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  • By-election to the famous Bankipur assembly seat in Bihar: बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी का दांव, अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी को टिकट; प्रशांत किशोर और RJD की रेखा गुप्ता से होगा मुकाबला

    By-election to the famous Bankipur assembly seat in Bihar: बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी का दांव, अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी को टिकट; प्रशांत किशोर और RJD की रेखा गुप्ता से होगा मुकाबला

    पटना: बिहार की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस हॉट सीट के लिए अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी ने युवा नेता अभिषेक कुमार सिन्हा ‘बंटी’ को अपना प्रत्याशी बनाया है। यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। बांकीपुर उपचुनाव में अब मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं। वहीं प्रशांत किशोर के बांकीपुर उपचुनाव में उतरने से शत्रुघ्न सिन्हा काफी गदगद नजर आ रहे हैं। शॉटगन ने प्रशांत किशोर की तारीफ करते हुए उन्हें सबसे काबिल बताया और कहा कि पीके ने जबरदस्त हलचल मचा दी है।

    बीजेपी ने युवा चेहरे पर लगाया भरोसा

    बीजेपी केंद्रीय चुनाव समिति की मंजूरी के बाद अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी के नाम की आधिकारिक घोषणा की गई। पार्टी ने इस बार बाहरी चेहरे की बजाय स्थानीय संगठन से जुड़े युवा नेता पर भरोसा जताया है। अभिषेक कुमार सिन्हा बंटी कायस्थ समाज से आते हैं और लंबे समय से बीजेपी संगठन में सक्रिय हैं। वह वर्तमान में प्रदेश भाजपा युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष हैं। इससे पहले वह पटना महानगर भाजयुमो के अध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन में उन्होंने मंडल मंत्री और महामंत्री जैसी जिम्मेदारियां भी संभाली हैं। करीब 40 वर्ष से कम उम्र के अभिषेक को टिकट देकर बीजेपी ने युवा मतदाताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश की है। पार्टी ने उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा है।

    तीन दशक से बीजेपी का मजबूत किला है बांकीपुर

    पटना शहर की बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट पर नवीन परिवार का दबदबा रहा है। नितिन नवीन लगातार पांच बार बांकीपुर से विधायक रहे। इससे पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी लगातार चार बार इस सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। यानी करीब तीन दशक से अधिक समय तक यह सीट बीजेपी के प्रभाव में रही है। अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने इस मजबूत किले को बचाने की है।

    प्रशांत किशोर की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प

    बांकीपुर उपचुनाव को सबसे ज्यादा चर्चा जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी ने दी है। राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर पहली बार किसी बड़े चुनावी मैदान में सीधे उतर रहे हैं। प्रशांत किशोर बीजेपी के इस पारंपरिक गढ़ में सेंध लगाने का दावा कर रहे हैं। जन सुराज पार्टी पिछले कई दिनों से क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रही है। उनकी उम्मीदवारी से बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक और शहरी मतदाताओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    RJD ने फिर रेखा गुप्ता पर जताया भरोसा

    महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा है। वह पिछले विधानसभा चुनाव में भी इसी सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन बीजेपी के नितिन नवीन से करीब 52 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार गई थीं। पिछले चुनाव में जन सुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी को करीब 7,717 वोट मिले थे। हालांकि इस बार खुद प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने से समीकरण बदलने की संभावना है।

    कई दलों की मौजूदगी से बढ़ी राजनीतिक गर्मी

    बांकीपुर सीट पर मुकाबला और भी रोचक हो गया है। पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) ने सामाजिक कार्यकर्ता वीना मानवी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) भी प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। ऐसे में बांकीपुर में बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।

    चुनाव कार्यक्रम

    बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है।

    • नामांकन की अंतिम तारीख: 13 जुलाई
    • नामांकन वापसी की अंतिम तारीख: 16 जुलाई
    • मतदान: 30 जुलाई
    • मतगणना और परिणाम: 3 अगस्त

    अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बीजेपी अपने पुराने किले को बचा पाएगी या प्रशांत किशोर और विपक्षी दल मिलकर इस सीट पर नया राजनीतिक समीकरण बना पाएंगे।

  • Jharkhand Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में सियासी हलचल तेज, दूसरी सीट पर दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद

    Jharkhand Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव से पहले झारखंड में सियासी हलचल तेज, दूसरी सीट पर दिलचस्प मुकाबले की उम्मीद

    Jharkhand Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को विधानसभा परिसर में सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान से पहले राजधानी रांची में राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच गई हैं और सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं।

    सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही चुनावी गणित को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार रणनीतिक बैठकों का दौर चला रहे हैं। एनडीए के विधायक रांची स्थित एक होटल में ठहरे हुए हैं, जबकि इंडिया गठबंधन के विधायक मुख्यमंत्री आवास और अन्य निर्धारित स्थानों पर बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं।

    मंगलवार शाम मुख्यमंत्री आवास में इंडिया गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें 54 विधायकों ने भाग लिया। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो और माले विधायक अरूप चटर्जी बैठक में उपस्थित नहीं रहे, हालांकि दोनों ने गठबंधन उम्मीदवारों का समर्थन करने का भरोसा जताया है। बैठक के दौरान कराए गए मॉक मतदान में झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को 29 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 27 वोट मिलने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं।

    बुधवार को भी महागठबंधन के नेताओं ने बैठक कर चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया। कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को रांची में तैनात किया है। प्रदेश प्रभारी के. राजू, सह प्रभारी सिरी बेला प्रसाद, सांसद नासिर हुसैन, राज्यसभा सांसद डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह तथा पर्यवेक्षक अजय शर्मा लगातार बैठकों में शामिल हो रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भी रांची पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    चुनाव के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने पोलिंग और काउंटिंग एजेंटों की नियुक्ति भी कर दी है, जो मतदान और मतगणना प्रक्रिया पर नजर रखेंगे।

    उल्लेखनीय है कि जिन दो सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें एक सीट झामुमो संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट भाजपा नेता दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण खाली हुई है।

    इन सीटों के लिए कुल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं। इंडिया गठबंधन ने झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी भी चुनावी मुकाबले में हैं।

    विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए बैजनाथ राम की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है। हालांकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्रॉस वोटिंग, अमान्य मत या किसी विधायक की अनुपस्थिति जैसे कारक चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।

    मतदान समाप्त होने के बाद गुरुवार शाम पांच बजे से मतगणना शुरू होगी। इसके बाद सामने आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि राज्यसभा की दूसरी सीट पर किस दल की रणनीति सफल रही और झारखंड की राजनीति में किसे बढ़त हासिल होती है।

  • New LPG Rules Come Into Effect From 1st June: 1 जून से LPG-PNG उपभोक्ताओं के लिए नए नियम लागू, एक घर में नहीं रख सकेंगे दो गैस कनेक्शन

    New LPG Rules Come Into Effect From 1st June: 1 जून से LPG-PNG उपभोक्ताओं के लिए नए नियम लागू, एक घर में नहीं रख सकेंगे दो गैस कनेक्शन

    नई दिल्ली | प्रतिनिधि
    देश में एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने गैस कनेक्शन से जुड़े कई नए नियम लागू किए हैं। 1 जून 2026 से लागू हो रहे इन नियमों का असर लाखों एलपीजी और पीएनजी उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है।
    New LPG Rules Come Into Effect From June:

