Genetic Mutations: ऑटिज्म को लेकर सामने आई एक नई रिसर्च ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ विशेष जेनेटिक म्यूटेशन महिलाओं में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
अब तक यह माना जाता रहा है कि महिलाओं के शरीर और मस्तिष्क में मौजूद एक प्रकार की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ उन्हें न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर से काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन हालिया रिसर्च से पता चला है कि कुछ आनुवंशिक बदलाव इस प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को भी कमजोर कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, ऑटिज्म एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो व्यक्ति के व्यवहार, संचार क्षमता और सामाजिक गतिविधियों को प्रभावित करती है। आमतौर पर पुरुषों में ऑटिज्म के मामले अधिक देखे जाते हैं, जबकि महिलाओं में इसके लक्षण कई बार अलग और कम स्पष्ट होते हैं।
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यही कारण है कि महिलाओं में ऑटिज्म की पहचान अक्सर देर से हो पाती है। नई स्टडी बताती है कि महिलाओं में मौजूद कुछ जेनेटिक म्यूटेशन मस्तिष्क के विकास और न्यूरल कनेक्शन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे ऑटिज्म का खतरा बढ़ जाता है।
वैज्ञानिकों ने रिसर्च के दौरान पाया कि जिन महिलाओं में ये विशेष जेनेटिक बदलाव मौजूद थे, उनमें सामाजिक व्यवहार, संवाद और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जुड़ी चुनौतियां अधिक देखी गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज महिलाओं में ऑटिज्म की पहचान और समझ को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे भविष्य में शुरुआती जांच, बेहतर उपचार और व्यक्तिगत थेरेपी विकसित करने में मदद मिलने की संभावना है।
रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि महिलाओं में ऑटिज्म को लेकर लंबे समय से कम अध्ययन हुए हैं, क्योंकि अधिकतर रिसर्च पुरुषों पर केंद्रित रही हैं। ऐसे में यह अध्ययन महिलाओं की मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ऑटिज्म केवल जेनेटिक कारणों से नहीं होता, बल्कि पर्यावरण, जीवनशैली और अन्य जैविक कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। फिर भी यह अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि कैसे कुछ आनुवंशिक बदलाव महिलाओं की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ को कमजोर कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी और व्यापक रिसर्च की आवश्यकता है, ताकि ऑटिज्म के कारणों और उसके प्रभावों को और गहराई से समझा जा सके।

