Category: Uttar Pradesh

  • INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    INDIA-US Agro Trade Deal: क्या अमेरिका के साथ कृषि समझौता भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” साबित होगा?

    मोदी सरकार की एग्री-डील पर उठते सवाल और हकीकत

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि क्षेत्र (INDIA-US Agro Trade Deal) में बढ़ते सहयोग और संभावित व्यापारिक समझौतों को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष के कुछ नेताओं और किसान संगठनों का आरोप है कि यह समझौता भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ है और “किसानों के डेथ वारंट” पर हस्ताक्षर जैसा कदम है।

    लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? आइए विस्तार से समझते हैं।


    कृषि समझौते की पृष्ठभूमि

    भारत और अमेरिका के बीच कृषि व्यापार पहले से ही जारी है। भारत अमेरिका से बादाम, सेब, दालें और कृषि तकनीक आयात करता है, जबकि अमेरिका को चावल, मसाले, समुद्री उत्पाद और कुछ कृषि उत्पाद निर्यात करता है।

    हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच:

    • कृषि बाजारों को खोलने,
    • टैरिफ कम करने,
    • जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के आयात,
    • डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के व्यापार
      को लेकर चर्चा तेज हुई है।

    इसी संदर्भ में प्रस्तावित या चर्चित “कृषि डील” को लेकर किसानों में आशंकाएँ पैदा हुई हैं।


    किसानों की प्रमुख चिंताएँ

    1. सस्ते आयात का खतरा

    अमेरिका में कृषि बड़े पैमाने पर, अत्याधुनिक तकनीक और भारी सरकारी सब्सिडी के सहारे की जाती है। यदि भारतीय बाजार अमेरिकी गेहूं, मक्का, सोयाबीन या डेयरी उत्पादों के लिए खुलता है, तो:

    • भारतीय किसानों को मूल्य प्रतिस्पर्धा में भारी नुकसान हो सकता है
    • एमएसपी व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है
    • छोटे और सीमांत किसान बाजार से बाहर हो सकते हैं

    2. जीएम फसलों का मुद्दा

    अमेरिका जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों का बड़ा उत्पादक है। यदि ऐसे उत्पाद भारत में व्यापक रूप से आयात होते हैं, तो:

    • जैव विविधता पर असर पड़ सकता है
    • पारंपरिक बीजों और स्थानीय खेती पर संकट आ सकता है
    • बीज कंपनियों की निर्भरता बढ़ सकती है

    3. डेयरी सेक्टर पर दबाव

    भारत का डेयरी क्षेत्र मुख्यतः छोटे किसानों और सहकारी मॉडल (जैसे अमूल) पर आधारित है। अमेरिकी डेयरी उत्पादों को अनुमति मिलने से लाखों दुग्ध उत्पादकों की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


    सरकार का पक्ष क्या है?

    सरकार का कहना है कि:

    • कोई भी समझौता भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए ही किया जाएगा।
    • निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
    • कृषि तकनीक, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ेगा।
    • भारत को उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार यह भी तर्क देती है कि वैश्विक व्यापार से अलग रहकर भारत कृषि क्षेत्र को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी नहीं बना सकता।


    “डेथ वारंट” वाली राजनीति

    “डेथ वारंट” जैसे शब्द राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। विपक्ष इसे 2020 के कृषि कानूनों की याद से जोड़ता है, जब बड़े कॉर्पोरेट और विदेशी कंपनियों के प्रवेश को लेकर व्यापक किसान आंदोलन हुआ था।

    आलोचकों का कहना है कि:

    • यह समझौता धीरे-धीरे कृषि बाजार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोल देगा
    • एमएसपी कानूनी गारंटी से ध्यान हटाया जा रहा है
    • आत्मनिर्भर कृषि मॉडल कमजोर होगा

    वहीं समर्थकों का दावा है कि:

    • भारतीय किसान अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं
    • निर्यात-आधारित कृषि से आय दोगुनी करने का लक्ष्य मजबूत होगा

    वास्तविक खतरा कहाँ है?

    सवाल यह नहीं है कि अमेरिका के साथ समझौता हो या न हो। असली मुद्दा यह है कि:

    • क्या भारतीय किसानों को बराबर की सब्सिडी और सुरक्षा मिलेगी?
    • क्या एमएसपी और सार्वजनिक खरीद प्रणाली बरकरार रहेगी?
    • क्या छोटे किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी?

