Category: Railway

  • CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns: क्या ट्रांसफर रोकने के लिए सीएसएमटी पार्सल में कार्यरत शैलेन्द्र पंडित ने शिकायत को बनाया हथियार?

    ” विजिलेंस पर दबाव डालने की कोशिश या प्रशासन को खुली चुनौती!”–सीएसएमटी पार्सल प्रकरण ने उठाया सवाल

    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
    सीएसएमटी पार्सल विभाग में स्थानांतरण के बाद जीआरपी शिकायत से मचा बवाल, विजिलेंस कार्रवाई और प्रशासनिक तंत्र पर उठे गंभीर सवाल

    मुंबई: मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन(CR Mumbai Division) स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) के पार्सल विभाग में सामने आया विवाद अब एक कर्मचारी के स्थानांतरण से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह मामला रेलवे की प्रशासनिक पारदर्शिता, विजिलेंस तंत्र की स्वतंत्रता और शिकायत प्रणाली के संभावित दुरुपयोग जैसे गंभीर मुद्दों को केंद्र में ले आया है।

    सूत्रों के अनुसार, विजिलेंस की अनुशंसा के आधार पर सीएसएमटी पार्सल सीबीएस बैच इंचार्ज शैलेन्द्र पंडित का स्थानांतरण सीएसएमटी से शिवुड़–दारावे स्टेशन किया गया। लेकिन स्थानांतरण आदेश जारी (CSMT Parcel Transfer Row Raises Vigilance and Administrative Concerns) होने के तुरंत बाद 11 फरवरी 2026 को सीएसएमटी जीआरपी में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने से पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    https://epaper.rashtriyaswabhimaan.com/view/501/rashtriya-swabhimaan

    जीआरपी में प्रस्तुत शिकायत(Complain) में मुंबई डिवीजन के सीनियर डीसीएम डॉ. शिवराज मानसपुरे, मध्य रेलवे के डिप्टी सीवीओ (ट्रैफिक) प्रदीप हिरडे तथा चीफ विजिलेंस इंस्पेक्टर सुमित दूधे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। रेलवे के जानकार अधिकारियों का कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई के तुरंत बाद इस प्रकार की शिकायत दर्ज होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं माना जा सकता। इससे यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं यह कदम विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने या दबाव बनाने की रणनीति तो नहीं।

    पहले से दर्ज थीं अनियमितताएँ

    • दस्तावेजों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी आपत्तियाँ दर्ज की जा चुकी थीं।
    • 23 अप्रैल 2025 को निरीक्षण में अनियमितता दर्ज होने की बात सामने आई।
    • 25 जून 2025 को ड्यूटी से अनुपस्थित पाए जाने का उल्लेख रिकॉर्ड में है।
    • ड्यूटी मस्टर में नाम का कॉलम खाली छोड़ने और बाद में हस्ताक्षर करने की प्रवृत्ति भी नोट की गई।
    • 3 अगस्त 2025 को सीआरबी निरीक्षण के दौरान अनुपस्थिति के बाद चेतावनी जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    इन्हीं तथ्यों के आधार पर चार्जशीट और बाद में स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने की बात कही जा रही है।

    एसोसिएशन की मान्यता पर भी प्रश्न

    मामले का एक और संवेदनशील पहलू यह है कि शिकायत पत्र ‘ऑल इंडिया एससी एंड एसटी रेलवे एम्प्लॉइज एसोसिएशन’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, रेलवे के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार संबंधित संगठन की रेलवे बोर्ड से मान्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि संगठन की वैधता संदिग्ध पाई जाती है, तो यह मामला फर्जी संगठन के नाम पर दबाव बनाने तक जा सकता है।

    क्या शिकायत तंत्र बन रहा है ‘ढाल’?

