Microsoft के Copilot AI में गंभीर खामी, गोपनीय ईमेल तक पहुंच का मामला

माइक्रोसॉफ्ट के Copilot AI में तकनीकी खामी के चलते Outlook के गोपनीय ईमेल्स तक पहुंच का मामला सामने आया, DLP सुरक्षा नीतियों को बायपास करने पर उठे सवाल।

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माइक्रोसॉफ्ट के Copilot AI में हाल ही में एक गंभीर तकनीकी खामी सामने आई है, जिसने कॉर्पोरेट सेक्टर में डेटा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बग के कारण Copilot को Microsoft Outlook में मौजूद गोपनीय ईमेल्स तक पहुंचने और उनका सारांश तैयार करने की अनुमति मिल रही थी। खास बात यह रही कि यह प्रक्रिया कंपनियों की Data Loss Prevention (DLP) नीतियों को दरकिनार कर रही थी।


बग की पहचान कैसे हुई?

इस खामी को CW1226324 नाम दिया गया है। इसे पहली बार 21 जनवरी को नोटिस किया गया। समस्या Copilot के “वर्क टैब चैट” फीचर में सामने आई, जहां AI ने Sent Items और Drafts फोल्डर में मौजूद ईमेल्स को पढ़कर उनका सारांश तैयार कर दिया।

चौंकाने वाली बात यह थी कि इन ईमेल्स पर “Confidential Label” लगा हुआ था, यानी वे ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग से सुरक्षित रखे गए थे। इसके बावजूद Copilot ने उन्हें प्रोसेस कर लिया।


DLP पॉलिसीज को बायपास करने का मामला

सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि यह बग Data Loss Prevention (DLP) नीतियों को बायपास कर रहा था। DLP सिस्टम का उद्देश्य संवेदनशील डेटा को अनधिकृत एक्सेस और बाहरी साझा करने से रोकना होता है।

माइक्रोसॉफ्ट ने स्वीकार किया है कि Copilot चैट ने गलती से गोपनीय ईमेल्स को प्रोसेस किया और यह एक कोड एरर के कारण हुआ।


कंपनी का आधिकारिक बयान

माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, फरवरी की शुरुआत से इस बग को ठीक करने के लिए पैच रोलआउट कर दिया गया है। कंपनी प्रभावित यूजर्स से संपर्क कर यह सुनिश्चित कर रही है कि सुधार सफलतापूर्वक लागू हो चुका है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस समस्या से कितने संगठन या यूजर्स प्रभावित हुए।


AI विस्तार के बीच बढ़ती सुरक्षा चुनौतियां

गौरतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले वर्ष Copilot को Word, Excel, PowerPoint और Outlook जैसे प्लेटफॉर्म्स में एकीकृत किया था। इसके अलावा Microsoft Edge ब्राउजर में भी AI आधारित फीचर्स लॉन्च किए गए।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनियां तेजी से AI टूल्स को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की बढ़ती क्षमताओं के साथ-साथ डेटा सुरक्षा ढांचे को भी उतनी ही मजबूती देना आवश्यक है, ताकि संवेदनशील जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रह सके।


यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत जितनी बड़ी है, उससे जुड़े जोखिम भी उतने ही गंभीर हो सकते हैं।

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