    यदि सुरक्षा उपायों के बिना बाजार पूरी तरह खोल दिया गया, तो छोटे किसानों पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि समझौता संतुलित शर्तों और चरणबद्ध तरीके से लागू हुआ, तो यह अवसर भी बन सकता है।

  • Bharat Ratna:सावरकर को भारत रत्न की मांग पर चंद्रशेखर आजाद का तंज, बोले– ‘भागवत सरकार के मालिक जैसे, मांग की जरूरत क्या’

    Bharat Ratna:सावरकर को भारत रत्न की मांग पर चंद्रशेखर आजाद का तंज, बोले– ‘भागवत सरकार के मालिक जैसे, मांग की जरूरत क्या’

    नगीना। उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा वीर सावरकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि देश में अभिव्यक्ति की आजादी है और कोई भी किसी के लिए पुरस्कार की मांग कर सकता है, लेकिन मोहन भागवत की स्थिति आम नागरिक जैसी नहीं है।

    नगीना सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “मोहन भागवत सरकार के मालिक जैसे हैं। उन्हें किसी से मांग करने की क्या जरूरत है? वे कह देंगे तो भला कौन मना करेगा।” उन्होंने कहा कि देश की आजादी और सामाजिक बदलाव की लड़ाई में किसका कितना योगदान रहा है, यह इतिहास में दर्ज है और किसी से छिपा नहीं है।

    कांशीराम को भारत रत्न की मांग दोहराई

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न दिए जाने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने देश की राजनीति और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी और वंचित, शोषित समाज को संगठित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

    कोतवाल धन सिंह गुर्जर को भी भारत रत्न देने की मांग

    नगीना सांसद ने 1857 की क्रांति के नायक कोतवाल धन सिंह गुर्जर को भी भारत रत्न देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि ऐसे वीरों और महापुरुषों को उचित सम्मान न देकर सरकार उन वर्गों का अपमान कर रही है, जिनसे ये महान हस्तियां जुड़ी रही हैं।

    चेतावनी भरे लहजे में दिया बयान

    चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि समाज इस तरह की उपेक्षा को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार ने इन महान हस्तियों को सम्मान देने की मांग पर ध्यान नहीं दिया, तो जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। हमारे लोग यह अपमान सहन नहीं करेंगे और वोट की ताकत से इसका बदला लेंगे।”

  • Shivam Mishra Accident:कानपुर के पॉश इलाके में लैम्बोर्गिनी का कहर, बुलेट और ऑटो को मारी टक्कर, तीन घायल

    Shivam Mishra Accident:कानपुर के पॉश इलाके में लैम्बोर्गिनी का कहर, बुलेट और ऑटो को मारी टक्कर, तीन घायल

    कानपुर। शहर के पॉश ग्वालटोली इलाके में रविवार दोपहर एक तेज़ रफ़्तार लैम्बोर्गिनी कार ने पहले बुलेट सवार को टक्कर मारी, फिर एक ऑटो रिक्शा को चपेट में लिया और अंत में अनियंत्रित होकर फुटपाथ पर चढ़ गई। इस हादसे में तीन लोग घायल हो गए। पुलिस ने मामले में अज्ञात के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।

    हादसा रविवार दोपहर करीब 3:15 बजे हुआ। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त लैम्बोर्गिनी कार को जब्त कर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दुर्घटना के बाद कार चला रहे शिवम मिश्रा को उसके बॉडीगार्ड्स ने कार का शीशा तोड़कर बाहर निकाला और अपने साथ ले गए।

    नशे में होने का आरोप

    स्थानीय लोगों का दावा है कि हादसे के समय शिवम मिश्रा नशे की हालत में था। हालांकि पुलिस की ओर से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।

    कौन है शिवम मिश्रा(Shivam Mishra)

    शिवम मिश्रा मशहूर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे हैं। वह दो साल पहले उस समय चर्चा में आए थे, जब आयकर विभाग ने उनके पिता की कंपनी बंशीधर टोबैको लिमिटेड पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी।

