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  • Wildlife Case: मशहूर लोगों को वन्यजीवों से खेलने की छूट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

    Wildlife Case: मशहूर लोगों को वन्यजीवों से खेलने की छूट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूट्यूबर Elvish Yadav के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यदि लोकप्रिय व्यक्तियों को “बेजुबान पीड़ित” जैसे सांपों का मनोरंजन के लिए उपयोग करने की अनुमति दी जाती है, तो इससे समाज में “बहुत गलत संदेश” जाएगा।

    मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

    क्या कहा अदालत ने?

    न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ एल्विश यादव की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने नोएडा में कथित रेव पार्टी में सांप के जहर के उपयोग से जुड़े मामले में दाखिल आरोपपत्र और आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने सवाल उठाया:

    “क्या लोकप्रिय लोग मनोरंजन के लिए वन्यजीवों(Wildlife) के साथ इस प्रकार का व्यवहार कर सकते हैं? यदि उन्हें ऐसा करने दिया गया तो समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा… क्या आप चिड़ियाघर जाकर जानवरों के साथ खेल सकते हैं? आप यह नहीं कह सकते कि आप जो चाहें करेंगे।”

    अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका मुख्य सरोकार वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत से है।

    क्या है मामला?

    एल्विश यादव के खिलाफ नवंबर 2023 में मामला(Case) दर्ज हुआ था और 17 मार्च 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन के अनुसार पुलिस ने नौ सांप, जिनमें पांच कोबरा शामिल थे, बरामद किए थे। आरोप है कि कथित रेव पार्टियों में सांप के जहर का नशीले पदार्थ की तरह उपयोग किया जाता था।

    आरोपपत्र में दावा किया गया कि ऐसी पार्टियों में विदेशी नागरिकों सहित कई लोग कथित तौर पर सांप के जहर का सेवन करते थे।

    बचाव पक्ष की दलील

    यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्‍ता गुप्ता ने दलील दी कि वे केवल गायक के एक वीडियो में अतिथि के रूप में शामिल हुए थे और किसी रेव पार्टी या प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा कि यादव कथित स्थल पर मौजूद नहीं थे, न ही उनके पास से कोई सांप या नशीला पदार्थ बरामद हुआ।

    आगे क्या?

    सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2024 को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। अब शीर्ष अदालत मामले में दर्ज शिकायत की जांच करेगी और अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

  • Chhattisgarh High Court का विवादित फैसला: ‘योनि पर वीर्यपात बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता’

    Chhattisgarh High Court का विवादित फैसला: ‘योनि पर वीर्यपात बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता’

    बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि केवल योनि के बाहरी हिस्से पर वीर्यपात करना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत ‘बलात्कार’ की श्रेणी में नहीं आता। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बलात्कार की कानूनी परिभाषा में ‘संभोग’ या ‘प्रवेश’ (penetration) का तत्व आवश्यक है।

    अदालत की प्रमुख टिप्पणी

    न्यायालय ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष ‘प्रवेश’ साबित नहीं कर पाता, तो इसे बलात्कार नहीं माना जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी हरकत अन्य धाराओं के तहत दंडनीय हो सकती है, जिनमें यौन उत्पीड़न या महिला की मर्यादा भंग करने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं।

    क्या था मामला?

    मामला एक आपराधिक अपील से जुड़ा था, जिसमें निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने साक्ष्यों और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर पाया कि ‘प्रवेश’ का स्पष्ट प्रमाण नहीं है, इसलिए बलात्कार का आरोप टिक नहीं सकता।

    हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि आरोपित का आचरण आपत्तिजनक और दंडनीय है तथा संबंधित अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    यह फैसला कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और ‘बलात्कार’ की परिभाषा को लेकर बहस छिड़ गई है।

  • निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार का प्रयास’’ माना जाएगा: Supreme Court

    निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार का प्रयास’’ माना जाएगा: Supreme Court

    नई दिल्ली – उच्चतम न्यायालय(Supreme Court) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक विवादास्पद आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना ‘‘बलात्कार का प्रयास’’ माना जाएगा, न कि केवल ‘‘तैयारी’’।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारी की पीठ ने कहा कि आपराधिक न्यायशास्त्र के स्थापित सिद्धांतों का स्पष्ट रूप से गलत प्रयोग किया गया था, इसलिए उच्च न्यायालय का आदेश रद्द किया जाना आवश्यक है।

    🔎 क्या था मामला?