    रेलवे के भीतर अब यह चर्चा तेज है कि क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए शिकायत प्रणाली का उपयोग एक ‘ढाल’ के रूप में किया गया। यदि हर विभागीय जांच या स्थानांतरण के बाद इसी तरह की रणनीति अपनाई जाती है, तो निष्पक्ष कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के लिए भय और असुरक्षा का वातावरण बन सकता है।

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि यदि जांच एजेंसियों और विजिलेंस अधिकारियों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाएगा, तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन हो जाएगा। यह केवल एक कर्मचारी बनाम प्रशासन का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है।

    रेलवे प्रशासन के लिए चेतावनी संकेत

    यह प्रकरण रेलवे के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। यदि विजिलेंस की अनुशंसा पर की गई कार्रवाई को शिकायतों के माध्यम से दबाने की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो भविष्य में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

    रेलवे को चाहिए कि:

    • शिकायत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराए।
    • विजिलेंस कार्रवाई के तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे (नियमों के दायरे में)।
    • एसोसिएशन की मान्यता की सत्यता की जांच कर स्पष्ट स्थिति सामने लाए।
    • ईमानदार अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण प्रदान करे।

    यदि समय रहते स्पष्ट और दृढ़ रुख नहीं अपनाया गया, तो यह मामला भविष्य में अनुशासनात्मक प्रक्रिया को कमजोर करने वाली मिसाल बन सकता है।

    अब सबकी निगाहें रेलवे बोर्ड और मध्य रेलवे के शीर्ष प्रशासन पर टिकी हैं कि वे संस्थागत साख को मजबूत करते हैं या यह प्रकरण भी फाइलों में सिमट कर रह जाता है।

  • Employment News: रेलवे ग्रुप-D भर्ती 2026: एक ही ज़ोन के लिए होगा आवेदन, जानें आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और फीस

    Employment News: रेलवे ग्रुप-D भर्ती 2026: एक ही ज़ोन के लिए होगा आवेदन, जानें आयु सीमा, परीक्षा पैटर्न और फीस

    नई दिल्ली: भारतीय रेलवे द्वारा ग्रुप-D के 21,997 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार केवल एक ही रेलवे ज़ोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि कोई अभ्यर्थी एक से अधिक ज़ोन के लिए आवेदन करता है, तो उसका फॉर्म रद्द कर दिया जाएगा। हालांकि, एक ही ज़ोन के अंतर्गत उम्मीदवार एक से अधिक पदों के लिए वरीयता क्रम देकर आवेदन कर सकता है, जिसके लिए अलग फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी।

    केवल एक ही फॉर्म भरा जा सकेगा

    उम्मीदवार केवल एक ही रेलवे ज़ोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि किसी उम्मीदवार ने एक से अधिक ज़ोन के लिए आवेदन किया, तो उसका फॉर्म रद्द कर दिया जाएगा।
    हालांकि, एक ही ज़ोन के भीतर एक से अधिक पदों के लिए आवेदन किया जा सकता है, जिसके लिए उम्मीदवार को वरीयता क्रम (Preference Order) देना होगा। इसके लिए अलग से कोई आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।


    आयु सीमा क्या है?

    इस भर्ती के लिए 18 से 33 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।
    आयु की गणना 1 जनवरी 2026 के अनुसार की जाएगी।

    आयु में छूट:

    • OBC: 3 वर्ष
    • SC/ST: 5 वर्ष

    खुला वर्ग / EWS:
    उम्मीदवार का जन्म 2 जनवरी 1993 से 1 जनवरी 2008 के बीच होना चाहिए।


    चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

    चयन प्रक्रिया निम्न चरणों पर आधारित होगी:

    1. सिंगल स्टेज कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT)
    2. शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET)
    3. दस्तावेज़ सत्यापन
    4. चिकित्सीय परीक्षण

    लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को ही शारीरिक परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा।


    परीक्षा का स्वरूप

    • परीक्षा अवधि: 90 मिनट
    • कुल प्रश्न: 100

    विषयवार प्रश्न:

    • सामान्य विज्ञान: 25 प्रश्न
    • गणित: 25 प्रश्न
    • बुद्धिमत्ता (रीजनिंग): 30 प्रश्न
    • सामान्य ज्ञान एवं समसामयिक घटनाएं: 20 प्रश्न

    नेगेटिव मार्किंग

    प्रत्येक गलत उत्तर पर 1/3 (एक-तिहाई) अंक काटे जाएंगे।


    न्यूनतम उत्तीर्ण प्रतिशत

    • UR / EWS: 40%
    • OBC / SC / ST: 30%

    शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की शर्तें

    पुरुष उम्मीदवारों के लिए:

    • 35 किलोग्राम वजन उठाकर 100 मीटर दूरी 2 मिनट में पूरी करनी होगी।
    • 1000 मीटर दौड़ 4 मिनट 15 सेकंड में पूरी करनी होगी।

    महिला उम्मीदवारों के लिए:

    • 20 किलोग्राम वजन उठाकर 100 मीटर दूरी 2 मिनट में पूरी करनी होगी।
    • 1000 मीटर दौड़ 5 मिनट 40 सेकंड में पूरी करनी होगी।

    वेतन और आवेदन शुल्क

    वेतन:

    • ₹18,000 प्रति माह (लेवल-1 पे स्केल) + अन्य भत्ते

    आवेदन शुल्क:

    परीक्षा में शामिल होने पर पूरा ₹250 रिफंड

    जनरल / OBC / EWS: ₹500

    परीक्षा में शामिल होने पर ₹400 रिफंड

    SC / ST / महिला / EBC: ₹250

  • Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    Western Railway News: चलती लोकल बनी कत्लखाना! मलाड स्टेशन पर प्रोफेसर की चाकुओं से नृशंस हत्या, रेलवे की नाक के नीचे गैंगराज

    सुजीत मिश्र | मुंबई।
    मुंबई की लोकल ट्रेनें अब सिर्फ सफर का जरिया नहीं रहीं, बल्कि दिनदहाड़े अपराध की चलती-फिरती प्रयोगशाला बन चुकी हैं। पश्चिम रेलवे की लोकल ट्रेनों में कानून, सुरक्षा और इंसानियत—तीनों का सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार हो चुका है। गुरुवार, 22 जनवरी को बोरीवली जाने वाली स्लो लोकल में मलाड रेलवे स्टेशन पर मामूली बहस ने वह भयावह मोड़ लिया, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया। 33 वर्षीय प्रोफेसर आलोक कुमार सिंह की चलती ट्रेन में चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई।

    यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सरकारी नाकामी का खून से लिखा दस्तावेज़ है। आरोपी 27 वर्षीय ओमकार शिंदे की गिरफ्तारी अगले दिन हो गई, लेकिन असली सवाल गिरफ्तारी का नहीं—सवाल यह है कि ऐसे कातिल लोकल ट्रेनों में बेखौफ कैसे घूम रहे हैं?

    मुंबई लोकल में अब अकेले यात्री नहीं चलते—गुंडों के झुंड चलते हैं। ये गिरोह तय करते हैं कि कौन चढ़ेगा, कौन उतरेगा और कौन ज़िंदा बचेगा। विरोध किया तो मारपीट, लूट और अब हत्या तय है। विकलांग डिब्बों तक पर दबंगों और माफियाओं का कब्ज़ा है, जहाँ असल में दिव्यांग यात्रियों की एंट्री ही मुश्किल हो चुकी है। यह अव्यवस्था नहीं, बल्कि संस्थागत अपराध है।

    रेलवे के उच्चाधिकारी और कमर्शियल विभाग या तो गहरी नींद में हैं या जानबूझकर आँखें मूंदे बैठे हैं। न नियमित पेट्रोलिंग, न अपराधियों पर सख़्त लगाम। बीते साल महिला डिब्बे में मारपीट का वीडियो वायरल हुआ, चेतावनियाँ दी गईं—लेकिन प्रशासन ने खून बहने तक इंतज़ार किया।

    मृतक आलोक कुमार सिंह उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के चंदवक थाना क्षेत्र के पड़रछा गाँव के निवासी थे और मुंबई के प्रतिष्ठित एन.एम. कॉलेज, विले पार्ले में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। एक शिक्षक, एक शिक्षित नागरिक अगर लोकल ट्रेन में सुरक्षित नहीं है, तो मजदूर, छात्र और महिला यात्रियों की सुरक्षा का दावा कौन करेगा?

    सीधा सवाल, सीधा आरोप—
    क्या मुंबई लोकल अब अपराधियों के लिए फ्री ज़ोन बन चुकी है?
    क्या रेलवे प्रशासन को चेतना सिर्फ लाशों की गिनती से आती है?