    5 राज्यों में पड़ी थी आईटी की रेड

    आयकर विभाग ने कानपुर, दिल्ली, मुंबई और गुजरात सहित 5 राज्यों में कंपनी से जुड़े करीब 20 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। विभाग के मुताबिक, कंपनी ने अपनी सालाना आय 20 से 25 करोड़ रुपये घोषित की थी, जबकि उसका वास्तविक कारोबार 100 से 150 करोड़ रुपये के आसपास होने का अनुमान लगाया गया था।

    लग्जरी कारों का शौक, नंबर एक जैसा

    छापेमारी के दौरान शिवम मिश्रा के दिल्ली स्थित आवास से कई महंगी लग्जरी कारें बरामद हुई थीं। खास बात यह थी कि सभी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नंबर ‘4018’ था। इन कारों की कुल कीमत करीब 50 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
    इनमें 16 करोड़ रुपये की रोल्स-रॉयस फैंटम, मैकलारेन, पोर्श और एक लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो शामिल थी।

    नकद, गहने और करोड़ों की घड़ियां बरामद

    आयकर विभाग को छापेमारी के दौरान करीब 4.5 करोड़ रुपये नकद और लगभग 7 करोड़ रुपये के आभूषण मिले थे। इसके अलावा शिवम मिश्रा की कई महंगी घड़ियां भी जब्त की गई थीं, जिनमें एक हीरे जड़ी घड़ी शामिल थी, जिसकी कीमत करीब 2.5 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    अब तक कार्रवाई पर सस्पेंस

    बंशीधर टोबैको(Banshidhar Tambaku) प्राइवेट लिमिटेड देश की प्रमुख पान मसाला कंपनियों में गिनी जाती है। हालांकि आयकर छापेमारी के बाद इन मामलों में आगे क्या कार्रवाई हुई, इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

  • Social News: ब्रेन हेमरेज पीड़ित के इलाज में सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट ने दिया आर्थिक सहयोग

    Social News: ब्रेन हेमरेज पीड़ित के इलाज में सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट ने दिया आर्थिक सहयोग

    प्रयागराज(Social News): प्रयागराज निवासी गंगाराम प्रजापति गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे अपने इलाज का खर्च वहन नहीं कर पा रहे थे। दुखद स्थिति यह थी कि जनवरी माह में ही उनके बड़े पुत्र का हृदयाघात से निधन हो गया था, जिससे परिवार पहले से ही गहरे सदमे में था।

    27 जनवरी को गंगाराम प्रजापति को हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज हो गया, जिसके कारण उनका इलाज बीच में ही रुक गया। इस कठिन समय में जंघई, प्रयागराज निवासी संतोष प्रजापति, जो सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट के साथ लंबे समय से जुड़े हैं, ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट के संस्थापक अजय प्रजापति, अरुण प्रजापति, इन्द्रजीत प्रजापति और विनोद प्रजापति को तुरंत जानकारी दी।

    सूचना मिलते ही ट्रस्ट ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सहयोगियों से अपील की और गंगाराम प्रजापति के मेडिकल उपचार के लिए ₹25,000/- की आर्थिक सहायता प्रदान की।

    इस अवसर पर ट्रस्ट के संस्थापक अजय प्रजापति ने कहा, “सर्व प्रजापति शक्ति ट्रस्ट सदैव जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है।” उन्होंने गंगाराम प्रजापति के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।

    इस पहल ने न केवल गंगाराम प्रजापति के परिवार को मुश्किल घड़ी में राहत दी, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी उजागर किया।

  • Jaunpur News: राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी के भ्राता राम शिरोमणि उपाध्याय का निधन, समाज में शोक की लहर

    Jaunpur News: राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी के भ्राता राम शिरोमणि उपाध्याय का निधन, समाज में शोक की लहर

    जौनपुर: जिले के सिकरारा क्षेत्र के ग्राम भोईला में शनिवार देर रात एक दुखद घटना सामने आई। राजेश उपाध्याय के पिताजी एवं राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी के भ्राता राम शिरोमणि उपाध्याय का आकस्मिक निधन हो गया। वे शनिवार, 7 फरवरी 2026 को रात करीब 9 बजे अपने निज निवास पर अंतिम सांस ली।

