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  • ईरान में भूचाल: अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ali Khamenei) की मौत के बाद 40 दिन का राष्ट्रीय शोक, अहमद वाहिदी बने नए कमांडर-इन-चीफ

    ईरान में भूचाल: अयातुल्लाह अली खामेनेई (Ali Khamenei) की मौत के बाद 40 दिन का राष्ट्रीय शोक, अहमद वाहिदी बने नए कमांडर-इन-चीफ

    तेहरान/वॉशिंगटन/तेल अवीव। मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद देश में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। ईरानी मीडिया के मुताबिक हालिया हमलों के बाद यह घटनाक्रम सामने आया।

    ईरान की सत्ता संरचना में सुप्रीम लीडर की भूमिका सर्वोच्च होती है, ऐसे में उनकी मौत ने 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से स्थापित शासन व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दिया है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे हैं। सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में हाई अलर्ट जारी है।

    ईरान ने तेजी दिखाते हुए Ahmad Vahidi को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया है।

    वाहिदी इससे पहले कुद्स फोर्स के पहले कमांडर रह चुके हैं और रक्षा व गृह मंत्री जैसे अहम पद संभाल चुके हैं। वे लंबे समय से Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़े रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका नाम विवादों में भी रहा है। 1994 में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में AMIA यहूदी केंद्र पर हुए हमले के मामले में वे इंटरपोल की रेड नोटिस सूची में शामिल रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ पहले ही उन पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

    हमलों के बाद ईरान ने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती पहले से बढ़ाई गई थी।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने आपात बैठक में हमलों की निंदा करते हुए तत्काल बातचीत की अपील की है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान की केंद्रीय सत्ता कमजोर पड़ती है तो इसका सीधा असर Hamas, Hezbollah और Houthi movement जैसे समूहों पर पड़ सकता है, जिन पर लंबे समय से ईरान के समर्थन के आरोप लगते रहे हैं। इससे Israel को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है।

    क्या बदलेगा मिडिल ईस्ट का समीकरण?

    ईरान शिया राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है और सऊदी अरब व तुर्की के साथ उसका प्रभाव क्षेत्रीय संतुलन तय करता रहा है। यदि सत्ता परिवर्तन स्थायी रूप लेता है तो:

    • क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है
    • अमेरिका समर्थित सरकार की चर्चा तेज हो सकती है
    • आंतरिक अस्थिरता और जनआंदोलन बढ़ सकते हैं
    • IRGC की भूमिका और मजबूत हो सकती है

    कुछ प्रवासी ईरानी समुदायों में पूर्व शाही परिवार के उत्तराधिकारी Reza Pahlavi का नाम भी चर्चा में है, हालांकि ईरान के भीतर उनकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है।


    विशेषज्ञों के मुताबिक यह घटनाक्रम केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। पूरे मध्य पूर्व में इसका असर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिन तय करेंगे कि ईरान में नया नेतृत्व सख्त रुख अपनाता है या अंतरराष्ट्रीय वार्ता का रास्ता खोलता है।

    फिलहाल, तेहरान से लेकर वॉशिंगटन और तेल अवीव तक कूटनीतिक हलचल तेज है और दुनिया की निगाहें ईरान पर टिकी हुई हैं।

  • University of Bristol के साथ महाराष्ट्र सरकार का समझौता, मेधावी छात्रों को मिलेगी 100% ट्यूशन फीस माफी

    University of Bristol के साथ महाराष्ट्र सरकार का समझौता, मेधावी छात्रों को मिलेगी 100% ट्यूशन फीस माफी

    मुंबई। महाराष्ट्र सरकार और University of Bristol मुंबई कैंपस प्राइवेट लिमिटेड के बीच विधान भवन में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य राज्य के प्रतिभाशाली और जरूरतमंद छात्रों को विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

    यह समझौता मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री Chandrakant Patil, अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. वेणुगोपाल रेड्डी, ब्रिस्टल विश्वविद्यालय की कुलपति एवं अध्यक्ष प्रो. एवलिन वेल्च, मुख्य परिचालन अधिकारी लुसिंडा पार, निदेशक जूलिया हॉल और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विन दमेरा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


    मुख्यमंत्री का वक्तव्य

    मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा कि ब्रिस्टल विश्वविद्यालय जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थान के साथ साझेदारी करना महाराष्ट्र के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार और शिक्षा जगत के सहयोग से राज्य के छात्रों के लिए उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।


    ‘मुख्यमंत्री–ब्रिस्टल विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति योजना’

