ठाणे | संवाददाता: ठाणे शहर में बच्चों के अचानक घर से लापता होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जिससे अभिभावकों में चिंता और दहशत का माहौल है। महिला दिवस(Women,s Day) की पूर्व संध्या पर ठाणे के कोलशेत इलाके से दो नाबालिग लड़कियों के लापता होने की घटना सामने आई है। वहीं इससे पहले एक 11 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला भी दर्ज किया गया है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 7 मार्च 2026 को सुबह करीब 6:45 बजे कोलशेत रोड से एक 16 वर्षीय लड़की अपनी सहेली के साथ बिना किसी को बताए घर से निकल गई। देर तक घर वापस न लौटने पर परिजनों ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन दोनों का कोई पता नहीं चल सका।
परिवार की शिकायत के बाद कपूरबावड़ी पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों लड़कियों को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बहला-फुसलाकर ले जाने की आशंका है। इस मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक मंजुषा भोंगले के मार्गदर्शन में की जा रही है।
11 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला भी दर्ज
इस घटना से पहले 6 मार्च को ठाणे के श्रीनगर थाना क्षेत्र से एक 11 वर्षीय लड़का लापता हो गया था। बताया जा रहा है कि वह अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने के लिए घर से बाहर गया था, लेकिन इसके बाद वह वापस नहीं लौटा।
काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने श्रीनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने वेंकट नामक एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया है।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की गंभीरता से जांच कर रही है और लापता बच्चों की तलाश जारी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से ठाणे में अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
वाशी/नवी मुंबई। बिना वैध अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) लिए और बाजार शुल्क (सेस) का भुगतान किए बिना कृषि उपज का कारोबार करने वाले व्यापारियों पर मुंबई कृषी उत्पन्न बाजार समिति (APMC) ने सख्त कार्रवाई करते हुए जनवरी से फरवरी 2026 के बीच 17 करोड़ 51 लाख 30 हजार रुपये मूल्य का कृषि माल जब्त किया है। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित व्यापारियों से तीन गुना दंड वसूलते हुए 59 लाख 90 हजार रुपये की वसूली भी की गई है।
यह विशेष अभियान जेएनपीटी, तुर्भे, नेरुल और ठाणे-बेलापुर औद्योगिक क्षेत्र सहित कई इलाकों में चलाया गया। विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) के आसपास स्थित आयात-निर्यात से जुड़े गोदामों और थोक मंडियों की जांच की गई। बाजार समिति के सचिव शरद जरे के मार्गदर्शन में सतर्कता पथक के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया।
जांच के दौरान पाया गया कि कई व्यापारी APMC की वैध अनुज्ञप्ति लिए बिना ही सीधे किसानों और एजेंटों से कृषि उपज की खरीद-बिक्री कर रहे थे। इतना ही नहीं, बाजार समिति को देय सेस और सुपरविजन फीस भी जमा नहीं की गई थी। कुछ आयातकों ने विदेश से मंगाए गए कृषि उत्पादों को APMC के अधिकार क्षेत्र में लाते समय पूर्व सूचना तक नहीं दी। कई मामलों में आयातकों के पास वैध लाइसेंस भी नहीं था, फिर भी बड़े पैमाने पर लेन-देन जारी था।
नियमों की इस गंभीर अनदेखी को देखते हुए बाजार समिति ने संबंधित व्यापारियों पर तीन गुना जुर्माना लगाया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी बिना लाइसेंस और बिना शुल्क भुगतान के व्यापार करने वालों के खिलाफ जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
ठाणे (Thane News)। ठाणे अपराध शाखा की यूनिट-1 ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कलवा के खारेगांव टोल नाका पर एक कार से 123.640 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। पुलिस ने कार सहित कुल 30 लाख 91 हजार रुपये मूल्य का मादक पदार्थ जब्त किया है।
