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  • Mahavitaran: पाटण में मिट्टी उत्खनन का बड़ा खेल! हवा में लटके सैकड़ों बिजली खंभे, बड़े हादसे का खतरा

    Mahavitaran: पाटण में मिट्टी उत्खनन का बड़ा खेल! हवा में लटके सैकड़ों बिजली खंभे, बड़े हादसे का खतरा

    असुरक्षित बिजली खंभों से बड़ा हादसा होने की आशंका, क्या महावितरण(Mahavitaran) को खबर भी है?

    सातारा: महाराष्ट्र के सातारा जिले के पाटण तालुका में नदी किनारे चल रहे बड़े पैमाने पर मिट्टी उत्खनन ने एक गंभीर खतरा खड़ा कर दिया है। उत्खनन के कारण खेती और घरों को बिजली देने वाले सैकड़ों बिजली के खंभे बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। कई जगह खंभों के चारों ओर की मिट्टी पूरी तरह हटा दी गई है, जिससे वे जमीन में मजबूती से टिके रहने के बजाय हवा में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बरसात में बाढ़ या तेज बारिश हुई तो ये खंभे कभी भी गिर सकते हैं। ऐसे में न केवल बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है, बल्कि करंट फैलने से लोगों और पशुओं की जान पर भी खतरा मंडरा सकता है।

    नदी किनारे बड़े पैमाने पर उत्खनन

    जानकारी के मुताबिक पाटण तालुका के नदी किनारे कई इलाकों में भारी मात्रा में मिट्टी निकाली जा रही है। उत्खनन के दौरान कई जगह शेतीपंप और घरों को बिजली देने वाले खंभों के आसपास की मिट्टी पूरी तरह हटा दी गई है।

    परिणाम यह हुआ कि कई बिजली के खंभे अब हवा में खड़े दिखाई दे रहे हैं और किसी भी समय गिर सकते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ऐसे सैकड़ों खंभे क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महावितरण को इस बारे में जानकारी है? और अगर है तो अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।

    प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल

    मिट्टी उत्खनन के लिए आमतौर पर राजस्व विभाग, वन विभाग, सिंचन विभाग और सार्वजनिक निर्माण विभाग सहित कई विभागों से अनुमति और ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ लेना जरूरी होता है।

    लेकिन इस मामले में यह सवाल उठ रहा है कि क्या महावितरण से अनुमति ली गई थी या उन्हें इसकी जानकारी दी गई थी? अगर नहीं, तो यह प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

    बाढ़ के समय बढ़ सकता है खतरा

    इस इलाके के कई बिजली खंभे कोयना नदी की बाढ़ रेखा के नीचे आते हैं। ऐसे में बारिश के मौसम में अगर नदी में बाढ़ आती है या तेज बारिश होती है, तो इन खंभों के गिरने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा।

    अगर खंभे गिरते हैं तो बिजली की तारें टूटकर जमीन या पानी में गिर सकती हैं, जिससे आसपास के लोगों, किसानों और पशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। खासकर अगर करंट पानी में फैल गया तो बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता।

    शॉर्ट सर्किट और आग का भी खतरा

    विशेषज्ञों के मुताबिक अगर खंभे कमजोर हो जाएं तो तेज हवा या तूफान में गिर सकते हैं। इससे बिजली की तारें आपस में टकराकर शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं।

    ऐसी स्थिति में पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे किसानों, गांव वालों और स्थानीय व्यवसायों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    खंभों को फिर से लगाने का खर्च कौन उठाएगा?

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन खतरनाक हो चुके खंभों को दोबारा सुरक्षित तरीके से लगाने की जिम्मेदारी किसकी होगी। आम तौर पर एक बिजली खंभे को लगाने में 25 से 30 हजार रुपये तक खर्च आता है।

    ऐसे में अगर सैकड़ों खंभों को दोबारा लगाना पड़ा तो इसके लिए काफी बड़ा बजट लगेगा। यह खर्च महावितरण उठाएगा या उत्खनन करने वालों से वसूला जाएगा, इस पर अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

    पर्यटन और नदी के प्रवाह पर भी असर

    कोयना नदी के किनारे कृषि पर्यटन और जल पर्यटन विकसित करने की योजनाएं भी चल रही हैं। कई लोगों ने नदी किनारे पर्यटन प्रोजेक्ट, होटल और अन्य व्यवसाय शुरू करने की तैयारी की है।

    लेकिन नदी से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकालने से नदी का प्रवाह बदल सकता है, जिससे नावों और जल पर्यटन गतिविधियों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

    इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत जांच कर उत्खनन पर नियंत्रण लगाया जाए और बिजली के खंभों को सुरक्षित किया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।


    भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 क्या कहता है?

    भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि से बिजली के खंभे, तार या अन्य विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचता है, तो बिजली वितरण कंपनी उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी और आर्थिक कार्रवाई कर सकती है।

    ऐसे मामलों में क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत या पुनर्स्थापना का पूरा खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जा सकता है।

    अगर मामला गंभीर पाया जाता है तो दोषी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। इस कानून के तहत सार्वजनिक बिजली संपत्ति को नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना, नुकसान की भरपाई और कुछ मामलों में जेल की सजा का भी प्रावधान है।

  • 8 मार्च 2026: पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानिए दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों में आज क्या है कीमत

    8 मार्च 2026: पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी, जानिए दिल्ली-मुंबई समेत बड़े शहरों में आज क्या है कीमत

    नई दिल्ली: देश की सरकारी तेल कंपनियों ने 8 मार्च 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी हैं। तेल कंपनियां रोजाना सुबह 6 बजे ईंधन के रेट अपडेट करती हैं। इन कीमतों को तय करते समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है।

    फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लंबे समय से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और अन्य टैक्स के कारण अलग-अलग शहरों में ईंधन की कीमतें अलग बनी हुई हैं।


    प्रमुख शहरों में आज पेट्रोल-डीजल के भाव

    8 मार्च 2026 को जारी ताजा रेट के मुताबिक देश के प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं:

    • नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72, डीजल ₹87.62 प्रति लीटर
    • मुंबई: पेट्रोल ₹104.21, डीजल ₹92.15 प्रति लीटर
    • लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.80 प्रति लीटर
    • कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94, डीजल ₹90.76 प्रति लीटर
    • चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75, डीजल ₹92.34 प्रति लीटर
    • बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92, डीजल ₹89.02 प्रति लीटर
    • जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21 प्रति लीटर
    • पटना: पेट्रोल ₹105.58, डीजल ₹93.80 प्रति लीटर
    • चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30, डीजल ₹82.45 प्रति लीटर

    कैसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत

    भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत कई आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करती है। इनमें सबसे अहम कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत होती है, जिसे भारत बड़े पैमाने पर विदेशों से आयात करता है।

    अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होता है तो उसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम होती है। अगर रुपया कमजोर होता है तो तेल आयात महंगा हो जाता है।

    साथ ही केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों द्वारा लगाया गया वैट भी ईंधन के दाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि हर राज्य में पेट्रोल-डीजल की कीमत अलग-अलग होती है।


    SMS से घर बैठे जानें अपने शहर का रेट

    अगर आप अपने शहर का ताजा पेट्रोल-डीजल रेट जानना चाहते हैं तो मोबाइल से SMS भेजकर भी जानकारी ले सकते हैं।

    • इंडियन ऑयल: RSP + शहर का कोड लिखकर 9224992249 पर भेजें
    • भारत पेट्रोलियम: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें
    • हिंदुस्तान पेट्रोलियम: HP Price लिखकर 9222201122 पर SMS करें

    कुछ ही सेकंड में आपको अपने शहर का ताजा रेट मिल जाएगा।


    लंबे समय से स्थिर हैं ईंधन की कीमतें

    मई 2022 में केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती किए जाने के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी हुई है। हालांकि तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए समय-समय पर मामूली बदलाव करती रहती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों या रुपये की स्थिति में बड़ा बदलाव होता है तो इसका असर पेट्रोल-डीजल के दामों पर भी देखने को मिल सकता है।

  • LPG Price Hike: गैस सिलेंडर महंगा होने पर कांग्रेस का हमला, पीएम मोदी को बताया “महंगाई मैन”

    LPG Price Hike: गैस सिलेंडर महंगा होने पर कांग्रेस का हमला, पीएम मोदी को बताया “महंगाई मैन”

