भिवंडी: समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेशाध्यक्ष अबू आसिम आज़मी के 30 साल के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के सम्मान में भिवंडी में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। ‘भिवंडी फर्स्ट’ के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन पूर्व उपमहापौर अहमद सिद्दीकी और इंजीनियर जलालुद्दीन अंसारी ने किया था। समारोह में शहर की कई संस्थाओं, पूर्व नगरसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आज़मी के तीन दशक लंबे राजनीतिक सफर को “संघर्ष, सेवा और समर्पण की यात्रा” बताया। अपने संबोधन में आज़मी ने कहा कि उनका यह सफर “अन्याय के खिलाफ आवाज़ और जनता की सेवा” का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा, “भिवंडी को अब ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो जिताऊ भी हो और टिकाऊ भी, न कि भागने वाला।”
हालांकि, इस सम्मान समारोह में समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख की गैरहाजिरी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच पिछले कुछ समय से मतभेद चल रहे हैं। मंच से आज़मी ने बिना नाम लिए कहा, “मैंने कुछ लोगों को शून्य से उठाया, लेकिन वही लोग आज धोखा दे रहे हैं।”
बाद में पत्रकारों से बातचीत में आज़मी ने खुलकर कहा कि रईस शेख अब उनके कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दूरी का असर आगामी भिवंडी महानगरपालिका चुनावों में दिख सकता है, जहां टिकट वितरण को लेकर पार्टी में गुटबाजी और बिखराव की स्थिति बन सकती है।
मुंबई: महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ(Harshwardhan Sakpal) ने राज्य की भाजपा सरकार और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके ऊपर लगातार पुलिस की नज़र रखी जा रही है और यह निगरानी अब उनकी निजी ज़िंदगी तक पहुंच गई है। सपकाळ ने खुलासा किया कि मुंबई के नाना चौक स्थित सर्वोदय आश्रम (Sarvoday Ashram) में उनके बेडरूम तक में पुलिसकर्मी घुस आए और उनसे निजी सवाल पूछे।
सपकाळ ने बताया कि यह घटना सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि तीसरी बार हुई है। आज सुबह एक सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी सीधे मेरे बेडरूम में घुस आया। उसने पूछा, क्या आप प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं, पत्रकार आ चुके हैं या नहीं? सपकाळ ने बताया कि जब मैंने पूछा कि किसके आदेश पर आए हो, तो उसने कहा कि ‘वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश हैं। उन्होंने कहा कि यह विरोधी नेताओं की निजी ज़िंदगी में दखल है। भाजपा सरकार लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तोड़ रही है। पहले पेगासस, फिर फोन टैपिंग और अब सीधे बेडरूम में घुसपैठ ,यह भाजपा की तानाशाही प्रवृत्ति है। हम इस डराने-धमकाने की राजनीति से नहीं डरेंगे।
मुंबई एनकाउंटर पर उठे सवाल: NSG मौजूद थी, फिर भी पुलिस ने गोली क्यों चलाई?