इस मामले में पुलिस ने सागर गोविंद पवार (33, निवासी नंदुर शिंगोटे, तहसील सिन्नर, जिला नासिक) और धोंडीराम वैतु भागडे (50, निवासी नंदगांव सादो, तहसील इगतपुरी, जिला नासिक) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, क्राइम ब्रांच यूनिट-1 के कांस्टेबल सागर सुरालकर को गुप्त सूचना मिली थी कि एक कार के जरिए गांजे की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर 24 फरवरी को कलवा स्थित खारेगांव टोल प्लाजा से कलवा जाने वाली सड़क पर जाल बिछाया गया।
इस दौरान एक संदिग्ध सैंट्रो कार को रोककर तलाशी ली गई। जांच में कार के भीतर प्लास्टिक की थैलियों में छिपाकर रखा गया 123 किलो 640 ग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने मादक पदार्थ और वाहन दोनों को जब्त कर लिया।
इस प्रकरण में कलवा पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को ठाणे अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 28 फरवरी 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
नासिक/मुंबई। महाराष्ट्र में कम छात्र संख्या (पटसंख्या) का हवाला देते हुए लगभग 18,000 सरकारी मराठी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की खबर ने शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। इस निर्णय के विरोध में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) ने नासिक में बड़े आंदोलन की घोषणा कर दी है।
26 फरवरी को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन
एआईएसएफ(AISF) के नेतृत्व में गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे नासिक के जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का आरोप है कि स्कूलों में छात्र संख्या स्वाभाविक रूप से कम नहीं हुई, बल्कि वर्षों की सरकारी उपेक्षा के कारण यह स्थिति पैदा की गई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि:
कई स्कूलों की इमारतें जर्जर अवस्था में हैं
मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है
वर्षों से नई शिक्षक भर्ती बंद है
शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरे गए
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए
इन सब कारणों से अभिभावक मजबूर होकर बच्चों को निजी स्कूलों की ओर भेज रहे हैं, जिससे सरकारी स्कूलों की पटसंख्या घटती गई।
आंदोलन की रूपरेखा
दिनांक: गुरुवार, 26 फरवरी 2026
समय: दोपहर 12:00 बजे
स्थान: जिलाधिकारी कार्यालय, नासिक
नेतृत्व: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ)
निजीकरण का बढ़ता खतरा
एआईएसएफ का आरोप है कि यह निर्णय शिक्षा के निजीकरण की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में मराठी माध्यम के सरकारी स्कूल बंद होते हैं, तो:
गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा महंगी हो जाएगी
कई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का ढांचा कमजोर पड़ेगा
मराठी माध्यम की शैक्षणिक परंपरा को झटका लगेगा
संगठन का यह भी कहना है कि मराठी भाषा और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की नीति के तहत यह कदम उठाया जा रहा है।
जनआंदोलन बनाने की तैयारी
एआईएसएफ की टीमें नासिक जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में जाकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद कर रही हैं। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल हों, ताकि सरकार को यह निर्णय वापस लेने पर मजबूर किया जा सके।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल बंद करने की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो आंदोलन को जिला स्तर से राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।
मुंबई: पश्चिम रेलवे के माध्यम से मादक पदार्थों की तस्करी(Drugs racket) के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुम्बई डिवीजन स्थित बाँद्रा टर्मिनस स्थित आरपीएफ़ ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए लगभग 13.834 किलोग्राम चरस बरामद की है जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत ₹13 करोड़ 83 लाख 40 हजार आंकी गई है।