    यह घटना चेतावनी नहीं, अंतिम अलार्म है। अगर अब भी सख़्त और दिखाई देने वाली कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली मौत किसी और की होगी—और जिम्मेदार फिर भी कोई नहीं होगा।

  • IRCTC West Zone Annual Day: आईआरसीटीसी वेस्ट जोन, मुंबई ने धूमधाम से मनाया 26वां एन्युअल डे समारोह

    IRCTC West Zone Annual Day: आईआरसीटीसी वेस्ट जोन, मुंबई ने धूमधाम से मनाया 26वां एन्युअल डे समारोह

    मुंबई | प्रतिनिधि
    इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईआरसीटीसी), वेस्ट जोन, मुंबई द्वारा दिनांक 19 दिसंबर 2025 को अपना 26वां एन्युअल डे समारोह अत्यंत हर्षोल्लास और भव्यता के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर ग्रुप जनरल मैनेजर श्री गौरव झा ने पश्चिमी क्षेत्र की उल्लेखनीय उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला।
    वेस्ट जोन का सशक्त और सराहनीय प्रदर्शन
    अपने संबोधन में श्री गौरव झा ने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में वर्तमान वर्ष वेस्ट जोन के लिए दृढ़ता, निरंतरता और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतीक रहा है। चुनौतीपूर्ण एवं गतिशील कार्य वातावरण के बावजूद वेस्ट जोन ने सभी क्षेत्रों में बेहतरीन कार्य करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
    मोबाइल केटरिंग से ₹360 करोड़ का राजस्व
    उन्होंने जानकारी दी कि मोबाइल केटरिंग, जो वेस्ट जोन का सबसे बड़ा राजस्व स्रोत है, ने चालू वित्तीय वर्ष में लगभग ₹360 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है।
    वेस्ट जोन द्वारा—

    – 13 वंदे भारत ट्रेनें
    – 12 राजधानी एवं शताब्दी ट्रेनें
    – 96 मेल/एक्सप्रेस WCB ट्रेनें
    – 83 एंड-टू-एंड TSV ट्रेनें
    – 329 ट्रेनें (सेक्शनल TSV मॉडल)
    में सफलतापूर्वक केटरिंग सेवाओं का संचालन किया गया।
    नई वंदे भारत ट्रेनों की सफल शुरुआत
    यात्रियों को आधुनिक और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में इस वर्ष दो नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों—
    नागपुर–सिकंदराबाद, पुणे–कोल्हापुर का भी सफलतापूर्वक शुभारंभ किया गया।
    लॉन्ग-टर्म क्लस्टर मॉडल की बड़ी उपलब्धि
    इस वर्ष की एक बड़ी उपलब्धि शॉर्ट-टर्म मोबाइल टेंडरों का लॉन्ग-टर्म क्लस्टर मॉडल में सफल रूपांतरण रहा।
    वित्तीय वर्ष के दौरान—
    34 क्लस्टर
    119 ट्रेनें
    163 किचन यूनिट्स का संचालन प्रारंभ किया गया।
    चुनाव विशेष और FTR ट्रेनों में रिकॉर्ड सेवाएं
    आईआरसीटीसी वेस्ट जोन ने चुनाव विशेष एवं FTR ट्रेनों में लगभग 7.56 लाख भोजन उपलब्ध कराए, जिससे लगभग ₹14.20 करोड़ का राजस्व अर्जित हुआ। यह उपलब्धि वेस्ट जोन के लिए गर्व का विषय रही।
    कर्मचारियों को मिला सम्मान
    इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।
    50 कर्मचारियों को व्यक्तिगत पुरस्कार
    -भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय – 11
    -अहमदाबाद क्षेत्रीय कार्यालय – 7
    -नागपुर एवं भुसावल – 2-2 के 6 ग्रुप अवार्ड सामूहिक उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदान किए गए।

    टीमवर्क और समर्पण का परिणाम
    समारोह के समापन पर श्री गौरव झा ने कहा कि वेस्ट जोन की यह सभी उपलब्धियाँ अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण, टीमवर्क और अथक परिश्रम का परिणाम हैं।

  • तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव: अब OTP से होगी पुष्टि, यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल या मिलेगी राहत?

    तत्काल टिकट बुकिंग में बड़ा बदलाव: अब OTP से होगी पुष्टि, यात्रियों की बढ़ेगी मुश्किल या मिलेगी राहत?

    मुंबई। भारतीय रेलवे ने अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए तत्काल टिकट बुकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब फिजिकल रिज़र्वेशन काउंटर पर तत्काल टिकट बुकिंग के लिए यात्रियों को वन-टाइम पासवर्ड (OTP) वेरिफिकेशन कराना होगा। यानी बिना OTP के टिकट बुक ही नहीं होगा।

    17 नवंबर से शुरू हुआ नया सिस्टम, अब 52 ट्रेनों तक बढ़ाया गया दायरा

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह सिस्टम 17 नवंबर से पायलट आधार पर शुरू किया गया था। शुरुआत में सिर्फ कुछ ही ट्रेनों पर इसे लागू किया गया था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 52 ट्रेनों में लागू कर दिया गया है।
    आगे चलकर इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर की सभी ट्रेनों पर लागू किया जाएगा।

    कैसे मिलेगा OTP?