सपकाळ ने मुंबई के पवई इलाके में हुए एनकाउंटर(Encounter) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “रोहित आर्य नामक व्यक्ति ने बच्चों को बंधक बनाया था, लेकिन जब मौके पर एनएसजी का दस्ता मौजूद था, तो पुलिस ने गोली चलाने की ज़रूरत क्यों समझी?” उन्होंने कहा कि रोहित आर्य मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया जा रहा है, मगर उसने ‘सुंदर माझी शाळा’ जैसी सरकारी परियोजनाओं में काम किया था और वह तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर(Deepak Kesarkar) के साथ मंच साझा कर चुका था। सपकाळ ने कहा, इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
“गुंडों के सरगना हैं फडणवीस”, डॉ. संपदा मुंडे की मौत को बताया संस्थागत हत्या
सपकाळ ने कहा कि डॉक्टर संपदा मुंडे की आत्महत्या दरअसल संस्थागत हत्या है, और इसके पीछे भाजपा के पूर्व सांसद रणजीतसिंह नाईक निंबाळकर(Ranjeet Naik Nimbalkar) जैसे प्रभावशाली नेताओं की भूमिका है। उन्होंने कहा कि निंबाळकर पर अपहरण, धमकी और मारपीट जैसे गंभीर आरोप हैं, लेकिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें बचा लिया। उन्होंने बताया कि सिंधुदुर्ग में एक फूल व्यापारी ने भी भाजपा नेताओं के उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या की थी और एक वीडियो में अपनी पीड़ा बताई थी। “राज्य में गुंडाराज चल रहा है, और इस सबका आका खुद फडणवीस हैं,” सपकाळ ने कहा।
शिवसेना और भाजपा के कई नेता कांग्रेस में शामिल
अकोला जिले में शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता विजय मालोकार कांग्रेस(Congress) में शामिल हो गए हैं। उन्होंने तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ा है और कई सरकारी समितियों में पद संभाला है। इसी तरह, हिंगोली जिले के शिवसेना (उद्धव गुट) (UBT)के नेता डॉ. रमेश शिंदे पाटिल भी अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं सहित कांग्रेस में शामिल हुए। इनके साथ एनसीपी, भाजपा, युवासेना और किसान संगठनों के कई पदाधिकारी भी कांग्रेस में आए। सपकाळ ने कहा, “गढ़चिरोली, जालना और नांदेड़ के देगलुर में भी हाल ही में बड़े स्तर पर प्रवेश हुए हैं। आने वाले दिनों में और भी प्रमुख नेता कांग्रेस से जुड़ने वाले हैं।”
1 नवंबर को चुनाव आयोग के खिलाफ सर्वदलीय मोर्चा
सपकाळ ने बताया कि 1 नवंबर को सभी विपक्षी दल चुनाव आयोग(Election Commission) के खिलाफ एक विशाल मोर्चा निकालेंगे। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है, जिसकी पोल सबसे पहले राहुल गांधी ने खोली। अब समय आ गया है कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की गारंटी सुनिश्चित की जाए। इस मौके पर कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य और पूर्व मंत्री नसीम खान, प्रदेश उपाध्यक्ष सचिन नाईक और वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
मुंबई: कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देश के सामने उजागर किए गए भाजपा और चुनाव आयोग के कथित “वोट चोरी गठजोड़” के बाद महाराष्ट्र की मतदाता सूची में अनियमितताओं का नया खुलासा हुआ है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 नए मतदाता कैसे जोड़े गए? उन्होंने यह आंकड़ा स्वयं चुनाव आयोग के डेटा के हवाले से पेश किया है।
सावंत ने कहा कि चुनाव आयोग के अनुसार लोकसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में 9,29,43,890 पंजीकृत मतदाता थे। इसके बाद केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा 30 अगस्त 2024 तक की गई जांच में यह संख्या बढ़कर 9,53,74,302 हो गई — यानी चार महीनों में 24 लाख मतदाता बढ़े। फिर 15 अक्टूबर 2024 को विधानसभा चुनाव की घोषणा के समय मतदाताओं की संख्या 9,63,69,410 बताई गई।
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार नामांकन की पहली तारीख से दस दिन पहले तक मतदाता पंजीकरण खुला रहता है। इसके बाद आठ दिनों तक जांच की जाती है और नामांकन के पहले दिन अंतिम पूरक सूची जारी की जाती है। चूँकि 29 अक्टूबर नामांकन का पहला दिन था, इसलिए पंजीकरण 19 अक्टूबर तक खुला रहा। इस अवधि में — 16 अक्टूबर से 19 अक्टूबर के बीच — पंजीकरण सक्रिय रहा और जब 30 अक्टूबर को अंतिम पूरक सूची प्रकाशित की गई, तब मतदाताओं की संख्या 9,70,25,119 पहुँच गई।