यह कार्रवाई पश्चिम रेलवे के प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त के नेतृत्व तथा वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त के दिशा-निर्देश में की गई। सुरक्षा आयुक्त रजत कुंदगीर एवं सहायक सुरक्षा आयुक्त अजीत डी. माने के मार्गदर्शन में मुंबई सेंट्रल मंडल की टीम ट्रेनों में मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध सतत अभियान चला रही है। 21 फरवरी 2026 को लगभग 4:20 बजे गाड़ी संख्या 19038 (अवध एक्सप्रेस) के बांद्रा टर्मिनस के प्लेटफार्म संख्या 4 पर आगमन के पश्चात कोच लॉकिंग के दौरान ड्यूटी पर तैनात आरक्षक को गार्ड के समीप स्थित सामान्य डिब्बे में एक लावारिस बैग संदिग्ध अवस्था में मिला। तत्काल इसकी सूचना ड्यूटी अधिकारी को दी गई जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और संयुक्त जाँच प्रारंभ की गई। घटनास्थल पर आरपीएफ, (जीआरपी), डॉग स्क्वॉड तथा एफएसएल टीम को बुलाया गया। आरपीएफ के नार्को विशेषज्ञ डॉग “टैंगा” तथा जीआरपी के डॉग “रॉकी” द्वारा बैग में मादक पदार्थ होने की पुष्टि की गई। स्वतंत्र पंचों की उपस्थिति में जब बैग को खोला गया तो उसमें कपड़ों के भीतर सावधानीपूर्वक छिपाकर रखे गए 31 पैकेट चरस बरामद हुए। मौके पर प्रत्येक पैकेट का वजन किया गया, जिसमें कुल वजन 13.834 किलोग्राम पाया गया। एफएसएल टीम द्वारा संदिग्ध सामग्री की प्राथमिक जाँच की गई तथा संपूर्ण कार्रवाई की वीडियोग्राफी आईपीएफ जगदीश जाट व आरपीएफ़ के विनीत कुमार की देख रेख में कई गई व फोटोग्राफी के साक्ष्य को सुरक्षित किए गए। इस संबंध में जीआरपी बांद्रा द्वारा अज्ञात आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8(C) एवं 20(b)(ii)(C) के तहत अपराध क्रमांक 42/26 दिनांक 21.02.2026 को मामला दर्ज कर आगे की जाँच प्रारंभ कर दी गई है। रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों एवं जवानों की सतर्कता, सजगता और कर्तव्यनिष्ठा के परिणामस्वरूप यह बड़ी तस्करी प्रयास विफल हुआ। इस कार्रवाई को ट्रेनों के माध्यम से संचालित मादक पदार्थ नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार माना जा रहा है। आरपीएफ ने स्पष्ट किया है कि रेलवे परिसरों में अवैध गतिविधियों के विरुद्ध इसी प्रकार सघन निगरानी एवं अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेंगे। ज्ञातव्य हो कि आईपीएफ जगदीश पी जाट ने जब से बाँद्रा टर्मिनस का चार्ज लिया है तब से असामाजिक तत्वों एवं मादक पदार्थो के सप्लाई करने वालों की कमर तोड़ कर रख दी है।
छत्रपति शिवाजी महाराज ( shivaji Maharaj Jayanti) के जन्मस्थान शिवनेरी किले पर शिवजयंती के पावन अवसर पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। भारी जनसैलाब और संकरे रास्तों के कारण किला परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कई श्रद्धालु घायल हो गए। प्रशासन की ढीली व्यवस्थाओं और पर्याप्त पुलिस बल की कमी को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नर तालुका में स्थित इस ऐतिहासिक किले पर इस वर्ष शिवजयंती के मौके पर राज्य के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में शिवभक्त पहुंचे थे। रात से ही शिवज्योत लेकर आए युवा, विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और दर्शनार्थी किले में एकत्र होने लगे थे। सुबह होते-होते किला परिसर खचाखच भर गया और आवाजाही अनियंत्रित होने लगी।
संकरे रास्ते बने मुख्य कारण
हादसे की मुख्य वजह किले के तंग और घुमावदार रास्ते रहे। अंबरखाना के नीचे स्थित हाथी दरवाजा क्षेत्र और गणेश दरवाजा जैसे संकरे मार्गों पर अचानक भीड़ का अत्यधिक दबाव बन गया। पहले से सीमित चौड़ाई वाले इन रास्तों पर जब एक साथ बड़ी संख्या में लोग आगे बढ़ने लगे तो हालात बेकाबू हो गए और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई।
महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित
धक्का-मुक्की के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और छोटे बच्चों को झेलनी पड़ी। अफरा-तफरी में कुछ महिलाएं और बच्चे नीचे गिर पड़े, जिससे कई लोग घायल हो गए। घायलों को तत्काल जुन्नर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
प्रशासन की तैयारियों पर उठे सवाल