    नई दिल्ली। घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी (LPG Price Hike) के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाला जा रहा है और इसे लेकर प्रधानमंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

    कांग्रेस ने कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये और 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे आम परिवारों और छोटे व्यवसायों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।

    कांग्रेस का आरोप: जनता के बजट पर सीधा हमला

    कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ाकर आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर डाला है। पार्टी के अनुसार, पिछले तीन महीनों में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमतों में कुल 307 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।

    कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्री ने हाल ही में दावा किया था कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ता और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है, लेकिन अगले ही दिन गैस सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए।

    खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि जो बातें मंत्री कहते हैं, उन पर भरोसा करना मुश्किल हो गया है।

    सरकार का पक्ष: ऊर्जा आपूर्ति में कोई कमी नहीं

    इस बीच पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार का लक्ष्य नागरिकों को किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है।

    सूत्रों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 7 मार्च से देशभर में 60 रुपये बढ़ा दी गई है, जबकि होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर के दाम में 115 रुपये की बढ़ोतरी लागू की गई है।

    पहले अप्रैल 2025 से स्थिर थे दाम

    इससे पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से स्थिर थी। उस समय दिल्ली में गैर-सब्सिडी वाला घरेलू सिलेंडर लगभग 853 रुपये में मिल रहा था। नई बढ़ोतरी के बाद अब घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ एलपीजी पर निर्भर छोटे व्यवसायों की लागत भी बढ़ने की संभावना है।

    अफवाहों पर न दें ध्यान: इंडियन ऑयल

    इसी बीच Indian Oil Corporation ने सोशल मीडिया के माध्यम से पेट्रोल और डीजल की कमी से जुड़ी खबरों को खारिज किया है। कंपनी ने कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई है।

  • धर्मयुद्ध का शंखनाद: काशी से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शुरू, गोमाता को राज्यमाता घोषित करने की मांग, 11 मार्च को पहुंचेंगे लखनऊ

    धर्मयुद्ध का शंखनाद: काशी से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शुरू, गोमाता को राज्यमाता घोषित करने की मांग, 11 मार्च को पहुंचेंगे लखनऊ

    वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार सुबह वाराणसी के प्रसिद्ध संकटमोचन हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपनी “गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा” की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान का आशीर्वाद लेकर वे लखनऊ के लिए यात्रा प्रारंभ कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य गो रक्षा के प्रति जनजागरण करना है।

    शंकराचार्य ने बताया कि यह यात्रा चार दिनों तक चलेगी, जिसमें वे छह जिलों में दर्जनभर से अधिक स्थानों पर सभाएं और जनसंवाद कार्यक्रम करेंगे। यात्रा के दौरान वे जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, उन्नाव और लखीमपुर खीरी से होते हुए 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे।

    गोमाता को “राज्यमाता” घोषित करने की मांग

    शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि 40 दिनों के भीतर गोमाता को “राज्यमाता” घोषित किया जाए और पूरे प्रदेश में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर पहले भी सरकार को समय दिया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

    शिवाजी जयंती के बाद आंदोलन तेज

    शंकराचार्य ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के दिन से सरकार को 40 दिन का समय दिया गया था। शुक्रवार को इस अवधि के 35 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण अब गो रक्षा के लिए व्यापक जनआंदोलन शुरू किया गया है।

    गंगा पूजन के साथ यात्रा का शुभारंभ

    यात्रा शुरू करने से पहले शंकराचार्य ने साधु-संतों के साथ केदार घाट पर विधिवत गंगा पूजन किया। इसके बाद उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के चित्र पर तिलक कर पुष्प अर्पित किए और काशी से “गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध” के शंखनाद की औपचारिक घोषणा की।

    इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। शंकराचार्य ने कहा कि गो रक्षा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की रक्षा का प्रश्न है, इसलिए इसके लिए जनजागरण आवश्यक है।

  • Mumbai Rail Neer Contractor :रेल नीर ठेकेदार पर रंगदारी का आरोप: टिळक नगर में कैंटीन संचालक से मांगे 2 लाख, महीनों तक वसूले 30-30 हजार