इसका अर्थ है कि सिर्फ चार दिनों में 6,55,709 मतदाता जोड़े गए, जो बेहद असामान्य और संदेहास्पद है। सावंत ने कहा कि मतदाता पंजीकरण पूरे वर्ष नियमित रूप से जारी था, ऐसे में चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद इतनी बड़ी संख्या में पंजीकरण होना “अभूतपूर्व और संदिग्ध” है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए।
सावंत ने आगे कहा कि यही त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची अब 1 जुलाई 2025 तक बढ़ाई गई है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को मतदाता सूची तक पहुँच नहीं दी जा रही है और उन्हें इस पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने कहा, “राज्य चुनाव आयोग का यह रवैया पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से तैयार की गई इस मतदाता सूची के आधार पर स्थानीय निकाय चुनाव कराना लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ होगा। विपक्षी दलों की इस विषय पर उठाई गई आपत्ति पूरी तरह न्यायसंगत है।”
मुंबई। महाराष्ट्र में किसानों की दुर्दशा और सरकार की नीतियों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने 20 अक्टूबर को पूरे राज्य में ‘पिठला-भाखर आंदोलन’ करने की घोषणा की है। इस दिन कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों के साथ बैठकर पिठला-भाखर और ठेचा खाएंगे और भाजपा महायुति सरकार की किसान-विरोधी नीतियों का विरोध दर्ज कराएंगे।
कांग्रेस ने कहा है कि अतिवृष्टि के कारण राज्य के 30 जिलों के 350 तालुकों में लाखों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है, लेकिन सरकार ने जो राहत पैकेज घोषित किया है, वह बेहद कमज़ोर और भ्रामक है। पार्टी का कहना है कि सरकार ने केवल पुरानी योजनाओं को जोड़कर 32,000 करोड़ रुपये का “फसवा पैकेज” घोषित किया है, जिससे किसानों को कोई वास्तविक सहायता नहीं मिली है।
कांग्रेस ने मांग की थी कि किसानों को प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये, जबकि पूरी तरह बह गई जमीन के लिए प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये की सहायता और साथ ही पूर्ण कर्जमाफी दी जाए। लेकिन सरकार ने इन मांगों को नज़रअंदाज़ कर दिया है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि “देश का अन्नदाता इस दिवाली पर काली दिवाली मना रहा है और इसके लिए पूरी तरह भाजपा महायुति सरकार ज़िम्मेदार है।” पार्टी ने घोषणा की कि यह आंदोलन राज्य के हर ज़िले, हर तालुके और हर गांव में एक साथ आयोजित किया जाएगा ताकि किसानों की आवाज़ सरकार तक पहुंचाई जा सके।
भाजपा का ‘कॉरपोरेट हिंदुत्व’: सचिन सावंत का आरोप, कहा अस्मिता और आस्था का हो रहा सौदा
मुंबई: कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सचिन सावंत ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस ने सत्ता के लिए धर्म, अस्मिता और राष्ट्रीय गौरव का व्यापार शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का तथाकथित हिंदुत्व अब “कार्पोरेट हिंदुत्व” बन चुका है, जहां देव-दैवत और महापुरुषों तक को प्रायोजक कंपनियों के हवाले किया जा रहा है।
गांधी भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सावंत ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस का नाम अब कोटक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस कर दिया गया है। सिद्धिविनायक मेट्रो स्टेशन को आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, महालक्ष्मी स्टेशन को एचडीएफसी लाइफ और आचार्य अत्रे स्टेशन को निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड के नाम से जोड़ा गया है। यह महाराष्ट्र की अस्मिता और श्रद्धा का घोर अपमान है।”
उन्होंने मांग की कि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार इस नामकरण पर जनता के सामने स्पष्टीकरण दें। सावंत ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और स्वाभिमानी जनता यह अपमान किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी।