    राम शिरोमणि उपाध्याय के निधन की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। उनके असामयिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वे एक सरल, मिलनसार और समाजसेवी व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। गांव और आसपास के इलाके में उनका विशेष सम्मान था।

    निधन की सूचना मिलते ही सामाजिक, राजनीतिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग शोक संवेदना व्यक्त करने उनके आवास पहुंचे। शुभचिंतकों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

    परिजनों के अनुसार, अंतिम संस्कार की तैयारियां परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार की जा रही हैं।
    ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

  • Religion News: बद्रीनाथ–केदारनाथ में मोबाइल पर नो-एंट्री? गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक

    Religion News: बद्रीनाथ–केदारनाथ में मोबाइल पर नो-एंट्री? गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक

    देहरादून: चारधाम यात्रा 2026 से पहले बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति मोबाइल फोन पर पूर्ण प्रतिबंध और गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त नियम लागू करने पर विचार कर रही है। (BKTC) आगामी चारधाम यात्रा सीजन के लिए श्रद्धालुओं पर कड़े नियम लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नियमों में मंदिर परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।

    ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान’ फोटो

    समिति का कहना है कि इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य मंदिरों की पवित्रता बनाए रखना और हाल के वर्षों में मंदिर परिसर में बढ़ती वीडियोग्राफी, रील्स और ब्लॉगिंग की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है। समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इन नियमों को लेकर जल्द होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हेमंत द्विवेदी ने बताया कि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार चल रहा है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित क्षेत्र में मोबाइल का उपयोग करते हुए पाया गया, तो मोबाइल जब्त किया जा सकता है और उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।

    इसके अलावा, भविष्य में मंदिर परिसर में ब्लॉगिंग, शूटिंग या फिल्मिंग के लिए बीकेटीसी या जिला प्रशासन से लिखित पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति शूटिंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। समिति का मानना है कि इससे न केवल अनुशासन बना रहेगा, बल्कि भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी।

    समिति सूत्रों के मुताबिक, चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और सोशल मीडिया गतिविधियों को देखते हुए यह कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

  • Forged Certificate: अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे के बाद भाई ने किया बड़ा खुलासा, प्रशासन में मचा हड़कंप

    Forged Certificate: अयोध्या के GST डिप्टी कमिश्नर के इस्तीफे के बाद भाई ने किया बड़ा खुलासा, प्रशासन में मचा हड़कंप

    फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी?

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। GST विभाग में डिप्टी कमिश्नर पद से हाल ही में इस्तीफा देने वाले प्रशांत कुमार सिंह की कहानी अब एक बड़े विवाद में तब्दील होती नजर आ रही है।

    इस्तीफे के बाद इस पूरे मामले में ऐसा धमाकेदार ट्विस्ट आया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। खुद उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने सामने आकर आरोप लगाया है कि प्रशांत कुमार सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल की।


    “पूरी तरह स्वस्थ हैं, फिर कैसे बने दिव्यांग?” — भाई का सनसनीखेज दावा

    डॉ. विश्वजीत सिंह ने मीडिया और प्रशासन के समक्ष खुलकर कहा है कि

    “प्रशांत कुमार सिंह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी आंखों में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिससे उन्हें नेत्र दिव्यांग माना जाए।”

    इसके बावजूद आरोप है कि उन्होंने खुद को 40 प्रतिशत नेत्र विकलांग बताकर सरकारी सेवा में एंट्री ली, जो नियमों के खिलाफ ही नहीं बल्कि सरकारी तंत्र के साथ खुली धोखाधड़ी मानी जा रही है।

    भाई का दावा है कि जिस दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी मिली, वह पूरी तरह फर्जी, भ्रामक और नियम विरुद्ध है।


    भाई बनाम भाई, सच्चाई बनाम सिस्टम

    इस पूरे मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब आरोप परिवार के भीतर से सामने आए।
    भाई द्वारा भाई पर लगाए गए आरोपों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि—

    • क्या सरकारी विभागों में दस्तावेजों की सही जांच हुई थी?
    • क्या दिव्यांग कोटे का दुरुपयोग किया गया?
    • और अगर आरोप सही हैं, तो ऐसे कितने अधिकारी सिस्टम में बैठे हैं?

