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  • Bihar Constable Recruitment: सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों की घोर उदासीनता, 4030 में 3134 रहे गैरहाजिर!

    Bihar Constable Recruitment: सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों की घोर उदासीनता, 4030 में 3134 रहे गैरहाजिर!

    Bihar Constable Recruitment: केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) की ओर से विशेष शाखा में सिपाही (सामान्य बंद सेवक) पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित लिखित परीक्षा बुधवार को मधेपुरा जिले के नौ परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण एवं कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न हुई।

    जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार के कार्यालय से जारी प्रतिवेदन के अनुसार जिले में कुल 4030 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से केवल 896 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 3134 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। इस प्रकार लगभग 78 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा नहीं दी।

    प्रतिवेदन के अनुसार सभी परीक्षा केंद्रों पर दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों एवं केंद्राधीक्षकों की निगरानी में परीक्षा संपन्न कराई गई। कहीं से भी कदाचार, हंगामा अथवा किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

    जिले के सबसे बड़े परीक्षा केंद्र एसएनपीएम प्लस टू स्कूल में 600 अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था की गई थी, लेकिन केवल 136 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। वहीं केबी विमेंस कॉलेज में 504 में 97 तथा मधेपुरा इंटर कॉलेज में 432 में 99 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि सभी केंद्रों पर परीक्षा निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न हुई। किसी भी केंद्र से एक भी अभ्यर्थी के निष्कासन की सूचना नहीं मिली।

  • Illegal Gas Cylinders Seized: भिवंडी में अवैध गैस सिलेंडरों का बड़ा भंडार पकड़ा, 772 सिलेंडर जब्त!

    Illegal Gas Cylinders Seized: भिवंडी में अवैध गैस सिलेंडरों का बड़ा भंडार पकड़ा, 772 सिलेंडर जब्त!

    Illegal Gas Cylinders Seized: भिवंडी में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से जमा किए गए 772 गैस सिलेंडरों का भंडार जब्त किया है। इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है।

    खोनी गांव में छापा
    यह कार्रवाई शहर के पास स्थित खोनी ग्राम पंचायत के मिठपाड़ा इलाके में की गई। यहां ‘श्री राम ट्रेडर्स’ नामक खाद्यान्न थोक गोदाम में भारी मात्रा में गैस सिलेंडरों के अवैध भंडारण की सूचना मिली थी।

    सूचना के आधार पर राज्य सतर्कता दस्ते के मार्गदर्शन में अधिकारियों की संयुक्त टीम ने बुधवार दोपहर छापा मारा। छापे के दौरान 692 भरे, 80 खाली सिलेंडर बरामद हुए। इस तरह कुल 772 सिलेंडर जब्त किए गए। ये सिलेंडर HP Gas, Bharat Gas और Indane कंपनियों के 5 किलो वाले घरेलू उपयोग के बताए जा रहे हैं।

    नियमों की खुली अनदेखी
    नियमों के अनुसार किसी भी किराना दुकान को अधिकतम 20 छोटे (5 किलो) गैस सिलेंडर रखने की अनुमति होती है। इसके बावजूद आरोपी द्वारा सैकड़ों सिलेंडर जमा करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि घनी आबादी वाले इलाके में बड़ा खतरा भी पैदा करता है।

    अधिकारियों की टीम
    इस कार्रवाई में उपनियंत्रक गणेश बेल्लाले, निरीक्षक राजीव भेले, रवींद्र राठौड़, अरुण काते, देवानंद थोरवे, राजेश सोरटे, राहुल इंगले, तालुका आपूर्ति निरीक्षक गौतम राउत, शहर राशनिंग अधिकारी रत्नदीप सावंत, सहायक अधिकारी अमोल गरकर और चेतन राजगडकर सहित कई अधिकारी शामिल थे।

    प्रशासन ने इस मामले में आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस आपूर्ति को लेकर उत्पन्न संकट के बाद देश में जमाखोरी पर सख्ती बढ़ाई गई थी। इसी क्रम में यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • Babubhai Bhavanji’s Message: पानी ही जीवन है, पानी है तो कल है; बाबूभाई भवानजी का जनजागरण संदेश

    Babubhai Bhavanji’s Message: पानी ही जीवन है, पानी है तो कल है; बाबूभाई भवानजी का जनजागरण संदेश