सावंत ने आगे कहा कि जब देश में किसान, मजदूर, बेरोजगारी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे असली मुद्दे हैं, तब भाजपा नामकरण की राजनीति कर जनता का ध्यान भटका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने इलाहाबाद का प्रयागराज, फैजाबाद का अयोध्या, दिल्ली के राजपथ का कर्तव्यपथ और रेसकोर्स रोड का लोक कल्याण मार्ग कर दिया, लेकिन नेहरू और गांधी के नामों को हटाने में उसे परेशानी नहीं होती।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा ने देश की संपत्तियाँ — हवाई अड्डे, बंदरगाह, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ — पहले ही कार्पोरेट्स को सौंप दी हैं, अब देवताओं और महापुरुषों की अस्मिता भी बेचने निकल पड़ी है। जो पार्टी धर्म और संस्कारों की बात करती है, वही अब देवालयों और आस्थाओं के नाम पर सौदेबाज़ी कर रही है — यही भाजपा का असली, दोगला हिंदुत्व है।”
भिवंडी। आगामी पंचायत समिति और ठाणे जिला परिषद चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं। इसी कड़ी में शिवसेना ने अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के लिए सम्मेलन का आयोजन किया। यह कार्यक्रम नाशिक रोड स्थित शांग्रीला होटल में आयोजित किया गया।
सम्मेलन का आयोजन शिवसेना पक्ष प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आदेशानुसार और सांसद श्रीकांत शिंदे के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर शिवसेना नेता प्रकाश पाटील, ठाणे ग्रामीण जिलाध्यक्ष देवानंद थले, विधायक शांताराम मोरे, पूर्व विधायक रूपेश म्हात्रे, लोकसभा संपर्क प्रमुख मदनबुवा नाईक, उपनेता अरुण पाटील, मोनिकाताई पालवे सहित युवा सेना और महिला आघाडी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावों में महायुति के माध्यम से जीत हासिल करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया। कार्यकर्ताओं से अपने-अपने गुटों के युवा और महिला मतदाताओं के साथ संवाद स्थापित कर सक्रियता से काम करने का आह्वान किया गया।
इस अवसर पर विधायक शांताराम मोरे, मदन नाईक सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी मार्गदर्शन दिया। सम्मेलन में कोनगांव, पडघा, कशेली, अंबाडी, राहनाल, अंजूर, पिंपलास, काल्हेर, अनगांव जैसे विभिन्न गांवों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। पार्टी के नेताओं ने कार्यकर्ताओं से ठाणे जिला परिषद में महायुति का झंडा फहराने के लिए पूरी तैयारी रखने का संदेश दिया।
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 4 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव शेड्यूल की घोषणा की। इस बार राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर मतदान सिर्फ दो चरणों में संपन्न होगा, जो बिहार के इतिहास में पहली बार है।
पहला चरण: 6 नवंबर 2025 (121 सीटें)
दूसरा चरण: 11 नवंबर 2025 (122 सीटें)
मतगणना: 14 नवंबर 2025
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि इस बार बिहार में SIR प्रक्रिया अपनाई गई है और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित कर दी गई है। बिहार में कुल 7.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 14 लाख फर्स्ट टाइम वोटर्स शामिल हैं। चुनाव आयोग ने हर बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं रखने का निर्णय लिया है, जिससे पोलिंग स्टेशन की संख्या बढ़ेगी। सभी पोलिंग स्टेशनों पर वेबकास्टिंग की सुविधा रहेगी, जिससे अधिकारी पूरी प्रक्रिया पर नजर रख सकेंगे।
चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा की तारीख से इसे लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है। लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता पूरे देश में जबकि विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे राज्य में लागू होती है।
आदर्श आचार संहिता की विशेषताएं क्या हैं?
इसकी मुख्य विशेषताएं निर्धारित करती हैं कि राजनीतिक दलों, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और सत्ताधारी दलों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान कैसा व्यवहार करना चाहिए। चुनाव प्रक्रिया, बैठकें आयोजित करने, शोभा यात्राओं, मतदान दिन की गतिविधियों और सत्ताधारी दल के कामकाज भी संहिता से निर्धारित होते हैं।
मंत्री अपने आधिकारिक दौरे को चुनाव प्रचार संबंधी कार्यों के साथ नहीं मिलाएंगे और न ही चुनाव प्रचार संबंधी कार्यों के दौरान सरकारी तंत्र या कार्मिकों का प्रयोग करेंगे। हालांकि, चुनाव प्रचार दौरे के साथ आधिकारिक दौरे को मिलाने संबंधी आदर्श आचार संहिता के प्रावधान से प्रधानमंत्री को छूट है।
विमान, वाहनों इत्यादि सहित कोई भी सरकारी वाहन किसी दल या उम्मीदवार के हितों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रयोग नहीं किया जाएगा।
सरकार के लिए क्या नियम होते हैं?