    प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच की मांग तेज

    इस खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है।
    सूत्रों के मुताबिक, मामला अब उच्च स्तरीय जांच की ओर बढ़ सकता है और अगर आरोप सही पाए गए तो—

    • नौकरी रद्द होने
    • सेवा लाभ वापस लेने
    • और आपराधिक कार्रवाई
      तक की नौबत आ सकती है।

    सवाल जो देश पूछ रहा है

    आज हर आम नागरिक के मन में एक ही सवाल है—

    क्या फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे सिस्टम को चकमा देना इतना आसान हो गया है?

    अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या सच में दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

  • Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    Pakistan Bangladesh Politics: ओवैसी के बयान पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर, पाकिस्तान–बांग्लादेश को लेकर कर दी ‘भविष्यवाणी’

    New Delhi: हिजाब को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सियासी और धार्मिक हलकों में घमासान मच गया है। कथावाचक और धार्मिक नेता देवकीनंदन ठाकुर ने ओवैसी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि अगर उनका सपना है कि भारत में हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बने, तो “हमारा भी सपना है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में तिलक और भगवा वस्त्र पहनने वाले लोग सत्ता में आएं।”

    देवकीनंदन ठाकुर ने इसे विचारधाराओं की टक्कर बताते हुए कहा कि जैसे ओवैसी भविष्य की कल्पना कर रहे हैं, वैसे ही सनातन समाज भी अपनी आकांक्षाएं रखता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    ओवैसी के बयान पर बीजेपी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। बीजेपी सांसद अनिल बोंडे ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि ओवैसी “आधा सच” बोल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मुस्लिम महिलाएं हिजाब को मजबूरी मानती हैं और ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी गुलामी पसंद नहीं करता।

    गौरतलब है कि ओवैसी ने सोलापुर की जनसभा में भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा था कि भारत में कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री बन सकता है और भविष्य में हिजाब पहनने वाली महिला भी इस पद तक पहुंचेगी। इसी बयान ने अब सियासी आग में घी डालने का काम किया है।

  • Lessons from the Gurukul- Sustaining Life with Minimal Resources: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कर-कमलों से ‘गुरुकुल सिखाता है’ पुस्तक का विमोचन

    Lessons from the Gurukul- Sustaining Life with Minimal Resources: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कर-कमलों से ‘गुरुकुल सिखाता है’ पुस्तक का विमोचन

    वाराणसी। संवाददाता
    शंकराचार्य सम्मान कार्यक्रम के अवसर पर ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के कर-कमलों द्वारा “गुरुकुल सिखाता है: कम संसाधनों में जीवन निर्वाह” (Lessons from the Gurukul: Sustaining Life with Minimal Resources) नामक पुस्तक का विधिवत विमोचन किया गया।

    यह ज्ञानवर्धक पुस्तक शंकराचार्य जी के नैष्ठिक ब्रह्मचारी शिष्य स्वामी प्रभुतानंद ब्रह्मचारी द्वारा संकलित की गई है। पुस्तक का उद्देश्य आधुनिक समाज को यह संदेश देना है कि प्राचीन गुरुकुल परंपरा के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी अनुशासित, आत्मनिर्भर और श्रेष्ठ जीवन जिया जा सकता है।

    पुस्तक विमोचन के अवसर पर आशीर्वचन देते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि वर्तमान उपभोक्तावादी संस्कृति में यह ग्रंथ नई पीढ़ी को सादगी, संयम और आत्मसंयम का मार्ग दिखाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि गुरुकुल जीवन केवल शिक्षा नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-दर्शन है, जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है।

    महाराज जी ने स्वामी प्रभुतानंद ब्रह्मचारी जी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुकुलों की शिक्षा पद्धति ही मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक उन्नति की सशक्त आधारशिला है। पुस्तक में गुरुकुलों के उन सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है, जो न्यूनतम साधनों में भी जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देते हैं।

    इस अवसर पर विभिन्न पूज्य संतगण, विद्वान आचार्य एवं वैदिक गुरुकुलम् के बटुक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने इस पुस्तक को वर्तमान समय की अत्यंत आवश्यक कृति बताते हुए इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।