    समझौते के तहत एक संयुक्त छात्रवृत्ति योजना विकसित की जाएगी, जिसका नाम होगा — ‘मुख्यमंत्री और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति योजना’।

    योजना की प्रमुख विशेषताएं:

    ✔ सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित लेकिन मेधावी छात्रों को प्राथमिकता
    ✔ चयनित छात्रों की पूरी डिग्री अवधि तक 100% ट्यूशन फीस माफ
    ✔ छात्रवृत्ति का संपूर्ण खर्च ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, मुंबई परिसर द्वारा वहन

    इस पहल से महाराष्ट्र के उन छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा, जो आर्थिक बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

  • Rahul Gandhi attack Epstein files & adani trade deal: एप्स्टीन फाइल्स से अडानी केस तक—मोदी सरकार दे जवाब, देश को सच चाहिए: राहुल गांधी का बड़ा हमला

    Rahul Gandhi attack Epstein files & adani trade deal: एप्स्टीन फाइल्स से अडानी केस तक—मोदी सरकार दे जवाब, देश को सच चाहिए: राहुल गांधी का बड़ा हमला

    नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार पर बहुआयामी हमला बोला। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने एप्स्टीन फाइल्स, भारत-अमेरिका ट्रेड डील, अडानी प्रकरण और किसानों की स्थिति जैसे मुद्दों को जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कथित एप्स्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री, उनके मंत्रियों और करीबी उद्योगपतियों के नाम आने की चर्चा बेहद गंभीर है। उनका कहना था कि यह देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है और सरकार को पारदर्शी स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लाखों दस्तावेज अब भी सार्वजनिक नहीं हुए हैं और उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, उद्योगपति अनिल अंबानी तथा प्रधानमंत्री का नाम होने की बात कही।

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस डील में राष्ट्रीय हितों से समझौता किया गया। उनके अनुसार भारतीय डेटा को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोला गया, किसानों के हितों की अनदेखी हुई और टेक्सटाइल उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। उन्होंने सरकार से पूछा कि इस समझौते से देश को वास्तविक लाभ क्या मिला।

    राहुल गांधी ने उद्योगपति Gautam Adani से जुड़े अमेरिका में चल रहे मामले का भी जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक कारोबारी का मामला नहीं, बल्कि सत्ता संरचना से जुड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 महीनों से ठोस कार्रवाई न होना कई संदेह पैदा करता है।

    इन आरोपों पर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित दस्तावेजों में प्रधानमंत्री के 2017 के इज़रायल दौरे के संदर्भ से परे जो भी उल्लेख हैं, वे एक दोषी अपराधी की कल्पनाएं हैं और निराधार हैं।

    राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि कांग्रेस देशहित के मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उद्योगपतियों के हितों की रक्षा में अधिक सक्रिय है, जबकि किसान और मध्यम वर्ग समस्याओं से जूझ रहे हैं।

    इस मुद्दे पर सियासी तापमान बढ़ गया है और आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक बहस तेज होने के संकेत हैं।

  • Yogi v/s Amukteshwaranand: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में सनसनीखेज दावा,  आशुतोष के गवाह ने कथित दबाव और प्रलोभन का किया खुलासा

    Yogi v/s Amukteshwaranand: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मामले में सनसनीखेज दावा, आशुतोष के गवाह ने कथित दबाव और प्रलोभन का किया खुलासा

    वाराणसी। ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद(Amukteshwaranand) सरस्वती से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में सोमवार को घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में आयोजित प्रेस वार्ता में रमाशंकर दीक्षित नामक व्यक्ति ने दावा किया कि उन पर उनकी नाबालिग बेटी के नाम का सहारा लेकर शंकराचार्य पर गंभीर आरोप लगाने के लिए दबाव बनाया गया।

    दीक्षित के अनुसार, उन्हें कथित रूप से आर्थिक प्रलोभन दिया गया ताकि वे लिखित शिकायत देकर मामला दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को ठुकराने के बाद उन्हें अप्रत्यक्ष धमकियों का सामना करना पड़ा। दीक्षित ने पूरी घटना को लिखित रूप में अपने हस्ताक्षर सहित मठ प्रशासन को सौंपने और मीडिया के सामने रखने की बात कही।