चुनाव के आयोजन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए सभी अधिकारियों या पदाधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती पर संपूर्ण प्रतिबंध होगा। यदि किसी अधिकारी का स्थानांतरण या तैनाती आवश्यक मानी जाती है तो पहले आयोग की अनुमति ली जाएगी। मंत्रियों को अपना आधिकारिक वाहन केवल अपने आधिकारिक निवास से अपने कार्यालय तक शासकीय कार्यों के लिए ही मिलेगा। इसमें शर्त है कि इस प्रकार के सफर को किसी चुनाव प्रचार कार्य या राजनीतिक गतिविधि से न जोड़ा जाए।
सरकारी योजनाओं, निर्माण कार्य पर क्या नियम लागू होते हैं?
चुनाव के दौरान प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सरकारी खर्चे पर पार्टी की उपलब्धियों के संबंध में विज्ञापन और सरकारी जन-सम्पर्क निषेध है।
केंद्र में सत्ताधारी पार्टी/राज्य सरकार की उपब्धियों को प्रदर्शित करने वाले होर्डिंग या विज्ञापनों को सरकारी खर्चे पर जारी नहीं रखा जाएगा। प्रदर्शित किए गए इस प्रकार के सभी होर्डिंग, विज्ञापन इत्यादि संबंधित प्राधिकारियों द्वारा तुरंत हटा दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित अन्य मीडिया पर सरकारी राजकोष के खर्चें पर कोई विज्ञापन जारी नहीं होगा।
चुनावों की घोषणा से पूर्व जारी कार्य आदेश के संबंध में यदि क्षेत्र में कार्य शुरू नहीं किया गया है तो उसे शुरू नहीं किया जाएगा। परंतु यदि काम शुरू कर दिया गया है तो उसे जारी रखा जा सकता है।
सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए कई दिशा-निर्देश हैं। इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत कोई भी नया निर्माण कार्य आरंभ नहीं किया जाएगा और चुनावों के पूरा होने तक किसी भी नए लाभार्थी को स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाई) चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है। राष्ट्रीय रोजगार ग्रामीण गारंटी अधिनियम (एनईआरजीए) ग्रामीण विकास मंत्रालय ऐसे जिलों की संख्या नहीं बढ़ाएगा जिनमें चुनावों की घोषणा के पहले से ही ऐसी योजनाओं का कार्यान्वयन हो रहा है। चुनावों की घोषणा के बाद जॉब कार्ड धारक को चल रहे काम में तभी रोजगार उपलब्ध करवाया जा सकता है यदि वे काम की मांग करें।
मंत्री या अन्य प्राधिकारी किसी भी रूप में कोई वित्तीय अनुदान या उससे संबंधित कोई वादा नहीं करेंगे। किसी परियोजना अथवा योजना की आधारशिला इत्यादि नहीं रखी जा सकेगी। सड़क बनवाने, पीने के पानी की सुविधा इत्यादि उपलब्ध करवाने का कोई वादा भी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा सरकार या निजी क्षेत्र के उपक्रमों में तदर्थ आधार पर कोई नियुक्ति भी नहीं पाएंगे। कुछ मामलों में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी किसी राजनीतिक पदाधिकारी को शामिल किए बिना आधारशिला इत्यादि रख सकते हैं।
गेहूं और अन्य कृषि-संबंधी उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए चुनाव आयोग से परामर्श लिया जा सकता है।
चुनाव प्रचार के लिए क्या नियम हैं?