    नई प्रक्रिया के अनुसार:

    • यात्री को रिज़र्वेशन फॉर्म में अपना मोबाइल नंबर लिखना होगा।
    • उसी नंबर पर रेलवे की ओर से OTP भेजा जाएगा।
    • OTP वेरिफाई होने के बाद ही तत्काल टिकट जारी होगा।

    क्यों बदला गया नियम?—हेराफेरी रोकने की तैयारी

    रेलवे मंत्रालय के मुताबिक यह कदम तत्काल टिकटों की बढ़ती हेराफेरी और ब्लैकिंग रोकने के लिए उठाया गया है।
    तत्काल टिकट की मांग बहुत अधिक रहती है, ऐसे में कई एजेंट और दलाल सिस्टम को चकमा देकर टिकट बुक कर लेते थे। रेलवे का मानना है कि OTP वेरिफिकेशन से यह धंधा काफी हद तक रुक जाएगा और टिकट सही यात्रियों तक पहुंच पाएंगे।

    पहले भी बदले थे कई नियम

    रेलवे इस साल टिकटिंग सिस्टम में लगातार बदलाव कर रहा है—

    • जुलाई में तत्काल टिकट की ऑनलाइन बुकिंग के लिए आधार-आधारित OTP वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया था।
    • 1 अक्टूबर से IRCTC पर बुकिंग विंडो खुलने के शुरुआती 15 मिनट केवल आधार-ऑथेंटिकेटेड यूजर्स को टिकट बुक करने की अनुमति दी गई।

    यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?

    अधिकारियों का दावा है कि—

    • सिस्टम ज्यादा पारदर्शी होगा
    • दलालों की परेशानी बढ़ेगी
    • पीक डिमांड में आम यात्रियों के टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी
    • बुकिंग प्रक्रिया और सुरक्षित होगी

    हालांकि, यात्रियों को मोबाइल नेटवर्क और OTP देरी जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

  • Swachchhata Pakhwada: रेलवे पर ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ के तहत चला गहन सफाई अभियान

    Swachchhata Pakhwada: रेलवे पर ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ के तहत चला गहन सफाई अभियान

    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे में 1 से 15 अक्टूबर 2025 तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान स्टेशनों और ट्रेनों पर गहन सफाई और स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    अभियान के तहत विभिन्न स्टेशनों पर नालियों और शौचालयों की गहन सफाई की गई। यात्रियों और आम लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    रेलवे ने गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण को बढ़ावा देने के लिए स्टेशनों पर अलग-अलग रंग के कूड़ेदान लगाए हैं। इसके साथ ही प्लास्टिक उपयोग को हतोत्साहित करने और प्रमुख स्टेशनों को प्लास्टिक-मुक्त बनाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि प्लेटफॉर्म और परिसरों को ‘शून्य अपशिष्ट क्षेत्र’ बनाने के लिए कूड़ा-कचरा मुक्त अभियान चलाया गया है। स्टेशनों पर प्लास्टिक बोतल क्रशर मशीनें भी लगाई गई हैं, ताकि फेंकी गई बोतलों से जल निकासी या नाली में समस्या न हो।

    रेलवे ने कहा कि यह अभियान केवल स्टेशनों की सफाई के लिए नहीं है, बल्कि यात्रियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास है।

  • Surat Bullet Train: सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन देगा यात्री सुविधा और कनेक्टिविटी को नया आयाम

    Surat Bullet Train: सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन देगा यात्री सुविधा और कनेक्टिविटी को नया आयाम

    ठाणे। निर्माणाधीन सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन के साथ शहर अब विकास और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई छूने को तैयार है। यह स्टेशन यात्रियों की सुविधा और आराम को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक डिज़ाइन के साथ तैयार किया जा रहा है।

    🏢 आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित स्टेशन

    स्टेशन में यात्रियों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी:

    • आरामदायक प्रतीक्षालय
    • नर्सरी और स्वच्छ शौचालय
    • खुदरा दुकानें और फूड कोर्ट
    • हवादार प्लेटफार्म और प्राकृतिक रोशनी के लिए रोशनदान