    दूसरी ओर, शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी प्रयागराज जिला न्यायालय में पेश हुए। सुनवाई के दौरान पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई के पहलुओं पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे संवेदनशील मामलों में शिकायत और गवाहों की विश्वसनीयता की गहन जांच अनिवार्य है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि आरोप असत्य सिद्ध होते हैं या गवाह बयान से पलटता है, तो शिकायतकर्ता के विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई संभव है।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय ने निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच पर जोर दिया है। फिलहाल सभी पक्ष आगामी सुनवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    संपादकीय दृष्टि से यह प्रकरण कानून-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी से परे रहकर पारदर्शी और समयबद्ध जांच आवश्यक है, ताकि न तो किसी निर्दोष की प्रतिष्ठा पर आंच आए और न ही वास्तविक शिकायत दबे। कानून के समक्ष सभी समान हैं—और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

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  • Donald Trump: मार-ए-लागो में घुसपैठ की कोशिश, ट्रंप की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

    Donald Trump: मार-ए-लागो में घुसपैठ की कोशिश, ट्रंप की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आलीशान निवास मार-ए-लागो, फ्लोरिडा में एक हथियारबंद शख्स ने घुसपैठ की कोशिश की। 20-25 साल के युवक के पास शॉटगन और पेट्रोल कैन था। खतरे को भांपते हुए यूएस सीक्रेट सर्विस और पाम बीच काउंटी शेरिफ ऑफिस ने फायरिंग की, जिसमें संदिग्ध मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद एफबीआई, सीक्रेट सर्विस और पाम बीच काउंटी शेरिफ ऑफिस ने संयुक्त जांच शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां घटनास्थल से सबूत जुटा रही हैं और इस सुरक्षा चूक के कारणों की पड़ताल कर रही हैं।

    यह ट्रंप पर हमला कोई नया मामला नहीं है। सितंबर 2024 में ट्रंप इंटरनेशनल गोल्फ क्लब में उनकी हत्या की कोशिश हुई थी, जबकि जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया की चुनावी रैली में भी उनके खिलाफ जा

  • ONLINE FRIEND छात्रा के लिए बनी जान की आफत, पहले अपहरण फिर बलात्कार

    परिवार और समाज की जिम्मेदारी, बच्चों को डिजिटल सुरक्षा सिखाएँ

    नई दिल्ली: गुरुग्राम से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। त्रिपुरा से पढ़ाई करने आई बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की दूसरी वर्ष की छात्रा को सोशल मीडिया पर बने एक दोस्त(ONLINE FRIEND) ने अपने जाल में फंसा लिया। शुरुआत में सामान्य बातचीत से शुरू हुई पहचान धीरे-धीरे दोस्ती में बदली और छात्रा ने उस युवक पर भरोसा कर लिया। लेकिन यह भरोसा उसके लिए खतरनाक साबित हुआ।

    आरोप है कि युवक ने मिलने के बहाने छात्रा को अपने ठिकाने पर बुलाया और वहां उसे बंधक बना लिया। तीन दिनों तक उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। भयभीत छात्रा ने किसी तरह अपनी मां को फोन कर मदद मांगी। बेटी की टूटी आवाज सुनकर मां ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और लोकेशन साझा की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छात्रा को गंभीर हालत में छुड़ाया और अस्पताल में भर्ती कराया। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया, जहां वह आईसीयू में भर्ती है।

    छात्रा के बयान के आधार पर पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए काम कर रही हैं। वहीं पीड़िता की मां ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि बेटी बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर आई थी, लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को हिला दिया है।

    फिलहाल परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है और पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा

  • Microsoft के Copilot AI में गंभीर खामी, गोपनीय ईमेल तक पहुंच का मामला

    Microsoft के Copilot AI में गंभीर खामी, गोपनीय ईमेल तक पहुंच का मामला

    माइक्रोसॉफ्ट के Copilot AI में हाल ही में एक गंभीर तकनीकी खामी सामने आई है, जिसने कॉर्पोरेट सेक्टर में डेटा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बग के कारण Copilot को Microsoft Outlook में मौजूद गोपनीय ईमेल्स तक पहुंचने और उनका सारांश तैयार करने की अनुमति मिल रही थी। खास बात यह रही कि यह प्रक्रिया कंपनियों की Data Loss Prevention (DLP) नीतियों को दरकिनार कर रही थी।


    बग की पहचान कैसे हुई?