चुनाव आयोग के अनुसार, कोई दल या उम्मीदवार ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जो धार्मिक या भाषायी जातियों और समुदायों, के बीच मतभेद को बिगाड़े या परस्पर घृणा या तनाव उत्पन्न करे।
जब राजनीतिक दलों की आलोचना की जाए, तो उसे उनकी नीतियों और कार्यक्रम, विगत रिकॉर्ड और कार्य तक ही सीमित रखा जाएगा। दल और उम्मीदवार दूसरे दलों के नेताओं या कार्यकर्ताओं की निजी जिंदगी के सभी पहलुओं की आलोचना करने से दूर रहें। इसमें शर्त है कि ये पहलू किसी के सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े नहीं होने चाहिए। तोड़-मरोड़ कर या असत्यापित आरोपों के आधार पर दूसरे दलों या उनके कार्यकर्ताओं की आलोचना करने से बचना होगा।
वोट हासिल करने के लिए जाति या संप्रदाय की भावनाओं के आधार पर कोई अपील नहीं की जाएगी। मस्जिदों, चर्चों, मंदिरों और अन्य पूजा स्थलों का चुनाव प्रचार के मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
सभी दल और प्रत्याशी ऐसी सभी गतिविधियों से परहेज करेंगे जो निर्वाचन विधि के अधीन भ्रष्ट आचरण और अपराध हैं। ये गतिविधियां हैं मतदाताओं को घूस देना, मतदाताओं को डराना-धमकाना, हमशक्ल मतदाता से मतदान करवाना, मतदान केंद्रों से 100 मीटर की दूरी के भीतर प्रचार करना, मतदान समाप्त होने के लिए नियत घंटे के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटों की अवधि के दौरान सार्वजनिक बैठकें आयोजित करना और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक ले जाने और वापस लाने के लिए परिवहन और वाहन की व्यवस्था करना।
प्रत्येक व्यक्ति के अधिकार का सम्मान किया जाएगा, फिर चाहे राजनीतिक दल और प्रत्याशी उसके राजनीतिक मत या गतिविधियों को कितना भी नापसंद क्यों न करते हों। लोगों के मत या गतिविधियों के प्रति विरोध जताने के लिए उनके घरों के सामने किसी भी परिस्थिति में न तो प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा और न ही धरना दिया जाएगा।
कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार अपने अनुयायियों को किसी भी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी भूमि, भवन, परिसर की दीवारों इत्यादि पर झंडा लगाने, बैनर लटकाने, सूचना चिपकाने, नारा लिखने इत्यादि की अनुमति नहीं देगा।
राजनैतिक दल और उम्मीदवार यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके समर्थक दूसरे दलों द्वारा आयोजित बैठकों और जुलूसों में न तो बाधा खड़ी करें और न ही उन्हें भंग करें। एक दल द्वारा उन स्थानों के आसपास जुलूस नहीं निकाला जाएगा, जहां दूसरे दल द्वारा बैठकें आयोजित की गई हों। एक दल के द्वारा लगाए गए पोस्टर दूसरे दल के कार्यकर्ताओं द्वारा नहीं हटाए जाएंगे।
आयोग ने राजनीतिक प्रयोग के लिए स्कूलों और कॉलेज के मैदानों (पंजाब और हरियाणा राज्य को छोड़कर जहां पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से विशेष निषेध है) के प्रयोग की अनुमति नहीं दी है।
सार्वजनिक संपत्ति पर उम्मीदवार संबंधित पार्टी अथवा उम्मीदवार के पोस्टर, प्लेकार्ड, बैनर, ध्वज आदि को लागू स्थानीय कानून के प्रावधानों और निषेधात्मक आदेशों के अध्यधीन प्रदर्शित कर सकता है।
उम्मीदवार चुनाव के समापन के लिए तय किए गए समय के साथ समाप्त होने वाले 48 घंटे की अवधि के दौरान सिनेमा, टेलीविजन या अन्य इसी तरह के उपकरण के माध्यम से जनता को किसी भी चुनाव सामग्री अथवा प्रचार को प्रदर्शित नहीं कर सकते हैं।
चुनाव प्रचार अवधि समाप्त होने के बाद राजनीतिक पदाधिकारियों की किसी चुनावक्षेत्र में उपस्थिति पर प्रतिबंध है। प्रचार बंद होने के बाद राजनीतिक पदाधिकारी आदि, जो चुनाव क्षेत्र के बाहर से आए हैं और जो चुनाव क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं, उन्हें चुनाव क्षेत्र में मौजूद नहीं रहना चाहिए। ऐसे पदाधिकारी को प्रचार अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद चुनाव क्षेत्र को छोड़ देना चाहिए।
किसी भी सार्वजनिक या निजी स्थान पर सभा आयोजित करने और जुलूस निकालने के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों से पूर्व लिखित अनुमति लेनी चाहिए। रात 10.00 बजे से प्रात: 6.00 बजे के बीच लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। जन सभाएं सुबह 6.00 बजे से पहले और शाम 10 बजे के बाद आयोजित नहीं की जा सकती हैं। इसके अतिरिक्त, उम्मीदवार प्रचार बंद होने के दौरान जनसभाएं और जुलूस नहीं निकाल सकते।
मतदान केंद्र के लिए क्या?