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 17 मार्च, 2025 के आदेश में कहा था कि स्तन पकड़ना और पायजामे की डोरी खींचना बलात्कार का अपराध नहीं, बल्कि केवल उसकी तैयारी है। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 10 फरवरी को सुनवाई की।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि आरोपी व्यक्तियों ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत अपराध करने के पूर्व निर्धारित इरादे से कार्य किया।

    📜 पीओसीएसओ के तहत बहाल हुआ आरोप

    सर्वोच्च न्यायालय(Supreme Court) ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दो आरोपियों के खिलाफ ‘‘बलात्कार के प्रयास’’ का गंभीर आरोप बहाल कर दिया। साथ ही विशेष न्यायाधीश (पीओसीएसओ), कासगंज द्वारा 23 जून, 2023 को पारित मूल समन आदेश को भी बहाल कर दिया गया।

    पीठ ने कहा:

    “आरोपी व्यक्तियों द्वारा किया गया प्रयास स्पष्ट रूप से इस निष्कर्ष की ओर ले जाता है कि शिकायतकर्ता और अभियोजन पक्ष द्वारा बलात्कार के प्रयास के प्रावधानों को लागू करने का मामला बनता है। अतः विवादित निर्णय को रद्द किया जाता है।”

    इस फैसले को यौन अपराधों के मामलों में ‘तैयारी’ और ‘प्रयास’ के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

  • Election Commission of India ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया

    Election Commission of India ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया

    नई दिल्ली – भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने 10 राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया है। मतदान 16 मार्च को होगा, जबकि पूरी चुनाव प्रक्रिया 20 मार्च तक संपन्न कर ली जाएगी।

    📅 प्रमुख तिथियां:

    • अधिसूचना जारी: 26 फरवरी
    • नामांकन की अंतिम तिथि: 5 मार्च
    • नामांकन पत्रों की जांच: 6 मार्च
    • नाम वापसी की अंतिम तिथि: 9 मार्च
    • मतदान: 16 मार्च
    • मतगणना: 16 मार्च, शाम 5 बजे से

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतपत्रों पर वरीयता अंकित करने के लिए केवल रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंगनी रंग के निर्धारित रेखाचित्र पेन का ही उपयोग किया जाएगा। किसी अन्य पेन का उपयोग मान्य नहीं होगा।


    📍 राज्यवार रिक्त सीटें

    • महाराष्ट्र – 07
    • ओडिशा – 04
    • तेलंगाना – 02
    • तमिलनाडु – 06
    • छत्तीसगढ़ – 02
    • पश्चिम बंगाल – 05
    • असम – 03
    • हरियाणा – 02
    • हिमाचल प्रदेश – 01
    • बिहार – 05

    🧾 प्रमुख सेवानिवृत्त सांसद

    इस चुनाव में जिन प्रमुख सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें शामिल हैं:

    • Sharad Pawar (एनसीपी-एसपी)
    • Abhishek Manu Singhvi (कांग्रेस)
    • Saket Gokhale (टीएमसी)
    • Ramdas Athawale (आरपी-आई-ए)
    • M. Thambidurai (एआईएडीएमके)
    • Tiruchi Siva (डीएमके)

    📢 EVM-VVPAT जागरूकता अभियान

    एक अलग पहल के तहत आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में ईवीएम और वीवीपीएटी के प्रति मतदाताओं को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है।

    आयोग के अनुसार:

    • 1,20,000 से अधिक मतदाता प्रदर्शन शिविरों में शामिल हुए।
    • 1,16,000 से अधिक लोगों ने मॉक वोट डाले।
    • 10 फरवरी तक मोबाइल प्रदर्शन वैन 29,000 से अधिक मतदान केंद्रों को कवर कर चुकी हैं।
  • INDIA गठबंधन में बढ़ती खींचतान, Sanjay Raut ने उठाए नेता बदलने की मांग

    INDIA गठबंधन में बढ़ती खींचतान, Sanjay Raut ने उठाए नेता बदलने की मांग

    नई दिल्ली/मुंबई – लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटों पर रोकने के बाद उत्साहित दिखा विपक्षी INDIA गठबंधन अब अंदरूनी मतभेदों से जूझता नजर आ रहा है। हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में चुनावी हार के बाद गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।

    महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गठबंधन की सक्रियता पर खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि INDIA अलायंस केवल लोकसभा चुनाव के आसपास ही सक्रिय होता है, जबकि अन्य समय दलों के बीच संवाद तक नहीं होता।