    Babubhai Bhavanji’s Message: दादर में आयोजित एक जनजागृति अभियान के दौरान मुंबई के पूर्व डिप्टी मेयर ने जल संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने लोगों से सवाल करते हुए कहा, “कोई बताए, पानी की एक्सपायरी डेट क्या होती है?” इस सवाल के माध्यम से उन्होंने समाज की सोच पर गहरा चिंतन करने को प्रेरित किया।

    भवानजी ने कहा कि अक्सर हम अपनी सुविधा और परिस्थितियों के आधार पर पानी की एक्सपायरी डेट तय कर लेते हैं, जबकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शहरों में जहां रोजाना नल का पानी उपलब्ध होता है, वहां लोग एक दिन पुराने पानी को बासी मानकर फेंक देते हैं। वहीं जिन इलाकों में पानी की आपूर्ति दो या आठ दिनों में होती है, वहां वही पानी कई दिनों तक सुरक्षित और उपयोगी माना जाता है।

    उन्होंने सामाजिक व्यवहार पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि शादियों और समारोहों में लोग नई बोतल मिलने पर आधी भरी पुरानी बोतल को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि दूसरी ओर रेगिस्तान जैसे क्षेत्रों में पानी की हर बूंद तब तक अमूल्य और ताजा मानी जाती है, जब तक अगला जलस्रोत नहीं मिल जाता।

    प्रकृति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बांधों और झीलों का पानी अगले मानसून तक उपयोगी बना रहता है, और सूखे की स्थिति में यह दो से तीन वर्षों तक भी जीवनदायी होता है। इसी तरह, बोरवेल से निकाला जाने वाला पानी हजारों या लाखों वर्षों पुराना हो सकता है, फिर भी वह शुद्ध और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित माना जाता है।

    भवानजी ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि पानी की अपनी कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती, बल्कि उसकी उपयोगिता हमारी सोच और उसकी उपलब्धता पर निर्भर करती है। जब पानी आसानी से उपलब्ध होता है, तो हम उसे बासी मान लेते हैं, और जब उसकी कमी होती है, तो वही पानी अमूल्य बन जाता है।

    उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि पानी का उपयोग विवेक, जिम्मेदारी और संयम के साथ करें। यदि हमने समय रहते अपनी सोच और आदतों में बदलाव नहीं किया, तो पानी खत्म होने से पहले ही हम प्यासे रह जाएंगे। अंत में उन्होंने इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

  • Python Hatchling Found: रेलवे इंजन में मिला अजगर का बच्चा, CSMT पर सुरक्षित रेस्क्यू!

    Python Hatchling Found: रेलवे इंजन में मिला अजगर का बच्चा, CSMT पर सुरक्षित रेस्क्यू!

    Python Hatchling Found: बुधवार देर रात एक अनोखी घटना सामने आई, जब एक रेलवे इंजन के अंदर अजगर प्रजाति का एक छोटा सर्प (पिल्ला) पाया गया। इस अप्रत्याशित घटना से कुछ समय के लिए हलचल मच गई, हालांकि समय रहते की गई कार्रवाई से स्थिति को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया।

    जानकारी के अनुसार, यह मामला मध्यरात्रि के दौरान सामने आया, जब रेलवे कर्मचारियों की नजर इंजन के भीतर मौजूद अजगर के बच्चे पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कर्मचारियों ने तुरंत सर्पमित्रों से संपर्क किया।

    सूचना मिलते ही मानद प्राणी कल्याण अधिकारी अभिषेक अशोक ठावरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ रात करीब 1:40 बजे अजगर के बच्चे को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। इस तत्पर कार्रवाई के कारण न केवल वन्यजीव की जान बचाई जा सकी, बल्कि रेलवे सेवाओं को भी बिना किसी बाधा के जारी रखा गया।

