बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में फसल अवशेष (stubble) जलाने के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक कार्रवाई की है। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर राजस्व विभाग ने 11 किसानों पर कुल 37 हजार 500 रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया है, जबकि दो किसानों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं।(Farmers Penalized)
अधिकारिक जानकारी के अनुसार बैतूल विकासखंड में पांच मामलों में 20 हजार रुपये का दंड लगाया गया है। इसके अलावा चिचोली विकासखंड में दो प्रकरणों में पांच हजार रुपये, आमला में तीन मामलों में सात हजार 500 रुपये तथा भैंसदेही विकासखंड में एक मामले में पांच हजार रुपये की कार्रवाई की गई है। वहीं घोड़ाडोंगरी और भीमपुर विकासखंड के दो किसानों के खिलाफ नरवाई जलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रबी सीजन में गेहूं की कटाई के बाद खेतों में अवशेष जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
यह कदम वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नरवाई जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है और भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, जिससे दीर्घकाल में कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपाय अपनाएं, जैसे मल्चिंग या मशीनों के माध्यम से अवशेषों का निस्तारण। साथ ही चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