    Mumbai Rail Neer Contractor :रेल नीर ठेकेदार पर रंगदारी का आरोप: टिळक नगर में कैंटीन संचालक से मांगे 2 लाख, महीनों तक वसूले 30-30 हजार

    टिळक नगर में कैंटीन संचालक से रंगदारी, गैंग बनाकर करता रहा वसूली फिलहाल दो पर मामला दर्ज

    “प्रोटेक्शन मनी” के नाम पर 2 लाख की मांग, महीनों तक वसूले 30-30 हजार रुपये
    शिकायत के बाद कई कंप्लेनर आए सामने

    मुंबई | प्रतिनिधि

    मुंबई के टिळक नगर इलाके में रेल नीर(Rail Neer) ठेकेदारी से जुड़े एक व्यक्ति पर कैंटीन संचालक से रंगदारी मांगने और मारपीट करने का गंभीर मामला सामने आया है। टिळक नगर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता शिवप्रकाश रामलखन यादव (37) टिळक नगर रेलवे स्टेशन के पास एक कैंटीन चलाते हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच दो स्थानीय लोगों ने उनसे “प्रोटेक्शन मनी” के नाम पर लगातार पैसों की मांग की और डराकर उनसे रकम वसूली।

    2 लाख रुपये की मांग, हर महीने हफ्ता

    शिकायत के मुताबिक आरोपी सेतुरामानंद पिल्लई उर्फ सेतुभाई और सुभाष कांदर उर्फ सुभाषभाई ने कैंटीन चलाने के बदले पहले 2 लाख रुपये प्रोटेक्शन मनी और हर महीने 40 हजार रुपये देने का दबाव बनाया।

    पीड़ित ने आरोप लगाया कि डर के कारण उसने पहले 1 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए और इसके बाद कई महीनों तक हर महीने करीब 30 हजार रुपये आरोपियों को देता रहा।

    पैसे देने से मना करने पर मारपीट

    पीड़ित के अनुसार फरवरी 2026 में जब उसने और पैसे देने से इनकार किया तो आरोपियों ने उसे टिळक नगर इलाके में बुलाकर कथित रूप से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद उसने टिळक नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

    शिकायत के बाद सामने आ रहे अन्य मामले

    सूत्रों के अनुसार शिकायत सामने आने के बाद इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भी शिकायतें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि रेल नीर व्यवसाय में पार्टनर रहे मुकेश मिश्रा के साथ भी आरोपियों द्वारा मारपीट और धोखाधड़ी की घटना हुई थी।

    आरोप है कि प्रोटेक्शन मनी नहीं देने पर दबाव बनाकर उनका धंधा हथिया लिया गया, जिसके बाद मुकेश मिश्रा अपने गांव लौट गए। डर के कारण उन्होंने उस समय पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई।

    इन धाराओं में मामला दर्ज

    टिळक नगर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 352, 351(3), 308(5), 3(5) और 115(2) के तहत मामला दर्ज किया है।

    मामले की जांच पुलिस उपनिरीक्षक मयूर सुलेपाटिल को सौंपी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

  • Unmesh Patil joins Shiv Sena:संपत्ति से ज्यादा लोगों का प्यार हमारे लिए मायने रखता है: एकनाथ शिंदे ने उबाठा पर कसा तंज

    खानदेश में उबाठा को लगा बड़ा झटका, सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने थामा शिवसेना का भगवा

    मुंबई: शिवसेना आम लोगों के साथ खड़े रहने वाली, अन्याय के खिलाफ लड़ने वाली और भगवा विचारों को आगे बढ़ाने वाली पार्टी है। इसलिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग शिवसेना में शामिल हो रहे हैं। संपत्ति कितनी कमाई यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आपने कितने लोगों का दिल जीता और लोगों का कितना प्यार हासिल किया, यही सबसे ज्यादा मायने रखता है। यह बात शिवसेना के मुख्य नेता और राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उबाठा पर तंज कसते हुए कही। उद्धव ठाकरे गुट के नेता और पूर्व सांसद उन्मेष पाटील ने आज सैकड़ों समर्थकों के साथ उपमुख्यमंत्री शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में प्रवेश किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री शिंदे कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस प्रवेश कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव, मंत्री गुलाबराव पाटील, सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे, सांसद मिलिंद देवरा, विधायक किशोर पाटील के साथ कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