    राउत ने कहा, “सिर्फ संसद में हंगामा करने से कुछ नहीं होगा। विपक्षी नेताओं को बोलने तक नहीं दिया जाता। ऐसे में गठबंधन को हर समय सक्रिय रहना चाहिए, चाहे चुनाव हों या न हों।”

    उन्होंने किसान आंदोलन, कानून-व्यवस्था और मणिपुर जैसे मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाने की जरूरत बताई। साथ ही यह भी कहा कि यदि गठबंधन केवल संसद तक सीमित रहेगा तो असर नहीं पड़ेगा।

    नेतृत्व को लेकर भी चर्चा

    नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर राउत ने कहा कि अलग-अलग दलों की अलग राय हो सकती है। किसी का मत हो सकता है कि Mamata Banerjee या M. K. Stalin नेतृत्व करें, लेकिन इस पर फैसला गठबंधन की बैठक में ही होना चाहिए।

    उन्होंने यह भी दोहराया कि सभी दल चाहते हैं कि गठबंधन लगातार सक्रिय रहे और समन्वित प्रयास करे।

    🗳️ आगे की चुनावी चुनौती

    इस वर्ष चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल और असम जैसे अहम राज्य शामिल हैं। चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में INDIA गठबंधन की रणनीति और एकजुटता पर सभी की नजरें टिकी हैं।

  • Ujjain Mahakaleshwar Mandir में बजरंग दल ने मुस्लिम युवक से हुई मारपीट, वीडियो वायरल

    Ujjain Mahakaleshwar Mandir में बजरंग दल ने मुस्लिम युवक से हुई मारपीट, वीडियो वायरल

    उज्जैन (Ujjain) (मध्य प्रदेश) – नानाखेड़ा क्षेत्र में एक युवक के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि हिंदूवादी संगठन Bajrang Dal के कार्यकर्ताओं ने मोहाली से आए एक मुस्लिम युवक जफर खान की पिटाई कर दी।

    बताया जा रहा है कि जफर धोती-कुर्ता, त्रिपुंड और रुद्राक्ष धारण कर एक युवती के साथ होटल में ठहरा था। शक होने पर कुछ कार्यकर्ताओं ने उसे होटल के बाहर रोककर पूछताछ की। आरोप है कि पूछताछ के दौरान युवक ने पहले हिंदू नाम बताया, लेकिन सख्ती करने पर अपनी असली पहचान जफर खान के रूप में स्वीकार की।

    जफर ने खुद को शिव भक्त बताते हुए कहा कि वह युवती के साथ बाबा Mahakaleshwar Temple के दर्शन करने आया था। उसने दावा किया कि दोनों ने मिलकर महाकाल मंदिर के अलावा हरसिद्धि और काल भैरव मंदिर में भी दर्शन किए।

    घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। (वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।) वीडियो में कुछ लोग युवक को घेरकर पहले पूछताछ करते और बाद में मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं।

    👮 पुलिस की कार्रवाई

    सूचना मिलते ही नानाखेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के अनुसार युवक और युवती दोनों मोहाली के रहने वाले हैं। युवती की उम्र 32 वर्ष बताई जा रही है और वह युवक के अलग धर्म से होने की जानकारी रखती थी। दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे।

    पुलिस ने युवक को अपने संरक्षण में लेकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

  • Action: Shahjahanpur में 74 साल बाद वन भूमि मुक्त,  300 बीघा पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    Action: Shahjahanpur में 74 साल बाद वन भूमि मुक्त, 300 बीघा पर चला प्रशासन का बुलडोजर

    शाहजहांपुर(Shahjahanpur) (उ.प्र.) – जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 74 वर्षों से वन विभाग की 300 बीघा जमीन पर किसानों द्वारा किए गए अवैध कब्जे को हटवा दिया। कार्रवाई के दौरान जमीन को ट्रैक्टर से जोतकर उस पर खड़ी फसल को भी नष्ट कर दिया गया।

    पुलिस अधीक्षक Rajesh Dwivedi ने बुधवार को बताया कि वर्ष 1952 में खुटार थाना क्षेत्र स्थित जंगल की भूमि पर कब्जा शुरू हुआ था। समय के साथ करीब 300 बीघा वन भूमि पर खेती की जाने लगी थी। कई बार वन विभाग ने कब्जा हटाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

    बाद में वन अधिकारियों के अनुरोध पर पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई। पुलिस क्षेत्राधिकारी (पुवायां) प्रवीण मलिक के नेतृत्व में एक संयुक्त टीम गठित की गई, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल थे। मंगलवार को टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध कब्जा हटाया और फसल जोतकर नष्ट कर दी।