    यह सब मिलकर यात्रियों को एक शांत, सुरक्षित और आनंददायक यात्रा अनुभव प्रदान करेगा।

    🚉 मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की योजना

    मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना (SMART) के तहत, सूरत नगर निगम (SMC) और सूरत शहरी विकास प्राधिकरण (SUDA) के सहयोग से एक मल्टी-मॉडल एकीकरण योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत:

    • मेट्रो ट्रेन, बस, टैक्सी, ऑटो और अन्य स्थानीय परिवहन के बीच आसान स्विचिंग
    • स्टेशन के आसपास यातायात का सुचारू प्रवाह
    • ट्रांज़िशन टाइम में उल्लेखनीय कमी

    यह स्टेशन न केवल सूरत की पहचान को नई दिशा देगा, बल्कि यात्रियों को तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव भी प्रदान करेगा। स्मार्ट इंटीग्रेशन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ यह परियोजना भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में एक मील का पत्थर साबित होगी।

  • IRCTC News-RailNeer:रेलनीर की पानी की बोतल अब और सस्ती, 22 सितंबर से लागू होंगे नए रेट

    IRCTC News-RailNeer:रेलनीर की पानी की बोतल अब और सस्ती, 22 सितंबर से लागू होंगे नए रेट

    मुंबई। रेल यात्रियों के लिए राहत की खबर है। भारतीय रेलवे द्वारा संचालित ‘रेलनीर’ ब्रांड की पानी की बोतल अब सस्ती हो गई है। रेलवे बोर्ड ने 20 सितंबर को जारी परिपत्र में इसकी घोषणा की है, जिसके अनुसार 22 सितंबर से देशभर के सभी रेलवे स्टेशनों और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों में ‘रेलनीर’ की नई दरें लागू होंगी।
    अब एक लीटर की रेलनीर पानी की बोतल ₹15 की बजाय ₹14 में और 500 मिली की बोतल ₹10 की बजाय ₹9 में मिलेगी। यह बदलाव यात्रियों को स्वच्छ और सस्ता पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
    रेलनीर का उत्पादन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) द्वारा किया जाता है। यह ब्रांड मुख्य रूप से मुंबई के CSMT से कसारा/कर्जत, चर्चगेट से विरार, हार्बर लाइन, वापी और वलसाड जैसे स्टेशनों पर उपलब्ध है। हालांकि, उत्पादन में कमी आने पर रेलवे द्वारा चयनित अन्य ब्रांड की पानी की बोतलें भी बेची जाती हैं, जिनकी कीमतों में भी ₹1 की कटौती की गई है।
    IRCTC के पश्चिम विभाग के सात प्रमुख प्लांट—अंबरनाथ, बुटीबोरी (नागपुर), मानेरी (जबलपुर), मंडीदीप (भोपाल), रामपुरा (राजस्थान), साणंद (गुजरात) और भुसावल—हर दिन लाखों यात्रियों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करते हैं। अंबरनाथ प्लांट में प्रतिदिन लगभग 1,74,000 बोतलों का उत्पादन होता है, जबकि अन्य प्लांट्स में औसतन 72,000 बोतलें रोजाना तैयार की जाती हैं।
    IRCTC पश्चिम विभाग के समूह महाप्रबंधक गौरव झा ने बताया कि नई दरों की जानकारी सभी स्टॉलधारकों और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के कर्मचारियों तक पहुंचा दी गई है। साथ ही, बोतलों पर नई छपी हुई कीमतें—एक लीटर पर ₹14 और 500 मिली पर ₹9—स्पष्ट रूप से दर्शाई जाएंगी।

  • MUM-AHD Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में ऐतिहासिक टनल ब्रेकथ्रू: भारत की पहली अंडर-सी हाई-स्पीड रेल सुरंग

    MUM-AHD Bullet Train Project: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में ऐतिहासिक टनल ब्रेकथ्रू: भारत की पहली अंडर-सी हाई-स्पीड रेल सुरंग

    ठाणे, महाराष्ट्र: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (HSR) प्रोजेक्ट में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। आज 4.8 किमी लंबी सुरंग के निर्माण में बड़ा ब्रेकथ्रू हुआ, जिसमें घनसौली और शिलफाटा से एक साथ खुदाई कर पानी के नीचे की चुनौतीपूर्ण भू-परिस्थिति को पार किया गया। दोनों टीमें आज सफलतापूर्वक जुड़ गईं — यह भारत की पहली अंडर-सी बुलेट ट्रेन सुरंग है।