    रेस्क्यू के बाद अजगर के बच्चे को सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। बताया जाता है कि भारत में पाया जाने वाला इंडियन रॉक पायथन एक बिनविषैला सर्प है, जो वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित प्रजाति है और पर्यावरण के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इन दिनों अजगरों के प्रजनन के बाद अंडों से बच्चों के बाहर निकलने का समय होता है, जिसके चलते उनकी गतिविधियां बढ़ जाती हैं। साथ ही, मुंबई और महाराष्ट्र में मानसून की शुरुआत के कारण वन्यजीव अक्सर सुरक्षित स्थान या आश्रय की तलाश में मानव बस्तियों की ओर रुख कर लेते हैं। संभावना है कि यह अजगर का बच्चा भी बारिश से बचने या आश्रय की तलाश में इंजन में घुस गया हो।

    अभिषेक ठावरे ने नागरिकों से अपील की है कि यदि इस प्रकार की कोई घटना सामने आए, तो घबराएं नहीं और न ही सर्प को पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्पमित्रों से संपर्क करना चाहिए, ताकि वन्यजीव और मानव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस पूरे घटनाक्रम में रेलवे कर्मचारियों की सतर्कता और सर्पमित्रों की त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है, जिनकी बदौलत एक ओर अजगर के बच्चे की जान बची और दूसरी ओर रेल सेवाएं भी सुचारू रूप से चलती रहीं।

  • Force Motors: फोर्स मोटर्स ने भारत में पेश किया 2 लाखवां मर्सिडीज-बेंज इंजन

    Force Motors: फोर्स मोटर्स ने भारत में पेश किया 2 लाखवां मर्सिडीज-बेंज इंजन

    Force Motors: फोर्स ने पुणे के चाकण स्थित अपने इंजन निर्माण संयंत्र से का 2,00,000वां इंजन तैयार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि दोनों कंपनियों के बीच लंबे समय से चल रही विनिर्माण साझेदारी को दर्शाती है।

    फोर्स मोटर्स और मर्सिडीज-बेंज के बीच यह सहयोग वर्ष 1997 से जारी है, जिसके तहत भारत में बनने वाली मर्सिडीज-बेंज की कारों और एसयूवी के लिए इंजन और एक्सल का निर्माण किया जाता है। कंपनी द्वारा तैयार किया गया यह 6-सिलेंडर एम256 इंजन मर्सिडीज-बेंज की जीएलएस 450 एसयूवी में लगाया गया है।

    इस अवसर पर फोर्स मोटर्स के प्रबंध निदेशक प्रसन फिरोदिया और मर्सिडीज-बेंज के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में इस उपलब्धि का जश्न मनाया गया। कार्यक्रम में मर्सिडीज-बेंज ग्रुप के शीर्ष अधिकारी, मर्सिडीज-बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक संतोष अय्यर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

    प्रसन फिरोदिया ने कहा कि यह उपलब्धि केवल उत्पादन का आंकड़ा नहीं, बल्कि दोनों कंपनियों के बीच विश्वास, गुणवत्ता और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि चाकण संयंत्र को मर्सिडीज-बेंज के वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है और यहां निर्मित हर इंजन उच्च गुणवत्ता का प्रमाण है।

    यह साझेदारी भारत-जर्मन औद्योगिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जिसने देश में ऑटोमोटिव विनिर्माण के स्तर को ऊंचा उठाने में योगदान दिया है। “मेक इन इंडिया” पहल के तहत फोर्स मोटर्स द्वारा वैश्विक स्तर की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रदर्शन किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहनीय है।

  • NCP Criticism: राकांपा ने महासभा में TDR केस पर चर्चा न होने की आलोचना की!

    NCP Criticism: राकांपा ने महासभा में TDR केस पर चर्चा न होने की आलोचना की!

    NCP Criticism: मनपा की सीमा में शील, डायघर और बिना इजाज़त के गोदामों के खिलाफ़ कार्रवाई हो रही है। लेकिन,महासभा में बोलने के बावजूद कोठारी कंपाउंड में गैर-कानूनी पब और हुक्का पार्लरों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके पीछे 193 एकड़ का TDR स्कैम है। अभी ठाणे में “सुबह उठो और ठाणे लूटो” नाम का नया धंधा चल रहा है। मंगलवार को हुई महासभा में सिर्फ़ TDR ब्रोकर जग्गू खेतवानी के फ़ायदे के लिए चर्चा नहीं होने दी गई।

