Tag: Women Health

  • Menstrual Festival: राजे शिवाजी स्कूल में मनपा और शेल्टर एसोसिएट्स ने ‘मासिक महोत्सव’ मनाया!

    Menstrual Festival: राजे शिवाजी स्कूल में मनपा और शेल्टर एसोसिएट्स ने ‘मासिक महोत्सव’ मनाया!

    Menstrual Festival: वर्ल्ड मेंस्ट्रुएशन डे के मौके पर मनपा व शेल्टर एसोसिएट्स और म्यूज़ फाउंडेशन के साथ मिलकर लोकमान्य नगर के राजे शिवाजी स्कूल में “मासिक महोत्सव” मनाया गया। यह पहल समाज में मेंस्ट्रुएशन को लेकर फैले अंधविश्वास, गलतफहमियों और शर्म को दूर करके महिलाओं और पुरुषों में जागरूकता लाने के मकसद से की गई थी।इस प्रोग्राम को सभागृह नेता हनुमंत जगदाले और महात्मा फुले शिक्षा सोसाइटी के जयंत घाडगे ने गाइड किया।

    शेल्टर एसोसिएट्स पिछले कई सालों से ठाणे मनपा एरिया की झुग्गियों में “वन टॉयलेट” प्रोजेक्ट और अलग-अलग सफाई कैंपेन चला रहा है। इसी के तहत, गुरुवार (28 मई, 2026) को वर्ल्ड मेंस्ट्रुएशन डे के मौके पर एक खास प्रोग्राम रखा गया है।इस प्रोग्राम में गाने, लेक्चर, सवाल-जवाब, गेम और एक्सपर्ट गाइडेंस जैसी अलग-अलग एक्टिविटीज़ के ज़रिए मौजूद लोगों में पीरियड्स के बारे में जागरूकता पैदा की गई।

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    प्रोग्राम की शुरुआत में, सीनियर एनवायरनमेंटल एक्सपर्ट विजयकुमार कट्टी ने पीरियड्स से जुड़े अंधविश्वासों और गलतफहमियों के बारे में कम्युनिटी को गाइड किया। उन्होंने यूज़ एंड थ्रो सैनिटरी पैड्स के एनवायरनमेंट पर पड़ने वाले बुरे असर के बारे में बताया और इको-फ्रेंडली ऑप्शन इस्तेमाल करने की अपील की।साथ ही, सवाल-जवाब सेशन के ज़रिए मौजूद महिलाओं और पुरुषों के मन में चल रहे शक और गलतफहमियों को दूर किया गया।

    शेल्टर एसोसिएट्स के प्रोजेक्ट मैनेजर अमोल गाडे ने ऑर्गनाइज़ेशन के पीरियड्स हाइजीन प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ठाणे की अलग-अलग झुग्गियों की करीब 2000 महिलाओं ने मेंस्ट्रुअल कप इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इससे सैनिटरी नैपकिन से होने वाला वेस्ट कम हुआ है और महिलाओं की हेल्थ बेहतर हुई है और पैसे भी बचे हैं।

    अमोल गाडे ने कहा, “पीरियड्स छिपाने की बात नहीं है, बच्चे पर खुलना बात करना और इसका सही ख्याल रखना है।” म्यूज़ फ़ाउंडेशन के निशांत बंगेरा ने भी प्रोग्राम की अहमियत के बारे में बताया और हिस्सा लेने वालों को बधाई दी।इस मौके पर संस्था के वैभव काले, सुनीता सकुंडे, योगिता शिंदे, मनीषा सुर्वे और पूजा भालेराव मौजूद थे। लोकमान्य नगर इलाके की महिलाओं और पुरुषों ने वर्ल्ड पीरियड्स डे के मौके पर “मासिक धर्म महोत्सव” में जोश के साथ हिस्सा लिया।

  • UE LifeSciences Technology: स्तन कैंसर की बढ़ती चुनौती के बीच यूई लाइफसाइंसेज की तकनीक बनी उम्मीद!

    UE LifeSciences Technology: स्तन कैंसर की बढ़ती चुनौती के बीच यूई लाइफसाइंसेज की तकनीक बनी उम्मीद!

    UE LifeSciences Technology: देशभर में महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे स्तन कैंसर के मामलों के बीच समय पर जांच और शुरुआती पहचान को सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। इसी दिशा में यूई लाइफसाइंसेज की अत्याधुनिक तकनीकें राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

    सरकार की महत्वाकांक्षी ‘RaKSA’ पहल के तहत कंपनी द्वारा विकसित पोर्टेबल और किफायती तकनीकों के जरिए कैंसर स्क्रीनिंग को अधिक तेज, आसान और व्यापक बनाया जा रहा है। कंपनी के ‘iBreastExam’ डिवाइस के माध्यम से महाराष्ट्र के 22 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत अब तक 1 लाख से अधिक महिलाओं की जांच की जा चुकी है।

    रेडिएशन-फ्री और दर्द रहित जांच
    iBreastExam पूरी तरह रेडिएशन-फ्री, दर्द रहित और नॉन-इनवेसिव तकनीक पर आधारित है। यह कुछ ही मिनटों में स्तन की जांच कर संभावित असामान्यताओं की पहचान कर सकता है। जांच के दौरान हजारों महिलाओं में शुरुआती स्तर पर बदलाव पाए गए, जिन्हें आगे उपचार के लिए रेफर किया गया।