    नए नियमों के तहत अब “एक घर-एक गैस कनेक्शन” नीति को और सख्ती से लागू किया जाएगा। जिन परिवारों के घर में पहले से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध है, उन्हें घरेलू एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। सरकार का कहना है कि इससे गैस की अनावश्यक खपत, जमाखोरी और अवैध बिक्री पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
    सरकार द्वारा जारी संशोधित प्रावधानों के अनुसार, PNG कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ता घरेलू LPG कनेक्शन न तो रख सकेंगे और न ही नया कनेक्शन प्राप्त कर सकेंगे। जिन उपभोक्ताओं के पास दोनों सुविधाएं हैं, उन्हें एलपीजी कनेक्शन वापस करना होगा।
    हालांकि सरकार ने ऐसे उपभोक्ताओं को राहत भी दी है। यदि कोई उपभोक्ता PNG अपनाने के बाद LPG कनेक्शन सरेंडर करता है, तो उसे एक विशेष वाउचर सुविधा दी जाएगी। भविष्य में यदि वह ऐसे क्षेत्र में स्थानांतरित होता है जहां PNG उपलब्ध नहीं है, तो उसी वाउचर के आधार पर दोबारा LPG कनेक्शन आसानी से प्राप्त कर सकेगा।
    इसके अलावा गैस सिलेंडर की उपलब्धता को संतुलित रखने के लिए रिफिल बुकिंग के नियम भी लागू हैं। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार शहरी क्षेत्रों में अगले सिलेंडर की बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिन का अंतर आवश्यक है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन निर्धारित की गई है। सरकार ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि इन समय सीमाओं में फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं किया गया है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों से वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, हालांकि महानगरों और PNG सुविधायुक्त क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को नई व्यवस्था के अनुसार अपने कनेक्शन अपडेट करने होंगे।

  • Commission Seeks Report: देवघर सुधार गृह में युवती की मौत से हड़कंप, आयोग ने तलब की विस्तृत रिपोर्ट!

    Commission Seeks Report: देवघर सुधार गृह में युवती की मौत से हड़कंप, आयोग ने तलब की विस्तृत रिपोर्ट!

    Commission Seeks Report: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(एनएचआरसी) ने झारखंड के देवघर जिले स्थित एक सुधार गृह में 19 वर्षीय युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव और देवघर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है।

    मानवाधिकार आयोग ने दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह में मामले की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य सही हैं तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। रिपोर्टों के अनुसार, देवघर जिले के चरखी पहाड़ी क्षेत्र स्थित सुधार गृह में गत दो मई को एक युवती की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उसे देवघर सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी।

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    मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। आयोग ने इस बात पर भी चिंता जतायी कि इस साल पहली जनवरी से अब तक इस सुधार गृह में पांच कैदियों की मौत हो चुकी है। आयोग ने कहा कि लगातार हो रही इन घटनाओं से सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

  • Jharkhand: जया प्रदा का मेदिनीनगर में रोड शो, चुनावी सरगर्मी तेज

    Jharkhand: जया प्रदा का मेदिनीनगर में रोड शो, चुनावी सरगर्मी तेज

    Jhankhand News: मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, शहर की सियासी फिजा गर्म होती जा रही है। राजनीतिक दल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए हर संभव रणनीति अपना रहे हैं। इसी क्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व सांसद जया प्रदा 21 फरवरी को मेदिनीनगर पहुंचकर रोड शो करेंगी, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

    भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में शक्ति प्रदर्शन

    जया प्रदा (Jaya Prada) भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी अरुणा शंकर के समर्थन में शहर की सड़कों पर रोड शो करेंगी। उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। स्थानीय स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं और इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि स्टार प्रचारक की मौजूदगी से मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और चुनावी माहौल में नया जोश पैदा होगा।

    विकास और शांति पर फोकस

    अरुणा शंकर इस बार पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतरी हैं। वह अपने पूर्व मेयर कार्यकाल के दौरान कराए गए विकास कार्यों को प्रमुखता से जनता के सामने रख रही हैं। उनका मुख्य चुनावी एजेंडा शहर में शांति, सुव्यवस्था और सतत विकास को बनाए रखना है। समर्थकों का दावा है कि उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी हुईं, जिनसे आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला।

    क्या साबित होगा गेम चेंजर?