    सुप्रीम कोर्ट के स्टे ऑर्डर के दौरान कब्ज़े की रसीदें दी जाती हैं। लेकिन, महासभा यह कहकर चर्चा नहीं करती कि यह मामला कोर्ट में है, यह कैसी बात है? राकांपा पार्टी के ग्रुप लीडर अभिजीत पवार, नेता विपक्ष इंचार्ज मर्जिया पठान,नगरसेवक सुधीर भगत, मनीषा भगत और पल्लवी जगताप ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल करने का फैसला किया।मनपा ने डी. डायाभाई एंड कंपनी को 2800 करोड़ रुपये का TDR दिया है। यह TDR फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की जमीन पर फर्म के लिए रिजर्वेशन करके दिया गया है। अभिजीत पवार और सुधीर भगत ने इस मामले में एक दिलचस्प प्रेजेंटेशन दिया था।

    हालांकि, मामला कोर्ट में होने की बात कहकर इस पर चर्चा नहीं की गई। इस बारे में राकांपा नगरसेवक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके फर्म के दोगलेपन का पर्दाफाश किया।इस मौके पर मर्जिया पठान ने कहा, शील-डायघर पर एक्शन लिया जा रहा है। लेकिन, कोठारी कंपाउंड में बिना इजाज़त के कंस्ट्रक्शन के खिलाफ एक्शन नहीं लिया जा रहा है। इसके पीछे TDR स्कैम वजह है। अगर यह मामला कोर्ट में है, तो आयुक्त को TDR देने की इतनी जल्दी क्या थी? उन्होंने सवाल किया।

    ग्रुप लीडर अभिजीत पवार ने कहा कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हालांकि कहा गया था कि इस पर चर्चा नहीं हो सकती, लेकिन BPMC एक्ट 481 और 481H के अनुसार यह चर्चा हो सकती थी। लेकिन, डी. डायाभाई एंड कंपनी को जग्गू खेतवानी नाम के एक TDR ब्रोकर के लिए पैंपर किया जा रहा है। कुछ एक्सपर्ट्स ने ज़ोर दिया कि यह चर्चा नहीं होनी चाहिए। ये एक्सपर्ट्स पार्टनर हो सकते हैं। इसीलिए यह रुख अपनाया गया होगा।

    असल में, इस जगह पर एक बायोडायवर्सिटी पार्क बनने वाला था। इसलिए, नियमों के अनुसार .8% TDR दिया जा सकता है। लेकिन, यहां 2800 करोड़ रुपये का TDR दिया गया। इसके लिए फर्म ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दिया। अब 2800 करोड़ रुपये के TDR के कारण 18 हज़ार घर बढ़ जाएंगे, उन्हें सुविधाएं कैसे दी जाएंगी? उन्होंने सवाल उठाया। उन्होंने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल करने का भी इरादा जताया। सुधीर भगत ने कहा कि ठाणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को इस ज़मीन का कब्ज़ा देने का अधिकार नहीं है। क्योंकि, यह ज़मीन फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की है।

    ठाणे मनपा को फॉरेस्ट एरिया तय करने का अधिकार किसने दिया? एक तरफ, जब शील, गायमुख इलाके में फॉरेस्ट ज़मीन का TDR अथॉरिटी ने नहीं दिया, तो यहाँ कैसे दिया? अथॉरिटी ने इस ज़मीन पर रिज़र्वेशन कैसे किया? 2 हज़ार 800 करोड़ का TDR 82 लाख स्क्वेयर फ़ीट का होता है। इस सारे कंस्ट्रक्शन के बाद शहर में सिविक सुविधाओं को लेकर भयानक स्थिति पैदा हो जाएगी।

    कुल मिलाकर, यह शहर की सिविक सुविधाओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश है और सुबह उठकर अथॉरिटी को लूटने जैसा धंधा शुरू हो गया है, ऐसा उन्होंने कहा।इस बीच, पल्लवी जगताप ने कहा कि एक तथाकथित किसान ने इन 193 एकड़ में से 17 एकड़ ज़मीन पर दावा किया था। तहसीलदार ने यह ज़मीन 70 B के हिसाब से संबंधित लोगों को दे दी। जिस जगह खदान है, वहाँ खेती कैसे की जा सकती है? इस पर विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालच के कारण बायोडायवर्सिटी खतरे में पड़ रही है।

  • Thane Polio Vaccine: लाखों बच्चों को पोलियो वैक्सीन देने का टारगेट; 1,878 वैक्सीनेशन बूथ, 1,347 हाउस विज़िट टीमें तैयार

