Tag: Corruption Case

  • Gwalior Bribe Trap Case: 20 हजार रुपये रिश्वत लेते तहसीलदार कार्यालय का रीडर रंगे हाथों गिरफ्तार

    Gwalior Bribe Trap Case: 20 हजार रुपये रिश्वत लेते तहसीलदार कार्यालय का रीडर रंगे हाथों गिरफ्तार

    Gwalior Bribe Trap Case: आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ग्वालियर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसीलदार गोसपुरा कार्यालय में पदस्थ रीडर एवं सहायक ग्रेड-3 अनिल कुडवारिया को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी पर प्लॉट के नामांतरण के बदले 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।

    ईओडब्ल्यू के अनुसार, ग्वालियर निवासी जितेन्द्र पाण्डेय ने 10 जून को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि रानीपुरा स्थित एक प्लॉट के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए आरोपी कर्मचारी द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी।

    शिकायत की डिजिटल जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ईओडब्ल्यू के निर्देश पर विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया। बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में की गई कार्रवाई के दौरान आरोपी को शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया।

    जांच प्रक्रिया के तहत रासायनिक परीक्षण में भी रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। टीम ने आरोपी के कब्जे से रिश्वत की राशि बरामद कर ली है। ईओडब्ल्यू ने बताया कि मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है और भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

  • Bribery Case: तीन करोड़ की रिश्वत मामले में दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर गिरफ्तार

    Bribery Case: तीन करोड़ की रिश्वत मामले में दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर गिरफ्तार

    Bribery Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में तैनात निरीक्षक प्रदीप सिंह को गिरफ्तार किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सीबीआई के मामलों में राहत दिलाने के नाम पर तीन करोड़ रुपये की रिश्वत की साजिश में अहम भूमिका निभाई।

    जांच एजेंसी के अनुसार, यह रिश्वत पुड्डुचेरी के एक आरोपी और उसके सहयोगी से कथित तौर पर सीबीआई मामलों में अनुकूल कार्रवाई कराने के बदले मांगी गई थी। आरोप है कि निरीक्षक प्रदीप सिंह ने दोनों आरोपियों की मुलाकात एक वरिष्ठ लोक सेवक से कराई, जिसने जांच एजेंसी में प्रभाव होने का दावा करते हुए मामलों में राहत दिलाने के लिए तीन करोड़ रुपये की मांग की।

    सीबीआई के मुताबिक, पुड्डुचेरी निवासी एन. राजा उर्फ राजशेखर और उसके सहयोगी राजकुमार उर्फ मधनराज इस कथित साजिश में शामिल थे। राजकुमार कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था।

    जांच में सामने आया कि मई महीने में दिल्ली के एरोसिटी क्षेत्र में हुई एक बैठक के दौरान रिश्वत की मांग को अंतिम रूप दिया गया था। इसके बाद रकम पहुंचाने के लिए हवाला नेटवर्क का सहारा लिया गया। आरोपियों ने दिल्ली तक धन पहुंचाने के लिए चेन्नई के एक हवाला कारोबारी से संपर्क किया था।

    सीबीआई को सूचना मिली थी कि रिश्वत की पहली किस्त 8 जून को दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में सौंपी जानी है। सूचना के आधार पर एजेंसी ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और निरीक्षक प्रदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

    सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क, कथित वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका और रिश्वत लेन-देन के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

  • 241 Crore Land Compensation Scam: पूर्व कलेक्टर अविनाश पाठक गिरफ्तार, SIT की बड़ी कार्रवाई!

    241 Crore Land Compensation Scam: पूर्व कलेक्टर अविनाश पाठक गिरफ्तार, SIT की बड़ी कार्रवाई!

    241 Crore Land Compensation Scam: महाराष्ट्र के बीड़ जिले में सामने आए बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष जांच दल (SIT) ने 2013 बैच के IAS अधिकारी और बीड़ के पूर्व जिलाधिकारी अविनाश पाठक को गुरुवार, 7 मई 2026 को लातूर स्थित उनके निवास से गिरफ्तार कर लिया। इस घोटाले की राशि लगभग ₹241 करोड़ बताई जा रही है, जबकि कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा ₹310 करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मामला धुले-सोलापुर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए बीड़ जिले में किए गए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। जांच में खुलासा हुआ है कि किसानों और जमीन मालिकों को दिए जाने वाले मुआवजे में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया। जांच समिति ने 154 संदिग्ध आदेशों की पहचान की है, जिनके जरिए कथित तौर पर अवैध रूप से बढ़ा हुआ मुआवजा मंजूर किया गया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार इन आदेशों में अविनाश पाठक के नाम, पदनाम और फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। कई आदेश ऐसे पाए गए जो उनकी 22 अप्रैल 2025 को बीड़ से बदली होने के बाद भी बैकडेट में जारी किए गए थे। अधिकारियों का दावा है कि फर्जी मंजूरियों के जरिए कुल ₹241.62 करोड़ की स्वीकृति दी गई, जिसमें से करीब ₹73 करोड़ की राशि विभिन्न लाभार्थियों को वितरित भी की जा चुकी है।

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    इस मामले में बीड़ पुलिस की SIT ने शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया है। अविनाश पाठक समेत कुल 10 लोगों को प्रारंभिक आरोपी बनाया गया है। SIT की अगुवाई सहायक पुलिस अधीक्षक वेंकटरमण (IPS) कर रहे हैं। पूर्व कलेक्टर पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    इनमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी तथा लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। पुलिस अब इस घोटाले में शामिल अन्य अधिकारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।