    इस खामी को CW1226324 नाम दिया गया है। इसे पहली बार 21 जनवरी को नोटिस किया गया। समस्या Copilot के “वर्क टैब चैट” फीचर में सामने आई, जहां AI ने Sent Items और Drafts फोल्डर में मौजूद ईमेल्स को पढ़कर उनका सारांश तैयार कर दिया।

    चौंकाने वाली बात यह थी कि इन ईमेल्स पर “Confidential Label” लगा हुआ था, यानी वे ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग से सुरक्षित रखे गए थे। इसके बावजूद Copilot ने उन्हें प्रोसेस कर लिया।


    DLP पॉलिसीज को बायपास करने का मामला

    सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि यह बग Data Loss Prevention (DLP) नीतियों को बायपास कर रहा था। DLP सिस्टम का उद्देश्य संवेदनशील डेटा को अनधिकृत एक्सेस और बाहरी साझा करने से रोकना होता है।

    माइक्रोसॉफ्ट ने स्वीकार किया है कि Copilot चैट ने गलती से गोपनीय ईमेल्स को प्रोसेस किया और यह एक कोड एरर के कारण हुआ।


    कंपनी का आधिकारिक बयान

    माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, फरवरी की शुरुआत से इस बग को ठीक करने के लिए पैच रोलआउट कर दिया गया है। कंपनी प्रभावित यूजर्स से संपर्क कर यह सुनिश्चित कर रही है कि सुधार सफलतापूर्वक लागू हो चुका है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस समस्या से कितने संगठन या यूजर्स प्रभावित हुए।


    AI विस्तार के बीच बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां

    गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले वर्ष Copilot को Word, Excel, PowerPoint और Outlook जैसे प्लेटफॉर्म्स में एकीकृत किया था। इसके अलावा Microsoft Edge ब्राउजर में भी AI आधारित फीचर्स लॉन्च किए गए।

    यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनियां तेजी से AI टूल्स को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की बढ़ती क्षमताओं के साथ-साथ डेटा सुरक्षा ढांचे को भी उतनी ही मजबूती देना आवश्यक है, ताकि संवेदनशील जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रह सके।


    यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत जितनी बड़ी है, उससे जुड़े जोखिम भी उतने ही गंभीर हो सकते हैं।

  • AI Investment Plan: मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: AI में 10 लाख करोड़ का करेंगे निवेश

    AI Investment Plan: मुकेश अंबानी का बड़ा ऐलान: AI में 10 लाख करोड़ का करेंगे निवेश

    Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच से एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए अगले सात वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करने का ऐलान किया है। उनका लक्ष्य साफ है—जिस तरह Jio Platforms ने इंटरनेट को हर हाथ तक पहुंचाया, उसी तरह अब AI को हर भारतीय के लिए सस्ता और सुलभ बनाया जाएगा।


    AI Investment Plan के लिए विदेशी निर्भरता खत्म करने पर जोर

    अंबानी ने कहा कि भारत को अपनी तकनीकी जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना अब जोखिम भरा है। उन्होंने इसे “इंटेलिजेंस को किराये पर लेना” बताया और स्पष्ट किया कि देश को अपना सुरक्षित और स्वदेशी AI इकोसिस्टम विकसित करना होगा।

    उनके अनुसार, जियो ने देश को डेटा क्रांति से जोड़ा था, और अब रिलायंस भारत को “एज ऑफ इंटेलिजेंस” में ले जाने की तैयारी कर चुका है।


    रिलायंस के AI मिशन के 3 प्रमुख आधार

    1. जामनगर में अत्याधुनिक AI डेटा सेंटर
    जामनगर में विश्वस्तरीय एआई डेटा सेंटर स्थापित किए जाएंगे, जो 10 गीगावाट ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे। इससे तकनीक और पर्यावरण के बीच संतुलन कायम रहेगा।

    2. जियो नेटवर्क के जरिए लो-लेटेंसी AI सेवाएं
    देशभर में फैले जियो के टेलीकॉम नेटवर्क का उपयोग कर ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे बिना रुकावट (लो-लेटेंसी) के AI सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    3. गांव-गांव तक AI की पहुंच
    रिलायंस एक सुरक्षित और व्यापक सिस्टम विकसित करेगा, जिसका लाभ केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। यह तकनीक गांवों के खेतों, छोटे स्कूलों, मोहल्ले के क्लीनिकों और किराना दुकानों तक पहुंचेगी।


    राष्ट्र निर्माण की दिशा में कदम

    मुकेश अंबानी ने स्पष्ट किया कि यह निवेश केवल मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से किया जा रहा है। उनका मानना है कि जियो भारत के AI ट्रांसफॉर्मेशन की धुरी बनेगी और इससे सरकारी सेवाओं, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आएगा।

    यह पहल भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

  • UP Election: लखनऊ में संघ-सरकार मंथन, 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू

    UP Election: लखनऊ में संघ-सरकार मंथन, 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू

    हिंदुत्व और सोशल इंजीनियरिंग पर संघ-सीएम की अहम बातचीत

    लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज में बुधवार शाम हुई बैठक ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संघ प्रमुख मोहन भागवत के बीच करीब 40 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे 2027 (UP Election) के विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

    2027 के चुनाव का रोडमैप?