    एसपी के अनुसार कार्रवाई के दौरान किसानों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति नियंत्रित कर ली गई।

    10 नवंबर को भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

    इससे पहले 10 नवंबर को जलालाबाद क्षेत्र के रोली बोली गांव में 13 बीघा जमीन पर बने लगभग 30 मकानों को अवैध घोषित कर प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया था। उस समय भी विरोध की स्थिति बनी थी।

    Meerut के Sardhana में भी चला कब्जा मुक्ति अभियान

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    https://media.assettype.com/newslaundry/2025-11-12/8z9pgijy/Mahar-land-controversy.jpg?h=675&w=1200

    उधर मेरठ जिले के सरधना तहसील क्षेत्र में भी प्रशासन ने सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की। एसडीएम Udit Narayan Sengar को लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद उन्होंने राजस्व विभाग की टीम गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए।

    मंगलवार को टीम ने गांव ईकड़ी में विवादित भूमि को कुर्क किया। कस्बा खिवाई में सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाया गया और भलसोना गांव में रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को भी मुक्त कराया गया।

    राजस्व निरीक्षक समर सिंह ने बताया कि खिवाई में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से खड़ी फसल को ट्रैक्टर से जोतकर कब्जा हटाया गया। विरोध के बावजूद पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई सफल रही।

    एसडीएम उदित नारायण सेंगर ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • Congress: प्रदेश कांग्रेस ने विमुक्त जाति व भटक्या जमाती विभाग की कमान एडवोकेट पल्लवी रेंके को सौंपी

    Congress: प्रदेश कांग्रेस ने विमुक्त जाति व भटक्या जमाती विभाग की कमान एडवोकेट पल्लवी रेंके को सौंपी

    मुंबई: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस(Maharashtra Pradesh Congress Committee) कमेटी के अंतर्गत संचालित ‘विमुक्त जाति व भटक्या जमाती सेल’ का रूपांतरण अब ‘विमुक्त जाति व भटक्या जमाती विभाग’ के रूप में किया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ के आदेश पर एडवोकेट पल्लवी रेंके को इस नवगठित विभाग का प्रमुख नियुक्त किया गया है।

    कांग्रेस ने बताया कि महाराष्ट्र में विमुक्त जातियों और भटक्या जमातियों की आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का कम से कम 11 प्रतिशत है। सामाजिक न्याय की स्थापना के उद्देश्य से कांग्रेस ने राज्य निर्माण के समय से ही इन समुदायों को शिक्षा और रोजगार में आरक्षण का समर्थन किया है।

    प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कडकलक्ष्मी, वैदू, गोंधळी, जोशी, वासुदेव, बहुरूपी, भराडी, डोंबारी, टकारी, रामोशी, लमाण सहित लगभग 40 से अधिक ऐसी जनजातियां आज भी अपनी पारंपरिक भटकंती और व्यवसाय के कारण संगठित नहीं हो पाई हैं और विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। इन्हीं बिखरे और वंचित समुदायों को संगठित करने के लिए प्रदेश कांग्रेस ने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने विमुक्त जाति व भटक्या जमाती विभाग को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि इस वर्ग को न्याय दिलाने और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कांग्रेस पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।

  • One of the busiest bridges in the city, Dadar’s Tilak Bridge, will be closed in Mumbai: मुंबई के तिलक ब्रिज पर तीन महीने के लिए भारी गाड़ियों पर बैन, ट्रैफिक जाम से राहत के लिए कदम

    One of the busiest bridges in the city, Dadar’s Tilak Bridge, will be closed in Mumbai: मुंबई के तिलक ब्रिज पर तीन महीने के लिए भारी गाड़ियों पर बैन, ट्रैफिक जाम से राहत के लिए कदम

    मुंबई(Mumbai): देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक ट्रैफिक जाम की समस्या है, और इसे लेकर जल्द ही कोई स्थायी समाधान नजर नहीं आ रहा। शहर के सबसे व्यस्त पुलों में से एक दादर का तिलक ब्रिज अब भारी वाहनों के लिए तीन महीने (12 फरवरी से 12 मई, 2026) के लिए बंद रहेगा।

    क्यों लिया गया निर्णय:
    मुंबई में सायन ब्रिज और एलफिंस्टन ब्रिज के निर्माण कार्यों के चलते शहर में लगातार ट्रैफिक जाम लग रहा है। इन पुलों पर काम के कारण ठाणे और नवी मुंबई से आने वाले वाहन धारावी और तिलक ब्रिज की तरफ मोड़ दिए जा रहे हैं, जिससे दादर और माटुंगा इलाके में भीड़ और जाम बढ़ गया है।

    मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि सुबह 7 बजे से रात 11 बजे तक मिक्सर, डंपर, ट्रेलर और अन्य भारी वाहनों के लिए तिलक ब्रिज पर यात्रा पर रोक रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य इमरजेंसी वाहनों के लिए रास्ता साफ रखना और ट्रैफिक की स्थिति में सुधार लाना है।

    भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग:

    • ईस्टर्न सबर्ब्स और नवी मुंबई से आने वाली गाड़ियां तिलक ब्रिज के बजाय सायन हॉस्पिटल जंक्शन से दाएं मुड़ेंगी, फिर वे सुलोचना शेट्टी मार्ग, कुंभारवाड़ा जंक्शन, कटारिया मार्ग, शोभा होटल, सावरकर रोड, चैत्यभूमि, सिद्धिविनायक मंदिर और अप्पासाहेब मराठे चौक होते हुए अपने गंतव्य पर पहुंचेंगी।
    • दक्षिणी दिशा में परेल और लालबाग के लिए दादर TT ब्रॉडवे जंक्शन से हिंदमाता ब्रिज, परेल वर्कशॉप, लालबाग ब्रिज, भारतमाता सिग्नल से गरम खाड़ा सिग्नल तक दाएं मुड़कर चिंचपोकली ब्रिज का रास्ता लिया जा सकता है।
    • डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर रोड से उत्तर की ओर जाने वाले ट्रैफिक के लिए भी वैकल्पिक मार्ग बनाए गए हैं।
    • सेना भवन से आने वाले वाहन सेना भवन, एल. जे. रोड, शोभा होटल, कटारिया रोड, कुंभारवाड़ा जंक्शन और सुलोचना शेट्टी मार्ग का उपयोग करेंगे।

    उल्लेखनीय है कि गुरुवार को मुंबई जिला की डीपीडीसी बैठक में, जिसकी अध्यक्षता डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने की, भी शहर में ट्रैफिक जाम की स्थिति और इसके समाधान के उपायों पर चर्चा हुई।

  • 13-Year-Old Girl Abducted in Azamgarh: आजमगढ़ में 13 वर्षीय बालिका अपहरण: स्थानीय पुलिस 23 दिन से निष्क्रिय, कार्रवाई में मूकदर्शक बना हुआ प्रशासन

    13-Year-Old Girl Abducted in Azamgarh: आजमगढ़ में 13 वर्षीय बालिका अपहरण: स्थानीय पुलिस 23 दिन से निष्क्रिय, कार्रवाई में मूकदर्शक बना हुआ प्रशासन

    आजमगढ़ (Azamgarh): आजमगढ़ के अत्रौलिया थाना क्षेत्र, ग्राम इटौरी-खालिसपुर में 20 जनवरी 2026 को रामलोटन तिवारी की 13 वर्षीय बेटी को स्कूल से घर लौटते समय कुछ बदमाशों ने अपहरण (13-Year-Old Girl Abducted in Azamgarh) कर लिया। आज 23 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन सोया हुआ है और कार्रवाई में मूकदर्शक बना हुआ है।

    घटना के बाद बच्ची के साथ आने वाली सहेलियां मानसिक रूप से परेशान हैं। इसके बावजूद पुलिस ने माता-पिता को बयान देने से रोककर जांच में विलंब किया। जिले के DM और थाना प्रशासन (SO, CO) भी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या कानून केवल आम जनता के लिए है या पुलिस और सरकार अधिकारियों के लिए अलग है।

    राष्ट्रीय पूर्वांचल एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुनाथ उपाध्याय ने कहा, “अगर पुलिस अधिकारियों की बेटी का अपहरण हुआ होता, तो क्या वे हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहते?” उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपी सरकार की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना सिर्फ कागजों में है, असली धरातल पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो रही।

    उपाध्याय ने कहा कि बलात्कार, अपहरण और अपराधों में लगातार वृद्धि इस बात का संकेत है कि यूपी पुलिस अपराधियों के लिए सुरक्षित वातावरण बना रही है। उन्होंने योगी सरकार से तत्काल कठोर कदम उठाने, दोषियों को गिरफ्तार करने और प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग की।

    स्थानीय नागरिक और राजनीतिक नेता भी कह रहे हैं कि अगर यही निष्क्रियता जारी रही, तो अपराधियों में और हिम्मत बढ़ेगी और आम जनता के लिए कानून और सुरक्षा केवल शब्दों तक सीमित रह जाएगी।