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था। भीड़ प्रबंधन के लिए स्पष्ट एंट्री-एग्जिट प्लान, बैरिकेडिंग और चरणबद्ध प्रवेश व्यवस्था का अभाव साफ दिखाई दिया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष शिवजयंती पर भारी भीड़ उमड़ती है, इसके बावजूद इस बार भीड़ नियंत्रण के लिए ठोस और प्रभावी योजना नहीं बनाई गई। अब मांग उठ रही है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए अग्रिम पंजीकरण, सीमित प्रवेश, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन चिकित्सा दल की स्थायी तैनाती जैसे कदम उठाए जाएं, ताकि आस्था के इस महापर्व पर किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो।
नई दिल्ली/मुंबई – लोकसभा चुनाव में भाजपा को 240 सीटों पर रोकने के बाद उत्साहित दिखा विपक्षी INDIA गठबंधन अब अंदरूनी मतभेदों से जूझता नजर आ रहा है। हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में चुनावी हार के बाद गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गठबंधन की सक्रियता पर खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि INDIA अलायंस केवल लोकसभा चुनाव के आसपास ही सक्रिय होता है, जबकि अन्य समय दलों के बीच संवाद तक नहीं होता।
राउत ने कहा, “सिर्फ संसद में हंगामा करने से कुछ नहीं होगा। विपक्षी नेताओं को बोलने तक नहीं दिया जाता। ऐसे में गठबंधन को हर समय सक्रिय रहना चाहिए, चाहे चुनाव हों या न हों।”
उन्होंने किसान आंदोलन, कानून-व्यवस्था और मणिपुर जैसे मुद्दों पर संयुक्त रणनीति बनाने की जरूरत बताई। साथ ही यह भी कहा कि यदि गठबंधन केवल संसद तक सीमित रहेगा तो असर नहीं पड़ेगा।
नेतृत्व को लेकर भी चर्चा
नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर राउत ने कहा कि अलग-अलग दलों की अलग राय हो सकती है। किसी का मत हो सकता है कि Mamata Banerjee या M. K. Stalin नेतृत्व करें, लेकिन इस पर फैसला गठबंधन की बैठक में ही होना चाहिए।
उन्होंने यह भी दोहराया कि सभी दल चाहते हैं कि गठबंधन लगातार सक्रिय रहे और समन्वित प्रयास करे।
🗳️ आगे की चुनावी चुनौती
इस वर्ष चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें पश्चिम बंगाल और असम जैसे अहम राज्य शामिल हैं। चुनाव आयोग जल्द ही तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में INDIA गठबंधन की रणनीति और एकजुटता पर सभी की नजरें टिकी हैं।
” विजिलेंस पर दबाव डालने की कोशिश या प्रशासन को खुली चुनौती!”–सीएसएमटी पार्सल प्रकरण ने उठाया सवाल
सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
मुंबई: मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन(CR Mumbai Division) स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पार्सल विभाग में सामने आया विवाद अब एक कर्मचारी के स्थानांतरण से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह मामला रेलवे की प्रशासनिक पारदर्शिता, विजिलेंस तंत्र की स्वतंत्रता और शिकायत प्रणाली के संभावित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को केंद्र में ले आया है।
सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की अनुशंसा के आधार पर सीएसएमटी पार्सल सीबीएस बैच इंचार्ज शैलेन्द्र पंडित का स्थानांतरण सीएसएमटी से शिवुड़–दारावे स्टेशन किया गया। लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी (CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns) होने के तुरंत बाद 11 फरवरी 2026 को सीएसएमटी जीआरपी में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जीआरपी में प्रस्तुत शिकायत(Complain) में मुंबई डिवीजन के सीनियर डीसीएम डॉ. शिवराज मानसपुरे, मध्य रेलवे के डिप्टी सीवीओ (ट्रैफिक) प्रदीप हिरडे तथा चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर सुमित दूधे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। रेलवे के जानकार अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तुरंत बाद इस प्रकार की शिकायत दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह कदम विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने या दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं।