    उल्लेखनीय है कि स्वामी प्रभुतानंद ब्रह्मचारी जी बाल्यकाल से ही वेद शिक्षा के लिए काशी आ गए थे। उन्होंने कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा का पूर्ण अध्ययन किया तथा शंकराचार्य जी की सेवा में रहते हुए नैष्ठिक ब्रह्मचारी की दीक्षा ग्रहण की। वर्तमान में वे देवार्चन एवं सेवा करते हुए पूर्णतः विरक्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

  • पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार: शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली की यात्रा के लिए रुके थे

    पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर गिरफ्तार: शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली की यात्रा के लिए रुके थे

    लखनऊ / देवरिया। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी अमिताभ ठाकुर को लखनऊ क्राइम ब्रांच और देवरिया पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार देर रात शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर देवरिया ले जाया है। ठाकुर उस समय लखनऊ–दिल्ली जा रही ट्रेन में सवार थे जब उन्हें हिरासत में लिया गया।

    गिरफ्तारी का विवरण

    स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, ठाकुर को ट्रेन रुकने पर सादे कपड़ों में उपस्थित पुलिसकर्मियों ने उठाकर हिरासत में लिया और उन्हें देवरिया ले जाया गया, जहां उनसे पूछताछ शुरू की गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि गिरफ्तारी योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई।

    आरोप क्या हैं?

    पुलिस का दावा है कि वर्ष 1999 में देवरिया में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती के दौरान ठाकुर ने अपने पद का दुरुपयोग कर जिला उद्योग केंद्र, देवरिया के औद्योगिक प्लॉट संख्या B-2 का आवंटन अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर कराया। आरोप है कि आवंटन के लिए कूट रचित (जाली) दस्तावेज तैयार किए गए — जिसमें छद्म नाम, झूठे पते और परिवर्तित अभिलेख शामिल थे — और बाद में प्लॉट को लाभ के लिए बेचा गया। पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता संजय शर्मा ने यह प्रार्थना-पत्र/शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई।

    दर्ज धाराएँ और सजा की जानकारी

    • धारा 419 — किसी अन्य की पहचान धारण कर धोखाधड़ी: सजा तक 3 वर्ष या जुर्माना या दोनों।
    • धारा 420 — धोखाधड़ी व संपत्ति हानि: सजा तक 7 वर्ष व जुर्माना।
    • धारा 467 — मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी: आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा व जुर्माना।
    • धारा 468 — जाली दस्तावेज बनाना धोखाधड़ी के उद्देश्य से: सजा तक 7 वर्ष व जुर्माना (अक्सर जमानत पर संकुल)।
    • धारा 471, 34, 120B भी आरोपपत्र में शामिल हैं। (नोट: सजा का निर्धारण अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।)

    पुलिस का बयान और वर्तमान स्थिति

    लखनऊ क्राइम ब्रांच और देवरिया पुलिस ने मामले की जांच और सत्यापन शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ठाकुर को देवरिया सदर कोतवाली में रखा गया और उनसे पूछताछ जारी है; आगे की कानूनी कार्यवाही—रिमांड, पेशी या जमानत—आगामी सुनवाई के अनुसार तय होगी।


    ठाकुर के प्रति प्रतिक्रिया

    पूर्व आईपीएस और सामाजिक सक्रियता में जुड़े ठाकुर ने इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में आरोपों को ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ या ‘मंसूबाबद्ध’ बताकर खारिज किया था; इस गिरफ्तारी से जुड़े उनके हालिया बयान उपलब्ध होते ही उसे जोड़ा जाएगा। पहले भी इस प्रकरण पर मीडिया पर और सोशल प्लेटफॉर्म पर ठाकुर व उनके वकील की प्रतिक्रिया दर्ज रही है।


    निष्कर्ष — आगे क्या होने की सम्भावना है

    • पुलिस के बयान, दर्ज धाराओं और गिरफ्तारी के बाद प्राथमिकी के आधार पर जांच तेज़ कर दी गई है।
    • अगला कदम़: पुलिस द्वारा पूछताछ, सम्भवतः रिमांड के लिए अदालत में पेशी, और यदि आवश्यक हुआ तो जमानत याचिका/जमानत सुनवाई।
    • कोर्ट(Delhi High Court) और जांच एजेंसियों के आधिकारिक प्रवक्ताओं से प्राप्त बयानों के बाद ही केस की कानूनी दिशा स्पष्ट होगी।