RSS News :आरएसएस 100 वर्ष कार्यक्रम में मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश- संघ न तो पैरामिलिट्री है, न राजनीतिक पार्टी

मुंबई में “संघ यात्रा के 100 वर्ष–नए क्षितिज” कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत संघ की भूमिका और विचारधारा पर संबोधित करते हुए।

मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के “संघ यात्रा के 100 वर्ष–नए क्षितिज” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संघ की भूमिका और विचारधारा को लेकर उठने वाली भ्रांतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि संघ को दूर से देखने पर गलतफहमी हो सकती है, इसलिए संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं और स्वयंसेवकों के जीवन को देखना जरूरी है।

मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ के स्वयंसेवक रूट मार्च करते हैं, लाठी-काठी सीखते हैं और घोष की धुन बजती है, लेकिन संघ न तो कोई पैरामिलिट्री संगठन है, न अखाड़ा और न ही संगीतशाला। उन्होंने कहा कि संघ में राजनीति से जुड़े स्वयंसेवक जरूर हैं, लेकिन संघ स्वयं कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का काम अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और समाज के लिए है। संघ न तो किसी के विरोध में बना है और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा के लिए। संघ को न लोकप्रियता चाहिए और न सत्ता, उसका उद्देश्य केवल समाज को संगठित करना है।

“संघ को समझना है तो शाखा देखिए”
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ को समझने के लिए उसकी शाखाओं, कार्यकर्ताओं के परिवारों और उनके सामाजिक व्यवहार को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश का उत्थान या पतन समाज की एकता पर निर्भर करता है, इसका उदाहरण अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और जर्मनी जैसे देशों के इतिहास से लिया जा सकता है।

हिंदू शब्द और समाज पर विचार
मोहन भागवत ने कहा कि ‘हिंदू’ को केवल धर्म या पूजा-पद्धति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह किसी एक समुदाय का नाम नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। उन्होंने कहा कि भारत धर्म-प्राण देश है, जहां सबको साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।

बीजेपी और संघ पर टिप्पणी
संघ प्रमुख ने साफ किया कि बीजेपी संघ की पार्टी नहीं है, हालांकि संघ के स्वयंसेवक उसमें कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संघ का एकमात्र उद्देश्य संपूर्ण समाज को संगठित करना है।

अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा कि भारत का स्वभाव सनातन है और “सबका सम्मान, सबका स्वीकार” ही हमारी संस्कृति की मूल भावना है। सबको साथ लेकर चलना ही देश की ताकत है।

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