    उन्मेष पाटील(Unmesh Patil joins Shiv Sena) के साथ आज कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी शिवसेना में प्रवेश किया। इनमें पंचायत समिति के पूर्व सभापति दिनेश बोरसे पूर्व अध्यक्ष, बीजेपी युवा मोर्चा , पंचायत समिति के उपसभापति भाऊसाहेब पाटील, बीजेपी के पूर्व सभापति लीलाभाई पाटील, राष्ट्रवादी कांग्रेस के रवि चौधरी, बीजेपी के पूर्व नगरसेवक चंदू तायडे, पूर्व नगरसेवक चिरागउद्दीन शेख, पूर्व नगरसेवक गणेश महाले, दिपक देशमुख, सुबोध वाघमारे, गवली समाज के प्रमुख विजू गवली, ओबीसी समाज के संजय चौधरी, बाळासाहेब पाटील, अनिल चव्हाण, रोहित खैरनार, मंगेश साबळे, सोमनाथ पाटील, चंद्रकांत पाटील, रमेश पाटील, योगेश मोरे, राजेंद्र सोनावणे, महादेव गायकवाड, विलास गवली, सुनीता पवार, रत्ना पाटील सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने आज शिवसेना का भगवा थाम लिया।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि आज तिथि के अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। महाराज कहा करते थे कि प्रजा की सब्जी के डंठल को भी हाथ नहीं लगाना चाहिए। आज राज्य सरकार ने राज्य के किसानों का दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का फैसला लिया है। जब हम मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में लाड़ली बहन योजना शुरू की गई थी। विधानसभा चुनाव में इन लाड़ली बहनों ने विपक्ष को करारा जवाब दिया। चुनाव के समय कर्ज माफी का जो वादा किया गया था, उसे आज महायुति सरकार ने पूरा कर दिखाया है। शिवसेना वह पार्टी है जो जो कहती है, वह करके भी दिखाती है। पिछले ढाई साल में किए गए कामों की वजह से इतिहास में पहली बार महायुति के २३२ विधायक चुनकर आए हैं।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह पार्टी बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे के विचारों पर आगे बढ़ रही है। इसी वजह से सोलापुर के एक गरीब परिवार की लाड़ली बहन को पार्टी ने राज्यसभा की उम्मीदवारी दी है। शिवसेना कार्यकर्ताओं की पार्टी है और कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़ाने वाली पार्टी है। यहां कोई मालिक या नौकर नहीं है, हम सभी साथी हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के समय महाराष्ट्र के लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया था। इसी तरह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण दुबई में फंसे सैकड़ों भारतीयों को भी दो विशेष विमानों के जरिए सुरक्षित भारत लाया गया।

    उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि आज नारपार योजना के लिए ७००० करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। चालीसगांव में किसानों को सबसे ज्यादा पशु शेड उपलब्ध कराने, सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने और किसानों के मुद्दों को उठाने का काम उन्मेष पाटील कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने गिरणा परिक्रमा भी की है। उन्होंने उन्मेष पाटील और उनके कार्यकर्ताओं से अपील की कि खानदेश में शिवसेना को घर-घर तक पहुंचाएं।

    इस मौके पर पूर्व सांसद उन्मेष पाटील ने कहा कि जब उपमुख्यमंत्री शिंदे दरे गांव में खेतों में काम करते नजर आते हैं, तो राज्य के किसानों को विश्वास होता है कि एक ऐसा नेता है जो खेती और मिट्टी से जुड़ा है और किसानों के दुख-दर्द को समझता है। उन्होंने कहा कि वे सरदार बनने के लिए नहीं, बल्कि एक सैनिक के रूप में काम करने के लिए शिवसेना में आए हैं।

  • Maharashtra Budget 2026-27: किसानों को कर्जमाफी, महिलाओं को आर्थिक संबल और उद्योगों को रफ्तार देने की कोशिश

    Maharashtra Budget 2026-27: किसानों को कर्जमाफी, महिलाओं को आर्थिक संबल और उद्योगों को रफ्तार देने की कोशिश