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में हिंदुत्व के एजेंडे को और सशक्त करने तथा विपक्ष के ‘पीडीए’ कार्ड का जवाब तैयार करने पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार के बीच समन्वय बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की गई।

    मुख्यमंत्री योगी पहले ही काशी, अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक-आध्यात्मिक केंद्रों का उल्लेख कर चुके हैं। अब इन मुद्दों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संघ के सहयोग की रणनीति पर विचार हुआ। हाल ही में मोहन भागवत का “हम सब हिंदू हैं” बयान भी सामाजिक समरसता और जातिगत विभाजनों को कम करने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है।

    संगठन की बड़ी भूमिका

    सूत्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में संघ के लगभग दो लाख कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका देने की योजना पर चर्चा हुई। इन कार्यकर्ताओं के माध्यम से सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधा संपर्क स्थापित कर जनाधार मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।

    बैठक में अवैध घुसपैठ, खासकर बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई, ‘घर वापसी’ और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बताया जा रहा है कि कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्न पर दोनों नेताओं की सोच में सामंजस्य दिखाई दिया।

    सरकार-संगठन समन्वय पर जोर

    बैठक के दौरान सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के जरिए मुख्यमंत्री योगी के एजेंडे को जमीनी स्तर पर और मजबूती दी जा सकती है।

    हालांकि, इस बैठक को लेकर आधिकारिक बयान सीमित हैं, लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है।

  • Air New Zealand: बिना शोर और धुएं की उड़ान: एयर न्यूजीलैंड ने किया ऑल-इलेक्ट्रिक विमान का सफल परीक्षण

    Air New Zealand: बिना शोर और धुएं की उड़ान: एयर न्यूजीलैंड ने किया ऑल-इलेक्ट्रिक विमान का सफल परीक्षण

    कल्पना कीजिए कि आप बादलों के ऊपर सफर कर रहे हैं, लेकिन न इंजन का तेज शोर है और न ही धुआं। यह अब सपना नहीं रहा। Air New Zealand ने अपने ‘मिशन नेक्स्ट जेनरेशन एयरक्राफ्ट’ के तहत पहले ऑल-इलेक्ट्रिक विमान की सफल टेस्टिंग पूरी कर ली है।

    यह पहल विमानन क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति मानी जा रही है, जो भविष्य में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम कर सकती है।


    अमेरिका–न्यूजीलैंड की साझेदारी

    ग्रीन एयर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए एयर न्यूजीलैंड ने अमेरिकी कंपनी BETA Technologies के साथ साझेदारी की है।

    इस समझौते के तहत ‘ALIA’ नाम के इलेक्ट्रिक विमान को चुना गया है। यह विमान eVTOL (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग) तकनीक पर आधारित है, यानी यह हेलिकॉप्टर की तरह सीधा ऊपर उठ सकता है और उतर सकता है।

    टेस्टिंग के दौरान इस विमान ने न्यूजीलैंड के पहाड़ी इलाकों और समुद्र के ऊपर उड़ान भरते हुए एक बार चार्ज होने पर 480 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की। छोटे रूटों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


    क्यों खास है ALIA?

    • यह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है और उड़ान के दौरान कार्बन उत्सर्जन नहीं करता।
    • इसका शोर बेहद कम है—घरेलू वैक्यूम क्लीनर या मिक्सी से भी कम।
    • खराब मौसम और तेज हवाओं में भी इसने 2000 फीट की ऊंचाई पर सफल उड़ान भरी।
    • इसकी ताकत पारंपरिक टर्बोप्रॉप इंजनों के बराबर मानी जा रही है।

    2050 नेट-जीरो लक्ष्य की ओर कदम

    न्यूजीलैंड सरकार ने 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। एयर न्यूजीलैंड का यह कदम न केवल इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा, बल्कि दुनिया को यह संदेश देगा कि बिजली से हवाई सफर अब हकीकत बनने की राह पर है।

    अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो आने वाले समय में आसमान में उड़ते विमान शोर और धुएं से मुक्त नजर आ सकते हैं।