पहले से दर्ज थीं अनियमितताएँ
दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी आपत्तियाँ दर्ज की जा चुकी थीं।
23 अप्रैल 2025 को निरीक्षण में अनियमितता दर्ज होने की बात सामने आई।
25 जून 2025 को ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।
ड्यूटी मस्टर में नाम का कॉलम खाली छोड़ने और बाद में हस्ताक्षर करने की प्रवृत्ति भी नोट की गई।
3 अगस्त 2025 को सीआरबी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति के बाद चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर चार्जशीट और बाद में स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की बात कही जा रही है।
एसोसिएशन की मान्यता पर भी प्रश्न
मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि शिकायत पत्र ‘ऑल इंडिया एससी एंड एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, रेलवे के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार संबंधित संगठन की रेलवे बोर्ड से मान्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि संगठन की वैधता संदिग्ध पाई जाती है, तो यह मामला फर्जी संगठन के नाम पर दबाव बनाने तक जा सकता है।
क्या शिकायत तंत्र बन रहा है ‘ढाल’?
रेलवे के भीतर अब यह चर्चा तेज है कि क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए शिकायत प्रणाली का उपयोग एक ‘ढाल’ के रूप में किया गया। यदि हर विभागीय जांच या स्थानांतरण के बाद इसी तरह की रणनीति अपनाई जाती है, तो निष्पक्ष कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के लिए भय और असुरक्षा का वातावरण बन सकता है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यदि जांच एजेंसियों और विजिलेंस अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। यह केवल एक कर्मचारी बनाम प्रशासन का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।
रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत
यह प्रकरण रेलवे के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि विजिलेंस की अनुशंसा पर की गई कार्रवाई को शिकायतों के माध्यम से दबाने की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो भविष्य में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।
रेलवे को चाहिए कि:
शिकायत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए।
विजिलेंस कार्रवाई के तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे (नियमों के दायरे में)।
एसोसिएशन की मान्यता की सत्यता की जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाए।
ईमानदार अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण प्रदान करे।
यदि समय रहते स्पष्ट और दृढ़ रुख नहीं अपनाया गया, तो यह मामला भविष्य में अनुशासनात्मक प्रक्रिया को कमजोर करने वाली मिसाल बन सकता है।
अब सबकी निगाहें रेलवे बोर्ड और मध्य रेलवे के शीर्ष प्रशासन पर टिकी हैं कि वे संस्थागत साख को मजबूत करते हैं या यह प्रकरण भी फाइलों में सिमट कर रह जाता है।
पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने की ठाणे में ज़िंदा पेड़ों पर सजावट बंद करने की मुख्यमंत्री से मांग
ठाणे (Thane News)। शहर में ज़िंदा पेड़ों पर की जा रही बिजली की लाइटिंग और सजावट को लेकर पर्यावरण का गंभीर मुद्दा खड़ा हो गया है। पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर ने इस प्रथा को सीधे-सीधे पर्यावरण अपराध (Environment Crime) करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ठाणे में ऐसे सभी कार्य तुरंत बंद करने की मांग की है।
डॉ. सिनकर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि त्योहारों, कार्यक्रमों और तथाकथित ब्यूटीफिकेशन के नाम पर ज़िंदा पेड़ों पर वायरिंग, ड्रिलिंग, कीलें ठोकना और भारी लाइटिंग उपकरण टांगना पेड़ों के लिए घातक साबित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पेड़ सजावटी खंभे नहीं, बल्कि शहर की सांस और नागरिकों की जीवनरेखा हैं।
पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल पेड़ों को शारीरिक नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि पक्षियों, कीट-पतंगों और पूरी जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। पेड़ों पर की गई लाइटिंग उनके प्राकृतिक विकास, जीवन चक्र और पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ रही है।
डॉ. सिनकर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर राज्य और केंद्र सरकार नेट ज़ीरो लाइफ मिशन और क्लाइमेट चेंज से लड़ने की बातें कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निकाय खुलेआम ज़िंदा पेड़ों पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने इसे नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच की खतरनाक विडंबना बताया।
इस पृष्ठभूमि में डॉ. सिनकर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि
ज़िंदा पेड़ों पर किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रिक लाइटिंग, डेकोरेशन और विज्ञापन सामग्री लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं
अपने पत्र के अंत में उन्होंने भावनात्मक अपील करते हुए लिखा, “पेड़ चीख नहीं सकते, लेकिन पूरे शहर को चुपचाप उनके ज़ख्म सहने पड़ते हैं। अगर आज हम पेड़ों के लिए नहीं खड़े हुए, तो कल शहर के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।”
पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को चुकाना पड़ेगा।
मुंबई। राज्य की निचली अदालतों में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मंजूर किए गए 2,800 से अधिक नए न्यायिक अधिकारियों की भर्ती को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट(Bombay High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि नागरिकों को तेज़ और प्रभावी न्याय देना है, तो राज्य सरकार के साथ-साथ हाईकोर्ट प्रशासन को भी तत्काल और ठोस कदम उठाने होंगे। इसी क्रम में हाईकोर्ट प्रशासन को भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत ‘ब्लूप्रिंट’ योजना अदालत के सामने पेश करने को कहा गया है।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की खंडपीठ ने कहा कि अदालत को इस बात की पूरी समझ है कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया किसी निश्चित समय-सीमा में बांधना आसान नहीं है। लेकिन ‘तेज़ न्याय’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हाईकोर्ट प्रशासन और विधि एवं न्याय विभाग से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया हाईकोर्ट और महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) के माध्यम से प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए।
याचिका में क्या है मामला
ये निर्देश वैजनाथ वझे द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिका में राज्य की न्याय व्यवस्था में लंबे समय से खाली पड़े पदों का मुद्दा उठाते हुए उन्हें तत्काल भरने की मांग की गई है। इससे पहले की सुनवाई में अतिरिक्त सरकारी वकील प्रियभूषण काकड़े ने अदालत को 6 फरवरी 2024 के सरकारी निर्णय की जानकारी दी थी। इसके अनुसार राज्य में 2,863 न्यायिक अधिकारियों के पदों को मंजूरी दी गई है। साथ ही 1,164 न्यायालयीन कर्मचारियों और 5,803 संविदा कर्मियों के नए पद भी सृजित किए गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया समय लेने वाली
28 जनवरी की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने रिक्त पदों की ओर ध्यान दिलाते हुए तत्काल भर्ती की मांग की थी। इस पर खंडपीठ ने कहा कि भले ही पदों को मंजूरी मिल चुकी हो, लेकिन उनकी भर्ती महाराष्ट्र न्यायिक सेवा नियम, 2008 के अनुसार ही करनी होगी। नियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया में उम्मीदवारों की पात्रता और योग्यता का मूल्यांकन जरूरी होता है, जिससे यह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से समय लेने वाली बन जाती है।
हालांकि, अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि नई मंजूरियों के बाद भर्ती को किस तरह अंजाम दिया जाएगा, इसका विस्तृत और व्यावहारिक ब्लूप्रिंट पेश करना अनिवार्य है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख को न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।