भिवंडी। महाराष्ट्र में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए दस्तावेज़ी प्रक्रिया को सरल बनाने, अभियान की समय-सीमा बढ़ाने तथा पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से न हटाए जाने की मांग की है।(SP Seeks Easier Voter Revision Rules) पार्टी का कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया के कारण गरीब, मजदूर, ग्रामीण और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आवश्यक दस्तावेज़ जुटाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी, भिवंडी शहर (जिला) अध्यक्ष मोहम्मद अनस अंसारी, मौलाना इम्तियाज फलाही, मौलाना औसाफ फलाही, मोहम्मद नईम अंसारी, मोहम्मद ज़मा अंसारी तथा पूर्व नगरसेविका रुखसाना सिद्दीकी ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर मांग की कि मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान को अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाया जाए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त और महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में वर्ष 2002 से पहले सरकारी अभिलेखों में दर्ज बस्तियों, गांवों और पाड़ों के निवासियों के लिए उन्हीं अभिलेखों को वैध प्रमाण मानने की मांग की गई है। साथ ही स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र, घरपट्टी, असेसमेंट उतारा, राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज़ों को भी स्वीकार करने का आग्रह किया गया है।
भिवंडी शहर (जिला) अध्यक्ष मोहम्मद अनस अंसारी ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में बीएलओ द्वारा अलग-अलग प्रक्रियाएं अपनाने से मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने पूरे राज्य में एक समान प्रक्रिया लागू करने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। ज्ञापन में वर्ष 2002 की मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं के पुराने और वर्तमान EPIC नंबर का मिलान करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि तकनीकी कारणों से किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न हो।
समाजवादी पार्टी ने सभी मतदाताओं के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने, फॉर्म मराठी के साथ हिंदी और अन्य भाषाओं में उपलब्ध कराने तथा बीएलओ को पर्याप्त प्रशिक्षण देने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि कई बीएलओ स्वयं प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पार्टी ने बीएलओ पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति तथा स्कूल शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी न डालने की भी मांग की है। साथ ही, बारिश और बाढ़ की मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए 29 जुलाई 2026 तक निर्धारित विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) की समय-सीमा कम से कम दो महीने बढ़ाने की अपील की गई है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।