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जया प्रदा का रोड शो भाजपा के लिए “गेम चेंजर” साबित हो सकता है। स्टार प्रचारक के रूप में उनकी लोकप्रियता चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। इससे विरोधी दलों पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ेगा और मुकाबला और अधिक कड़ा होने की संभावना है।

    मतदाता अब भी खामोश

    हालांकि चुनावी तापमान बढ़ चुका है, लेकिन मतदाता फिलहाल अपनी राय खुलकर जाहिर नहीं कर रहे हैं। लोकतंत्र में गुप्त मतदान के अधिकार के कारण जनता चुप्पी साधे हुए है। माना जा रहा है कि असली तस्वीर मतदान के दिन ही सामने आएगी।

    अब सबकी निगाहें 21 फरवरी को होने वाले रोड शो पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस शक्ति प्रदर्शन का मेदिनीनगर की चुनावी राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

  • हेमंत सोरेन की बीजेपी को करारी चेतावनी: हाई कोर्ट से राहत, NDA में जाने की अफवाहों पर पलटवार

    हेमंत सोरेन की बीजेपी को करारी चेतावनी: हाई कोर्ट से राहत, NDA में जाने की अफवाहों पर पलटवार

    Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की दिल्ली में बीजेपी नेताओं से मुलाकात ने राज्य की सियासी गलियों में हलचल मचा दी थी। हालांकि, अब हाई कोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत दी है। रांची हाई कोर्ट ने सीएम को निचली अदालत में सशरीर उपस्थिति से छूट दे दी है, और वे केवल 6 दिसंबर को ट्रायल के दौरान अदालत में उपस्थित होंगे। यह राहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन की अवहेलना मामले में दी गई है।

    28 नवंबर से दिल्ली में रहे हेमंत सोरेन बुधवार शाम को अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ रांची लौट आए। इस दौरान मीडिया में खबरें आई थीं कि उन्होंने बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ गुप्त बैठक की। इस खबर ने अफवाहों का बाजार गर्म कर दिया कि क्या सीएम विपक्षी गठबंधन छोड़कर एनडीए में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।

    हालांकि, झारखंड बीजेपी और जेएमएम नेताओं ने इन अटकलों को तुरंत खारिज कर दिया। जेएमएम के एक्स हैंडल पर भी “झारखंड झुकेगा नहीं” कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया, जिससे साफ संकेत मिला कि राज्य में गठबंधन मजबूत है और अफवाहों से प्रभावित नहीं होगा।

    सीएम हेमंत सोरेन के रांची लौटने के बाद कांग्रेस विधायक और राज्य मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने कहा, “इन तरह की अटकलों पर रोक लगनी चाहिए। यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है। झारखंड में ग्रैंड अलायंस को स्पष्ट जनादेश मिला है। बीजेपी की कोशिशें गठबंधन को कमजोर करने की हैं, लेकिन सफल नहीं होंगी। हमारे मुख्यमंत्री कभी भी बीजेपी की चालों में नहीं आएंगे। जो नेता राज्य और जनता के हित के लिए जेल जा सकता है, वह कभी भी विपक्ष की साजिशों में शामिल नहीं होगा। हमारी सरकार मजबूत है और आगे भी मजबूत रहेगी।”

    राज्य की सियासी प्रतिक्रिया साफ है: हेमंत सोरेन अपनी राजनीतिक जमीन पर अडिग हैं और बीजेपी की साजिशों के बावजूद ग्रैंड अलायंस मजबूत रहेगा।