    इंजीनियरिंग चमत्कार

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए कहा:

    “यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जब हम भारत की पहली अंडर-सी टनल बना रहे हैं, जो मुंबई और ठाणे को इस चुनौतीपूर्ण खाड़ी से जोड़ेगी।”

    इस प्रोजेक्ट में अत्याधुनिक New Austrian Tunnelling Method (NATM) का उपयोग किया गया है, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी और आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।

    आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

    • यात्रा समय में कटौती: मुंबई से अहमदाबाद की यात्रा अब सिर्फ 2 घंटे 7 मिनट में संभव होगी।
    • आर्थिक कॉरिडोर: यह प्रोजेक्ट आनंद, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, वापी और मुंबई को जोड़कर एकीकृत बाज़ार बनाएगा।
    • मध्यम वर्ग के लिए सुलभता: किराया संरचना को मध्यम वर्ग के अनुकूल रखा जाएगा, जिससे आरामदायक और सुलभ यात्रा सुनिश्चित होगी।

    जैसे जापान में टोक्यो, नागोया और ओसाका को जोड़ने वाली बुलेट ट्रेन ने देश की अर्थव्यवस्था को गति दी थी, वैसे ही यह प्रोजेक्ट भारत में औद्योगिक विकास को तेज़ करेगा।

    प्रोजेक्ट की प्रगति

    • 320 किमी लंबा वायाडक्ट निर्माण पूरा
    • सभी स्टेशनों पर निर्माण कार्य तेज़ी से जारी
    • नदियों पर systematically पुलों का निर्माण
    • साबरमती टनल लगभग पूर्ण

    अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी नवाचार

    • जापानी विशेषज्ञों के साथ मिलकर सुरंग निर्माण में एकल सुरंग तकनीक और 40-मीटर गर्डर का उपयोग किया गया।
    • भारत ने इस प्रोजेक्ट से महत्वपूर्ण तकनीकी ज्ञान प्राप्त किया है।
    • जापान के उपमंत्री के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में प्रोजेक्ट की समीक्षा की और प्रगति से संतुष्टि जताई।

    संचालन योजना

    • शुरुआत: 2027 तक सूरत से बिलीमोरा के बीच पहला सेक्शन शुरू होने की उम्मीद
    • फ्रीक्वेंसी: पीक ऑवर में हर 30 मिनट, बाद में हर 20 मिनट, और भविष्य में हर 10 मिनट पर ट्रेन संचालन की योजना
    • प्रशिक्षण: लोको पायलट और मेंटेनेंस स्टाफ का प्रशिक्षण जापान में आधुनिक सिमुलेटरों पर

    🗺️ रणनीतिक महत्व

    यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री मोदी के विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विज़न का हिस्सा है और भारत के भविष्य के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए एक मॉडल साबित होगा।

  • मुंबई शॉक: कुशीनगर एक्सप्रेस में 3 साल के मासूम का शव मिला, हत्या का राज खुला;आरोपी भाई गिरफ्तार

    मुंबई शॉक: कुशीनगर एक्सप्रेस में 3 साल के मासूम का शव मिला, हत्या का राज खुला;आरोपी भाई गिरफ्तार

    राष्ट्रीय स्वाभिमान। शिवदिनेश शर्मा

    मुंबई: दिल दहला देने वाली घटना! कुशीनगर एक्सप्रेस के बी2 एसी कोच के शौचालय में सिर्फ 3 साल का मासूम बच्चा मृत पाया गया। शव की पहचान सूरत के अमरोली के रहने वाले बच्चे के रूप में हुई। जानकारी के अनुसार, यह मासूम रात को लापता हुआ था। उसके माता-पिता ने 22 अगस्त को अमरोली पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन मुंबई में इस खौफनाक खोज ने सबको हिला कर रख दिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि बच्चे की गला घोंटकर बेरहमी से हत्या की गई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या करने वाला मासूम का ही मौसी का लड़का भाई, विकाश शाह, था। आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है।

    मुंबई रेलवे पुलिस और आरपीएफ की टीम ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। घटना से रेलवे यात्री भी स्तब्ध हैं और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के लाखों सुरक्षा दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
    इस दर्दनाक घटना ने न केवल मासूम के परिवार को तहस-नहस कर दिया है, बल्कि पूरे शहर में रेलवे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।