में खरीदी जाएगी
    • ₹900 करोड़ का निवेश इक्विटी शेयरों के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए किया जाएगा
    • लगभग ₹600 करोड़ का निवेश वारंट्स के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के माध्यम से प्रस्तावित है

    इन लेनदेन के परिणामस्वरूप, सेबी के टेकओवर नियमों के तहत सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर अनिवार्य होगा। यह सौदा सभी सामान्य शर्तों की पूर्ति के अधीन रहेगा, जिसमें प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और अन्य नियामकीय मंजूरियां शामिल हैं।


    लेनेक्सिस फूडवर्क्स के जरिए होगा लेनदेन

    यह लेनदेन लेनेक्सिस फूडवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा, जो इंस्पायरा ग्लोबल की फूड एंड बेवरेज शाखा है। लेनेक्सिस को क्यूएसआर क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है और यह भारत के 45 से अधिक शहरों में 250 से ज्यादा चाइनीज वोक रेस्टोरेंट्स का संचालन करती है।


    आरबीए और इंस्पायरा ग्लोबल की प्रतिक्रिया

    रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के होल-टाइम डायरेक्टर एवं ग्रुप सीईओ राजीव वर्मन ने कहा,

    “हमें आयुष अग्रवाल और इंस्पायरा ग्लोबल का हमारे नए प्रमोटर के रूप में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। उनके दीर्घकालिक पूंजी समर्थन और मजबूत वैल्यू-क्रिएशन ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, हमें विश्वास है कि यह साझेदारी हमारी विकास यात्रा को नई गति देगी।”

    इंस्पायरा ग्लोबल के प्रमोटर आयुष मधुसूदन अग्रवाल ने कहा,

    “हम आरबीए टीम द्वारा अब तक किए गए कार्य का सम्मान करते हैं। यह अधिग्रहण हमारे लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन का अवसर है। हम मौजूदा प्रबंधन टीम के साथ मिलकर आरबीए के विज़न को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”


    QSR सेक्टर में इंस्पायरा ग्लोबल की मजबूत होती मौजूदगी

    यह निवेश उपभोक्ता व्यवसायों पर इंस्पायरा ग्लोबल के फोकस को और सशक्त करता है तथा भारत के उच्च-विकास वाले क्विक सर्विस रेस्टोरेंट सेक्टर में उसकी मौजूदगी को विस्तार देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा आने वाले वर्षों में बर्गर किंग इंडिया के विस्तार और परिचालन क्षमता को नई दिशा दे सकता है।

  • AI WEF:हैदराबाद में खुलेगा L’Oréal का पहला ग्लोबल टेक हब

    AI WEF:हैदराबाद में खुलेगा L’Oréal का पहला ग्लोबल टेक हब

    WEF 2026 में ऐलान, ब्यूटी‑टेक में एआई के नए युग की शुरुआत

    हैदराबाद: दुनिया की सबसे बड़ी ब्यूटी कंपनी L’Oréal (लोरियल) ने भारत के हैदराबाद में अपना पहला ‘ग्लोबल टेक हब’ स्थापित करने की घोषणा की है। इस ऐतिहासिक फैसले का ऐलान वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026, दावोस में L’Oréal के सीईओ निकोलस हिरोनिमस और तेलंगाना सरकार के बीच हुई हाई‑लेवल बैठक के बाद किया गया।

    यह केंद्र दुनिया का पहला ऐसा ‘ब्यूटी‑टेक हब’ होगा, जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज़रिये ब्यूटी और टेक्नोलॉजी को एक साथ जोड़ा जाएगा। इस हब में 2030 तक करीब ₹3,500 करोड़ (लगभग €350 मिलियन) का निवेश किया जाएगा और 2,000 से अधिक हाई‑वैल्यू टेक नौकरियां सृजित होंगी।


    भारत‑फ्रांस नवाचार वर्ष की सबसे बड़ी शुरुआत

    यह साझेदारी ‘2026 भारत‑फ्रांस इनोवेशन ईयर’ की सबसे अहम पहलों में से एक मानी जा रही है। दावोस में हुई बैठक में तेलंगाना सरकार के आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और उद्योग मंत्री श्री डी. श्रीधर बाबू, विशेष मुख्य सचिव श्री संजय कुमार और L’Oréal के सीईओ निकोलस हिरोनिमस मौजूद रहे।