    यह स्क्रीनिंग कार्यक्रम सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल, गोकुलदास तेजपाल अस्पताल, कामा एंड अल्ब्लेस हॉस्पिटल और ग्रांट मेडिकल कॉलेज सहित महाराष्ट्र के कई सरकारी अस्पतालों में संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा नांदेड़, अकोला, औरंगाबाद, नागपुर, कोल्हापुर, धुले, यवतमाल, चंद्रपुर, पुणे, सांगली और सतारा जैसे जिलों में भी यह अभियान जारी है।

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    महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए समय पर जांच जरूरी
    गौरी नवलकर-गोडसे ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य को अब देरी से होने वाले निदान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक बदलाव जागरूकता, समय पर स्क्रीनिंग और ऐसी तकनीकों की उपलब्धता से आता है, जो बीमारी को गंभीर अवस्था तक पहुंचने से पहले पहचान सकें। उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए शुरुआती कदम केवल बचाव नहीं, बल्कि परिवारों और भविष्य को सुरक्षित रखने का अवसर है।

    AI आधारित तकनीकों से होगा विस्तार
    यूई लाइफसाइंसेज अब अपनी AI आधारित तकनीकों का विस्तार करने जा रही है। कंपनी जल्द ही सर्वाइकल कैंसर के लिए cervAIcal और ओरल कैंसर के लिए OrCA को इस अभियान में शामिल करेगी। ये स्मार्टफोन आधारित पोर्टेबल उपकरण स्वास्थ्य कर्मियों को दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में ‘डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग’ करने में मदद करेंगे, जिससे मरीजों का डेटा तुरंत डॉक्टरों तक पहुंच सकेगा।

    हाल ही में मुंबई में महाराष्ट्र पुलिस कर्मियों के लिए आयोजित विशेष कैंसर स्क्रीनिंग कैंप में भी इन तकनीकों की मदद से लगभग 100 महिला और पुरुष पुलिस कर्मियों की स्तन तथा ओरल कैंसर जांच की गई। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्तन कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो 90 प्रतिशत तक मामलों में सफल उपचार संभव है। ऐसे में तकनीक आधारित समय पर जांच की यह पहल स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है।

  • Genetic Mutations: महिलाओं की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ को कमजोर कर रहा जेनेटिक म्यूटेशन!

    Genetic Mutations: महिलाओं की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ को कमजोर कर रहा जेनेटिक म्यूटेशन!

    Genetic Mutations: ऑटिज्म को लेकर सामने आई एक नई रिसर्च ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ विशेष जेनेटिक म्यूटेशन महिलाओं में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

    अब तक यह माना जाता रहा है कि महिलाओं के शरीर और मस्तिष्क में मौजूद एक प्रकार की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ उन्हें न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर से काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करती है। लेकिन हालिया रिसर्च से पता चला है कि कुछ आनुवंशिक बदलाव इस प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र को भी कमजोर कर सकते हैं।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, ऑटिज्म एक जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो व्यक्ति के व्यवहार, संचार क्षमता और सामाजिक गतिविधियों को प्रभावित करती है। आमतौर पर पुरुषों में ऑटिज्म के मामले अधिक देखे जाते हैं, जबकि महिलाओं में इसके लक्षण कई बार अलग और कम स्पष्ट होते हैं।

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    यही कारण है कि महिलाओं में ऑटिज्म की पहचान अक्सर देर से हो पाती है। नई स्टडी बताती है कि महिलाओं में मौजूद कुछ जेनेटिक म्यूटेशन मस्तिष्क के विकास और न्यूरल कनेक्शन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे ऑटिज्म का खतरा बढ़ जाता है।

    वैज्ञानिकों ने रिसर्च के दौरान पाया कि जिन महिलाओं में ये विशेष जेनेटिक बदलाव मौजूद थे, उनमें सामाजिक व्यवहार, संवाद और भावनात्मक प्रतिक्रिया से जुड़ी चुनौतियां अधिक देखी गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज महिलाओं में ऑटिज्म की पहचान और समझ को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे भविष्य में शुरुआती जांच, बेहतर उपचार और व्यक्तिगत थेरेपी विकसित करने में मदद मिलने की संभावना है।

    रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि महिलाओं में ऑटिज्म को लेकर लंबे समय से कम अध्ययन हुए हैं, क्योंकि अधिकतर रिसर्च पुरुषों पर केंद्रित रही हैं। ऐसे में यह अध्ययन महिलाओं की मानसिक और न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि ऑटिज्म केवल जेनेटिक कारणों से नहीं होता, बल्कि पर्यावरण, जीवनशैली और अन्य जैविक कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। फिर भी यह अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि कैसे कुछ आनुवंशिक बदलाव महिलाओं की ‘नेचुरल सेफ्टी शील्ड’ को कमजोर कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस विषय पर अभी और व्यापक रिसर्च की आवश्यकता है, ताकि ऑटिज्म के कारणों और उसके प्रभावों को और गहराई से समझा जा सके।