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री Devendra Fadnavis द्वारा पेश किया गया बजट 2026-27 (Maharashtra Budget 2026-27) राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। लगभग 51 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था (GSDP) के लक्ष्य के साथ सरकार ने इसे “विकसित महाराष्ट्र 2047” की आधारशिला बताया है। इस बजट में एक ओर किसानों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए राहत भरी घोषणाएं की गई हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी बड़ा जोर दिया गया है।

    मुंबई। सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए 30 सितंबर 2025 तक के बकाया कृषि ऋणों में से 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी की घोषणा की है। इस फैसले से राज्य के लाखों छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही समय पर अपनी कर्ज की किस्तें चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये का नकद प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है, जिसे ईमानदार किसानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    महिलाओं के लिए भी बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। राज्य सरकार की ‘लाडकी बहिन योजना’ को जारी रखते हुए 25 लाख नई “लखपति दीदी” तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। वहीं दिव्यांग नागरिकों के मानधन में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2,500 रुपये कर दिया गया है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा का बेहतर सहारा मिलने की उम्मीद है।

    औद्योगिक और शहरी विकास के क्षेत्र में भी सरकार ने बड़े विजन का संकेत दिया है। मुंबई के वडाला इलाके में 130 एकड़ में विशाल स्टार्टअप हब बनाने की योजना घोषित की गई है। इसके साथ ही राज्य में लगभग 50 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में कोस्टल रोड, मेट्रो नेटवर्क और भूमिगत सुरंगों के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया गया है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए नई ऊर्जा माना जा रहा है। सरकार ने महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को 566 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने और राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

    हालांकि बजट को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रत्यक्ष कर या महंगाई से राहत की कोई बड़ी घोषणा नहीं की गई है। मुंबई जैसे महंगे शहर में रहने वाले आम करदाताओं को भविष्य में टोल और बुनियादी ढांचे के निर्माण से होने वाली असुविधाओं की आशंका भी जताई जा रही है। विपक्ष ने राज्य के लगभग 9.32 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का हवाला देते हुए इतनी बड़ी योजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि कर्जमाफी और नकद लाभ योजनाओं का बोझ राज्य के खजाने पर दबाव बढ़ा सकता है।

    कुल मिलाकर यह बजट एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कर्जमाफी और किसान हितैषी योजनाओं के जरिए मजबूती देने की कोशिश करता है, तो दूसरी ओर शहरी विकास, स्टार्टअप और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से महाराष्ट्र को वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाने का रोडमैप भी प्रस्तुत करता है। अब इस बजट की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाएं कितनी पारदर्शिता और तेजी से जमीन पर उतरती हैं।

  • Mumbai BJP:मुंबई भाजपा की नई कार्यकारिणी घोषित: आचार्य पवन त्रिपाठी महासचिव, उदयप्रताप सिंह फिर बने प्रवक्ता; प्रमोद मिश्र को उत्तर भारतीय मोर्चा अध्यक्ष की जिम्मेदारी

    Mumbai BJP:मुंबई भाजपा की नई कार्यकारिणी घोषित: आचार्य पवन त्रिपाठी महासचिव, उदयप्रताप सिंह फिर बने प्रवक्ता; प्रमोद मिश्र को उत्तर भारतीय मोर्चा अध्यक्ष की जिम्मेदारी

    मुंबई (Mumbai): मुंबई भाजपा अध्यक्ष एडवोकेट अमित साटम द्वारा पार्टी की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी गई है। जारी सूची के अनुसार श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी को मुंबई भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया है, जबकि उदयप्रताप सिंह को एक बार फिर पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया है।

    पार्टी की नीतियों और उपलब्धियों को मीडिया तथा जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उदयप्रताप सिंह को दोबारा यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पत्रकार विकास संघ द्वारा ‘पत्रकार मित्र पुरस्कार’ से सम्मानित उदयप्रताप सिंह ने अपनी नियुक्ति पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम सहित पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पार्टी की विचारधारा और नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य जारी रखेंगे।

    इसी के साथ संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से भाजपा ने कई अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों की भी घोषणा की है। पार्टी ने प्रमोद मिश्र को मुंबई भाजपा उत्तर भारतीय मोर्चा का अध्यक्ष बनाया है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निवासी प्रमोद मिश्र ने वर्ष 2009 में वार्ड स्तर से भाजपा में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। संगठन में सक्रिय भूमिका के चलते उन्हें पहले युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष, उत्तर भारतीय मोर्चा के महासचिव तथा वर्ष 2023 में मुंबई भाजपा का सचिव बनाया गया था। नई जिम्मेदारी मिलने पर प्रमोद मिश्र ने मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम तथा महासचिव आचार्य पवन त्रिपाठी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे उत्तर भारतीय समाज को संगठित कर पार्टी संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का प्रयास करेंगे।