मतदान के दिन मतदान केंद्र के एक सौ मीटर की दूरी के भीतर वोटों के लिए प्रचार करना निषिद्ध है। मतदान के दिन मतदान केंद्र के आसपास किसी भी तरह के हथियारों से लैस किसी भी व्यक्ति को हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से परिवहन के लिए किसी भी प्रकार के वाहन द्वारा किसी भी मतदाता को मतदान केंद्र तक लाने ले जाने के लिए कोई भी व्यवस्था अपराध है।
उपचुनाव का पूरा शेड्यूल चुनाव आयोग ने बताया कि उपचुनाव की अधिसूचना 13 अक्टूबर को जारी की जाएगी और 20 अक्टूबर तक प्रत्याशी अपना नामांकन कर सकेंगे। प्रत्याशियों द्वारा जमा किए गए नामांकन को चुनाव आयोग 22 अक्टूबर तक जांच करेगा। इसके साथ ही 24 अक्टूबर तक प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि इन सभी 8 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। 16 नवंबर को चुनाव प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। खास ऑफर्स
किन 8 सीटों पर होंगे उपचुनाव चुनाव आयोग ने जम्मू-कश्मीर की बडगाम विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की है, यह सीट उमर अब्दुल्ला के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। जबकि जम्मू-कश्मीर की नगरोटा सीट देवेंद्र सिंह राणा के निधन से खाली हुई थी। राजस्थान की अंता सीट कंवरलाल को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद खाली हुई थी। झारखंड की घाटशिला सीट पर भी उपचुनाव होने हैं। यह सीट तत्कालीन विधायक रामदास सोरेने के निधन से खाली हुई थी। पंजाब की तरनतारन सीट भी कश्मीर सिंह सोहल के निधन के कारण खाली हुई। इसके अलावा तेलंगाना की जुबली हिल्स, मिजोरम की डंपा सीट और ओडिशा की नुआपाड़ा की सीट भी मौजूदा विधायक के निधन से खाली हुई है। ओडिशा की नुआपाड़ा सीट राजेंद्र ढोलकिया के निधन से खाली हुई है।
ठाणे। स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में रमेश परमार जूनियर कॉलेज ऑफ जनरल एजुकेशन और अभिरुचि मंडल के सहयोग से भव्य रैली, विभिन्न गतिविधियाँ और यादगार कार्यक्रम आयोजित किए गए। जूनियर कॉलेज के सभी छात्र, शिक्षक, विद्यालय समिति के अध्यक्ष और संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष शैलेंद्र सालवी, प्रधानाचार्य विकास पाटिल, उप-प्रधानाचार्य अनुराधा कुलकर्णी और सतीश घोलप, प्राथमिक विभागाध्यक्ष सुनील पाटिल, निदेशक मंडल, शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी रैली में शामिल हुए। रैली एम.डी.एच. विद्यालय, शिवाजी पथ, तलावपाली, नौपाड़ा होते हुए निकाली गई।
उद्घाटन समारोह एवं विशेष गतिविधियाँ
स्वर्ण जयंती के उद्घाटन अवसर पर अत्याधुनिक खगोल विज्ञान प्रयोगशाला का उद्घाटन किया गया और राज्य स्तरीय बोली कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के वन मंत्री एवं पालघर जिला संरक्षक मंत्री गणेशजी नाइक और विधायक निरंजन डावखरे उपस्थित थे।
प्रधानाचार्य विकास पाटिल ने बताया कि डिजिटल पुस्तकालय की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये की आवश्यकता है। वन मंत्री गणेश नाइक ने तत्काल 50 लाख रुपये और निरंजन डावखरे ने 20 लाख रुपये का योगदान देने की घोषणा की। संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष शैलेंद्र सालवी ने मराठी माध्यम शिक्षा के संरक्षण के लिए इस सहयोग पर आभार व्यक्त किया और इसे अमूल्य बताया।