    Thane Polio Vaccine: लाखों बच्चों को पोलियो वैक्सीन देने का टारगेट; 1,878 वैक्सीनेशन बूथ, 1,347 हाउस विज़िट टीमें तैयार

    Thane Polio Vaccine: देश को पोलियो-फ़्री रखने के नेशनल गोल को मज़बूत करने के लिए 28 जून, 2026 को होने वाले पल्स पोलियो वैक्सीनेशन कैंपेन के लिए ठाणे ज़िले में पूरी माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली गई है। ज़िला एडमिनिस्ट्रेशन, हेल्थ डिपार्टमेंट और लोकल सेल्फ़-गवर्नमेंट बॉडीज़ के कोऑर्डिनेशन से ग्रामीण और शहरी इलाकों में हर एलिजिबल बच्चे तक पहुँचने के लिए ज़रूरी मैनपावर और मशीनरी तैयार कर ली गई है।इस कैंपेन के तहत, जिले में करीब 1 लाख 97 हज़ार 694 बच्चों को पोलियो वैक्सीन पिलाने का टारगेट रखा गया है।

    इसके लिए, गांव और शहर के इलाकों में 1,878 वैक्सीनेशन बूथ बनाए जाएंगे, और उन पर काम करने के लिए 4,348 कर्मचारियों को रखा गया है। बूथों के काम की देखरेख के लिए 374 सुपरवाइज़र रखे गए हैं।कोई भी बच्चा वैक्सीनेशन से वंचित न रहे, इसके लिए एक खास घर-घर जाकर कैंपेन चलाने का प्लान बनाया गया है। जिले में करीब 6,69,773 घरों में जाने के लिए 1,347 टीमें काम करेंगी, और इस काम के लिए कुल 5,323 टीम-डे प्लान किए गए हैं।

    इस कैंपेन को अच्छे से चलाने के लिए 263 सुपरवाइज़र रखे गए हैं, और उनके लिए कुल 1,036 सुपरवाइज़र-डे प्लान किए गए हैं।बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, चेक पोस्ट और उन जगहों पर भी खास ध्यान दिया गया है जहां माइग्रेंट्स का आना-जाना ज़्यादा होता है। ऐसी जगहों पर 68 ट्रांजिट टीमें काम करेंगी। इसके लिए 257 टीम-डे प्लान किए गए हैं और 27 सुपरवाइज़र इस काम की देखरेख करेंगे।इसके अलावा, दूर-दराज और खास हालात वाले इलाकों में सर्विस देने के लिए 88 मोबाइल टीमों को तैयार रखा गया है और उनके लिए 317 टीम-डे प्लान किए गए हैं।

    वैक्सीनेशन कैंपेन को सफलतापूर्वक चलाने के लिए, जिले के 36 हेल्थ इंस्टीट्यूशन (प्राइमरी हेल्थ सेंटर, ग्रामीण अस्पताल और दूसरी हेल्थ फैसिलिटी) हिस्सा लेंगे, और 76 मेडिकल ऑफिसर और 34 डिस्ट्रिक्ट लेवल के ऑफिसर और सुपरवाइज़र कैंपेन की निगरानी करेंगे।वैक्सीन की क्वालिटी बनाए रखने के लिए ज़रूरी कोल्ड चेन सिस्टम भी चालू किया गया है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन और मैनेजमेंट के लिए 4 हज़ार 225 कोल्ड चेन इक्विपमेंट, 1 ​​हज़ार 292 वैक्सीन कैरियर और 4 हज़ार 476 मार्कर पेन उपलब्ध कराए गए हैं।

    जिला प्रशासन ने माता-पिता से अपील की है कि वे पांच साल से कम उम्र के हर बच्चे को पल्स पोलियो वैक्सीन की डोज़ के लिए पास के वैक्सीनेशन सेंटर या बूथ पर ले जाएं। यह भी अपील की गई है कि वे घर-घर जाकर हेल्थ वर्कर का सहयोग करें और यह पक्का करें कि कोई भी बच्चा वैक्सीनेशन से वंचित न रहे।चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर रंजीत यादव ने माता-पिता, NGOs और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन से भी हेल्थ डिपार्टमेंट के इस कैंपेन में एक्टिव रूप से सहयोग करने की अपील की है, क्योंकि पोलियो-फ्री इंडिया की सफलता को बनाए रखने के लिए हर नागरिक की भागीदारी ज़रूरी है।

  • Hair Care Tips: मजबूत और चमकदार बालों के लिए घरेलू नुस्खों और सीरम का परफेक्ट कॉम्बो!