    इस ग्लोबल टेक हब का उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचा विकसित करना नहीं है, बल्कि भारतीय टेक टैलेंट को आगे बढ़ाना भी है। स्थानीय युवाओं को AI, जेनरेटिव AI और एजेंटिक AI जैसी उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे “भारत में रहकर दुनिया के लिए” ब्यूटी‑टेक समाधान विकसित कर सकें।


    2,000 से अधिक हाई‑स्किल नौकरियां

    L’Oréal के अनुसार, हैदराबाद का यह टेक हब आने वाले वर्षों में:

    • AI विशेषज्ञों, डेटा वैज्ञानिकों और टेक इंजीनियरों के लिए 2,000 से अधिक नौकरियां पैदा करेगा
    • बड़े पैमाने पर AI‑ड्रिवन ब्यूटी सॉल्यूशंस की डिलीवरी को तेज़ करेगा
    • डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा ब्यूटी‑टेक केंद्र बनेगा

    यह इंडिया टेक हब, फ्रांस, अमेरिका, चीन और सिंगापुर में स्थित L’Oréal के वैश्विक टेक नेटवर्क के साथ मिलकर काम करेगा और भविष्य की ब्यूटी टेक्नोलॉजी पर संयुक्त रूप से काम करेगा।


    तेलंगाना सरकार की प्रतिक्रिया

    मुख्यमंत्री श्री रेवंत रेड्डी ने कहा,

    “L’Oréal द्वारा हैदराबाद को अपने पहले ग्लोबल टेक हब के लिए चुनना तेलंगाना की नवाचार क्षमता और यहां की कुशल प्रतिभा पर वैश्विक भरोसे को दर्शाता है। यह पहल हमारे ‘तेलंगाना राइजिंग: 2047 विज़न’ को मज़बूती देगी और राज्य को AI व डिजिटल टेक्नोलॉजी का ग्लोबल सेंटर बनाएगी।”

    आईटी एवं उद्योग मंत्री श्री डी. श्रीधर बाबू ने कहा,

    “L’Oréal का यह निर्णय तेलंगाना की टेक और इनोवेशन इकोसिस्टम पर एक बड़ी मुहर है। ब्यूटी सेक्टर को AI, डेटा और इंजीनियरिंग से जोड़कर यह साझेदारी राज्य को डिजिटल उत्कृष्टता का वैश्विक केंद्र बनाने में मदद करेगी।”

    विशेष मुख्य सचिव श्री संजय कुमार ने कहा,

    “L’Oréal का ग्लोबल टेक हब हमारे प्रस्तावित ‘तेलंगाना AI हब’ के लक्ष्य से पूरी तरह मेल खाता है। दोनों मिलकर हैदराबाद को दुनिया के लिए AI‑आधारित समाधान विकसित करने वाला प्रमुख केंद्र बनाएंगे।”


    L’Oréal की वैश्विक रणनीति में भारत की अहम भूमिका

    L’Oréal के सीईओ निकोलस हिरोनिमस ने कहा,

    “भारत के साथ हमारा 31 वर्षों का मजबूत रिश्ता रहा है। हैदराबाद में ग्लोबल टेक हब स्थापित कर हम भारत की बेहतरीन AI और टेक प्रतिभा को अपने वैश्विक मिशन से जोड़ रहे हैं। खूबसूरती का भविष्य विज्ञान, तकनीक और क्रिएटिविटी के संगम में है, और अब हैदराबाद हमारी डिजिटल और AI महत्वाकांक्षाओं का प्रमुख केंद्र होगा।”

    इस घोषणा के साथ L’Oréal ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत उसकी वैश्विक परिवर्तन यात्रा का केंद्र है। आने वाले समय में ब्यूटी‑टेक की नई और आधुनिक तकनीकों का विकास भारत के इनोवेशन से पूरी दुनिया के लिए किया जाएगा।