भिवंडी। भिवंडी मनपा ने ‘अभिजात मराठी भाषा सप्ताह’ का शुक्रवार को श्री मार्कंडेय महामुनि वाचनालय में दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ किया। यह सप्ताह 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य मराठी भाषा को अभिजात भाषा (शास्त्रीय भाषा) का दर्जा दिलाना और उसकी विरासत को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त विट्ठल डाके ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में पूर्व नगरसेवक संतोष शेट्टी, सहायक आयुक्त (चुनाव) नितिन पाटिल, वाचनालय विभाग प्रमुख सुदाम जाधव, जनसंपर्क अधिकारी श्रीकांत परदेशी सहित कई अधिकारी-कर्मचारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
अतिरिक्त आयुक्त डाके ने छात्रों को मराठी भाषा और उसकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यक्रम में ‘महाराष्ट्राची महावक्ता’ प्रतियोगिता की विजेता कु. संस्कृति सदानंद म्हात्रे का विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। वाचनालय की ओर से ग्रंथ प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।
भिवंडी मनपा के स्कूलों में भी इस सप्ताह के दौरान विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मनपा इस पूरे सप्ताह के दौरान ग्रंथ दिंडी (पुस्तक यात्रा), ग्रंथ प्रदर्शनी, व्याख्यानमाला और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करेगी। प्रशासक और आयुक्त अनमोल सागर ने शहरवासियों से इन आयोजनों में सक्रिय भाग लेने की अपील की है।
ठाणे। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के माध्यम से और अनुकंपा के आधार पर चयनित 530 लिपिक टाइपिस्टों को सरकारी सेवा में नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर जिलाधिकारी डॉ. श्रीकृष्ण पांचाल ने नव-नियुक्त कर्मचारियों से ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए “विकसित महाराष्ट्र 2047” के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया।
ठाणे जिला योजना समिति हॉल में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में विधायक संजय केलकर, विधायक सुलभा गायकवाड़, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहन घुगे, पुलिस अधीक्षक डॉ. डी. स्वामी, निवासी उप जिलाधिकारी डॉ. संदीप माने समेत अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान मुंबई के यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय रोजगार मेले का सीधा प्रसारण भी किया गया।
जिलाधिकारी पांचाल ने बताया कि अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी 45 सरकारी निर्णयों पर विचार करने के बाद, दस्तावेज़ सत्यापन की जटिल प्रक्रिया को केवल ढाई महीने में पूर्ण किया गया। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखते हुए पात्र उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया।
कार्यक्रम में विधायक संजय केलकर ने इसे “रोजगार का उत्सव” करार दिया और कहा कि सुशासन तब संभव होता है जब सरकार और प्रशासन मिलकर कार्य करते हैं। उन्होंने महिला अधिकारियों के योगदान की विशेष सराहना की जिन्होंने इस प्रक्रिया को सफल बनाने में अतिरिक्त समय दिया।
राज्य सरकार के इस ऐतिहासिक रोजगार मेले के तहत एक ही दिन में महाराष्ट्र भर में 10,000 से अधिक उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें से 5,000 से अधिक उम्मीदवार अनुकंपा के आधार पर नियुक्त किए गए हैं। ठाणे ज़िले में कुल 530 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए, जिनमें से 257 अनुकंपा और 273 एमपीएससी के माध्यम से चुने गए हैं।
राज्य में कुल 10,309 नियुक्तियों में सबसे अधिक 3,078 उम्मीदवार कोंकण क्षेत्र से हैं, जबकि विदर्भ से 2,597, पुणे से 1,674, नासिक से 1,250 और मराठवाड़ा से 1,710 उम्मीदवार नियुक्त हुए हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और राज्यगान से हुई तथा अंत में गणमान्य अतिथियों ने नव-नियुक्त कर्मियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।