    Hair Care Tips: मजबूत और चमकदार बालों के लिए घरेलू नुस्खों और सीरम का परफेक्ट कॉम्बो!

    Hair Care Tips: त्वचा की तरह ही बालों की देखभाल के मामले में भी हम अक्सर इस कशमकश में रहते हैं कि हमारी रसोई के नुस्खे अपनाएं या बाजार में मिलने वाले आधुनिक हेयर सीरम। आइए देखते हैं कि बालों के लिए दादी-नानी के घरेलू तेल-लेप और आधुनिक हेयर सीरम में से कौन कब और क्यों बेहतर है:

    ​1. दादी-नानी के नुस्खे (पारंपरिक पोषण): ​इसमें मुख्य रूप से आंवला, रीठा, शिकाकाई, भृंगराज, मेथी दाना, प्याज का रस, कढ़ी पत्ता और सरसों/नारियल का तेल शामिल होते हैं।

    ● फायदे: ​

    • ​जड़ों से मजबूती: प्याज का रस, मेथी या भृंगराज का तेल बालों की जड़ों (Scalp) के अंदर जाकर उन्हें पोषण देते हैं, जिससे बालों का झड़ना रुकता है और नए बाल उगते हैं।
    • ​लंबे समय तक फायदा: यह बालों को असमय सफेद होने से रोकते हैं और उन्हें प्राकृतिक रूप से काला और घना बनाते हैं।
    • ​केमिकल-फ्री: स्कैल्प को किसी भी तरह के नुकसान का खतरा नहीं रहता।

    ● नुकसान: ​

    • ​चिपचिपाहट और महक: प्याज का रस या भारी तेल लगाने के बाद बालों से महक आती है और बाल चिपचिपे दिखते हैं। इन्हें तुरंत लगाकर आप बाहर नहीं जा सकते।
    • ​धोने में मेहनत: उबटन या गाढ़े तेल को बालों से साफ करने के लिए ज़्यादा शैम्पू और समय की ज़रूरत होती है।

    ​2. आधुनिक हेयर सीरम (इंस्टेंट स्मूथनेस और प्रोटेक्शन)
    ​हेयर सीरम मुख्य रूप से सिलिकॉन-आधारित लिक्विड होते हैं, जो बालों की ऊपरी परत पर एक सुरक्षा कवच बना देते हैं।

    ● फायदे:​

    • तुरंत चमक और सुलझे बाल: बालों को धोने के बाद सीरम की कुछ बूंदें लगाने से बाल तुरंत चमकदार, मुलायम और सुलझ जाते हैं (Frizz-free)।
    • ​हीट प्रोटेक्शन (Heat Protection): अगर आप हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर या स्टाइलिंग टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, तो सीरम बालों को जलने या डैमेज होने से बचाता है।
    • ​लगाने में आसान: इसे धोने की ज़रूरत नहीं होती। बस कुछ बूंदें गीले बालों की लंबाई (Lengths) पर लगाईं और आप बाहर जाने के लिए तैयार हैं।

    ● नुकसान:
    ​* सिर्फ ऊपरी सुधार: सीरम बालों की जड़ों में नहीं लगाया जाता, इसलिए यह बालों को अंदर से पोषण नहीं देता। यह केवल बालों को बाहर से सुंदर दिखाता है।

    • ​केमिकल बिल्ड-अप: लगातार सिलिकॉन वाले सीरम इस्तेमाल करने से बालों पर एक परत जम सकती है, जिससे बाल बाद में रूखे हो सकते हैं।

    ● बेस्ट रिजल्ट के लिए दोनों का तालमेल कैसे बनाएं?
    ​जड़ों को पोषण चाहिए और बालों की लंबाई को प्रोटेक्शन। इसलिए आपको दोनों की ज़रूरत है।