    नई कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष पद पर अभिजीत सामंत, अमरजीत मिश्रा, महेश पारकर, राजश्री पालांडे, रश्मि मिरचंदानी, रवि राजा, पंकज यादव और किरण शेलार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं महासचिव पद पर राजेश शिरवडकर, आचार्य पवन त्रिपाठी, श्वेता पारुलकर और विनोद शेलार को नियुक्त किया गया है।

    सचिव पद पर संतोष मेढेकर, रविमणि खरटमल, प्रतीक कर्पे, जयश्री खरात, बिंदु त्रिवेदी, जितेंद्र राउत, अखिलेश चौबे और जिगर कराणी को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं प्रवक्ता के रूप में अनिकेत निकम, निरंजन शेट्टी, सुमिता सुमन सिंह, राहुल दीनानाथ तिवारी, अजय सिंह, उदय प्रताप सिंह और किशोर जोशी को नियुक्त किया गया है।

    कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी किरीट भंसाली को दी गई है, जबकि कार्यालय प्रमुख के रूप में दिनेश जगताप को नियुक्त किया गया है। मोर्चा स्तर पर भी कई नियुक्तियां की गई हैं। युवा मोर्चा अध्यक्ष के रूप में दीपक सिंह, महिला मोर्चा अध्यक्ष के रूप में योजना टोकले, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष के रूप में सनी सानप तथा अनुसूचित जाति मोर्चा अध्यक्ष के रूप में शरद कांबले को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    इसके अलावा उत्तर भारतीय मोर्चा अध्यक्ष के रूप में प्रमोद मिश्र, अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष के रूप में कासिम खान तथा झोपड़पट्टी मोर्चा अध्यक्ष के रूप में धनंजय कोल्हेकर को नियुक्त किया गया है।

    पार्टी ने विभिन्न प्रकोष्ठों और सेल के संयोजकों की भी घोषणा की है। लीगल सेल के संयोजक एडवोकेट अमित मेहता तथा सह-संयोजक एडवोकेट मदन गुप्ता बनाए गए हैं। आईटी एवं सोशल मीडिया सेल के संयोजक नचिकेत सहस्रबुद्धे और सह-संयोजक पल्लवी ताम्हाणकर होंगे, जबकि गुजराती सेल के संयोजक बिमल भूता और सह-संयोजक सी.वी. शाह को जिम्मेदारी दी गई है।

    इसी प्रकार इंडस्ट्रीज सेल के संयोजक भरत अडवानी, शिक्षा सेल के संयोजक डॉ. राजू बंडगर, सांस्कृतिक सेल के संयोजक जेसल कोठारी, उत्तराखंड सेल के संयोजक महेंद्रसिंह गोसाई, पारसी सेल के संयोजक खुर्शेद खेकवाड, सिंधी सेल के संयोजक रोहित भगनानी तथा मच्छीमार सेल के संयोजक निकेश वेती को नियुक्त किया गया है।

    इसके अतिरिक्त परराज्य व्यवहार प्रकोष्ठ के संयोजक जतिन देसाई, बिहार प्रकोष्ठ के संयोजक मनोज झा, कोकण आघाड़ी की अध्यक्ष सुहास आडिवरेकर, कामगार आघाड़ी के अध्यक्ष अभिजीत राणे, पश्चिम महाराष्ट्र आघाड़ी के अध्यक्ष पांडुरंग थोरात, वरिष्ठ कार्यकर्ता आघाड़ी के संयोजक दिलीप गोडांबे तथा सहकार आघाड़ी के संयोजक सुनील बागुलकर को जिम्मेदारी दी गई है।

    साथ ही भटक विमुक्त आघाड़ी के अध्यक्ष चंद्रकांत शिंदे, माजी सैनिक आघाड़ी के अध्यक्ष सुभाष देवरकर और रिक्शा व टैक्सी चालक आघाड़ी के अध्यक्ष के.के. तिवारी को भी संगठन में महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है।