  • पटना की रैली से उपेंद्र कुशवाहा ने बदले राजनीतिक तेवर, एनडीए पर दबाव की कोशिश

    पटना की रैली से उपेंद्र कुशवाहा ने बदले राजनीतिक तेवर, एनडीए पर दबाव की कोशिश

    पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के नेता उपेंद्र कुशवाहा इन दिनों अपने राजनीतिक अस्तित्व और ताकत का अहसास कराने के लिए लगातार शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। कभी मानव श्रृंखला तो कभी बड़ी रैलियों के जरिए, वह अपने समर्थकों को संदेश देने और विपक्षियों पर दबाव बनाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में 5 सितंबर को पटना में आयोजित रैली ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान खींचा। इस रैली का समय और मकसद दोनों ही काफी अहम माने जा रहे हैं।

    यह संयोग नहीं है कि कुशवाहा ने शिक्षक दिवस पर रैली की, बल्कि उनके लिए यह तारीख इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि यह बिहार के लेनिन कहे जाने वाले शहीद जगदेव प्रसाद का शहादत दिवस है। जगदेव प्रसाद कुशवाहा समाज के बड़े नेता रहे हैं और उनकी याद में पहले भी कई रैलियां होती रही हैं। ऐसे मौके का चुनाव कर उपेंद्र कुशवाहा ने अपने समाज और समर्थकों को साधने का प्रयास किया है।

    इस रैली का मुख्य मुद्दा परिसीमन रहा। कुशवाहा लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि बिहार में 50 साल से परिसीमन नहीं हुआ, जबकि अगर समय पर यह प्रक्रिया पूरी होती तो राज्य की लोकसभा सीटें 40 नहीं बल्कि 60 होतीं। इसी मुद्दे को लेकर वह लगातार रैलियां कर रहे हैं और लोगों को अपने पक्ष में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, यह अभियान अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार और बीजेपी पर दबाव बनाने का तरीका भी है।

    लेकिन रैली में दिए गए उनके कुछ बयान एनडीए के लिए असहज करने वाले साबित हुए। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और राहुल गांधी पर उनकी टिप्पणी ने यह संकेत दिया कि वह एनडीए की स्थापित राजनीतिक लाइन से हटकर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को SIR की प्रक्रिया के लिए बिहार जैसे राज्य को अधिक समय देना चाहिए था। साथ ही, यह भी माना कि वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस और राहुल गांधी को फायदा हो सकता है। हालांकि उन्होंने इस यात्रा को ‘फेल’ भी बताया, लेकिन राहुल गांधी के पक्ष में यह स्वीकारोक्ति बीजेपी के लिए स्वीकार करना मुश्किल होगी।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा की लाइन इस समय कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं से मिलती-जुलती नजर आ रही है। फर्क बस इतना है कि वह खुलकर ‘वोट चोरी’ जैसी बातें नहीं कर रहे, लेकिन SIR पर उनकी राय वही है जो तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की है।

    इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के भीतर असहज हो रहे हैं और फिर से नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं। उनका राजनीतिक इतिहास भी इस आशंका को मजबूत करता है। कभी जेडीयू में रहकर, कभी बीजेपी से गठबंधन कर और कभी तीसरा मोर्चा बनाकर, वह बार-बार पाला बदलते रहे हैं। 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद वह बीजेपी के सहारे राज्यसभा पहुंचे, लेकिन अब उनके तेवर यह दिखा रहे हैं कि आने वाले दिनों में वह फिर किसी नए समीकरण की ओर बढ़ सकते हैं।

    पटना रैली ने स्पष्ट कर दिया है कि उपेंद्र कुशवाहा सिर्फ अस्तित्व की लड़ाई ही नहीं लड़ रहे, बल्कि एनडीए में भी अपनी राजनीतिक कीमत बढ़ाने की जुगत में हैं। परिसीमन और SIR जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने एक साथ जनता और केंद्र दोनों को संदेश दिया है। अब देखना यह होगा कि यह दांव उन्हें सत्ता समीकरण में कितना लाभ पहुंचाता है और क्या वह एनडीए के साथ टिके रहते हैं या फिर एक बार फिर पाला बदलने की राजनीति करते हैं।