    • ​बाल धोने से पहले (जड़ों के लिए): हफ्ते में 1-2 बार बाल धोने से दो घंटे पहले दादी-नानी वाला मेथी, प्याज के रस या भृंगराज का तेल लगाएं। यह आपके बालों को झड़ना रोकेगा और मजबूत बनाएगा।
    • ​बाल धोने के बाद (लेंथ के लिए): शैम्पू और कंडीशनर करने के बाद, जब बाल हल्के गीले हों, तो नीचे के बालों पर 2-3 बूंद हेयर सीरम लगाएं। इससे बाल दिनभर सुलझे और चमकदार रहेंगे।
  • Skin Care: दादी-नानी के नुस्खे बनाम सीरम- कौनसा ऑप्शन है आपके लिए बेहतर; जानिए दोनों के फायदे और नुकसान!

    Skin Care: दादी-नानी के नुस्खे बनाम सीरम- कौनसा ऑप्शन है आपके लिए बेहतर; जानिए दोनों के फायदे और नुकसान!

    Skin Care: आज के समय में सुंदर और स्वस्थ त्वचा सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं रही, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई स्किन केयर पर ध्यान दे रहा है। हमारे पास मुख्य रूप से दो रास्ते हैं:

    • पारंपरिक दादी-नानी के नुस्खे
    • आधुनिक स्किन केयर प्रोडक्ट्स जैसे फेस सीरम

    दोनों के अपने फायदे और सीमाएं हैं। आइए समझते हैं कि आपकी त्वचा के लिए कब क्या बेहतर है।

    1. दादी-नानी के नुस्खे (पारंपरिक देखभाल)
      यह पूरी तरह प्राकृतिक चीज़ों जैसे हल्दी, बेसन, दही, एलोवेरा और शहद पर आधारित होते हैं।

    ● फायदे:

    • 100% प्राकृतिक और सुरक्षित
      इनमें केमिकल या प्रिज़र्वेटिव नहीं होते, जिससे स्किन पर कम नुकसान होता है।
    • किफायती (Pocket-Friendly):
      घर में उपलब्ध सामग्री से ही काम चल जाता है।
    • त्वचा का पोषण: ये त्वचा को गहराई से साफ करते हैं और प्राकृतिक नमी बनाए रखते हैं।

    ● नुकसान:

    • धीमा असर: परिणाम दिखने में हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है।
    • समय और मेहनत ज्यादा: पैक बनाना, लगाना और धोना थोड़ा झंझट भरा होता है।
    • सीमित प्रभाव: गहरे दाग-धब्बे या झुर्रियों पर इनका असर सीमित होता है।
    1. फेस सीरम (आधुनिक विज्ञान)
      सीरम हल्के लिक्विड होते हैं जिनमें Vitamin C, Hyaluronic Acid, Retinol और Niacinamide जैसे एक्टिव तत्व होते हैं।

    ● फायदे:

    • तेज़ और सटीक असर (Targeted Treatment):
      पिंपल्स, पिग्मेंटेशन या झुर्रियों पर जल्दी असर दिखाते हैं।
    • गहराई तक असर: छोटे मॉलिक्यूल्स होने के कारण त्वचा की अंदरूनी परत तक पहुंचते हैं।
    • इस्तेमाल में आसान: सिर्फ 2–3 बूंदें और हल्का टैप—बस।

    ● नुकसान:

    • महंगे होते हैं: अच्छे ब्रांड्स के सीरम की कीमत ज्यादा होती है।
    • साइड इफेक्ट्स का जोखिम: गलत सीरम या सेंसिटिव स्किन में जलन या रैश हो सकते हैं।

    ● आपके लिए क्या बेहतर है?

    • सच यह है कि आपको किसी एक को चुनने की ज़रूरत नहीं है, दोनों का संतुलन सबसे बेहतर तरीका है।

    ● सही तरीका:

    • डेली रूटीन: सुबह Vitamin C और रात में Retinol या Niacinamide जैसे सीरम का इस्तेमाल करें (स्किन टाइप के अनुसार)
    • वीकेंड केयर: हफ्ते में 1 बार उबटन या घरेलू फेस पैक लगाकर नैचुरल ग्लो पाएं

    ● जरूरी सलाह:

    • किसी भी नए सीरम को इस्तेमाल करने से पहले Patch Test जरूर करें
    • यदि आपकी स्किन बहुत सेंसिटिव है, तो Dermatologist की सलाह लें