    भाजपा नेताओं का कहना है कि नई कार्यकारिणी के गठन से मुंबई में संगठनात्मक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और विभिन्न समाजों तथा वर्गों के बीच पार्टी का आधार और मजबूत होगा।

  • Central Railway: मध्य रेल के मुंबई मंडल में बिना टिकट यात्रा पर सख्ती, 16.16 लाख मामलों से 71.31 करोड़ रुपये जुर्माना वसूला

    Central Railway: मध्य रेल के मुंबई मंडल में बिना टिकट यात्रा पर सख्ती, 16.16 लाख मामलों से 71.31 करोड़ रुपये जुर्माना वसूला

    मुंबई: मध्य रेल(Central Railway) के मुंबई मंडल ने बिना टिकट और अनियमित यात्रा के खिलाफ अभियान तेज करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से फरवरी 2026) के दौरान 16.16 लाख मामलों का पता लगाया और यात्रियों से कुल 71.31 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 15.90 लाख मामलों और 68.56 करोड़ रुपये की वसूली की तुलना में क्रमशः 2 प्रतिशत और 4 प्रतिशत अधिक है।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस अवधि में एसी लोकल ट्रेनों में 1.10 लाख मामलों से 3.51 करोड़ रुपये, प्रथम श्रेणी डिब्बों में 1.46 लाख मामलों से 4.66 करोड़ रुपये और द्वितीय श्रेणी डिब्बों में 11.68 लाख मामलों से 58.60 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में किराए के अंतर के 50,809 मामलों से 2.98 करोड़ रुपये तथा बिना बुक किए गए सामान के 1.40 लाख मामलों से 1.56 करोड़ रुपये वसूले गए।

    फरवरी 2026 के दौरान ही अनियमित यात्रा के 1.65 लाख मामले सामने आए, जिनसे 8.58 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। मध्य रेल के अनुसार टिकट जांच टीमों द्वारा उपनगरीय, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नियमित विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि बिना टिकट यात्रा पर रोक लगाई जा सके।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे वैध टिकट लेकर ही यात्रा करें, ताकि जुर्माने और असुविधा से बचा जा सके।

  • Scrap Scam:तुर्भे गुड्स शेड में रद्दी घोटाले की चर्चा: 300 किलो में से 200 किलो गायब होने का आरोप

    Scrap Scam:तुर्भे गुड्स शेड में रद्दी घोटाले की चर्चा: 300 किलो में से 200 किलो गायब होने का आरोप

    मुंबई: मध्य रेलवे के मुंबई मंडल अंतर्गत तुर्भे गुड्स शेड में कथित तौर पर रद्दी बिक्री को लेकर एक बड़ा घोटाला(Scam) सामने आने की चर्चा है। यहां कार्यरत सीजीएस गिरीश कुमार शर्मा पर 300 किलोग्राम रद्दी में से 200 किलोग्राम गायब कर केवल 100 किलोग्राम दिखाकर बिक्री करने का गंभीर आरोप लगाया गया है।

    सूत्रों के अनुसार 13 जनवरी 2026 को गुड्स शेड में कुल 300 किलोग्राम रद्दी मौजूद थी, लेकिन दस्तावेज़ों में केवल 100 किलोग्राम रद्दी(Scrap) दिखाकर उसकी बिक्री कर दी गई। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि बिक्री से संबंधित दस्तावेज़ों पर न तो सीसीआई के हस्ताक्षर हैं और न ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की उपस्थिति दर्ज है।

    नियमों के अनुसार इस प्रकार की किसी भी बिक्री प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी और दस्तावेज़ों पर उनके हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। ऐसे में इस पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। चर्चा है कि आखिर 300 किलो रद्दी में से 200 किलो कहां चली गई और क्या यह पूरा मामला अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है या फिर जिम्मेदार विभाग की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ।

    बताया जाता है कि संबंधित अधिकारी के कार्यकाल के दौरान समय पालन और कार्यप्रणाली को लेकर भी पहले कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं।

    अब इस मामले को लेकर रेलवे प्रशासन की भूमिका पर सबकी निगाहें टिकी हैं। यह देखना होगा कि क्या उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।